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झूठ बोलने में माहिर है कांग्रेस पार्टी, जानिए पिछले तीन लोकसभा चुनावों में किए गए कांग्रेसी वादों की सच्चाई

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2019 के लोकसभा चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। सभी पार्टियां मतदाताओं को रिझाने के लिए अपने वादों के साथ कमर कस कर चुनावी समर में उतने को तैयार हैं। लेकिन क्या राजनीतिक पार्टियां चुनाव में जो वादे करती हैं उन्हें पूरा भी करती हैं। देश में सबसे अधिक समय तक शासन करने वाली कांग्रेस पार्टी के वादों पर नजर डालें तो उसके वादे सिर्फ वादे ही रह जाते हैं। पिछले तीन लोक सभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की तरफ से लोकलुभावन वादों का स्टेटस दिखाते हैं, तो आपको समझ में आएगा की कांग्रेस का चुनावी घोषणपत्र झूठ का पुलिंदा होता है और कुछ नहीं।

हर चुनाव में रोजगार को लेकर कांग्रेस ने किया झूठा वादा
सबसे पहले कांग्रेस पार्टी के रोजगार जेनरेशन को लेकर किए गए वादे को देखते हैं। 2009 के चुनावी घोषणापत्र में कांग्रेस ने देश के युवाओं को रोजगार के काबिल बनाने के लिए नेशनल स्किल डेवलपमेंट मिशन में 30 हजार करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया था। सच्चाई यह है कि 2009 से 2014 के बीच कांग्रेस सरकार ने स्किल डेवलपमेंट में सिर्फ 1850 करोड़ रुपये ही खर्च किए। हैरानी की बात यह है कि इस सब के बावजूद 2014 में भी कांग्रेस ने पांच वर्षों में 10 करोड़ युवाओं को स्किल ट्रेनिंग और रोजगार देने का वादा किया था। वहीं मोदी सरकार ने हर वर्ष दो करोड़ से अधिक रोजगार देकर अपने चुनावी वादे को निभाया है।

कांग्रेस ने किसान कल्याण के लिए कुछ नहीं किया
कांग्रेस पार्टी ने 2004, 2009 और 2014 कृषि और किसान कल्याण के लिए लंबे-चौड़े वादे किए थे। 2004 में कृषि उत्पादों के निर्यात के लिए लॉन्ग टर्म पॉलिसी बनाने के वादा किया था। किसानों के लागत का डेढ़गुना एमएसपी देने का वादा किया था। लेकिन दस वर्षों तक शासन चलाने के दौरान इन मुद्दों पर कुछ नहीं किया गया। 2009 के चुनावी घोषणापत्र में कांग्रेस ने फसल बीमा और एमएसपी का वादा किया था। सच्चाई यह है कि 2007 में स्वामिनाथन कमीशन ने डेढ़ गुना एमएसपी बढ़ाने की सिफारिश की थी, लेकिन कांग्रेस सरकार किसानों से वादा करने के वाबजूद इस रिपोर्ट पर कुंडली मारकर बैठी रही। बाद में मोदी सरकार ने पिछले वर्ष इन सिफारिशों को लागू किया और 22 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना घोषित किया।

कांग्रेस शासन में हुई शिक्षा की बदहाली
2004 के चुनाव में कांग्रेस ने शिक्षा पर कुल जीडीपी का 6 प्रतिशत खर्च करने और राष्ट्रीय शिक्षा आयोग गठित करने का वादा किया था। कांग्रेस ने दस वर्षों तक इसको लेकर कुछ भी नहीं किया। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि वर्ष 2004-05 में शिक्षा पर कुल जीडीपी का 3.26 प्रतिशत खर्च किया गया और दस वर्षों के कांग्रेस शासन में यह बढ़ कर 2013-14 में केवल 4.38 प्रतिशत पहुंच पाया। यानि दस वर्षों में सिर्फ 0.54 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी।

हवा-हवाई साबित हुआ सबको बेहतर स्वास्थ्य का वादा
हेल्थ के मामले में भी कांग्रेस ने देशवासियों के सामने झूठे वादों की झड़ी लगा दी। 2004 के मेनिफेस्टो में कांग्रेस ने स्वास्थ्य सुविधाओं पर कुल जीडीपी का 2 से 3 प्रतिशत खर्च करने और प्रथामिक स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत करने का वादा किया था। 2009 में भी कांग्रेस ने देश के सभी जिला अस्पतालों को उन्नत करने का वादा किया। गरीबों को लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना लाने का वादा किया गया। लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। स्वास्थ्य जैसे विषय पर कांग्रेस ने देशवासियों से झूठ बोला। सच्चाई यह है कि वर्ष 2004-05 में स्वास्थ्य पर कुल जीडीपी का 1.19 प्रतिशत खर्च हुआ, जबकि दस वर्षों के कांग्रेस शासन के बाद यह रकम बढ़ कर कुल जीडीपी की सिर्फ 1.20 प्रतिशत ही पहुंच पाई। यानि दस वर्षों में स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाया ही नहीं गया। आपको जानकर ताज्जुब होगा कि एक भी जिला अस्पताल को उन्नत नहीं किया।

वहीं मोदी सरकार ने बीते पांच वर्षों में देश के हेल्थ सेक्टर की तस्वीर बदल दी है। देश के 84 जिला अस्पतालों को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड किया गया है। 14 नए एम्स बनाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं आयुष्मान भारत योजना के तहत 10 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों यानि लगभग 50 करोड़ लोगों को 5 लाख रुपये सालाना की मुफ्त चिकित्सा सुविधा दी जा रही है।

कांग्रेस शासन में घरों में क्या गांवों तक नहीं पहुंच सकी बिजली
बिजली के क्षेत्र का कायाकल्प करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने हर चुनाव में वादा किया। 2004 में कांग्रेस के वादा किया था कि अगले 3 से पांच वर्षों में हर घर में बिजली कनेक्शन दे दिया जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बावजूद 2009 के घोषणा पत्र में कांग्रेस ने दावा किया कि उसने लगभग सभी घरों में बिजली पहुंचा दी है और बाकी घरों में जल्द पहुंचा दी जाएगी। ये वादा भी झूठा साबित हुआ। बेशर्मी की हद देखिए बिजली को लेकर 2014 में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वादा किया कि शहरी क्षेत्रों में 100 प्रतिशत और राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत 90 प्रतिश ग्रामीण घरों में बिजली कनेक्शन दे दिया जाएगा।

सच्चाई यह है कि कांग्रेस के दस वर्षों के कार्यकाल में इतने दावों के बाद भी 18 हजार गांव अंधेरे में डूबे हुए थे। मोदी सरकार ने इन गांवों में बिजली पहुंचाने का काम किया है और देश के सभी घरों में बिजली कनेक्शन का कार्य भी पूरा होने वाला है।

अल्पसंख्यक और कमजोर वर्ग के उत्थान का झूठा वादा
2004 के चुनावी घोषणापत्र में कांग्रेस ने आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का वादा किया। 2009 और 2014 में भी इसी तरह के वादा किया गया। अपना वोटबैंक बढ़ाने के लिए किया गया कांग्रेस का यह वादा सिर्फ वादा ही रह गया। सच्चाई यह है कि मोदी सरकार ने आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान कर सामान्य वर्ग के गरीबों को भी समाज की मुख्यधारा में लाने का काम किया है।

कांग्रेस पार्टी ने 2004 में अल्पसंख्यकों को स्वरोजगार के लिए कर्ज मुहैया कराने का भी वादा किया था। लेकिन यह वादा भी पूरा नहीं हो सका। वहीं मोदी सरकार ने मुद्रा योजना के तहत समाज के सभी वर्गों को बिना भेदभाव के बगैर बैंक गारंटी के लोन दिया। लगभग 16 करोड़ लोगों को लोन दिया जा चुका है।

दलितों और आदिवासियों को वादों को झुनझुना थमाया
कांग्रेस वार्टी ने 2004 के चुनावी मेनिफेस्टो में दलितों और अदिवासियों की उन्नति के लिए प्राइवेट सेक्टर में नौकरी में आरक्षण का वादा किया था। 2009 में कांग्रेस ने यही वादा किया लेकिन कुछ नहीं किया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2014 में फिर दलितों के लिए यही वादा किया। दस वर्षों के शासन में दलितों को हक दिलाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने कुछ नहीं किया। वहीं मोदी सरकार ने पांच वर्षों में गरीबों, वंचितों, शोषितों, दलितों,आदिवासियों का कल्याण सर्वोपरि रखा है। उज्ज्वला योजना के तहत करीब 3 करोड़ मुफ्त गैस कनेक्शन एससी-एसटी महिलाओं को दिए गए हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 51 लाख से अधिक यानी मकान एससी-एसटी समुदाय के लोगों को दिए गए हैं।

न देश की रक्षा की चिंता की और न ही जवानों की
कांग्रेस पार्टी अपने झूठे वादों से रक्षा क्षेत्र और सेना के जवानों को भी नहीं बख्शा। कांग्रेस ने 2009 में सैन्यकर्मियों को वन रैंक वन पेंशन का वादा किया और बिना कुछ किए हैं 2014 के मेनिफेस्टो में कह दिया कि ओआरओपी का वादा पूरा कर दिया गया है। जबकि सच्चाई यह है कि प्रधानमंत्री मोदी ने सत्ता की बागडोर संभालने के बाद ओआरओपी को लागू किया और सैन्यकर्मियों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा किया। अगस्त 2018 तक 8500 करोड़ रुपये इसके लिए जारी भी किया जा चुका है।

जीएसटी का वादा किया लेकिन लागू नहीं कर पाई कांग्रेस
काग्रेस पार्टी ने 2009 के घोषणा पत्र में जीएसटी का वादा किया। पांच वर्षों तक कांग्रेस सरकार ने कुछ नहीं किया और 2014 के घोषणापत्र में फिर यही वादा दोहराया गया। सच्चाई यह है कि मोदी सरकार ने सभी अवरोधों को दूर करते हुए एक राष्ट एक कर का सपना साकार किया। मोदी सरकार ने टैक्सों के मकड़जाल से मुक्ति दिलाते हुए जीएसटी को देशभर में लागू किया।

वादे के वाबजूद सिर्फ 59 गांवों में ब्रॉडबैंड पहुंचा पाई कांग्रेस सरकार
कांग्रेस पार्टी ने 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले अपने घोषणा पत्र में हर गांव में ब्रॉडबैंड कनेक्टिवविटी पहुंचाने का वादा किया था। कांग्रेस की सरकार दोबारा लौट कर आई लेकिन इस मुद्दे पर कांग्रेस ने कुछ नहीं किया। आपको बता है, पांच वर्षों में कांग्रेस की सरकार सिर्फ 59 गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ पाई थी। मोदी सरकार ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व काम किया है। आज देश की करीब 1 लाख 20 हजार ग्राम पंचायत ऑप्टिकल फाइबर से जुड़ चुकी हैं।

कांग्रेस का गंगा को स्वच्छ करने का वादा भी झूठा साबित हुआ
कांग्रेस पार्टी ने जीवनदायनी गंगा को लेकर भी देशवासियों से झूठ बोला। 2009 के मेनिफेस्टो में कांग्रेस ने कहा कि गंगा की सफाई उसकी प्राथमिकता है, इसके लिए गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण को अधिकार संपन्न बनाया जाएगा। पांच वर्ष तक इस पर कांग्रेस ने कोई कदम नहीं उठाया और 2014 में फिर इसी तरह का वादा कर दिया। जबकि मोदी सरकार ने गंगा की सफाई को अपने सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया। नमामि गंगे के तहत 20 हजार करोड़ का डेडिकेटेड फंड बनाया। आज गंगा के किनारे बसे शहरों में 25 हजार करोड़ से ज्यादा की 267 परियोजनाएं चल रही है, उनमें से 75 परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी हैं। गंगा के किनारे बसे सभी गांव ओडीएफ घोषित किए जा चुके हैं।

सबको आवास का वादा भी कांग्रेस ने पूरा नहीं किया
कांग्रेस पार्टी ने 2004 और 2009 के घोषणापत्रों में शहरी गरीबों के लिए आवास का वादा किया। लेकिन दस वर्षों में इस मसले पर बहुत ही धीमी गति से कार्य किया गया। कांग्रेस सरकार द्वारा 2004 से 2014 के बीच दस वर्षों में सिर्फ 8 लाख मकान ही बनाए गए। वहीं मोदी सरकार द्वारा पांच वर्षों में ही 15 लाख मकान बनाए जा चुके हैं और 30 से अधिक मकानों को बनाने का काम चल रहा है। मोदी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में डेढ़ करोड़ मकान बना चुकी है और चाबी भी सौंपी जा चुकी है। शहरों में आधुनिक सुविधाओं के विकास के लिए कांगेस सरकार ने दस वर्षों में करीब 63 हजार करोड़ रुपये खर्च किए थे, वहीं मोदी सरकार महज पांच वर्षों में ही शहरी विकास के लिए लगभग 78 हजार करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है।

 

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