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2019 के आम चुनाव के लिए प्रधानमंत्री मोदी हैं ग्लोबल वित्तीय फर्मों की पहली पसंद

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तीन राज्यों के चुनाव में भाजपा ने सत्ता गांवाई है, इसके बावजूद प्रधानमंत्री मोदी के ब्रांड पर कोई असर नहीं पड़ा है। जाहिर है कि विधानसभा चुनाव राज्यों के स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं और इनके परिणामों में स्थानीय मुद्दे हावी रहते हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के चुनाव में यही देखने को मिला है। एक तरफ भाजपा के वोट पर्सेंटेज में कोई खास असर नहीं पड़ा है और दूसरी तरफ मोदी लहर भी कमजोर नहीं पड़ी है। यही वजह है कि अधिकतर रेटिंग एजेंसियों और वैश्विक वित्तीय फर्मों को लगता है कि मोदी ब्रांड आज भी मजबूत है और 2019 के चुनाव में पीएम मोदी आज भी पहली पसंद बने हुए हैं।

ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने साफ कहा है कि 2019 के चुनाव में अब भी मोदी पहली पसंद हैं। सीएलएसए का मानना है कि 2019 में एनडीए 245-280 सीटें जीत सकता है, जाहिर है कि यह आंकड़ा पीएम मोदी को सत्ता में काबिज रखने के लिए काफी है।

वहीं ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म क्रेडिट सुइस के मुताबिक भाजपा ने जिस तरह से प्रदर्शन किया है उससे साफ जाहिर होता है कि केंद्र के स्तर पर मोदी जी की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि मंगलवार को चुनाव परिणाम आने के बाद बजार में कोई घबराहट देखने के नहीं मिली है। यानि साफ है कि बाजार को लगता है कि इन परिणामों का केंद्रीय स्तर पर कोई फर्क नहीं पड़ा है और मोदी जी का ग्राफ ऊंचाई पर बना हुआ है।

वैश्विक वित्तीय फर्म यूबीएस भी 2019 में भाजपा की वापसी को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है। यूपीएस के मुताबिक मार्केट अलग-अलग तरह के नतीजों की संभावनाओं का भी आकलन कर रहा है, लेकिन इससे पीएम मोदी की मजबूत स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है।

एचएसबीसी को उम्मीद है कि भारत में व्यापक स्तर पर स्थिरता कायम रहेगी। यदि इन पांच राज्यों के मतदाताओं ने आम चुनावों में भी इसी तरह की प्रतिक्रिया दी तो भी कुल लोकसभा सीटों में इनका हिस्सा 15 फीसदी ही है। राजनीतिक दल कई तरह के गठबंधन करेंगे, लेकिन इससे प्रधानमंत्री मोदी की पोजीशन पर कोई असर पड़ता नहीं दिख रहा है।

सिटी के मुताबिक 2013-14 में राज्य और आम चुनाव में मतदान का ट्रेंड काफी अलग-अलग रहा था। तीन राज्यों में भाजपा को हुए नुकसान के पीछे सत्ता विरोधी लहर हो सकती है। सिटी का कहना है कि इस परिणामों के बाद जीएसटी के नियमों में नरमी और प्रत्यक्ष करदाताओं के लिए टैक्स में कुछ छूट दी जा सकती है।

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