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‘जन्नत’ की गंदगी साफ कर कश्मीर को संवार रही है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीति

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इस वर्ष जम्मू-कश्मीर में प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप योजना के अंतर्गत 3,420 छात्र लाभान्वित हुए हैं। ये संख्या पिछले साल के मुकाबले करीब 1200 ज्यादा है। इस वर्ष इस योजना के तहत आवेदन करने वाले कुल 25,798 छात्रों में से 10,944 जम्मू से जबकि 12,047 श्रीनगर से थे।  यह जम्मू-कश्मीर के छात्रों को उच्च शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार द्वारा विशेष रूप से किया गया प्रयास है। इसके अंतर्गत उच्च शिक्षा में फीस में जनरल डिग्री वाले छात्रों के लिए 30 हजार, इंजीनियरिंग में सवा लाख और मेडिकल में तीन लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान करने की व्यवस्था है। वर्ष 2017 में इस योजना के अंतर्गत प्रवेश लेने वाले छात्रों में 2,377 इंजीनियरिंग के, 228 फार्मेसी के, 508 नर्सिंग के और 13 छात्र मेडिकल के शामिल हैं।

नया भविष्य चाहते हैं कश्मीरी युवा

कश्मीर घाटी से आए इस ताजा समाचार में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार के द्वारा वहां सतत रूप से किए जा रहे शांति-प्रयासों की सुगंध है। स्थानीय नागरिकों का जीवन पूरी तरह से सामान्य हो जाए, वहां अमन-शांति को फिर से बहाल किया जा सके और युवाओं के हाथों में पत्थर नहीं, किताबें हों, हुनर हो, रोजगार हो, इसके लिए मोदी सरकार संकल्पबद्ध है। सुखद रूप से इसका परिणाम यह रहा कि अब वहां के युवा आतंकियों-अलगाववादियों के बरगलाने में आकर आतंकवादी बनने की बजाय इंजीनियर बनना चाहते हैं, डॉक्टर बनना चाहते हैं। वे इस बात को समझ रहे हैं कि कश्मीर में कुछ बदलना है तो पहले उन्हें खुद को बदलना होगा और इस कार्य में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार हर कदम पर उनके साथ है।

पत्थर थामे हाथों को मिली किताबें

यहां यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की 40-50 घटनाएं नियमित रूप से होना सामान्य बात हो गई थी। किसी-किसी दिन तो एक ही दिन में ऐसी 4-5 घटनाएं घट जाया करती थीं। प्रधानमंत्री मोदी की सरकार को यह समझते जरा भी देर नहीं लगी कि ‘भय बिनु होत न प्रीति।‘ इसलिए इस मामले में तुरंत कड़ा रुख अपनाए जाने के बाद से वर्ष 2017 में इन घटनाओं में 90 प्रतिशत की कमी आई है, यानी एक तरह से कहा जा सकता है कि कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएं लगभग समाप्त हो चुकी हैं।

अमन का संकल्प

गाली और गोली से नहीं, गले लगाने से कश्मीर समस्या हल होगी।‘ जब लालकिले के प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह बात कही थी तो उसमें उनकी यह नीति स्पष्ट थी कि वे आतंक के साये में सांस लेने को मजबूर अपने कश्मीर के नागरिकों को उनकी समस्याओं के साथ अकेला हर्गिज नहीं छोड़ेंगे। बुरी तरह से अस्त-व्यस्त उनके जीवन में अमन-चैन वापस लाकर ही रहेंगे। साथ ही अलगाववादी संगठन और आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देकर उन जख्मों का भी कड़ा इलाज करके रहेंगे, जो पिछली सरकारों ने अर्से से अब तक पाले रखा था। जिनके चलते भारत का यह जीता-जागता ‘स्वर्ग’ नर्क में बदल चुका था।

भटके कदमों की होती घर-वापसी

कश्मीर में आतंकवाद के विषय में मोदी सरकार द्वारा लिए जा रहे कड़े फैसलों में भी वहीं के लोगों का हित छिपा है। जहां एक तरफ खूंखार आतंकियों का एक के बाद एक सफाया किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ भटककर आतंक के रास्ते पर चल पड़े युवाओं की घर-वापसी की भी पूरी व्यवस्था की जा रही है। वापस लौटे इन युवाओं के सामाजिक रूप से पुनर्वास व रोजगार की ओर भी सरकार ध्यान दे रही है। यहां तक कि आतंकवादी रहते हुए अगर उन्होंने किसी बड़ी घटना को भी अंजाम दिया है तो भी वापसी के बाद उनके प्रति कार्रवाई करते हुए संवेदनशीलता बरती जाएगी। इसका एक ताजा उदाहरण माजिद अरशिद खान है, जो हाल ही में लश्कर-ए-तैयबा को छोड़कर घर वापस आया है। कल तक जो एक विद्यार्थी था, फुटबॉल का होनहार गोलकीपर था, उसने आतंकवाद का रास्ता चुन तो लिया, मगर जल्दी ही उसे समझ में आ गया कि इन आतंकियों का असल मकसद क्या है।  

घाटी में खिलता-खेलता जीवन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पहले ही बजट में जम्मू-कश्मीर राज्य में खेलों के विकास के लिए 200 करोड़ रुपयों की राशि आवंटित करके इस राज्य के जनजीवन को पटरी पर लाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर कर दी थी।  राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने काफी समय पहले ही यह घोषणा कर दी थी कि इस राज्य की समस्याओं का समाधान यदि कोई कर सकता है तो वह केवल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ही हो सकती है।

देश-हित सर्वोपरि

एक ओर राज्य में खेलों को प्रोत्साहन देकर, आतंकवादी संगठनों का साथ छोड़कर वापस लौटे युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में हरसंभव मदद देकर मोदी सरकार ने उदारता का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर अलगाववादियों का बहिष्कार करके, देशविरोधियों के विरुद्ध कार्रवाई करके, सेना को राज्य में स्थिति के अनुसार निर्णय लेने में छूट देकर, आतंकवादियों को मिल रहे स्थानीय जनसमर्थन पर रोक लगाकर, सेना पर पत्थरबाजी जैसी घटनाओं के प्रति कड़े फैसलों लेकर, एक-एक करके कुख्यात आतंकियों का सफाया करके और नोटबंदी जैसे कड़े निर्णय से आतंकवादियों का आर्थिक आधार समाप्त करके और सर्जिकल स्ट्राइक जैसे सख्त कदमों द्वारा यह संदेश भी प्रसारित कर दिया कि इस घाटी में देशविरोधी घटनाओं को न तो सीमापार से सहन किया जाएगा, न सीमा के भीतर से। कश्मीर में शांति, सद्भाव और प्रगति के लिए केंद्र की सरकार प्रतिबद्ध है।

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