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गुजरात मॉडल का मतलब वाकई में जानते हैं राहुल ?

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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी विदेश प्रवास के बाद गुजरात ‘भ्रमण’ पर हैं। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की संभावनाओं को ताकत देने के क्रम में वह अब ‘केम छो’ बोल रहे हैं और हिंदुओं के पूजा स्थल भी जा रहे हैं। किसानों के मुद्दे और विकास की बात के साथ ही वे हर जगह ‘गुजरात मॉडल’ को फेल बता रहे हैं। राहुल गांधी द्वारा सवाल उठाना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और इसपर किसी को आपत्ति भी नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर का कोई नेता जब अपनी किसी बात को जनता के सामने रखता है तो उसका महत्व होना चाहिए। सवाल यह है कि दो दिन के गुजरात दौरे में ही राहुल गांधी ने ‘गुजरात मॉडल’ को समझ लिया! बहरहाल हम उनकी समझ पर सवाल नहीं उठाते हुए उन्हें केवल ‘गुजरात मॉडल’ के बारे में बता रहे हैं।

गुजरात मॉडल मतलब छह करोड़ गुजरातियों का स्वाभिमान
2008 में गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी का दिया गया ये बयान तब का है, जब वे राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और प्राकृतिक स्तर पर चुनौतियों से जूझते राज्य को अपने अंदाज में गढ़ रहे थे। आज उनकी अथक मेहनत और संकल्प शक्ति के कारण ही देश-दुनिया में ‘गुजराती मान-सम्मान’ को नया आयाम मिला है। ‘केम छो’ को अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली है, और ‘गुजरात नुं गौरव’ शब्द राज्य की छह करोड़ जनता की आन-बान-शान बन गई है। 30 सितंबर, 2014 को जब अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘केम छो मिस्टर प्राइम मिनिस्टर’ कहकर स्वागत किया तो गुजराती मान को एक नायाब स्थान मिला। आज जब देश-दुनिया में गुजरात मॉडल की चर्चा कर राज्य के विकास की नजीर दी जाती है तो गुजराती अस्मिता को नया आयाम मिलता है।

गुजरात मॉडल मतलब विकास का पर्याय बना प्रदेश
2001 में श्री मोदी जब गुजरात के सीएम बने तो गुजरात की छह करोड़ जनता ने उनमें विकास पुरुष देखा। ‘गुजरात नुं गौरव’ की रक्षा करने वाला एक दृढ़ निश्चयी व्यक्तित्व देखा। जनता ने उनमें सपने दिखाने वाला और उसे पूरा करने वाला नेता देखा। लोगों ने मोदी की आंखों से जो सपना देखा उसे उन्होंने अपने 12 वर्षों के मुख्यमंत्रित्व काल में पूरा कर दिखाया। 2014 में देश का प्रधानमंत्री बनने तक उन्होंने गुजरात को उस मुकाम पर लाकर खड़ा कर दिया, जहां यह राज्य दिन-प्रतिदिन विकास की नई ऊंचाइयां प्राप्त कर रहा है।

गुजरात मॉडल मतलब एक SMS से बदलती है किस्मत
2008 में जब पश्चिम बंगाल के सिंगूर में टाटा को अपने नैनो प्लांट को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा, तो टाटा समूह के तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा निराश हो चुके थे, लेकिन गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री के एक एसएमएस ने उनके चेहरे की रौनक लौटा दी। उन्होंने रतन टाटा को ‘स्वागतम’ लिखकर एसएमएस किया और इस एक शब्द से प्रभावित होकर उन्होंने साणंद में टाटा नैनो की प्लांट लगा दी। आज उस एक एसएमएस की बदौलत साणंद इलाके की तस्वीर बदल गई है और इस प्लांट में दस हजार लोग काम कर रहे हैं।

गुजरात मॉडल मतलब ऊर्जा क्रांति से रोशन हुआ देश-प्रदेश
2001 में नरेंद्र मोदी जब गुजरात के सीएम बने थे तो उनसे मिलने वाले लोग कहते कि मोदीजी कुछ करो या न करो कम से कम डिनर के समय बिजली न जाए इसकी व्यवस्था कर दो। ये पीड़ा गुजरात के उन छह करोड़ जनमानस की थी जो बिजली की किल्लत से कराह रही थी। तब नरेंद्र मोदी ने इस कमी को दूर करने की ठानी। अब राज्य के 18, 066 गांवों में भी 24 घंटे बिजली है। आज गुजरात लगभग 29 हजार मेगावाट बिजली उत्पादन कर रहा है और सरप्लस बिजली हरियाणा और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों को बेच भी रहा है। साल 2012 में नेशनल ग्रिड के फेल होने की वजह से जहां देश के 19 राज्यों में दो दिनों तक अंधेरा छा गया था तब गुजरात अपनी बिजली से जगमग कर रहा था।

गुजरात मॉडल मतलब हर कदम पर कानून का शासन
न्यायपूर्ण सहअस्तित्व की नीति के साथ गुजरात में कानून व्यवस्था परफेक्ट है। गांव से लेकर शहरों तक में सुरक्षा का ऐसा माहौल है जो लोगों को भयमुक्त वातावरण दे रहा है। हर एक नागरिक खुद को संपूर्ण सुरक्षित महसूस कर रहा है। सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए सीमावर्ती गांवों को ‘शक्ति ग्राम’ के रूप में विकसित किया गया है। इससे सीमा पार से हो रही अवैध गतिविधियों पर रोकथाम में सफलता मिली है। जखौ में कोस्ट गार्ड स्टेशन की स्थापना गुजकोक और पोटा जैसे कानून का समर्थन जैसे काम हुए जिसने राज्य की कानून व्यवस्था को पुख्ता किया। वहीं सेना, नौसेना, वायुसेना के बीच राज्य शासन का तालमेल बिठाकर सीमापार से प्रोत्साहित अपराध पर लगाम लगाई गई।

गुजरात मॉडल मतलब सशक्त महिला, सार्थक विकास
महिला विकास के क्षेत्र में गुजरात आज उस मुकाम पर खड़ा है जहां से प्रेरणा लेकर देश के दूसरे राज्य भी उसका अनुसरण कर रहे हैं। बेटी बचाओ जैसा अभियान तो अब देशव्यापी बन गया है। आज गुजरात में संगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिलाओं की संख्या देश में सबसे ज्यादा 57.47 है, जबकि देश में यह प्रतिशत 53.26 प्रतिशत है। वहीं गुजरात के प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 42.53 प्रतिशत है। चिरंजीवी योजना, नारी गौरव नीति, मातृ वंदना योजना, महिला स्वाबलंबन, महिला सुरक्षा, महिला नेतृत्व, महिला आरोग्य, महिला कृषि, महिला शिक्षण, महिला स्वच्छता जागृति, महिला कल्याण, महिला बाल पोषण जागृति, महिला कर्मयोगी, महिला और कानून, महिला श्रमयोगी, महिला शारीरिक सौष्ठव जैसी योजनाएं गुजरात की महिला विकास के हर पहलू को सार्थक कर रही है।

गुजरात मॉडल मतलब श्वेत क्रांति से विकास का उजियारा
गुजरात में ‘श्वेत क्रांति’ ने 2003 के बाद राज्य में दूध उत्पादन 68 प्रतिशत बढ़ा है। आज गुजरात की डेयरियां दिल्ली के लिए 20 लाख लीटर, मुंबई के लिए 8 लाख लीटर और कोलकाता के लिए 5 लाख लीटर दूध रोजाना भेजती हैं। इसके अलावा देश की सेनाओं के लिए मिल्क पाउडर भी भेजा जाता है। 2003 से 2013 के बीच डेयरी उद्योग का व्यापार 2,400 करोड़ रुपये से बढ़कर 12,250 करोड़ रुपये हो गया। इससी दौरान प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियों की तादाद 10,000 से बढ़कर 16,000 हो गई है। वहीं, महिलाओं द्वारा गठित व संचालित दुग्ध समितियां 800 से 2,250 हो गईं।

गुजरात मॉडल मतलब गांवों का विकास और समृद्धि 
गुजरात के गांव आएंगे तो आपको गुजरात मॉडल की सही जानकारी मिल पाएगी। समग्र विकास की धारणा के साथ कार्य करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री रहते गुजरात में जितना विकास शहरों का किया उतना ही गांवों के विकास पर भी फोकस किया। उन्होंने गांवों को समृद्ध और शक्तिशाली बनाने के लिए कई पहल किए हैं। समरस पंचायतें और ई ग्राम जैसी योजनाओं ने जहां गांव के विकास को रफ्तार दी है। वहीं वतन सेवा जैसी योजनाओं के जरिये प्रवासी भारतीयों को भी अपने गांवों से जुड़ने का अवसर प्रदान किया है। गुजरात की सभी पंचायतें ब्रॉडबैंड सेवा से जुड़ी हुई हैं। लगभग सभी गांवों में इंटरनेट की सुविधा पहुंची हुई है। गुजरात का सारा मैनेजमेंट ‘गुजरात स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क’ से जुड़ा हुआ है। 2001 से चालू यह नेटवर्क 26 जिलों और 226 तालुकों को उनके सभी कार्यालयों से जोड़ता है।

गुजरात मॉडल मतलब खेती-किसानी में बेजोड़ राज्य
खेतों को चार घंटे निर्बाध पानी दिए जाने का सिलसिला 2003 से ही शुरू हो गया था। आज हर खेत, हर घर में पानी सहज उपलब्ध है। कच्छ जिले के रेगिस्तान को ड्रिप एवं स्प्रिंक्लर सिंचाई से हरा भरा कर दिया गया। बूंद-बूंद को तरसते कच्छ की सात लाख हेक्टेयर भूमि ड्रिप तकनीक से सिंचित है। गुजरात में ही सॉइल हेल्थ कार्ड का पहला प्रयोग हुआ जो आज पूरे देश में लागू हो गया है। नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्रित्व काल के 12 सालों में राज्य में खेती का ग्रोथ रेट केंद्र से दोगुनी और तीन गुनी रही है। 2002-06 तक औसतन 6 फीसदी विकास दर, वहीं 2007-09 तक औसतन 8 प्रतिशत जबकि 2009-12 में औसतन 10 प्रतिशत से ज्यादा रहा है। नेट हाउस, ग्रीन हाउस, पॉली हाउस जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों और विधियों ने बागवानी फसलों की खेती ने किसानों की समृद्धि की राह खोल दी। इस समय देश में सबसे ज्‍यादा पॉली हाऊस गुजरात में हैं। पशुओं की स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल का राज्‍यव्‍यापी नेटवर्क स्‍थापित किया गया। इससे पशुओं में होने वाली 122 तरह की बीमारियों से गुजरात मुक्‍त हो गया है।

गुजरात मॉडल मतलब जनशक्ति से जल क्रांति
2001 में जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात की कमान संभाली थी तो राज्य का 70 प्रतिशत भू-भाग भयंकर सूखा झेल रहा था, लेकिन उन्होंने राज्य को सूखे से निजात दिलाने का निश्चय किया, नीति बनाई और इसे करके दिखाया। जल है तो कल है, के सूत्र वाक्य के साथ जल संरक्षण के लिए जन सहभागिता का आह्वान किया। समाज के हर तबके को जल संरक्षण अभियान से जोड़ा और राज्य के लोगों ने ‘मूक क्रांति के जरिये जल क्रांति’ कर दिया। 2003 से पहले सूखे राज्य का तमगा झेलता रहा गुजरात आज जल शक्ति से लबालब है। राज्य के हर गांव, हर खेत में पानी की सहज उपलब्धता है। प्रदेश में सरकारी और निजी सहभागिता मॉडल के तहत 6 लाख से ज्यादा चेक डैम, खेत, तलावड़ियां और बोरीबांधों का निर्माण किया गया है। नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर परियोजना दुनिया का सबसे बड़ा सिंचाई नेटवर्क है। इसके तहत दस सालों में 10 लाख से ज्यादा कुएं और बोरवेल फिर से भर दिए गए हैं। इन योजनाओं से 33 लाख हेक्टेयर भूमि तो सिंचित हुई ही भू-जल स्तर में भी तीन मीटर की बढ़ोतरी हो गई है।

गुजरात मॉडल मतलब दुनिया भर में गुजरात की धमक
2001 से पहले का वो दौर याद कीजिए जब गुजरात में निवेशक नहीं आ रहे थे। औद्योगिक विकास के मानकों पर प्रदेश पिछड़ता जा रहा था, लेकिन तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने इसे चैलेंज माना और 2003 से वाइब्रेंट गुजरात की शुरुआत कर दी। फिर तो वाइब्रेंट गुजरात के सफल आयोजन ने दुनिया के सामने गुजरात की ऐसी तस्वीर पेश कर दी जो ये राज्य आकर्षक इनवेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन गया। आज हर छोटा-बड़ा उद्यमी गुजरात में निवेश करना चाहता है। वाइब्रेंट गुजरात आज की तारीख में उद्योग-जगत, विज्ञान और समाज के बीच संवाद का एक अंतर्राष्ट्रीय मंच है। इस मंच के सहारे अगल-अलग रंगों के सियासी और सामाजिक संदेश भी दुनिया को गए हैं। भारत के शीर्ष उद्योगपतियों और दुनिया के बेहतरीन सीईओ के साथ एक ही छतरी के नीचे एक साथ, एक मंच पर होना अपने आप में असाधारण बात है।

गुजरात मॉडल मतलब विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान
काइपो छे… काइपो छे… मकर संक्रांति के अवसर पर गुजरात में ये शब्द अनूठा अहसास कराता है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने पतंगबाजी को सात दिन का राज्यव्यापी उत्सव बना दिया। पतंग उत्सव में कोरिया, इजरायल, मलेशिया, स्विटजरलैंड, श्रीलंका, तुर्की, वियतनाम, थाईलैंड, स्पेन, सिंगापुर, कनाडा, नीदरलैंड, मकाऊ, कंबोडिया, इटली, पोलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देशों के पतंगबाज पेंच लड़ाने आते हैं। सबसे खास ये कि 15 साल पहले यहां का पतंग कारोबार महज 35 करोड़ का था। अब यह बढ़कर 750 करोड़ तक पहुंच गया है। इनमें से 350 करोड़ का कारोबार सिर्फ अहमदाबाद में है। इतना ही नहीं 20 हजार लोग इस रोजगार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं।

 

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