Home समाचार कश्मीर से आतंकवाद का सफाया मोदी सरकार का लक्ष्य-अरुण जेटली

कश्मीर से आतंकवाद का सफाया मोदी सरकार का लक्ष्य-अरुण जेटली

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कश्मीर में आतंकवादी अब जान बचाने की फिक्र में हैं। भारतीय सुरक्षा बलों की कार्रवाई से डरकर आतंकी भाग रहे हैं। ये सबकुछ मुमकिन हुआ है सुरक्षा बलों की सतर्कता और मोदी सरकार की आतंकमुक्त कश्मीर नीति की वजह से। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने एक कार्यक्रम में साफ किया कि मोदी सरकार की प्राथमिकता है कि आतंकवादियों को खत्म कर दिया जाए। उन्होंने आतंकवाद के सफाये को लेकर मोदी सरकार की प्राथमिकताओं और नीतियों पर भी प्रकाश डाला।

रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी का फोकस नोटबंदी जैसे पॉपुलिस्ट फैसलों की ओर हो सकता है। (फाइल)

नोटबंदी का सकारात्मक असर
अरुण जेटली ने कहा कि टेरर फंडिंग के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने जो एक्शन लिया है, उससे बहुत सफलता मिली है। एनआईए की कार्रवाई से विदेश से आतंकियों को मिलने वाले पैसे पर रोक लगी है। यही नहीं नोटबंदी के बाद से आतंकियों के हौसले पस्त हुए हैं और उनके पास पैसा पहुंचने पर काफी हद तक ब्रेक लगाई जा सकी है।

अलगाववादी के लिए चित्र परिणाम

आतंकवाद की ‘सफाई’ लक्ष्य
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की प्राथमिकता कश्मीर से आतंकियों की सफाई है। अब आतंकवादियों पर दबाव बढ़ रहा है और कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम लगी है। जेटली ने आतंकियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए खासतौर पर जम्मू-कश्मीर पुलिस की तारीफ की। जेटली ने कहा कि जम्मू कश्मीर पुलिस ने बहुत मेहनत से अपने काम को अंजाम दिया है।

हिज्बुल मुजाहिदीन के चीफ कमांडर यासीन इत्तू के लिए चित्र परिणाम

मारे जाते रहेंगे आतंकी
अरुण जेटली ने कहा कि आज कश्मीर में कोई भी बडा़ आतंकी लंबे वक्त तक वहां दहशत फैलाने के बारे में सोच भी नहीं सकता। हालांकि वो कई साल तक अपने इस मंसूबे में कामयाब रहे हैं। आज किसी भी आतंकी की जिंदगी कुछ महीनों से ज्यादा लंबी नहीं है। उन्होंने कहा कि दो तरह के खतरे सामने हैं। एक जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और दूसरा लेफ्ट विंग एक्सट्रीमिज्म।

कश्मीर में अब भाग रहे हैं आतंकी, NIA की कार्रवाई के बाद कामयाबी: जेटली, national news in hindi, national news

भारत की सेना का दबदबा
रक्षा मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से ही पाकिस्तान कभी ये मानने को तैयार नहीं हुआ कि कश्मीर भारत का अटूट हिस्सा है। इसलिए वो वहां आतंकवाद फैला रहा है। ये उसका कभी पूरा ना होने वाला एजेंडा रहा है। 1965,1971 और कारगिल इसके उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि एलओसी पर आज भी भारतीय सेना का दबदबा है।

अलगाववादी के लिए चित्र परिणाम

पत्थरबाजी में हुई कमी
अरुण जेटली ने कहा कि पहले जब कभी भी किसी आतंकी का एनकाउंटर होता था तो हजारों लोग वहां पहुंच जाते और आर्मी पर पत्थरबाजी करते। अब हालात ये हैं कि इनकी तादाद 20 या 30 से ज्यादा नहीं होती। उन्होंने कहा कि ये पहली बार हुआ है और अब वो बैंक लूटने की कोशिश करने लगे हैं। सच तो ये है कि अब कुछ ही आतंकी बचे हैं और वो जान बचाकर भागने की जुगत में हैं।

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