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निवेश के लिए सबसे पसंदीदा जगह बना भारत, 100 अरब डॉलर लगाने की तैयारी में सऊदी अरब

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था सिर्फ मजबूत ही नहीं हो रही है, बल्कि कारोबारी माहौल भी अच्छा हुआ है। यही वजह है कि भारत आज विदेशी निवेशकों के लिए पसंदीदा डेस्टिनेशन बन गया है। तमाम देशों की कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं। भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं को देखते हुए सऊदी अरब पेट्रो रसायन, बुनियादी संरचना और खनन समेत अन्य क्षेत्रों में 100 अरब डॉलर निवेश करने की तैयारी में है। सऊदी अरब के राजदूत डॉ सऊद बिन मोहम्मद अल साती ने कहा कि भारत एक आकर्षक निवेश गंतव्य है और सऊदी अरब तेल, गैस व खनन जैसे मुख्य क्षेत्रों में 100 अरब डॉलर निवेश करने के अवसरों पर गौर कर रहा है। सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको भारत में बहुत बड़ा निवेश करने जा रही है। भारत के तेल आपूर्ति, खुदरा ईंधन बिक्री, पेट्रोरसायन और लुब्रिकैंट बाजार में अरामको की निवेश की योजना है। उन्होंने कहा कि 2019 में दोनों देशों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त भागीदारी और निवेश के 40 से अधिक अवसरों की पहचान की गयी है।

एक नजर डालते हैं मोदी सरकार के दौरान अर्थव्यवस्था के बढ़ते ग्राफ और सुधरते कारोबारी माहौल पर- 

5 साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश करेगी फेयरफैक्स
प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का ही असर है कि आज भारत में विदेशी कंपनियां खूब निवेश कर रही हैं। कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स अगले पांच साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश करने जा रही है। कंपनी पिछले पांच साल में भारत में 5 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी है और इतनी ही रकम वह अगले पांच साल में लगाने जा रही है। कंपनी के प्रमुख और अरबपति निवेशक प्रेम वत्स ने इकनॉमिक टाइम्स के साथ इंटरव्यू में भारत में आर्थिक सुस्ती की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि यहां ‘शानदार मौके’ हैं। उन्होंने कहा कि मेरे हिसाब से भारत दुनिया का नंबर वन देश है। प्रेम वत्स ने कहा, ‘दुनिया की जीडीपी में भारत का योगदान 3 प्रतिशत है, लेकिन कुल वैश्विक निवेश में इसकी हिस्सेदारी 1 प्रतिशत ही है। अगर इसे बढ़ाकर 2 प्रतिशत भी कर दिया जाए तो भारत में 3 लाख करोड़ डॉलर का निवेश बढ़ेगा।’  प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि भारत खुशकिस्मत है कि उसे मोदीजी जैसे बिजनस-फ्रेंडली नेता मिला है। उनका पूरा ध्यान देश के लिए अच्छा करने पर है। वत्स ने कहा कि इस तरह का तजुर्बा ग्लोबल लीडर में कम ही होता है। 

यूपीए की तुलना में अधिक हुआ प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
एनडीए सरकार के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश जमकर हुआ। मोदी सरकार के पहले पांच साल में देश में औसतन 52.2 अरब डॉलर सालाना का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ। यूपीए-2 में सालाना औसतन 38.4 अरब डॉलर और यूपीए-1 के दौर में 18.1 अरब डॉलर सालाना का विदेशी निवेश आया था। मोदी सरकार ने जो तमाम सुधार किए हैं, उनका फायदा विदेशी निवेश में दिख रहा है।  पिछले वित्त वर्ष 2018-19 में अब तक का सर्वाधिक 64.37 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) भारत में किया गया है। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की 2018-19 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार देश में पिछले पांच साल के दौरान 286 अरब डॉलर का एफडीआई आया है। 

विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 430 अरब डॉलर के पार
मोदी सरकार की नीतियों के कारण आज भारत का विदेशी का मुद्रा भंडार नए रिकॉर्ड पर पहुंच गया है। विदेशी मुद्रा भंडार पहली बार 430 अरब डॉलर के पार 430.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 19 जुलाई को समाप्त सप्ताह में 1.58 अरब डॉलर बढ़कर पहली बार 430.38 अरब डॉलर पर पहुंच गया। रिजर्व बैंक के अनुसार, 19 जुलाई को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 1.39 अरब डॉलर बढ़कर 401.09 अरब डॉलर हो गया। इस दौरान स्वर्ण भंडार 24.30 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। विदेशी मुद्रा भंडार ने आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

इसी साल दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकोनॉमी बन जाएगा भारत
यूपीए के समय देश की अर्थव्यवस्था दुनिया में 11वें स्थान पर थी, जबकि मौजूदा समय में यह दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। यह देश की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और उसकी मजबूती का संकेत है। अर्थव्यवस्था के मामले में भारत आज विश्व की चोटी के देशों को चुनौती दे रहा है। आईएचएस मार्किट की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत इस साल ब्रिटेन को पछाड़कर दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। इतना ही नहीं रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2025 तक भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश हो जाएगा। इस रिपोर्ट में भारतीय उपभोक्ता बाजार के भी 2019 में 1.9 खरब डॉलर से लगभग दोगुना बढ़कर 2025 तक 3.6 खरब डॉलर हो जाने की भविष्यवाणी भी की गई है।

सर्विस सेक्टर में 37 प्रतिशत बढ़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश
मोदी सरकार ने निवेश आकर्षित करने के लिये कई कदम उठाए हैं, इसमें मंजूरी के लिए नियत समयसीमा और कारोबार सुगमता बढ़ाने के लिये प्रक्रियाओं को दुरूस्त करना शामिल हैं। वर्ष 2018-19 में सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) 36.5 प्रतिशत बढ़कर 9.15 अरब डॉलर रहा। उद्योग और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) के अनुसार इस क्षेत्र में वर्ष 2017-18 में 6.7 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। सेवा क्षेत्र में यह वृद्धि इसलिए अहम है क्योंकि यह जीडीपी में इसका योगदान 60 प्रतिशत से अधिक है।

FDI के मोर्चे पर 20 वर्ष में पहली बार भारत ने चीन को पछाड़ा
भारत 20 साल में पहली बार एफडीआई हासिल करने के मामले में चीन से आगे निकल गया। वर्ष 2018 में वालमार्ट, Schneider Electric और यूनीलीवर जैसी कंपनियों से भारत में आए निवेश के चलते ये संभव हो सका। इस दौरान भारत में 38 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हुआ, जबकि चीन सिर्फ 32 अरब डॉलर ही जुटा सका। पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूत सरकार और नए क्षेत्रों में भारी अवसरों के कारण भारत विदेशी निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पिछले साल भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के 235 सौदे हुए। पिछले 20 वर्षों से चीन विदेशी निवेशकों की पसंदीदा जगह बना हुआ था। पिछले साल चीन के बाजारों में आंशिक मंदी और अमेरिका के साथ ट्रेड वार के चलते विदेशी निवेशकों का रुख भारत की ओर बढ़ा है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियां, परिवर्तनकारी परिणाम
कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

मोदीराज में बेहतर है विकास दर
प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी नीतियों की वजह से देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत होती जा रही है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान अर्थव्यवस्था की हालत ठीक नहीं थी। सरकार पॉलिसी पैरालिसिस की शिकार थी। मोदी सरकार के दौरान अर्थव्यवस्था का आधार मजबूत हुआ और दुनिया में देश की विश्वसनीयता कायम हुई है। मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था में जीएसटी और इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड जैसे कई बड़े ढांचागत सुधार किए, जिनके सकारात्मक परिणाम मिलने लगे हैं।

कर संग्रह में अव्वल रही है मोदी सरकार
वैसे भी अपनी कार्य योजना और कार्यशैली से मोदी सरकार कर संग्रह में हमेशा अव्वल रही है। मोदी सरकार जिस प्रकार कर की संरचना की है उससे देश में करदाताओं की संख्या में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी हुई है। करदाताओं की संख्या बढ़ने की वजह से ही कर संग्रह में भी वृद्धि हुई है। इसी के तहत मोदी सरकार के पार्ट-2 को भी कर के फ्रंट पर अच्छी खबर मिली है। मई महीने में ही जीएसटी संग्रह एक लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। पिछले साल मई महीने में जहां करीब 94 हजार करोड़ की वसूली हुई थी वहीं इस साल यह बढ़कर एक लाख करोड़ के पार पहुंच गया। जबकि अप्रैल 2019 में इससे भी ज्यादा करीब 1,13,865 करोड़ रुपये  की वसूली हुई थी। 

मोदी सरकार में ग्रामीण भारत पर जोर
एनडीए सरकार के दौरान केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के खर्च में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। पीएम आवास योजना, मनरेगा, स्वच्छ भारत अभियान, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना आदि पर काफी पैसा खर्च किया गया। 2014 में सिर्फ 54 प्रतिशत गांव सड़क से जुड़े हुए थे, जो मोदी सरकार में बढ़कर 82 प्रतिशत तक पहुंच गए।

हर रोज 30 किलोमीटर रोड का निर्माण 
पीएम मोदी की पहल पर केंद्र सरकार पूरे देश को यातायात सुविधाओं का जाल बिछाने पर काम कर रही है। मोदी सरकार ने मनमोहन सरकार के मुकाबले ढाई गुना तेज गति से सड़कों का निर्माण किया है। मोदी सरकार में हर रोज सड़क बनाने का दायरा बढ़ा है, जहां साल 2014-15 में 12 किलोमीटर हर रोज सड़क निर्माण होता था, जो 2018-19 में बढ़कर हर रोज 30 किलोमीटर हो गया है। वित्त वर्ष 2018-19 में राजमार्गों का निर्माण और विस्तार 10,800 किमी तक पहुंच गया। यह यूपीए शासन के दौरान 2013-14 की तुलना में ढाई गुना अधिक है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार यूपीए- 2 के पांच वर्षों के दौरान कुल 24,690 किमी का निर्माण या चौड़ीकरण किया गया था, जबकि मोदी राज में कुल निर्माण 39,350 किमी को छू गया, जो लगभग 70% की वृद्धि है।

मोबाइल फोन के उत्पादन और निर्यात में 8 गुना बढ़ोतरी 
यूपीए सरकार के दौरान वर्ष 2014 में देश में मोबाइल निर्माण करने वाली कंपनियों की संख्या महज दो थी, जो बढ़ कर अब 113 तक पहुंच गयी है। भारत में मोबाइल फोन के उत्पादन और निर्यात में पिछले पांच वर्षों में 8 गुना वृद्धि हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, 2018-19 में भारत ने 24.3 बिलियन डॉलर के मोबाइल फोन का उत्पादन किया, जो 2014-15 में सिर्फ 3.1 बिलियन डॉलर था। भारत में ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान के तहत मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग एक प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभरा है। मोदी सरकार ने मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए हैं,जिसमें टैरिफ संरचना में सुधार, बुनियादी ढांचे का विकास, प्रक्रिया को सरल बनाने और कई तरह के प्रोत्साहन शामिल है।

 

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