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राहुल गांधी ने हैम्बर्ग में रची राफेल डील निरस्त करने की साजिश!

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वायुसेना चीफ बीएस धनोआ ने राफेल डील को बोल्ड बताते हुए इसका समर्थन किया है। उन्होंने कहा ”हम कठिन स्थिति में थे। हमारे पास तीन विकल्प थे, पहला या तो कुछ घटने का इंतजार करें, RPF को वापस ले लें, या फिर आपात खरीदारी करें। हमने इमर्जेंसी खरीदारी की। राफेल डील हमारे लिए बूस्टर के समान है।”

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार धनोआ ने कहा, ”सरकार ने बोल्ड कदम उठाते हुए 36 राफेल फाइटर विमान खरीदा। एक उच्च प्रदर्शन वाला और उच्च तकनीक से सुसज्जित लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को दिया गया है ताकि हम अपनी क्षमता को बढ़ा सकें।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले वाइस चीफ एयर मार्शल देव ने कहा था, ”यह बेहद खूबसूरत एयरक्राफ्ट है… यह बहुत क्षमतावान है और हम इसे उड़ाने का इंतजार कर रहे हैं।”

जाहिर है वायुसेना इस राफेल डील को लेकर बेहद उत्साहित है। देश की सुरक्षा के लिहाज से भी यह काफी महत्वपूर्ण है, लेकिन कांग्रेस पार्टी इस डील को लेकर जिस तरह से इस पर सवाल उठा रही है, वह जिस प्रकार राफेल डील को खत्म करने पर अड़ गई है, इससे एक गहरी साजिश की ‘बू’ आ रही है।

एबीपी न्यूज के पत्रकार विकास भदौरिया के 28 सितंबर को गिए गए एक ट्वीट से यह बात साबित भी हो रही है कि डील रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश रची गई है।


इसमें उन्होंने लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय हथियार कंपनियों, आर्म्स डीलर तथा दो राजनीतिक पार्टियों के नेता अपने लाभ के लिए राफेल डील को खत्म करने में लगे हुए है। ये लोग एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र के तहत मोदी सरकार को बदनाम करने में जुटे हैं ताकि यह सरकार राफेल डील को निरस्त कर दे।

विकास भदौरिया ने 29 सितंबर को जो ट्वीट किया उससे भी ये बात पुख्ता होती है कि कांग्रेस पार्टी लगातार यह कोशिश कर रही है कि राफेल डील खत्म हो जाए। इसके मुताबिक इन दो राजनीतिक दलों के पांच नेताओं के साथ हथियार निर्माता तथा आर्म्स डीलर की बैठक अगस्त के अंतिम सप्ताह के दौरान जर्मनी के हमबर्ग में हुई थी। ध्यान रहे कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का जर्मनी दौरान उसी समय में हुआ था और 21 और 22 अगस्त को वे जर्मनी के हैम्बर्ग में थे। इस बात की जानकारी राहुल गांधी ने खुद ट्वीट कर दी थी।


विकास भदौरिया के ट्वीट के बाद पड़ताल से जो जानकारी बाहर आई है इसके अनुसार हैम्बर्ग में ही लोगों की घंटों चली बैठक में राफेल डील को निरस्त कराने के लिए मोदी सरकार को बदनाम करने की रणनीति बनी।


आपको बता दें कि राहुल गांधी द्वारा की गई इस भविष्यपरक घोषणा पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए सवाल भी उठाया था। आपको यह भी याद होगा कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के उस बयान से पहले ही 30 अगस्त को राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि राफेल सौदे पर फ्रांस में धमाका होने वाला है। अब सवाल उठता है कि दो दिन बाद फ्रांस्वा ओलांद क्या बयान देने वाले हैं यह बात राहुल गांधी को पहले से कैसे पता थी?


गौरतलब है कि ओलांद ने कहा था कि राफेल लड़ाकू जेट निर्माता कंपनी डास्सो ने ऑफसेट भागीदार के रूप में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस को इसलिए चुना क्योंकि भारत सरकार ऐसा चाहती थी। जाहिर है एक ओलांद एक बयान देते हैं उसके बाद में उसका खंडन भी आता है, लेकिन राहुल गांधी 20 दिन पहले ही यह कह दिया था।

कांग्रेस पार्टी के ही निष्कासित नेता शहजाद पूनावाला ने भी कहा था कि यह सच है कि राफेल डील को निरस्त कराने की कोशिश में कई अमेरिकी तथा यूरोपियन एयरक्राफ्ट बनाने वाली कंपनी भी शामिल हैं। उनका कहना है कि भारत से यह समझौता पाने के लिए उन्होंने वकीलों, पत्रकारों तथा नेताओं के महागठबंधन पर काफी पैसे खर्च किए हैं, ताकि राफेल डील को निरस्त कराया जा सके। उन्होंने कहा है कि इस सच्चाई का तथ्य है कि उन लोगों ने लंदन से लेकर अमेरिका और जर्मनी तक में बैठकें की हैं। ये लोग किसी प्रकार राफेल डील को खत्म कर किसी अन्य कंपनी से डील कराना चाहते हैं ताकि सभी को अपना-अपना हिस्सा मिल सके, भले ही देश की सुरक्षा जाए भाड़ में।

जाहिर है इतने तथ्यों के बाद यह साबित होता है कि राहुल गांधी ने मोदी सरकार के विरुद्ध एक साजिश रची और जर्मनी दौरा से यह साफ हो गया कि राहुल गांधी हथियार निर्माता तथा आर्म्स डीलर से मिले थे तभी इस बारे में उन्हें इतनी पुख्ता जानकारी थी।

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