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इस्लामिक कट्टरता की राह पर बढ़ रहा केरल !

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वर्ष 2015 में गाजियाबाद के दादरी में अखलाक की हत्या के बाद देश में कई हफ्तों तक असहिष्णुता पर चर्चा होती रही। विरोध में आंदोलन हुए, सड़कें जाम की गईं। मीडिया में मंथन चला, चौक-चौराहों पर विमर्श हुए। पुरस्कार वापसी का अभियान चला और देश को बदनाम करने की लगातार कई कोशिशें हुईं। यह सब केवल इसलिए हुआ कि गाय का मांस खाने वाला वह शख्स मुस्लिम था।

22 फरवरी, 2018 को भी इसी तरह की घटना घटी केरल में घटी। एक निरीह युवक को भीड़ ने पहले तो खूब पीटा, उसकी मोबाइल में रिकॉर्डिंग की और फिर तड़पा-तड़पाकर मारा डाला गया। परन्तु मीडिया चुप है। तथाकथित बुद्धिजीवी जमात खामोश है। अब न तो मीडिया में असहिष्णुता पर बहस हो रही है और न ही पुरस्कार लौटाए जा रहे हैं। ये सब इसलिए नहीं हो रहा है कि मरने वाला व्यक्ति हिंदू समुदाय का दलित-आदिवासी था और मारने वाले मुसलमान।

दरअसल हिंदुओं के प्रति देश के तथाकथित सेक्युलर जमात की सोच हमेशा ही दोहरे रवैये वाला रहा है। इसी जमात के कारण देश खतरनाक दिशा में आगे बढ़ रहा है। हम बात कर रहे हैं ‘भगवान की धरती’ कही जाने वाली ‘हरित भूमि’ केरल के ‘लाल’ हो जाने की।

आदिवासी युवक को मुस्लिमों ने मार डाला !
केरल को अन्य राज्यों की तुलना में अधिक साक्षर और सभ्य माना जाता है, लेकिन दलित–आदिवासी युवक मधु को जिस तरह मारा गया, वह केरल के सभ्य समाज के कट्टर बन जाने की कहानी है। मधु को पहले तो चोर कहा गया, लेकिन जैसे ही पता चला कि ये हिंदू है उसे वहां की मुस्लिमों की भीड़ ने घेर लिया और पीट-पीट कर मार डाला। हालांकि बाद में पुलिस ने मामले को संतुलित करने के लिए इसमें मनु दोमादरन, जोनाथन जोसफ जैसे नामों को भी नामजद किया। इस घटना में इन नामों की (दूसरे धर्म के) संलिप्तता है या नहीं यह तो जांच के बाद पता लगेगा, लेकिन स्थानीय लोगों की मानें तो यह हिंदुओं के प्रति मुस्लिम युवाओ में बढ़ रही घृणा का परिणाम है। इस घटना ने वीरेंद्र सहवाग जैसी शख्सियत को भी झकझोर दिया जिसे ट्वीट कर इजहार भी किया। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी इस ट्वीट को हटा लिया। 

RSS-बीजेपी कार्यकर्ताओं की सुनियोजित हत्याएं
यह घृणा का वातावरण वहां का सियासी जमात के दिमाग की उपज तो है ही, साथ ही एक समुदाय विशेष को मिल रहा संरक्षण केरल के सभ्य समाज को लील रहा है। एक विशेष तथ्य यह है कि केरल में एक साजिश के तहत आरएसएस के सदस्यों को निशाना बनाया जाता रहा है। हत्याओं के आरोप अधिकतर वामपंथी दलों और उनसे जुड़े संगठनों पर लगते हैं।

दरअसल ये हत्याएं एक सुनियोजित साजिश के तहत की जाती हैं। वामपंथियों की यह नीति रही है कि हिंदू समाज को विभाजित कर वर्गभेद के आधार पर वैमनस्यता बढ़ाई जाए। हिंदू समाज जैसे ही एकजुट करने की आरएसएस की कोशिशों के चिढ़ा रहता है। इसी का परिणाम है कि एक सुनियोजित साजिश के तहत वामपंथी आरएसएस सदस्यों को निशाना बनाते रहे हैं। 

2012 से अब तक की प्रमुख राजनीतिक हत्याएं

आनंदन – 12 नवंबर, 2017 को त्रिशूर में बाइक से आईटीआई कॉलेज से लौटते समय आरएसएस कार्यकर्ता आनंदन की कथित रूप से चार सीपीआईएम के कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से पिटाई कर दी। इसमें आनंदन गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस उसे अस्पताल ले गई जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। हमलावरों में एक की पहचान नेनमेनी के रूप में हुई।

ई राजेश- 29 जुलाई, 2017 को आरएसएस कार्यकर्ता ई राजेश की बेरहमी से श्रीकरियम में सरेआम हत्या कर दी गई।

संतोष (कन्नूर) – 18 जनवरी, 2017 की रात घर में अकेला पाकर सीपीएम के गुंडों ने चाकूओं से गोदकर संतोष की हत्या कर दी। पुलिस को जानकारी मिलने पर अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले संतोष की मौत हो गई।

सी. राधाकृष्णन (पलक्कड़) – 28 दिसंबर, 2016 को सीपीएम कार्यकर्ताओं ने कोझिकोड के पलक्कड़ में 44 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता सी. राधाकृष्णन को उनके ही घर में जिंदा जलाने की कोशिश हुई। उनके घर के सामने खड़ी उनकी बाइक में पहले आग लगाई। फिर घर में गैस का छिड़काव करके घर में आग लगा दी। इस आगजनी में सी राधाकृष्णन सहित दो परिजन और बुरी तरह से झुलस गए। त्रिस्सुर जुबली मिशन हॉस्पिटल में 6 जनवरी, 2017 को उपचार के दौरान सी. राधाकृष्णन की मौत हो गई।

संतोष (कन्नूर) – 18 जनवरी, 2017 की रात घर में अकेला पाकर सीपीएम के गुंडों ने चाकूओं से गोदकर संतोष की हत्या कर दी। पुलिस को जानकारी मिलने पर अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले संतोष की मौत हो गई।

सी. राधाकृष्णन (पलक्कड़) 28 दिसंबर, 2016 को सीपीएम कार्यकर्ताओं ने कोझिकोड के पलक्कड़ में 44 वर्षीय भाजपा कार्यकर्ता सी. राधाकृष्णन को उनके ही घर में जिंदा जलाने की कोशिश हुई। उनके घर के सामने खड़ी उनकी बाइक में पहले आग लगाई। फिर घर में गैस का छिड़काव करके घर में आग लगा दी। इस आगजनी में सी राधाकृष्णन सहित दो परिजन और बुरी तरह से झुलस गए। त्रिस्सुर जुबली मिशन हॉस्पिटल में 6 जनवरी, 2017 को उपचार के दौरान सी. राधाकृष्णन की मौत हो गई।

रेमिथ (कन्नूर) अक्टूबर, 2016 में ही 26 साल के रेमिथ नामक युवक की हत्या कर दी गई। चौदह साल पहले उसके पिता को भी मार दिया गया था। ये दोनों बीजेपी-आरएसएस से जुड़े थे। ये हत्याएं पिनाराई गांव में हुई जो कि केरल के मुख्यमंत्री का गांव है।

कथिरूर मनोज (कन्नूर) तीन सितंबर, 2014 को कथित तौर पर सीपीएम कार्यकर्ताओं के हमले में आरएसएस कार्यकर्ता मनोज की मौत हो गई। इस मामले में वरिष्ठ सीपीएम नेता पी जयराजन को भी पुलिस हिरासत ने हिरासत में लिया था।

केके रंजन (कन्नूर) सीपीएम कार्यकर्ताओं की ओर से की गई पत्थरबाजी में केके रंजन के सिर पर गहरी चोट लगी और एक दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

विनोद कुमार (कन्नूर) एक दिसंबर, 2013 को आरएसएस कार्यकर्ता विनोद कुमार की हत्या मार्च निकालने के दौरान सीपीएम कार्यकर्ताओं ने की।

सुजीत (कन्नूर) 19 फ़रवरी 2016 को आरएसएस कार्यकर्ता सुजीत की उनके परिवार के सामने ही कथित सीपीएम कार्यकर्ताओं ने गला काटकर हत्या कर दी

नेडुमकंडम अनीश रंजन (इडुक्की) – 18 मार्च, 2012 को एसएफआई के 23 साल के नेडुमकंडम अनीश रंजन की हत्या दो सीपीएम कार्यकर्ताओं ने चाकू मारकर की थी।

केरल की हिंदू लड़कियों का जबरन धर्मांतरण
केरल में हिंदू लड़कियों को भी एक विशेष अभियान के तौर पर मुस्लिम युवा निशाना बना रहे हैं। हिंदू लड़कियों का धर्मांतरण कर ISIS जैसे खतरनाक संगठन में शामिल करवाने जैसी साजिशें भी सरेआम जारी हैं। 11 जनवरी, 2018 को एक अखबार में छपी रिपोर्ट के आधार पर ये साजिश एक बार फिर बेनकाब हुई थी। अखिला नाम की हिंदू महिला के हदिया बन जाने का केस अभी भी सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। ऐसे हजारों मामले हैं जो केरल की धरती पर हिंदुओं के विरुद्ध अंजाम दिए जा रहे हैं।

केरल में लव जिहाद की सुनियोजित साजिश
केरल में हिंदू लड़कियों के साथ लव जिहाद का मामला भी सरेआम है। केरल हाईकोर्ट की टिप्पणी भी पब्लिक डोमेन में है जहां लव जिहाद जैसी साजिशों को सच माना गया था। यही नहीं केरल की कांग्रेस और वामपंथी दोनों ही सरकारों ने इस बात को माना है कि केरल में लव जिहाद जैसी साजिशें बड़े पैमाने पर की जा रही हैं और इसके लिए अरब देशों से भी फंडिंग की जाती है।

केरल में लव जिहाद तो कोर्ट ने भी मान लिया !
केरल में पिछले दस साल के दौरान करीब दस हजार लड़कियों ने धर्म परिवर्तन किया। केरल हाईकोर्ट ने भी आशंका जताई है कि ISIS के इशारे पर लव जिहाद के जरिए लड़कियों को फंसा कर उनका धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। उनका ब्रेनबॉश करके उन्हें आतंकवाद के रास्ते पर भेजा जा रहा है। अब जब सवाल आया कि क्या लव जिहाद होता है भी है या नहीं? लव जिहाद के बारे में लंबी बहस है और इससे इनकार नहीं किया जा सकता। यहां तक कि शुरुआत में इसे सिरे से नकारने वाली कांग्रेस ने भी बाद में कहा लव जिहाद होता है।

ओमन चांडी ने रखे थे तथ्य
25 जून 2014 को मुख्यमंत्री ओमन चांडी ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि 2667 युवतियां 2006 से लेकर अब तक प्रेम विवाह के बाद इस्लाम कबूल कर चुकी हैं। वहीं केरला कैथोलिक बिशप काउंसिल ने इससे पहले 2009 में ये आंकड़ा 4500 बताया था। इसके अलावा एक अन्य संस्था ने कर्नाटक में 30 हजार लड़कियों के लव जिहाद की शिकार होने की बात कही थी। अक्टूबर 2009 में तत्कालीन कर्नाटक सरकार ने लव जिहाद को एक गंभीर मुद्दा माना और इसकी CID जांच के आदेश दिए। तत्कालीन डीजीपी जेकब पुनूज ने कहा था जांच में कई मामले आए, लेकिन लड़कियां यही कहती हैं कि वो अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल रही हैं।

केरल हाई कोर्ट ने जताई थी चिंता
9 दिसंबर 2009 को केरल हाइकोर्ट के जस्टिस के टी. शंकरन ने लव जिहाद के मामले में पकड़े गए दो मुस्लिम युवाओं की जमानत पर सुनवाई करते हुए कहा था कि पुलिस रिपोर्ट इस ओर इशारा कर रही है कि 3 से 4 हजार लड़िकयों के साथ इसी तरह के प्रेम संबंधों के मामले पिछले तीन-चार सालों में आ चुके हैं। उन्होंने ये भी बताया था कि जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाने के भी मामले मिलते हैं। ये भी पाया गया है कि धोखे में रखकर इन लड़कियों से ये संबंध बनाए गए। कोर्ट ने कहा था कि हजारों लड़कियों के इस तरह धर्म परिवर्तन की बात सामने आती है, लेकिन ये साबित नहीं हो पा रहा है कि ये ऑर्गेनाइज्ड तरीके से किया गया काम है।

वी एस अच्युतानंदन ने जताई थी आशंका
टाइम्स ऑफ इंडिया की 26 जुलाई 2010 को प्रकाशित एक खबर में तत्कालीन मुख्यमंत्री वीएस अच्यूतानंदन ने भी इस विषय पर चिंता जताई थी। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा था कि पॉपूलर फ्रंट ऑफ इंडिया और कैंपस फ्रंट जैसे संगठन दूसरे धर्मों की लड़कियों को फुसलाकर उनसे शादी कर इस्लाम कबूल करवाने की साजिश रच रह हैं। 20 वर्षों में केरल का इस्लामीकरण करने का प्लान बना रहे हैं। वो तालिबान के अंदाज में कॉलेजों में हमला कर सकता है।

केरल सरकार ने भी जताई थी चिंता
लव जिहाद के अधिकतर मामले केरल और दक्षिण भारत मे सामने आए हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी इसके पैर पसारने की खबर आई। हालांकि केरल की कई सरकारों ने (कांग्रेस और सीपीएम दोनों ने) बकायदा इस पर अपने निर्णय भी दे दिए हैं कि अब ऐसी घटनाओं को रोकने मे सरकार भी मदद करेगी। सरकार ने यह भी कहा है कि ऐसे मामलों में हर हिन्दू और गैर मुस्लिम परिवार की पूरी सहायता की जाएगी। इतना ही नहीं केरल सरकार ने ये भी वादा किया था कि ऐसी घटनाओं की जांच सीआईडी द्वारा कराई जाएगी ।

 

ये होता है लव जिहाद
जानकारों को अनुसार हिन्दू लड़की या गैर मुस्लिम लड़कियों को अपने नकली प्यार मे फंसा कर धर्मांतरित करना ही इस जिहाद का मूल उद्देश्य है। इस षडयंत्र के माध्यम से हिंदू महिलाओं को मुस्लिमों की आबादी बढ़ाने के उपयोग के लिए मजबूर किया जाता है। दरअसल यह इस्लामिस्ट कट्टरपंथी जमात भारत को दारुल हरब यानि काफिरों का देश मानता है और इसे दारुल इस्लाम यानि मुसलमानों के देश में परिवर्तित करने की योजना पर काम कर रहा है जिसका एक बड़ा हथियार लव जिहाद भी है।

ऐसे किया जाता है लव जिहाद
ये भी आरोप कई संगठनों की तरफ से लगाए गए कि हाथ में कलावा और सिर पर तिलक लगाकर लव जिहादी दूसरे धर्म का होने का छलावा करते हैं। इन्हें बाइक और पैसा दिया जाता है ताकि ये लड़कियों को अपने जाल में फंसा सके। ये स्कूल-कॉलेज के इर्द-गिर्द मंडराते हैं और इन्हें इसके लिए पैसा भी दिया जाता है। बीते साल कोझीकोड लॉ कॉलेज से जहांगीर रजाक नाम के एक लव जिहादी ने 42 लड़कियों की अकेले ही फंसा लिया और उन सब को मिलाकर एक सेक्स रैकेट चलाने लगा। ऐसी ही एक लड़की थी गीता। दिल्ली की रहने वाली इस लड़की को जैसे ही पता चला कि उसका ब्वॉयफ्रेंड विशाल दरअसल मोहम्मद एजाज है, तो उसने मौत को गले लगा लिया।

 

अरब देशों से होती है फंडिंग
ऐसा माना जाता है कि लव-जिहाद अभियान अरब देशों द्वारा वित्त पोषित है। एक सऊदी अरब स्थित संगठन, भारतीय भाईचारे के तहत भारत आता है पर ये सब काम हवाला द्वारा चलाया जाता है। हिंदू लड़कियां जो गांवों से शहर के लिए चले गए वो आसान शिकार हो जाते हैं। कहा तो ये भी जाता है कि ऐसे लोग किसी लड़की के पीछे दो से तीन हफ्ते का समय देते हैं और यदि लड़की उनके जाल में नहीं फंसती है, तो वो दूसरे शिकार की तरफ निकल पड़ते हैं। इन बातों की सत्यता के लिए निष्पक्ष जांच और उन जांच नतीजों का सामने आना जरूरी है।

 

अरब देशों की तरह कट्टरता की राह पर केरल
केरल की साढ़े तीन करोड़ आबादी का 26 प्रतिशत से अधिक मुसलमान हैं। यहां कट्टर सुन्नी इस्लाम को मानने वालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है जो खुद को सलफी कहते हैं।  इनपर ISIS जैसे संगठनों का बड़ा प्रभाव बढ़ता जा रहा है। इसी का परिणाम है कि केरल के सामाजिक जीवन में नफरत का जहर भर गया है। जनवरी 2016 में जब ये खबर आई कि केरल के 20 युवक गायब हो गए हैं तो खबरें हैरान करने वाली थीं। इन सभी के इस्लामिक स्टेट से मिल जाने की खबरें सामने आईं थी। समझा जा सकता है कि केरल के पढ़े लिखे समाज में किस तरह की कट्टरता बढ़ती जा रही है, जो देश के लिए घातक सिद्ध होने वाला है। 

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