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प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना को मिली नई उड़ान

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नई दिल्ली में देश के पहले कौशल विकास केंद्र के आरंभ के साथ ही, उसके लिए बारह हजार करोड़ रुपये के बजट की घोषणा करते हुए केंद्र सरकार ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना की सशक्तता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रकट की है। जुलाई 2015 में अपने अस्तित्व में आने के साथ ही इस योजना की पहचान मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक की रही है। इसका लक्ष्य रहा है, देश के कमजोर वर्गों, महिलाओं, युवाओं और हाशिये पर पड़े व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाना और इस प्रयास में हरसंभव सहायता उन तक पहुंचाना।

कौशल भारत से बनेगा कुशल भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को हमेशा युवाओं का देश कहा है। उनका हमेशा यह विश्वास रहा है कि भारत की साठ प्रतिशत आबादी युवाओं की है, जिस पर देश गर्व करता है। कौशल विकास योजना आरंभ करने के परोक्ष में भी उनका यही उद्देश्य रहा है कि भारत का युवा, जो आज पूरे विश्व में अपनी तरुणाई के कारण आकर्षण का केंद्र-बिंदु बना हुआ है, वह केवल रोजगार पाने वाला न बना रहे, बल्कि रोजगार देने वाला बने। ऐसा हो पाना तभी संभव है, जब भारतीय युवा केवल नौकरी के भरोसे न रहकर, अपने कौशल का विकास करके व्यावसायिक दक्षता अर्जित करे। अल्प शिक्षा के बाद यह तो हो सकता है कि उन्हें कोई न कोई नौकरी मिल जाए, मगर बिना किसी तकनीकी दक्षता के यह पूरे घर के दायित्व को संबल दे पाने में सहायक नहीं होगी। इसके लिए किसी न किसी तकनीकी दक्षता की, किसी न किसी कौशल की आवश्यकता बनी रहेगी। यही कारण है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना भारत में रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक बड़ी पहल सिद्ध होगा। इससे गरीबी उन्मूलन में भी काफी सीमा तक सहायता मिलेगी।

40.02 करोड़ प्रशिक्षित युवाओं का लक्ष्य

प्रधानमंत्री कौशल योजना में इसके आरंभ के साथ ही 2150 केंद्रों भी शुरू किए गए थे, जो वर्तमान में बढ़कर लगभग पांच हजार हो चुके हैं। इन केंद्रों पर युवाओं के विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण की व्यवस्था है, जिसमें पारंगत होने के बाद उन युवाओं को सर्टिफिकेट दिए जाने की भी व्यवस्था है। आरंभ में 24 लाख युवाओं के प्रशिक्षण के लक्ष्य के साथ शुरू हुई इस योजना को 2022 तक 40.02 करोड़ से अधिक तक ले जाने की प्रतिबद्धता है। इन प्रशिक्षित युवाओं का सरकार द्वारा भी विशेष ध्यान रखा जाएगा, जिसका अर्थ है कि इन युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिलेगी।

प्रशिक्षण भी, ऋण भी

यह भी ध्यान देने योग्य तथ्य है कि कौशल विकास योजना, कौशल ऋण योजना से परस्पर संबद्ध है। कौशल विकास योजना से प्रशिक्षित युवा, कौशल ऋण योजना द्वारा सीधे स्व रोजगार आरंभ कर सकते हैं, जिससे भारतीय कौशल को विश्व-मंच मिलेगा। यहां तक कि इस समय कई ऐसे देश हैं, जो विकसित तो है, उनके पास संपत्ति और संसाधन भी हैं, लेकिन पर्याप्त मानव संसाधन नहीं है। यदि भारतीय युवा अपने कौशल विकास पर समुचित ध्यान दे तो भविष्य में इन देशों की इस आवश्यकता पूरी कर सकता है। इससे भारतीय युवा के रोजगार के अवसर देश के साथ-साथ विदेश तक फैल जाएंगे। यह स्थिति भारतीय युवाओं के आत्मसविश्वास को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

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