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‘सोनिया गांधी एंड फैमिली’ ने अनिल अंबानी पर किया ‘उपकार’,  काले कारनामों से कांग्रेस का दामन दागदार

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उद्योगपतियों से सांठगांठ कर कांग्रेस ने किस तरह देश को लाखों करोड़ का चूना लगाया था, एक अखबार ने इसका खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस की अगुआई वाली यूपीए सरकार ने ऐसी कंपनियों को ठेके दिए जिन्होंने जरूरी प्रक्रियाओं का पालन ही नहीं किया था। कांग्रेस सरकार ने सरकारी कंपनियों से कई प्रोजेक्ट्स छीन कर अनिल अंबानी की कंपनियों को दे दिए थे। एक लाख करोड़ से अधिक के ये प्रोजेक्ट्स तो कांग्रेस शासन के आखिरी 7 वर्षों में ही दिए गए।

आपको बता दें कि रोड ट्रांसपोर्ट ऐंड हाइवेज, टेलिकॉम, NHAI, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी और DMRC जैसी सरकारी इकाइयों से ये प्रोजेक्ट्स छीने गए थे। इसी मिलीभगत का नतीजा था कि कांग्रेस के 5 पांच साल में ही अनिल अंबानी की इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी देश की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी बन गई थी। इस दौरान 16500 करोड़ रुपये के 12 प्रॉजेक्ट्स शुरू किए गए, जिससे आर-इंफ्रा देश में सबसे बड़ी प्राइवेट रोड डेवलपर बन गई थी।

रिलायंस कम्युनिकेशंस के लिए रेगुलेटरी अप्रूवल्स तो तमाम प्रक्रियाओं को दरकिनार कर दिया गया था। अनिल अंबानी ग्रुप की 6 कंपनियों रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस पावर, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड और रिलायंस मीडियावर्क्स भी इसमें शामिल थी।

गौरतलब है कि प्रोजेक्ट्स हासिल करने से पहले इनमें से कई कंपनियों को उस क्षेत्र का अनुभव भी नहीं था। जाहिर है ये सब इसलिए संभव हो पाया कि अनिल अंबानी के ‘सोनिया गांधी एंड फैमिली’ से करीबी रिश्ते थे।

कांग्रेस सरकार के 10 साल में घोटालों का खेल

दरअसल यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी की सरपरस्ती में कांग्रेस और उनसे ताल्लुक रखने वाली कंपनियों ने लूट का खेल खेला। 

                                 यूपीए सरकार में ‘लूट ही लूट’
                घोटालों के नाम                   ‘लूट’ की रकम
             कोल ब्लॉक आवंटन, 2012                  1.86 लाख करोड़ रुपये
               2 जी स्पेक्ट्रम, 2008                 1.76 लाख करोड़ रुपये
           महाराष्ट्र इरीगेशन स्कैम,2012                  70,000  करोड़ रुपये
              कॉमनवेल्थ गेम्स, 2010                    35,000 करोड़ रुपये
            सत्यम कम्प्यूटर स्कैम, 2009                    14,000 करोड़ रुपये
              स्कॉर्पियन पनडुब्बी, 2005                    1,100 करोड़ रुपये
               अगस्ता वेस्ट लैंड, 2012                    3,600 करोड़ रुपये
                टेट्रा ट्रक स्कैम, 2012                        3,000 करोड़ रुपये

बहरहाल मोदी सरकार ऐसे कई उद्योगपतियों और कंपनियों पर शिकंजा कसा है और उनसे लूट की रकम वापस भी वसूली जा रही है। खास तौर पर एनपीए का बहाना ढूंढ रही कंपनियों को मोदी सरकार ने अपने निशाने पर लिया है। आइए एक नजर डालते हैं कि कैसे मोदी सरकार की सख्ती के बाद कंपनियों को अपनी संपत्ति बेचकर अपने कर्ज की रकम चुकानी पड़ रही है। 

               मोदी राज में सूट-बूट वालों की ‘लूट’ पर लगी ब्रेक
               बैंकों के कर्ज वापसी के लिए मजबूर हुए उद्योगपति

जिंदल स्टील
अक्टूबर, 2017
रायगढ़ और अंगूल स्टील प्लांट के दो यूनिट को 1,121 करोड़ में बेचना पड़ा
अगस्त 2017
6 हजार करोड़ वसूलने के लिए SBI ने अंगूल में जिंदल इंडिया थर्मल पावर प्लांट का टेंडर मंगवाया

एस्सार ऑयल
अगस्त 2017
ESSAR ऑयल को अपना 49 प्रतिशत शेयर रुस की Rosneft कंपनी को बेचना पड़ा
SBI, ICICI, Axis, IDBI और Standard Chartered बैंकों का 70,000 करोड़ रुपया चुकाना पड़ा

जीवीके पॉवर एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर
जुलाई, 2017
बकाया चुकाने के लिए 3,439 करोड़ रुपये में बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट बेचना पड़ा

डीएलएफ
दिसंबर, 2017
DCCDL को अपना 40 प्रतिशत हिस्सा बेच कर बैंकों का 7100 करोड़ रुपया चुकाना पड़ा

जेपी एसोसिएट्स
40 हजार करोड़ का कर्ज चुकाने के लिए 15,000 करोड़ में Ultratech और ACC को बेचना पड़ा
बैंकों ने जेपी ग्रुप की 13, 000 करोड़ की जमीन बेचने की प्रक्रिया शुरू की

टाटा ग्रुप
जनवरी, 2018
टाटा ग्रुप ने बैंकों के 23 हजार करोड़ में से 17 हजार करोड़ चुका दिए
सितंबर, 2018
टीसीएस के लाभांश से टाटा मोटर्स और टाटा टेलिसर्विसेज लिमिटेड का कर्ज चुकाएंगे

जीएमआर
37,480 करोड़ रुपये में 18,480 हजार करोड़ वापस किए, बकाया 19,000 करोड़ रुपये जल्द चुकाएंगे

वीडियोकॉन
नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में बैंकरप्सी के तहत कंपनी बेचकर वसूला जाएगा बकाया 20 हजार करोड़

रिलायंस
45,000 करोड़ रुपये बकाये की वापसी के लिए अपने Assets बेचकर कर्ज चुकाएगी कंपनी

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