Home समाचार कांग्रेस में भगदड़ क्यों मची है भाई !

कांग्रेस में भगदड़ क्यों मची है भाई !

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दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष और कांग्रेस की नेता बरखा शुक्ला सिंह ने ये कहते हुए कांग्रेस पार्टी छोड़ दी है कि राहुल गांधी मानसिक रूप से नेतृत्व के योग्य नहीं हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पार्टी की कमान संभाल रहे अजय माकन की बदसलूकी की शिकायत एक साल पहले ही पार्टी नेतृत्व से की थी। बीच-बीच में कई रिमाइंडर भी दिया, लेकिन आलाकमान कान में तेल डालकर सोया हुआ है। दरअसल बरखा शुक्ला सिंह की पीड़ा पार्टी के भीतर उनकी आवाज नहीं सुने जाने को लेकर है। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने उनकी इस बात को तवज्जो नहीं दी। वो शायद अब भी अनुशासन की परिधि में ही देख रहा है और सबक सीखने को तैयार नहीं।

कांग्रेस में घुटन महसूस होती है!
पतन के रास्ते पर बढ़ रही कांग्रेस चुनाव दर चुनाव हारती जा रही है, वहीं एक से बढ़कर एक कद्दावर नेता पार्टी को झटके पर झटका देते जा रहे हैं। नेताओं की फेहरिस्त इतनी लंबी हो गई है कि एक नई पार्टी का गठन हो जाए। पार्टी नेताओं को लेकर नाराजगी जताई जा रही है। सवाल पार्टी की नीति को लेकर भी उठाए जा रहे हैं । पार्टी की कार्यशैली को भी कई नेता कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। लोकसभा चुनावों से पहले पार्टी छोड़ने का जो सिलसिला चल पड़ा है वो रुकने का नाम नहीं ले रहा है। हालत ये है कि कांग्रेस पार्टी के सबसे बड़े वफादार नेता भी एक-एक कर आज पार्टी से मुंह मोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस को झटके पर झटका
कुछ दिन पहले ही दिल्ली कांग्रेस के कद्दावर नेता अरविंदर सिंह लवली का पार्टी छोड़ना भी पार्टी के लिए बड़ा झटका रहा है। लवली के साथ युवा कांग्रेस अध्यक्ष अमित मलिक ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। वहीं निगम चुनावों में दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने भी पार्टी के चुनाव प्रचार से किनारा कर लिया है। उन्होंने तो साफ तौर पर प्रदेश नेतृत्व की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। शीला दीक्षित ने कहा ”वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष का नेताओं के साथ तालमेल अच्छा नहीं है। इसी कारण लोग पार्टी छोड़ रहे हैं।” आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही दिल्ली विधानसभा में पूर्व उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता अमरीश सिंह गौतम अपने पुत्र अविनाश गौतम और बड़ी संख्या में समर्थकों सहित भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने भी कहा कि कांग्रेस में उन्हें घुटन महसूस हो रही थी। 

नाकाम नेतृत्व पर प्रश्नचिन्ह
बीते मार्च में कर्नाटक के कद्दावर नेता और पूर्व विदेश मंत्री एसएम कृष्णा ने कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्वाइन कर लिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज इस स्थिति में पहुंच गई है कि उसे बड़ा बदलाव करना आवश्यक हो गया है, लेकिन पार्टी के आलाकमान इसके लिए बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा पार्टी के बड़े नेता और पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच कोई संपर्क ही नहीं है। उधर गोवा में सरकार बनाने में नाकाम रहने पर कांग्रेस के विश्वजीत राणे ने तो नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर पार्टी छोड़ दी। इसी तरह कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए बीरेन सिंह आज मणिपुर के सीएम बन गए हैं। इससे पहले उत्तराखंड में विजय बहुगुणा और उत्तर प्रदेश में रीता बहुगुणा जोशी जैसी कद्दावर नेता ने भी कांग्रेस का साथ छोड़ दिया था। जाहिर है पार्टी नेतृत्व की नाकामी कांग्रेस के लिए संकट पैदा कर रहा है। 

वाफादारों ने छोड़ी कांग्रेस
जून 2016 में कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं गुरुदास कामत और अजीत जोगी ने पार्टी इसलिए छोड़ दी कि वे पार्टी के वर्तमान नेतृत्व से निराश हो गए थे। गुरुदास कामत ने तो पार्टी छोड़ने से पहले कांग्रेस नेतृत्व को कम से कम 10 बार पत्र लिखा था। वहीं पार्टी छोड़ने के बाद अजित जोगी ने कहा “अब मैं आजाद हो गया हूं। छत्तीसगढ़ के फ़ैसले अब दिल्ली में नहीं लिए जाएंगे।” जाहिर है पार्टी नेतृत्व के प्रति कितनी भारी नाराजगी रही होगी। इतना ही नहीं 2016 में ही त्रिपुरा में कांग्रेस के 6 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी।

लोकसभा चुनाव से पहले से भागमभाग
पार्टी नेतृत्व के प्रति 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले ही शुरू हो गया था जब हरियाणा में बीरेन्द्र सिंह, तमिलनाडु में जी.के. वासन, जयंती नटराजन ओडिशा में गोमांगो, आंध्रप्रदेश के के.एस. राव, आर. सम्बाशिवा राव, किरण रेड्डी, जगन रेड्डी और दिवंगत एन.टी. रामाराव की बेटी पुरंदेश्वरी ने भी कांग्रेस छोड़ दिया था। उत्तर प्रदेश में जगदम्बिका पाल और उत्तराखंड में सतपाल महाराज जैसे नेताओं ने कांग्रेस छोड़ दी थी। दिल्ली में कृष्णा तीरथ, महाराष्ट्र में दत्ता मेघे, पंजाब में जगमीत सिंह बराड़, हरियाणा में अवतार सिंह भडाना और जम्मू कश्मीर में मंगत राम शर्मा जैसे नेताओं ने भी पार्टी छोड़ दी थी। सबसे चौंकाने वाला नाम पूर्व केंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा का था जिन्होंने कांग्रेस छोड़ने के बाद कहा कि वो पिछले दो साल में घुटन महसूस कर रहे थे। 

बहरहाल किसी ने नेतृत्व की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए पार्टी छोड़ी तो किसी ने पार्टी में आमूल-चूल परिवर्तन की मांग रखी। जाहिर है कांग्रेस जब अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है दिग्गज नेताओं का इस मुश्किल घड़ी में एक-एक कर हाथ छोड़कर जाना पार्टी के लिए किसी बड़ी संकट का आहट तो नहीं है?

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