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प्रधानमंत्री मोदी की उजाला योजना से देश हो रहा रोशन

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उजाला यानी ‘उन्नत ज्योति बॉय अफर्डेबल फॉर ऑल’ योजना… 01 मई 2015 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस योजना की शुरुआत कर रहे थे तो उन्हें विश्वास था कि यह भारत में ऊर्जा क्रांति की ओर बढ़ाया गया एक कदम है। आज उजाला योजना ने वास्तव में देश का अंधेरा दूर करने में अपना अहम योगदान दिया है। वाकई यह लोगों के घरों में उजाला भर रही है।

77 करोड़ एलईडी बल्ब लगाने की योजना
उजाला योजना के अन्तर्गत एक वर्ष के अन्दर ही 9 करोड़ एलईडी बल्बों की बिक्री हो गयी थी जिससे लगभग 550 करोड़ रुपये के बिजली बिल की बचत हुई थी। इससे उत्साहित होकर इसे और विस्तार दिया गया और अब तक करीब 26 करोड़ से ज्यादा बल्ब लगाए भी जा चुके हैं। इस मिशन ने बिजली और पैसों की बचत के साथ-साथ प्रदूषण भी कम किया है। इसके माध्यम से देश में 77 करोड़ एलईडी बल्ब लगाने की योजना है।

EESL के गठन से बढ़ा उजाला का सफर
इस योजना की जब शुरुआत हुई थी तो एलईडी बल्ब की कीमत सामान्य बल्ब से 30-35 गुना अधिक थी। 3 साल पहले जब कोई एक एलईडी बल्ब खरीदना चाहता था तो उसे 300 रुपये से भी अधिक खर्च करने पड़ते थे। अधिक कीमत इसकी सफलता में बड़ी बाधा थी। इसका कारण था कि उस वक्त एलईडी बल्बों का उत्पादन कम था। इससे लागत ज्यादा आती थी। इस समस्या से निबटने का इकलौता तरीका था ज्यादा से ज्यादा एलईडी बल्ब का प्रॉडक्शन ताकि इनकी कीमत कम हो सके। ऐसे में ऊर्जा मंत्रालय के तहत एनटीपीसी, पावर फायनांस कॉरपोरेशन जैसे पीएसयूज ने मिलकर EESL का गठन किया ताकि एलईडी रेवलूशन को अंजाम तक पहुंचाया जा सके।

पीएम मोदी की नीतियों से बढ़ा उपयोग, कम हुईं कीमतें
पीएम मोदी की पहल से सरकार ने योजनाएं बनाईं और नई नीतियों को लागू किया। एलईडी की कीमतें जब बाजार में कम होने लगीं तो धीरे-धीरे लोगों ने इसमें दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया। लोग एक-दूसरे को एलईडी बल्ब के लाभ बताने लगे। सरकार के प्रयासों के बाद इसकी कीमतें करीब 88 प्रतिशत तक कम हो गईं। इसके बाद घरों के इतर स्ट्रीट लाइट और दूसरी जगहों पर भी बड़ी संख्या में एलईडी बल्ब लगने लगे। असम के बिलसाईपाड़ा की एसडीएम डॉ. एम. एस. लक्ष्मीप्रिया ने उजाला योजना के तहत 50,000 एलईडी बल्ब खरीदे और सरकारी स्कूल के बच्चों के बीच बंटवा दिए। इससे भी लोगों में उत्साह का संचार हुआ।

एलईडी बल्व की कीमतें 10 गुना कम हुईं
पीएम मोदी के निर्देशन में इस मिशन को सफल बनाने में पूर्व ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल ने बहुत मेहनत की थी। दरअसल, पहली बार एलईडी क्रांति के लिए जो सूत्र तैयार किया गया, उसका पहला प्रयोग पुदुचेरी में किया गया। 2014 में सिर्फ 6 महीने के अंदर 7 वाट के 60 लाख एलईडी बल्ब बेचे गए। उसी साल के आखिर में आंध्र प्रदेश से 60 लाख बल्ब की मांग आ गई। इतनी ज्यादा मांग का परिणाम यह रहा कि 2014 खत्म होते होते एक एलईडी बल्ब की कीमत 310 रुपये से घटकर 149 रुपये हो गई। 2015 के शुरुआती महीनों में ही दिल्ली से 1.60 करोड़ एलईडी बल्बों की डिमांड आई और कीमत घटकर 82 रुपये पर पहुंच गई। जल्द ही 5 करोड़ नए बल्ब के ऑर्डर और पहुंची तो बल्ब की कीमत 70 रुपये पर आ गई।

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उजाला योजना बन गया जन अभियान
जब किसी देश में पावर की डिमांड में 3.6 फीसदी की गिरावट आए तो इसे बहुत नहीं कहा जाएगा, लेकिन भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश के लिए यह बड़ी बात है। एलईडी बल्ब के इस्तेमाल ने ही यह करिश्मा किया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार महज 32 महीनों के अंदर 25.79 करोड़ से अधिक सामान्य बल्बों को एलईडी बल्बों से बदला जा चुका है। यह संख्या हर दिन बढ़ रही है। सरकार का मकसद 77 करोड़ एलईडी बल्ब लगाने का है। इसके अलावा लाखों एलईडी ट्यूब लाइट्स और पंखे भी लगाए गए हैं।

समाज के हर वर्ग को हुआ इसका लाभ
एलईडी के यूज से जहां आम लोगों के बिजली बिल में कमी आई है, वहीं सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी कुछ कम हुआ है। बिजली की खपत कम होने से अब ज्यादा घरों के रोशन होने का रास्ता भी साफ हो गया है। मिशन उजाला की सफलता का यह भी एक बड़ा कारण है। देश का कोई भी नागरिक जिसने बिजली का कनेक्शन लिया हुआ है, उजाला योजना के तहत सस्ते एलईडी खरीद का फायदा उठा सकता है। यही नहीं, वे ईएमआई पर भी बल्ब खरीद सकते हैं। साफ है कि कम आय वर्ग भी इस कारण से इसका लाभ उठा पा रहे हैं।

एलईडी बल्ब पाने का आसान है तरीका
इसके लिए बिजली का बिल और सरकारी पहचान-पत्र देना होगा। अगर एक बार पेमेंट करके खरीदना चाहते हैं तो सरकारी पहचान-पत्र ही काफी है। अधिकतर शहरों में इसके वितरण केंद्र हैं, यह रिटेल स्टोर पर नहीं मिलता। वितरण केंद्रों की पूरी जानकारी ujala.gov.in पर उपलब्ध है। खास बात यह है कि अगर एलईडी बल्ब खराब हो गया हो, लेकिन वह टूटा न हो तो तीन साल के अंदर ईईएसएल इसे मुफ्त में बदल देती है।

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पेट्रोल पंप और गैस स्टेशनों पर भी उपलब्ध
EESL ने ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर पेट्रोलियम और नेचरल गैस मंत्रालय के साथ एमओयू भी साइन किया है जिसके तहत ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल) अब उजाला कार्यक्रम को बढ़ावाा देंगी। इसके तहत अब LED बल्ब, ट्यूब और बिजली बचाने वाले पंखे आदि के रिटेल आउटलेट पेट्रोल पंपों और नेचरल गैस स्टेशनों पर भी मिला करेंगे। इसे फेज के अनुसार लागू किया जाएगा। पहले फेज में यूपी और महाराष्ट्र को शामिल किया गया है।

LED बल्ब की कीमत
उजाला के तहत मिलने वाली चीजों की कीमत है:
LED बल्ब: 70 रुपये
LED ट्यूबलाइट: 220 रुपये
LED पंखा: 1200 रुपये

अब तक लगाए गए हैं
25,79,68,000 बल्ब
31,60,725 ट्यूबलाइट
11,85,467 पंखे
3,000,000 स्ट्रीट लाइट

LED बल्ब लगाने से
33,501 मिलियन किलोवाट बिजली की बचत हर साल
13,401 करोड़ रुपये की बचत सरकार को हर साल
6,707 मेगावाट बिजली की मांग हुई कम

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