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मुस्लिम महिलाओं को मिलेगा हक, निकाह हलाला और बहुविवाह पर SC में जवाब दाखिल करेगी मोदी सरकार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने पिछले चार वर्षों में मुस्लिम समाज की महिलाओं के उत्थान और उनके सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए हैं। सबसे बड़ी बात कि मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की सदियों पुरानी कुप्रथा से मुक्ति दिलाने का बीड़ा उठाया और इसे खत्म करने के लिए संसद में विधेयक लेकर आई। इसके साथ ही मोदी सरकार ने निकाह हलाला और बहुविवाह के दंश से भी मुस्लिम महिलाओं को आजाद करने की मुहिम छेड़ी है। सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला और बहुविवाह को असंवैधानिक घोषित करने की याचिका पर सुनवाई चल रही है। याचिका में कहा गया है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) आवेदन अधिनियम, 1937 की धारा 2 को संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21 और 25 का उल्लंघन करने वाला घोषित किया जाए, क्योंकि यह बहु विवाह और निकाह हलाला को मान्यता देता है। याचिका में मांग की गई है कि भारतीय दंड संहिता, 1860 के प्रावधान सभी भारतीय नागरिकों पर बराबरी से लागू हों। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर जल्द जवाब दाखिल करने को कहा है।

निकाह हलाला और बहुविवाह रोकने की तैयारी में मोदी सरकार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गंभीरता से काम कर रही है। पिछले चार वर्षों में मोदी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनसे महिलाओं को आत्मसम्मान से जीने, आत्मनिर्भर होने और समाज में बराबरी का दर्जा मिलने में मदद मिली है। प्रधानमंत्री मोदी का सोचना है कि महिला का विकास नहीं बल्कि महिला नेतृत्व में विकास से ही न्यू इंडिया का निर्माण होगा। मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की कुप्रथा से मुक्ति दिलाने के लिए विधेयक लाई है और अब मोदी सरकार मुस्लिम महिलाओं के हित में एक और फैसला लेने जा रही है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट में निकाह हलाला की प्रथा का विरोध करेगी। शीर्ष अदालत निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथा की कानूनी वैधता की पड़ताल कर रही है। निकाह हलाला, मुसलमानों में वह प्रथा है जो समुदाय के किसी व्यक्ति को अपनी तलाकशुदा पत्नी से फिर से शादी करने की इजाजत देता है। निकाह हलाला के तहत एक व्यक्ति अपनी पूर्व पत्नी से तब तक दोबारा शादी नहीं कर सकता, जब तक कि वह महिला किसी अन्य पुरूष से शादी कर उससे शारीरिक संबंध नहीं बना लेती और फिर उससे तलाक लेकर अलग रहने की अवधि (इद्दत) पूरा नहीं कर लेती। 

मोदी सरकार का मानना है कि यह प्रथा लैंगिक न्याय (जेंडर जस्टिस) के सिद्धांतों के खिलाफ है और उसने इस मुद्दे पर शीर्ष न्यायालय में अपना रुख स्पष्ट कर दिया था। मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने निकाह हलाला और बहुविवाह प्रथा पर केंद्र को नोटिस जारी किया था। कानून मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार भारत सरकार इस प्रथा के खिलाफ है। निकाह हलाला की कानूनी वैधता की अब उच्चतम न्यायालय पड़ताल कर रहा है। न्यायालय की एक संविधान पीठ इस प्रथा की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

तीन तलाक के खिलाफ विधेयक
शीर्ष न्यायालय ने पिछले साल तीन तलाक की प्रथा को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। सरकार तीन तलाक को एक दंडनीय अपराध बनाने के लिए बाद में एक विधेयक लेकर आई। लोकसभा ने यह विधेयक पारित कर दिया और अब यह राज्यसभा में लंबित है। यह तीन तलाक को अवैध बनाता है और पति के लिए तीन साल तक की कैद की सजा का प्रावधान करता है। मसौदा कानून के तहत तीन तलाक किसी भी रूप में (मौखिक , लिखित या ईमेल, एसएमएस और व्हाट्सऐप सहित इलेक्ट्रानिक तरीके से) अवैध और अमान्य होगा। 

महिलाओं के संपूर्ण विकास पर जोर
“महिला, वो शक्ति है, सशक्त है, वो भारत की नारी है,  न ज़्यादा में, न कम में, वो सब में बराबर की अधिकारी है।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ये बातें 2017 के महिला दिवस के अवसर पर कही थी। उनका मानना है कि स्त्री शक्ति को सशक्त किए बिना किसी भी राष्ट्र-समाज का सम्पूर्ण विकास नहीं हो सकता है। मोदी सरकार ने पिछले चार सालों में हर स्तर पर महिलाओं के सम्पूर्ण विकास की ओर ध्यान दिया है। समाज में बराबरी दिलाने के साथ ही उन्हें सशक्त और सामर्थ्यवान करने के उपायों पर जोर दिया गया है। महिलाओं को समान अधिकार, आर्थिक अवसर, सामाजिक सहयोग, कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाएं और कार्यक्रम लागू किए हैं। 

आइये हम नजर डालते हैं उन कुछ कार्यक्रमों और योजनाओं पर जो महिलाओं के सम्पूर्ण विकास का आधार तैयार कर रही हैं-

हज के लिए ‘महरम’ की अनिवार्यता खत्म
पीएम मोदी के प्रयास से भारतीय मुस्लिम महिलाएं बिना ‘महरम’ के हज यात्रा पर जा सकती हैं। गौरतलब है कि आजादी के 70 वर्षों बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर भारत की मुस्लिम महिलाओं को अकेले भी हज यात्रा पर जाने का हक मिला है। 

51 हजार रुपये का ‘शादी शगुन’
केंद्र सरकार उन अल्पसंख्यक लड़कियों को 51,000 रूपये की राशि बतौर ‘शादी शगुन’ दे रही है जो स्नातक की पढ़ाई पूरी करेंगी। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ (एमएईएफ) ने मुस्लिम लड़कियों की मदद के लिए यह कदम उठाने का फैसला किया। 

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
प्रधानमंत्री ने बेटे और बेटियों के बीच के भेद को खत्म करने और बेटियों के प्रति समाज की सोच को बदलने के उद्देश्य से 22 जनवरी 2015 को इस अभियान की शुरुआत की थी। पहले इसे देश के 100 जिलों मेे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था, दूसरे साल में इसे 161 जिलों में विस्तार दिया गया। योजना को पहले ही साल के अंत तक ही 58 जिलों में जन्म के समय लिंग अनुपात में वृद्धि दर्ज की गई। दूसरे वर्ष में 104 जिलों में जन्म के समय लिंगानुपात में बढ़ोत्तरी हुई। इस अभियान को बड़ी सफलता मिल रही है और अब इसे देश के 640 जिलों में लागू किया जा रहा है।

सुकन्या समृद्धि योजना
यह योजना बेटी, बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना का ही विस्तार है जिसे 2 दिसंबर 2014 को लांच गया था। बालिकाओं के सुनहरे और सुरक्षित भविष्य के लिए बनाई गई इस योजना के तहत उन्हें पूरी शिक्षा और 18 साल की होने पर शादी के खर्च की व्यवस्था सुनिश्चित होती है। ये योजना बालिकाओं और उनके माता-पिता को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करने के लिए लागू की गई है, जिसमें छोटे निवेश पर ज्यादा ब्याज दर की व्यवस्था है। 

10वीं, 12वीं की लड़कियों को मिलेगी स्कॉलरशिप
नौंवी और 10वीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली मुस्लिम बच्चियों को 10 हजार रुपये की राशि प्रदान की जा रही है। पहले 11वीं और 12वीं कक्षा में पढ़ाई करने वाली मुस्लिम लड़कियों को 12 हजार रुपये की छात्रवृत्ति मिल रही थी। यह योजना केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन के तहत शुरू की गई।

प्रधानमंत्री उज्जवला योजना
इस योजना के तहत गरीबी रेखा के नीचे के परिवार की महिलाओं को एलपीजी का मुफ्त कनेक्शन दिया जा रहा है। जिन महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन मिले हैं उन्हें धुएं से मुक्ति मिल गई है और उनकी जिंदगी बदल गई है। अब तक तीन करोड़ 22 लाख से अधिक कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इस योजना के तहत 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए जाने हैं। गौरतलब है कि ये एक समाज कल्याण योजना है, जिसे ग्रामीण महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लागू किया गया है।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान
यह योजना तीन से छह महीने की गर्भवती महिलाओं के लिए है। इस के तहत हर महीने की 9 तारीख को गर्भवती महिलाओं की मुफ्त स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की गई है। इस जांच में गर्भ में पल रहे शिशु की जांच भी शामिल है। इसे देश के सभी 650 जिलों में लागू कर दिया गया है जिसमें नकद राशि 4000 से बढ़ाकर 6000 रुपयों तक कर दी गई है।

मातृत्व अवकाश, मातृत्व लाभ
वर्तमान सरकार ने नया मातृत्व लाभ संशोधित कानून एक अप्रैल 2017 से लागू कर दिया है। संशोधित कानून के तहत सरकार ने कामकाजी महिलाओं के लिए वैतनिक मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह कर दी है। इसके तहत 50 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले संस्थान में एक तय दूरी पर क्रेच सुविधा मुहैया कराना अनिवार्य है। महिलाओं को मातृत्व अवकाश के समय घर से भी काम करने की छूट है। मातृत्‍व लाभ कार्यक्रम के 1 जनवरी 2017 से लागू है। योजना के अंतर्गत गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली माताओं को पहले दो जीवित शिशुओं के जन्‍म के लिए तीन किस्‍तों में 6000 रुपये का नकद प्रोत्‍साहन दिया जाता है।

महिला हेल्पलाइन
यह योजना हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए 24 घंटे तत्काल और आपातकालीन सहायता प्रदान करने के लिए है। ये योजना विशेष रूप से परिवार, समुदाय, कार्यस्थल निजी और सार्वजनिक दोनों स्थानों पर हिंसा की शिकार सभी महिलाओं के लिए है।

मोबाइल फोन में पैनिक बटन और जीपीएस
केंद्र सरकार की ओर से सभी फीचर और स्मार्ट मोबाइल फोन में पैनिक बटन की सुविधा सुनिश्चित की गई है। मोबाइल फोन में 5 और 9 नंबर का बटन इसके लिए निर्धारित है, स्मार्ट फोन में ऑन-ऑफ बटन को तीन बार हल्के से प्रेस करना होता है। सरकार ने यह तय कर दिया है कि 1 जनवरी 2018 से सभी मोबाइल फोन में जीपीएस की सुविधा देना अनिवार्य होगा। पैनिक बटन सीधे 112 नंबर से जुड़कर सहायता उपलब्ध कराएगा।

महिला शक्ति केंद्र
महिला शक्ति केंद्र अलग-अलग स्तर पर काम कर रही है। इसके तहत केंद्रीय स्तर पर नॉलेज सपोर्ट  और राज्य स्तर पर महिलाओं को संसाधन सहयोग मुहैया किया जा रहा है। इसके तहत राज्य सरकार, जिले और ब्लॉक स्तर पर भी महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर महिला शक्ति केंद्र को सहयोग दिए जाने का प्रावधान है।  महिला शक्ति केंद्र को दूरदूराज के इलाकों में बढ़ावा देने के लिए छात्रों को भी इससे जोड़ा जा रहा है । 3 लाख से भी ज्यादा स्वयंसेवी छात्रों को इस स्कीम से जोड़ा जाएगा। महिला शक्ति केंद्र और महिलाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरूकता फैलाने वाले छात्रों को समाज सेवा के लिए प्रमाणपत्र भी दिए जाने की व्यवस्था की गई है। 

कामकाजी महिला छात्रावास
कामकाजी महिलाओं को जरूरी सहयोग मुहैया करने के लिए 190 से ज्यादा कामकाजी महिलाओं के होस्टेल खोले जा रहे हैं।  इन होस्टल में 19 हजार से ज्यादा महिलाएं रह सकेंगी। इसके अलावा कई और सुधार गृह भी बनाए जा रहे हैं। इन सुधार गृहों में 26000 लाभार्थ‍िंयों को फायदा मिलेगा।

वन स्टॉप सेंटर
हिंसा की श‍िकार हुई महिलाओं के लिए ‘वन स्टॉप सेंटर्स’ भी खोले जा रहे हैं। 150 से भी ज्यादा जिलों में इनकी स्थापना किया जाना है। इन केंद्रों को महिला हेल्पलाइन के साथ जोड़ा जाएगा और ये 24 घंटे आपातकालीन सेवा मुहैया कराएंगे। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की तरफ से महिला पुलिस स्वयंसेवियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। 

नारी शक्ति पुरस्कार
विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान के लिए महिलाओं और संस्थाओं को सम्मानित किया जाता है। सम्मानित की जाने वाली महिलाएं समाज सुधार, विज्ञान, बिजनेस, खेल, मनोरंजन और कला जगत जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से संबंध रखती हैं। 

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