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देखिए, कब-कब यूपीए के मंत्रियों ने गोपनीयता का हवाला देकर रक्षा से जुड़े सवालों का नहीं दिया जवाब

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राफेल डील को लेकर इन दिनों कांग्रेस पार्टी और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी हो-हल्ला मचा रहे हैं और राफेल विमान की कीमत का खुलासा करने की मांग कर रहे हैं। मोदी सरकार की तरफ से लगातार कहा जा रहा है कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल डील को लेकर गोपनीतयता का समझौता है, इस समझौते के तहत सौदे से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती है। कांग्रेस पार्टी और उसके नेता संसद के भीतर और संसद के बाहर इस मुद्दे पर झूठ और भ्रम फैलाने में लगे हैं। जबकि सच्चाई यह है कि भारत और फ्रांस के बीच राफेल डील को लेकर समझौता यूपीए के कार्यकाल में ही हुआ था और 25 जनवरी, 2008 को हुई डील के दस्तावेज पर तत्कालीन रक्षामंत्री ए के एंटनी के ही हस्ताक्षर हैं। इसके बावजूद कांग्रेस देश के सामने झूठ पर झूठ बोले जा रही है।

आज जिस बात को लेकर कांग्रेस पार्टी बखेड़ा खड़ा कर ही है, उसी गोपनीयता और राष्ट्रहित का हवाला देकर उसने संसद में सवालों का जवाब नहीं दिया। आगे आपको बताते हैं कि यूपीए के दस वर्षों के शासन के दौरान कितने बार मंत्रियों ने संसद में रक्षा से जुड़े सवालों का गोपनीयता और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर संसदों के सवालों का जवाब नहीं दिया।

1 – 14 दिसंबर, 2005 : राज्यसभा में समाजावादी पार्टी के सांसद जनेश्वर मिश्र ने यूपीए सरकार से अमेरिकी कंपनियों से हथियार प्रणाली खरीदने में खर्च की जाने वाली रकम के बारे में सवाल पूछा था। तब तत्कालीन रक्षा मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा था कि हथियारों की खरीद पर सरकार द्वारा खर्च की गई रकम के बारे में जानकारी देना राष्ट्रहित में नहीं है, इसलिए सदन में इसके बारे में नहीं बताया जा सकता है।

2 – 22 अगस्त, 2007 : राज्यसभा में सांसद सीताराम येचुरी ने इजरायल से खरीदी जाने वाली मिसाइलों के लिए बजटीय आवंटन और खर्च की जानकारी मांगी थी, लेकिन तत्कालीन रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने इसकी जानकारी देने से इनकार कर दिया था।

3 – 27 फरवरी, 2008 : राज्यसभा में सांसद राजीव चंद्रशेखर के 1962 की Hunderson Brook Report की गोपनीयता का मुद्दा उठाया था और पूछा था कि आखिर इस रिपोर्ट को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है। इसके जवाब में तत्कालीन रक्षामंत्री ए के एंटनी ने कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में इसे गोपनीय रखने की सिफारिश की गई थी।

4 – 22 अक्टूबर, 2008 : राज्यसभा में सांसद सुशीला तिरिया ने पूछा था कि क्या सरकार का सेना में एसओपी स्थापित करने का प्रस्ताव है। तब एंटनी ने कहा था कि इसके बारे में बताया नहीं जा सकता है।

5 – 9 मार्च, 2011 : सांसद पीयूष गोयल ने राज्यसभा में M777 Howitzer राइफल की फील्ड ट्रायल की रिपोर्ट लीक होने की जांच से बारे में जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में तत्काली रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने कहा था कि जांच चल रही है, लेकिन इसके बारे में कुछ बता नहीं सकते हैं।

6 – 14 मार्च, 2012 : राज्यसभा में सांसद मोहम्मद अदीब ने दूसरे देशों में मदद के लिए भेजे गए भारतीय हेलिकॉप्टरों के बारे में जानकारी मांगी थी। तब भी तत्कालीन रक्षा मंत्री ए के एंटनी ने राष्ट्रीय हित का हवाला देकर इसकी जानकारी देने से मना कर दिया था।

इस विश्लेषण से साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी सिर्फ और सिर्फ नाटक कर रही है। कई बार राष्ट्रहित में गोपनीयता बनाए रखना जरूरी होता है, या फिर किसी दूसरे देश से समझौते के तहत गोपनीयता बनाए रखना सरकार की मजबूरी होती है। वर्षों तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी को इसके बारे में अच्छी तरह से पता है, लेकिन आज अपनी राजनीति चमकाने के लिए कांग्रेस पार्टी देश की जनता को गुमराह करने में लगी है।

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