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मोदी राज में उज्ज्वला योजना का सबसे ज्यादा लाभ एससी-एसटी परिवारों को

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की महात्वाकांक्षी उज्ज्वला योजना का सबसे अधिक लाभ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को मिला है। उज्ज्वला योजना के तहत इस साल 23 मार्च तक तीन करोड़ 51 हजार से अधिक मुफ्त गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इनमें से 44 प्रतिशत से अधिक इन परिवारों को मिला है। उज्ज्वला योजना का लाभ सिर्फ कुछ राज्यों के अनुसूचित जाति और जनजाति के परिवारों तक सीमित नहीं है, बल्कि सभी राज्यों के परिवारों को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी 21 प्रतिशत के करीब है, लेकिन यहां 40 प्रतिशत लाभार्थी हैं। हरियाणा में उनकी आबादी 19 प्रतिशत है, लेकिन लाभार्थी 48 प्रतिशत हैं। इसी तरह पंजाब में एससी-एसटी की जनसंख्या 29 प्रतिशत है, लेकिन उज्ज्वला लाभार्थियों में इनकी हिस्सेदारी 68 प्रतिशत है। केंद्र सरकार का लक्ष्य 2022 तक अनुसूचित जाति और जनजाति के सभी परिवारों को मुफ्त गैस कनेक्शन देने का है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धमेंद्र प्रधान के अनुसार पिछले चार वर्षों में प्रधानमंत्री उज्जवला योजना (पीएमयूवाई) के तहत 3.5 करोड़ कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। दिल्ली में पीएमयूवाई योजना को लांच करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 2020 तक नौ करोड़ बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों तक पहुंचने का है। इसमें सामाजिक-आर्थिक जाति सर्वेक्षण (एसईसीसी) से बाहर रहनेवाले गरीब परिवारों को शामिल किया जाएगा, जिससे समाज का वृहत्तर हिस्सा सशक्त बनेगा। प्रधान ने बताया कि पिछले 4 सालों में 9 करोड़ नए एलपीजी कनेक्शन जारी किए गए जबकि 1955- 2014 के दौरान सिर्फ 13 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए गए थे। प्रधान ने उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन के मौजूदा लक्ष्य को 5 करोड़ से बढ़ाकर 2020 तक 8 करोड़ करने के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।

8 करोड़ परिवारों को मिलेगा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का लाभ
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गरीब महिलाओं को बीमारी से मुक्ति दिलाने और उनके चेहरे पर खुशी लाने के लिए 1 मई, 2016 को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरूआत की थी। हालांकि इस योजना तहत पांच करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस चूल्हा और कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन इस योजना की सफलता को देखते हुए सरकार ने इसका दायरा बढ़ाकर आठ करोड़ का फैसला किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक योजना तैयार की है, जिसमें उन गरीब परिवारों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। सरकार इसकी घोषणा बजट में या उससे पहले कर सकती है। ताकि 2025 तक सभी घरों तक स्वच्छ ईंधन पहुंचाने का लक्ष्य हासिल किया जा सके।

महिला सशक्तीकरण को मिलेगा बढ़ावा
वर्ष 2022 तक न्यू इंडिया के सपने को साकार करने में महिलाओं की बड़ी भूमिका देखते हुए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना का दायरा बढ़ाने का फैसला किया गया है। इस योजना के तहत उन परिवारों को शामिल किया गया है, जिनका नाम सामाजिक-आर्थिक जनगणना- 2011 की सूची में शामिल है, लेकिन अब एससी-एसटी वर्ग, वनवासियों, अति पिछड़े वर्ग और द्वीपों के निवासियों समेत कुछ अन्य कैटिगरी के लोगों को भी नए गैस के कनेक्शन दिए जाएंगे।। ताकि इस योजना का लाभ अधिक से अधिक महिलाओं को मिल सके और उनका सशक्तीकरण हो सके।

मिट्टी के चूल्हे से मिलेगी आजादी 
प्रधानमंत्री मोदी ने महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे से आजादी दिलाने का संकल्प लिया है। यह संकल्प उज्ज्वला योजना के माध्यम से पूरा होता दिखाई दे रहा है। इस योजना ने देश के करोड़ों लोगों की जिंदगी बदली है। उज्ज्वला योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में गरीब महिलाओं को घर पर एक कनेक्शन के बदले सरकारी एजेंसियों को 1600 रुपये की सब्सिडी दी जाती है। इसके साथ स्टोव खरीदने और पहला रीफिल कराने पर सरकार किस्तों में पैसा चुकाने की भी सुविधा देती है।

गरीब महिलाओं को वायु प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति
मोदी सरकार उज्ज्वला योजना के तहत देश के ग्रामीण क्षेत्रों की गरीब महिलाओं को खाना पकाने के दौरान धुएं के कहर से मुक्ति दिलाने में जुटी हुई है। वहीं लकड़ी पर निर्भरता भी खत्म करना चाहती है। इससे पेड़ों की कटाई पर रोक लगेगी और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकेगा।

गरीबों के आंसू पोंछने में मोदी सरकार जिस तरह से सामने आई है… उसकी शायद दूसरी मिसाल नहीं। ये एक समाज-कल्याण योजना है, जिसे ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लागू किया गया है। गरीबी रेखा से नीचे की महिलाओं के लिए गैस चूल्हा अभी एक सपना है। इस सपने को साकार करने के लिए ही उज्ज्वला योजना के जरिए कोशिशें की जा रही हैं।

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