Home चुनावी हलचल और कितना झूठ बोलेंगे केजरीवाल, जानिए सच्चाई

और कितना झूठ बोलेंगे केजरीवाल, जानिए सच्चाई

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आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि उनकी पार्टी के पास आगामी पंजाब और गोवा के विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए एक पैसा भी नहीं है और बैंक खाते खाली हैं। केजरीवाल इससे पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश के जरिए लोगों से चंदे की अपील भी कर चुके हैं। केजरीवाल का कहना है कि आम आदमी पार्टी चंदे से चलती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी की एक-एक पाई की निगरानी आयकर विभाग करता है।

पार्टी को आयकर विभाग का नोटिस
एक-एक पाई की निगरानी का हाल यह है कि आयकर विभाग ने हाल ही में पार्टी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और पूछा है कि क्यों न आयकर अधिनियम के तहत आप को आयकर से मिलने वाली छूट खत्म कर दी जाय। पार्टी पर चंदे का विवरण नहीं देने का आरोप है। नियमों के मुताबिक किसी भी राजनीतिक दल को 20 हजार रुपये से ज्यादा का चंदा देनेवालों का विवरण चुनाव आयोग को सौंपना होता है। लेकिन आम आदमी पार्टी ने ऐसा नहीं किया है। इसके साथ ही पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर से सभी दानदाताओं का नाम हटा लिया है।

पार्टी ने जुटाए करोड़ों रुपए
दिल्ली के सीएम ने कहा कि उनकी पार्टी के पास चुनाव में लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं। लेकिन, हकीकत इसके परे है। पंजाब के राजनीतिक दलों द्वारा 2010-11 से 2014-15 में जमा की गई ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, आप पार्टी ने सिर्फ तीन सालों में अपनी कुल आय में 44.54 फीसदी की बढ़ोत्तरी दिखाई है। पार्टी की तीन साल में कुल आय 110.03 करोड़ रही है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (एडीआर) रिपोर्ट में पंजाब के राजनीतिक दलों द्वारा पांच सालों में जुटाई गई कुल आय का ब्योरा दिया है।

आम आदमी पार्टी ने अपनी कुल आय का विज्ञापन पर 62.41 करोड़ रुपए खर्च किए। इसके अलावा सार्वजनिक बातचीत पर 26.60 फीसदी यानी 27.34 करोड़ रुपए और प्रशासनिक जनरल खर्च 10.57 करोड़ रुपए रहा है।

अन्ना भी नाराज
सामाजिक कार्यकर्ता और किसी समय केजरीवाल के गुरु माने जाने वाले अन्ना हजारे एक बार फिर उनसे नाराज हैं। अन्ना ने हाल ही में एक चिट्ठी लिखकर केजरीवाल से पूछा है कि आम आदमी पार्टी और दूसरी पार्टियों में क्या अंतर रह गया है। पत्र में अन्ना ने कहा कि यदि व्यवस्था में परिवर्तन लाना है तो नेतृत्व को कथनी और करनी में फर्क नहीं रखना चाहिए। अन्ना ने कहा कि आपने कई वादे किए, जिनमें आप को मिलने वाले चंदे को पार्टी की वेबसाइट पर डालना शामिल है। आपके लिए राजनीति और धन महत्वूपर्ण होते जा रहे हैं। अन्यथा, आपने अपनी वेबसाइट से उन लोगों के नाम नहीं हटाए होते, जिन्होंने मुश्किल दौर में पार्टी को चंदा दिया।

नो डोनेशन कंपैन
विदेशों से आम आदमी पार्टी को चंदा दिलाने वाले शिकागो के एक डॉक्टर मनीष रायजादा ने भी अरविंद केजरीवाल के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी से निलंबित डॉ मनीष ने चंदा बंद सत्याग्रह (नो लिस्ट, नो डोनेशन) शुरू किया है। रायजादा ने आम आदमी पार्टी द्वारा वित्तीय पारदर्शिता के नाम पर जनता को धोखा देने के संबंध में चुनाव आयोग को एक पत्र भेजकर मांग की है कि आयोग इस मामले में हस्तक्षेप करे। पत्र में रायजादा ने लिखा है कि आप यह दावा करती है कि पार्टी के वित्तीय मामलों में वह 100 फीसद पारदर्शिता बरतती है। पार्टी को चंदे में मिले पैसों के साथ-साथ पार्टी गतिविधियों पर खर्च होने वाले पाई-पाई के हिसाब को भी वेबसाइट पर अपलोड किया जाता है, लेकिन हकीकत इससे अलग है। जून 2016 के बाद से आप ने चंदा देने वालों के नाम वेबसाइट पर नहीं डाले है।

पुराने साथी भी खिलाफ
आम आदमी पार्टी को खड़ा करने में कभी अपना जी जान लगा देने वाले केजरीवाल के पुराने साथी भी नाराज हैं। अन्ना के साथ प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, किरण बेदी, शाजिया इल्मी और प्रोफेसर आनंद कुमार जैसे लोगों का भी केजरीवाल से मोहभंग हो चुका है। प्रशांत भूषण का कहना है कि आप को कई निजी कंपनियों की मदद से करोड़ों रुपये मिले हैं। जिसकी वजह से पार्टी ने चंदे की सूची को जनता से छुपाया है।

चंदे को लेकर विवादों में आई आम आदमी पार्टी पर उनके ही विधायक ने फर्जी कंपनी के सहारे पार्टी को चंदा जुटाने का आरोप लगाया है। बिजवासन से आप विधायक कर्नल देवेंद्र सहरावत ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी को फर्जी माध्यम से एक्सिस बैंक के चेक से 35 करोड़ रुपये का चंदा दिया गया है। जिस कंपनी के माध्यम से पार्टी को पैसा दिया गया है, वह कंपनी फर्जी है।

पैसे लेकर टिकट देने का आरोप
अरविंद केजरीवाल भले ही ईमानदारी का दम भरे लेकिन पंजाब में उनकी पार्टी पर पैसे लेकर टिकट देने के आरोप लगे हैं। बताया जाता है कि हाल ही में पार्टी के एक गुट ने 49 उम्मीदवारों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और कहा कि इन सभी से पैसे लेकर टिकट बांटे गए।

जाहिर है अरविंद केजरीवाल चंदा उगाहने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते रहे हैं। मक्कारी देखिए कि पार्टी फंड में करोड़ों रुपए आने के बाद भी पैसे ना होने की बात करते हैं। आखिर कोई केजरीवाल पर विश्वास करे तो कैसे?

 

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