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प्रधानमंत्री मोदी का कमाल, चार साल में देश हुआ मालामाल

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने पिछले चार साल में देश को नकारात्मकता और निराशा के दौर से बाहर निकाल कर सकारात्मक और विकासोन्मुखी दिशा दी है। 2014 से पहले के माहौल और आज के माहौल में जमीन-आसमान का अंतर है, और यह अंतर सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी की हर क्षेत्र में लागू की गई सही नीतियों और योजनाओं के कारण संभव हो सका है।

आइये देखते हैं कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी ने इस देश को ईमानदारी, स्वच्छता, समृद्धि और सफलता की राह पर अपने कार्यकाल में आगे बढ़ाया हैः

कांग्रेस राज के भ्रष्टाचार पर नकेल कसने में मोदी सरकार सफल

टैक्स चोरों पर कसा शिकंजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने कालाधन, बेनामी संपत्ति रखने वालों और इनकम टैक्स चोरी करने वालों पर अपना शिकंजा कसा है। नोटबंदी के बाद से बैंक खातों में कालाधन के रूप में मोटी रकम जमा करने वाले उन 2 लाख लोगों को आयकर विभाग ने नोटिस भेजा है, जिन्होंने  नोटबंदी के बाद 20 लाख से ज्यादा के 1000 और 500 रुपये के पुराने नोट बैंकों में जमा कराए थे और इन लोगों ने आयकर विभाग के सवालों का न जवाब दिया है, और न ही इनकम टैक्स रिटर्न भरा है।

3,500 करोड़ की बेनामी संपत्तियां जब्त
सिर्फ आयकर चोरी करने वालों पर ही नहीं, बेनामी संपत्ति और कालाधन रखने वालों पर भी मोदी सरकार का चाबुक जोरों से चला। पिछले साल  देशभर से 500 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य की 900 से अधिक बेनामी संपत्तियां जब्त हुई हैं। बेनामी संपात्ति लेन-देन रोकथाम कानून 1 नवंबर, 2016 लागू हुआ है। आयकर विभाग ने सभी अन्वेषण निदेशालयों में बेनामी संपत्तियों को पकड़ने के लिए इकाइयां भी बना दी हैं।

दो लाख से अधिक फर्जी कंपनियां बंद 
नोटबंदी के दौरान सरकार को कालेधन का घालमेल करने वाली तीन लाख से भी अधिक फर्जी कंपनियों के बारे में जानकारी मिली। यह सभी कंपनियां, नेताओं और व्यापारियों द्वारा गैरकानूनी और भ्रष्ट तरीके से देश के अंदर बनाये जा रहे कालेधन को सफेद करती थीं। इन सभी कंपनियों का रजिस्ट्रेशन केंद्र सरकार ने रद्द कर दिया।

जन-धन योजना से भ्रष्ट कमाई बंद– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जनधन योजना का शुभारंभ किया जिसके तहत देश में अब तक 32 करोड़ से अधिक ऐसे वयस्कों का बैंक खाता खुला है, जिनके पास 2014 से पहले बैंक में कोई खाता नहीं था। 2014 से पहले जहां सरकारी मदद और सब्सिडी, पेंशन आदि का पैसा बिचौलियों के हाथों में चला जाता था अब डायरेक्ट ट्रांसफर से सीधे जरूरतमंदों के खातों में पहुंचता है। इससे जनता का 90 हजार करोड़ रुपये से अधिक बचाया जा चुका है।

सरकारी खरीद और नीलामी में भ्रष्टाचार बंद- कांग्रेस सरकार ने कोयला, स्पेक्ट्रम, जमीन और अयस्कों की नीलामी में जिस तरह से लाखों करोड़ रुपये का घोटाला किया था, उसे खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी को ऑनलाइन कर दिया। अब सरकार के विभिन्न विभाग सामानों की खरीदारी ऑनलाइन मार्केट GeM के जरिए करते हैं। इससे बिचौलियों की कमीशनखोरी पूरी तरह से बंद हो चुकी है।

युवाओं को स्वर्णिम भविष्य, रोजगार के करोड़ों अवसर देने में मोदी सरकार सफल
मोदी सरकार ने युवाओं के लिए रोजगार हो या फिर अर्थव्यवस्था की मजबूती हर मोर्चे पर गंभीरता से काम किया है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत-राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन (एबी-एनएचपीएम) लागू होने से रोजगार के लाखों अवसर पैदा हो रहे हैं। योजना के तहत निजी और सरकारी दोनों अस्पतालों में एक लाख आयुष्मान मित्रों को तैनात किया जाएगा, जो कि स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को पैकेज का लाभ उठाने में सहायता प्रदान करेंगे। वे सहायता डेस्क संचालित करेंगे और योजना में पंजीकृत करने एवं पात्रता की पुष्टि के लिए दस्तावेजों की जांच करेंगे।

टेक्सटाइल सेक्टर में 10 करोड़ रोजगार
मोदी सरकार ने 300 से अधिक टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स पर इंपोर्ट ड्यूटी दोगुनी करने का फैसला किया है। सरकार ने टेक्सटाइल उत्पादो के इंपोर्ट पर शुल्क 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया है। सरकार के इस फैसले से घरेलू कपड़ा उद्योग को मजबूती मिलेगी और इससे देश में टेक्सटाइल सेक्टर में 10 लाख रोजगार सृजित हो रहे हैं।

क्रांतिकारी मुद्रा योजना- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना रोजगार सृजन और नए उद्यमी बनाने में क्रांतिकारी साबित हुई है। इस योजना के तहत वर्ष 2015-16 से 2017-18 के बीच करीब 3.49 करोड़ नए उद्यमियों ने अपना कारोबार शुरू किया है। इस दौरान इस योजना के तहत 12.27 करोड़ लोगों को बिना गारंटी का ऋृण दिया गया है। इस योजना के लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक महिलाएं हैं, यानी महिलाओं की आर्थिक उन्नति में भी यह योजना क्रांतिकारी साबित हुई है।

पीएम रोजगार प्रोत्साहन से 61 लाख रोजगार- मोदी सरकार द्वारा वर्ष 2016-17 में रोजगार सृजन की दिशा में शुरू की गई प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना के तहत अब तक 61.12 लाख को रोजगार मिला है। इस योजना के तहत सर्वाधिक 11.07 लाख रोजगार सृजन महाराष्ट्र में दर्ज किया गया है। जबकि छत्तीसगढ़ में 59,164, मध्य प्रदेश में 1,81,825, हरियाणा में 5,12,317 और दिल्ली में 3,71,122 लोगों को इस योजना का लाभ गत 25 जुलाई तक दिया जा चुका है।

पर्यटन से 1.46 करोड़ लोगों को मिला रोजगार- 
पर्यटन के क्षेत्र में पिछले चार वर्षों में 1.46 करोड़ रोजगार के अवसर मिले हैं।

अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 2017 में 4.3 लाख को रोजगार 
मनीकन्ट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में पिछले साल 2017 में 4.32 लाख लोगों को रोजगार मिला। भारत के हरित ऊर्जा क्षेत्र में 2016 में 3.85 लाख रोजगार के अवसर बने थे, 2017 में यह आंकड़ा 12 प्रतिशत बढ़कर 4.32 लाख हो गया। भारत ने मई 2018 तक 69 गीगावॉट संचयी अक्षय ऊर्जा की क्षमता प्राप्त कर ली है। इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत को अप्रैल 2014 से सितंबर 2016 तक गैर पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र में 1.77 बिलियन डॉलर का एफडीआई प्राप्त हुआ।

सड़क, पोत परिवहन, जल संसाधन में 1 करोड़ रोजगार
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि उनके मंत्रालयों की परियोजनाओं से चार साल में रोजगार के एक करोड़ से अधिक अवसर सृजित हुए हैं।उन्होंने कहा कि उनके अधीन आने वाले विभागों ने मई 2014 में एनडीए सरकार आने के बाद से एक करोड़ युवाओं को रोजगार दिया है।

कांग्रेसी संस्कृति से अर्थव्यवस्था को मुक्त कराने में मोदी सरकार सफल

जीएसटी ने 70 प्रतिशत बढ़ायी अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या
एक जुलाई, 2017 को देश में सबसे बड़ा कर सुधार वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू हुआ। इसके लागू होने के बाद केंद्र सरकार का टैक्स कलेक्शन भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, एक साल के भीतर ही अप्रत्यक्ष करदाताओं की संख्या 70 प्रतिशत बढ़ गई है। आजादी के बाद, पिछले 66 सालों में जहां 66 लाख अप्रत्यक्ष करदाता ही रजिस्टर्ड थे, वहीं 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू होने के बाद से 48 लाख नए उद्यमियों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। देश में लगने वाले 17 टैक्स और 23 तरह के उपकर (सेस) खत्म हो गए हैं।

बेहतर किया कारोबारी माहौल- पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं।

छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाया- मोदी सरकार के इस साहसिक फैसले का ही नतीजा है कि आज भारत विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थ-व्यवस्था बन गया है। भारत ने यह उपलब्धि फ्रांस को पीछे करके हासिल की है। फ्रांस की 2.582 ट्रिलियन डॉलर सकल घरेलू आय (जीडीपी) की तुलना में भारत की जीडीपी 2.597 ट्रिलियन डॉलर हो गई है। विश्व बैंक की रिपोर्ट मेंं पीएम मोदी के नोटबंदी और जीएसटी लागू करने के फैसले की सराहना की गई है। रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी और पिछले साल 1 जुलाई से लागू हुई जीएसटी व्यवस्था के बाद मैन्युफैक्चरिंग और लोगों की क्रय शक्ति (Purchasing Capacity) बढ़ी है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुसार इस वित्तीय वर्ष (2018-19) में भारत की जीडीपी 7.4 प्रतिशत और 2019 में इसके 7.8 प्रतिशत रहने के अनुमान है।

कोर सेक्टर 6.8 प्रतिशत की रफ्तार- आठ कोर सेक्टरों में जून 2018 के महीने में वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रही। यह सात महीने का उच्चतम स्तर है। रिफाइनरी, इस्पात और सीमेंट जैसे क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन की वजह से बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर बढ़ी है। बुनियादी क्षेत्र में सीमेंट उद्योग में जून माह के दौरान 13.2 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई, वहीं रिफानरी क्षेत्र में 12 प्रतिशत और कोयला क्षेत्र में 11.5 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। बिजली क्षेत्र में जून माह में 4 प्रतिशत की वृद्धि रही।

बलात्कारियों को मृत्युदंड, महिला सुरक्षा में मोदी सरकार सफल
मोदी सरकार ने कानून बनाकर 12 साल से कम उम्र के मासूमों से रेप करने वाले दोषियों को फांसी की सजा देने का प्रावधान किया है। निर्भया फंड के तहत रेलवे द्वारा Integrated Emergency Response Management परियोजना से 983 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, इनके माध्यम से 24 घंटे महिला यात्रियों को सुरक्षा मिलती है। पांच राज्यों में महिला पुलिस स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं, जो महिलाओं को उनके खिलाफ होने वाले अपराध की रिपोर्ट दर्ज कराने में मदद करती हैं।

मोबाइल में पैनिक बटन- मोदी सरकार महिला सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार ने देश में बनने वाले या आयात किए जाने वाले सभी मोबाइल फोन में एक पैनिक बटन को अनिवार्य कर दिया है। इससे संकट में फंसी महिलाओं को मदद मिल सकेगी। इस पैनिक बटन की सुविधा को पुलिस की आपतकालीन सेवा से जोड़ गया है।

महिलाओं के लिए वन स्टॉप सेंटर- पहले हिंसा की शिकार हुई महिलाओं को पुलिस और दूसरे विभागों से मदद के लिए भटकना पड़ता था। अब ऐसी महिलाओं की मदद के लिए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 195 ‘वन स्टॉप सेंटर्स’ बन चुके हैं। इन केंद्रों को महिला हेल्पलाइन के साथ जोड़ा गया है और ये पीड़ित महिलाओं को 24 घंटे आपातकालीन सेवा मुहैया करा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को पुलिस, चिकित्सा, कानूनी सहायता, मनोवैज्ञानिक सहायता और जरूरत पड़ने पर आश्रय भी प्रदान किया जा रहा है। दिसंबर 2017 तक इन वन स्टॉप सेंटरों से  1.5 लाख से अधिक महिलाओं की मदद की जा चुकी है

महिलाओं के लिए पासपोर्ट नियमों में बदलावमोदी सरकार ने महिलाओं के पासपोर्ट में शादी के पूर्व का उपनाम रखने की छूट प्रदान की। यानी अब महिलाओं को शादी के बाद पासपोर्ट में अपना सरनेम नहीं बदलना पड़ता है। इसके साथ ही एकल महिलाओं के लिए भी पासपोर्ट के नियम में बदलाव किया गया है। अब पासपोर्ट फार्म में या तो मां या फिर पिता का नाम लिखना जरूरी है। इसके साथ ही पासपोर्ट आवेदन के समय मैरिज सर्टिफिकेट या फिर तलाक का प्रमाण देने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है।

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना- सरकार ने पूरे देश में महिला भ्रूण हत्या, लिंग भेद की रोकथाम और महिला शिक्षा के लिए बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना शुरू की। योजना पहले वर्ष में एक सौ जिलों में शुरू की गई थी और पहले ही साल के अंत तक ही 58 जिलों में जन्म के समय लिंग अनुपात में वृद्धि दर्ज की गई। दूसरे वर्ष में योजना 161 जिलों में शुरू की गई, जिसमें से 104 जिलों में जन्म के समय लिंगानुपात में बढ़ोत्तरी हुई। अब यह योजना पूरे देश में लागू हो चुकी है।

मातृत्व अवकाश, मातृत्व लाभ- नया मातृत्व लाभ संशोधित कानून एक अप्रैल 2017 से लागू है। संशोधित कानून के तहत कामकाजी महिलाओं के लिए वैतनिक मातृत्व अवकाश की अवधि 12 सप्ताह से बढ़ा कर 26 सप्ताह कर दिया गयी है। इसके तहत 50 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाले संस्थान में एक तय दूरी पर क्रेच सुविधा मुहैया कराना अनिवार्य है।

महिला उद्यमिता और महिला कौशल को बढ़ावा- स्टैंड-अप इंडिया के अंतर्गत महिलाओं को अपना व्यवसाय प्रारंभ करने के लिए हर बैंक शाखा को 10 लाख से लेकर 1 करोड़ तक के ऋण कम से कम एक महिला को उपलब्ध कराने का नियम बनाया गया है। वहीं प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत रोजगार योग्य बनाने के लिए 11 लाख से अधिक महिलाओं को अलग-अलग तरह के हुनर में प्रशिक्षित किया गया है।

मुद्रा योजना में महिलाओं की भागीदारी- मुद्रा योजना महिला सशक्तीकरण का एक बहुत बड़ा जरिया बन चुकी है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अन्तर्गत बिना गारंटी के 12 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को ऋण वितरित किए गए हैं, जिनमें 76% महिलाएं और 50% से अधिक एससी/एसटी एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लाभार्थी शामिल हैं।

महिला ई-हाट- स्वसहायता समूहों के लिए ‘महिला ई-हाट’के नाम से एक अनूठा प्लेटफॉर्म स्थापित किया गया है। जिन महिलाओं को अपने उत्पादों को बाजार तक ले जाने का साधन नहीं मिलता था, उनके लिए यह योजना एक वरदान साबित हो रही है। सवा लाख महिलाओं और 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों को इस योजना का लाभ मिल रहा है

सुकन्या समृद्धि योजना- केंद्र सरकार ने सुकन्या समृद्धि योजना के माध्यम से देश की बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने का कार्य किया है। योजना के अंतर्गत 0-10 साल की कन्याओं के खाते डाकघर में खुल रहे है। इन खातों में जमा राशि पर 8.1 प्रतिशत की दर से वार्षिक ब्याज मिलता है।

11 लाख से अधिक महिलाओं को मिला मातृत्व योजना का लाभ- मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के अंतर्गत कुल 271.66 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है जिससे देश भर की 11,47,386 महिलाओं को लाभ मिला है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के अंतर्गत दर्ज लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 22,04,182 हो गई है। मोदी सरकार ने 01 जनवरी, 2017 से देश के सभी जिलों में पीएमएमवीवाई के पैन इंडिया कार्यान्वयन को मंजूरी दी थी, जिसके अंतर्गत लाभार्थी को 5,000/- रुपये मिलते हैं और बच्चे के जन्म के बाद जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के अंतर्गत मातृत्व लाभ के स्वीकृत नियमों के अनुसार शेष नकद प्रोत्साहन राशि मिलती है, जिससे औसतन एक महिला को 6,000/- रुपये मिलते हैं।

महिलाओं के लिए पुलिस फ़ोर्स में 33% आरक्षण- महिला सशक्तीकरण की दिशा में पुलिस भर्ती में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का एक बड़ा निर्णय किया गया है। यह राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में अभी से ही अलग-अलग स्तर पर पुलिस बालों में महिला आरक्षण लागू कर दिया गया है।

हज के लिए ‘महरम’ (पुरुष अभिभावक) की अनिवार्यता खत्म – 31 दिसंबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल के आखिरी ‘मन की बात’ में मुस्लिम महिलाओं को बहुत ही बड़ी खुशखबरी दी। प्रधानमंत्री ने बताया है कि अब भारतीय मुस्लिम महिलाएं बिना ‘महरम’ के हज यात्रा पर जा सकती हैं। गौरतलब है कि आजादी के 70 वर्षों बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर भारत की मुस्लिम महिलाओं को अकेले भी हज यात्रा पर जाने का हक मिला है.

ऱाष्ट्रीय सुरक्षा में मोदी सरकार बेजोड़

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार की नीतियों की वजह से आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर में तेजी के साथ आतंकियों का सफाया हुआ है। सीआरपीएफ के डीजी के अनुसार सितंबर तक इस साल 142 आतंकियों को ढेर किया गया है जबकि पिछले वर्ष 220 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे। सुरक्षा बलों और सीआरपीएफ के जवानों के बीच बहुत बढ़िया तालमेल है, इसी कारण आतंकियों के खात्मे के अभियान में सफलता मिली है। जनवरी, 2017 से जारी ऑपरेशन ऑल आउट में प्रतिदिन कोई न कोई आतंकी मारा जा रहा है। आतंकियों के हौसले पस्त हैं ।

सर्जिकल स्ट्राइक पर भारत को दुनिया का साथ- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को दुनिया में जो रुतबा मिल रहा है वह निश्चित ही भारत के बढ़ते प्रभुत्व को बयां करता है। जम्मू-कश्मीर के उरी में 18 सितंबर, 2016 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 29 सितम्बर 2016 को सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों और लॉन्चपैड को तबाह किया तो विश्व समुदाय भारत के साथ खड़ा रहा।

टेरर फंडिंग पर कसा शिकंजा- टेरर फंडिंग को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA ने अलगाववादियों के कई नेताओं को अंदर किया। NIA के अनुसार कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों के पास हवाला के जरिए पैसा पहुंचाया जा रहा था। एनआईए ने करोड़ों रुपये जब्त किए हैं वहीं सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह समेत कई बड़े-बड़े अलगाववादी नेता NIA और ED की गिरफ्त में हैं।

पत्थरबाजों पर कसी गई नकेल- वर्ष 2017 में पत्थरबाजी में 90 प्रतिशत तक की कमी आई। जहां पिछले सालों में हर रोज पत्थरबाजी की 40 से 50 घटनाएं होतीं थीं वहीं अब इक्का-दुक्का घटनाएं ही होती हैं। नोटबंदी का इस पर खासा असर पड़ा है। इसके अलावा टेरर फंडिंग को लेकर एनआईए ने अलगाववादियों पर जो कार्रवाई की उसका भी इस पर सकारात्मक असर पड़ा। जो लोग घाटी में पत्थरबाजों को पैसे बांटते थे, वो नोटबंदी के बाद हमले करने के लिए 100 युवकों को भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

आतंकवाद का संरक्षक देश घोषित हुआ पाकिस्तान- प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के प्रयासों के चलते अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान को आतंकवादियों की शरणस्थली वाले देशों की सूची में डाल दिया है। इसके साथ ही अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, नार्वे, कनाडा, ईरान जैसे देशों ने आतंक के खिलाफ एकजुट रहने का वादा भी किया।

ICJ में भारत का झंडा बुलंद- संयुक्त राष्ट्र में भारत को बड़ी जीत तब मिली जब दलवीर भंडारी लगातार दूसरी बार अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस में जज बन गए। दलवीर भंडारी का मुकाबला ब्रिटेन के क्रिस्टोफर ग्रीनवुड से था, लेकिन आखिरी दौर में अपनी हार देखते हुए उन्हें नाम वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर बना ‘अंतरराष्ट्रीय सौर संगठन’-सारी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग को कम करने के लिए चिंता जता रही थी, लेकिन भारत ने बड़ी पहल की और वैश्विक स्तर पर अमेरिका और फ्रांस के साथ इसके लिए इनोवेशन की तरफ कदम बढ़ाया गया। 26 जनवरी, 2016 को गुरुग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (आईएसए) के अंतरिम सचिवालय का उद्घाटन कर एक ‘नये अध्याय’ की शुरुआत की।

भारत के योग को विश्व ने अपनाया- 21 जून, 2015- ये वो तारीख है जो स्वयं ही एक यादगार तिथि बनकर इतिहास का हिस्सा बन गई है। इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का आगाज हुआ और पूरी दुनिया में भारत का डंका बजने लगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनथक प्रयास से योग को आज पूरी दुनिया में एक नई दृष्टि से देखा जाने लगा है।

डोकलाम पर चीन ने देखी भारत की धमक- अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक-टैंक हडसन इंस्टिट्यूट के सेंटर ऑन चाइनीज स्ट्रैटजी के डायरेक्टर माइकल पिल्स्बरी ने कहा कि चीन की बढ़ती ताकत के समक्ष मोदी अकेले खड़े थे। दरअसल ये टिप्पणी उन्होंने ‘वन बेल्ट, वन रोड’ परियोजना को ध्यान में रखते हुए कही थी। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी और उनकी टीम चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस महत्वाकांक्षी प्रॉजेक्ट के खिलाफ मुखर रही है। दरअसल अमेरिकी थिंक टैंक का मानना बिल्कुल सही है, क्योंकि भारत ने चीन को डोकलाम विवाद में भी अपनी दृढ़ता का परिचय करा दिया है और चीन को अपनी सेना को वापस बुलाने पर मजबूर होना पड़ा।

किसानों की समस्याओं का अंत करने में मोदी सरकार सफल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसान कल्याण पर रिकॉर्ड कायम कर रही है। मोदी सरकार ने किसानों के हित में जितने कदम उठाए हैं, उतने पहले किसी भी सरकार ने नहीं उठाए।

आय दोगुनी करने के लिए डबल किया बजट- प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की आय को दोगुना करने के संकल्प को 2022 तक पूरा करने के लिए केंद्रीय बजट में खेती को दिए जाने वाले धन को भी दोगुना कर दिया। कांग्रेस की यूपीए सरकार ने जहां 2009 से 2014 के दौरान मात्र 1 लाख 21 हजार 82 करोड़ रुपये दिए थे वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने 2014-18 के बीच, चार सालों में ही, 2 लाख 11 हजार 694 करोड़ रुपये दे दिए।

सिंचाई के पानी की समस्या खत्म – खेती के लिए, किसानों के पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए फाइलों में बंद पड़ी योजनाओं को लागू किया। हर खेत को पानी पहुंचाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ नहरों और बांधों पर काम चल रहा है। इसके साथ पानी का खेती के कामों में उचित उपयोग हो, ड्रिप सिंचाई की तकनीक को चार सालों के अंदर ही 26.87 लाख हेक्टेयर खेतों तक पहुंचा दिया गया .

सॉयल हेल्थ कार्ड से खेतों की पैदावार की ताकत बढ़ाई
सॉयल हेल्थ कार्ड खेतों की उपज शक्ति मापने का किसानों के हाथ में जबरदस्त हथियार है। अब तक किसी सरकार ने किसानों के खेतों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में खेतों की ताकत के बारे में कभी नहीं सोचा था। सॉयल हेल्थ कार्ड, किसान को यह बता देता है कि उसके खेत में किस तरह के उर्वरक की जरूरत है।

किसानों को आसानी से मिलती है खाद- कांग्रेस की सरकारों के दौरान किसानों को खेती के लिए उर्वरक लाने में जान के लाले पड़ जाते थे। सरकारी खाद की दुकानों पर किसानों का अधिक समय लाइन लगाने और खाद लाने में बीत जाता था, लेकिन अब देश में यह बीते दिनों की बातें हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने नीम कोटिंग का ऐतिहासिक फैसला लेकर कालाबजारी को पूरी तरह से बंद कर दिया, अब रासायनिक उर्वरकों का उपयोग केवल खेतों में ही हो सकता है, पहले की तरह उद्योगों में इसका उपयोग होना बंद हो गया है।

किसानों को लगभग मुफ्त में फसल बीमा का लाभ- आज किसानों को खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत और रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत के प्रीमियम पर बीमा मिल रहा है, शेष 98 प्रतिशत प्रीमियम राज्य और केन्द्र सरकारें देती हैं.

किसानों को खेत से ही फसल बेचने की सुविधा- देश में सभी अनाज और फल-सब्जी मंडियों के कानून में संशोधन करके, इंटरनेट के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। पूरे देश की अनाज और फल की मंडियों के एक हो जाने से किसी भी गांव का किसान देश में उपज कहीं भी बेच सकता है। 2022 तक यह पूरी तरह से व्यवस्थित होकर एक हो जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 585 मंडियों को e-NAM से जोड़ा जा चुका है जिस पर 87.5 लाख किसान अपना उपज बेच रहे हैं। अब तक e-NAM पर 164.5 लाख टन कृषि उपज बेचा जा चुका है, जिससे किसानों को 41, 591 करोड़ रुपये मिले हैं।

किसानों की वैकल्पिक आय के साधन बढ़ाए- बीते चार वर्षों में देश में दूध उत्पाद रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा है। पूरे विश्व में दूध उत्पाकदन की वृद्धि दर दो प्रतिशत है, जबकि भारत ने चार वर्षों में दूध उत्पादन में 4 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है।

नई अनाज खरीद नीति PM-AASHA
मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए पिछले महीने सितंबर में नई अनाज खरीद नीति को मंजूरी दी है। कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ (PM-AASHA) के तहत राज्यों को एक से ज्यादा स्कीमों का विकल्प दिया जाएगा। अगर, बाजार की कीमतें समर्थन मूल्य से नीचे जाती हैं तो सरकार एमएसपी को सुनिश्चित करेगी और किसानों के नुकसान की भरपाई भी करेगी। यह स्कीम राज्यों में तिलहन उत्पादन के 25% हिस्से पर लागू होगी।

खरीफ फसलों की एमएसपी में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी
मोदी सरकार ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में ऐतिहासिक बढ़ोत्तरी की। सरकार ने खरीफ फसलों की लागत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य डेढ़ गुना या उससे ज्यादा बढ़ा दिया। कैबिनेट ने जिन 14 फसलों का एमएसपी बढ़ाया है, उसमें- धान, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली, सूरजमुखी बीज, सोयाबीन, तिल, रामतिल और कपास शामिल है।

गन्ना किसानों के लिए राहत पैकेज- मोदी सरकार ने हाल ही में देश के गन्ना किसानों को राहत देने के लिए 8500 करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान किया। सरकार का कहना है कि चीनी की कीमत बढ़ाए बगैर किसानों को बड़ी राहत पहुंचाई जाएगी। गन्ना किसानों के लिए राहत पैकेज में चीनी का 30 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने के लिए 1200 करोड़ रुपए दिए जाने की घोषणा की गई।

सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए 5000 करोड़ मंजूर- मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के लिए 5,000 करोड़ रुपये का सूक्ष्म सिंचाई कोष गठित करने को मंजूरी दी है।

‘हरित क्रांति-कृषोन्नति योजना’ जारी रखने की स्वीकृति- मोदी सरकार ने कृषि क्षेत्र में छतरी योजना ‘हरित क्रांति-कृषोन्नति योजना’ को 2017-18 से आगे 2019-20 तक जारी रखने को मंजूरी दी है। इसमें कुल केंद्रीय हिस्सान 33,269.976 करोड़ रुपये का है। छतरी योजना में 11 योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं का उद्देश्ये समग्र और वैज्ञानिक तरीके से उत्पाोदन और उत्पाादकता बढ़ाकर तथा उत्पासद पर बेहतर लाभ सुनिश्चउत करके किसानों की आय बढ़ाना है। ये योजनाएं 33,269.976 करोड़ रूपये के व्यउय के साथ तीन वित्ती य वर्षों यानी 2017-18, 2018-19 और 2019-20 के लिए जारी रहेंगी

देश भर में किसानों को निर्बाध बिजली- खेती-किसानी में बिजली का अहम योगदान होता है, क्योंकि खेतों में ट्यूबबेल चलाने, सिंचाई के लिए बिजली जरूरी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बात को बाखूबी समझते हैं। हालांकि किसानों के लिए बिजली की अलग फीडर लाइन पर पिछले डेढ़ दशक से चर्चाएं हो रही हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के दखल के बाद इस पर अमल की प्रक्रिया शुरू हो गई है। देश में “पीएम सहज बिजली हर घर योजना” लांच की गई है। किसानों को बिजली का असली फायदा देने के लिए अब फीडर लाइन को अलग किया जाएगा। अलग बिजली फीडर होने से किसानों को बिजली सब्सिडी सीधे बैंक खाते में देने की व्यवस्था शुरू करने में भी काफी आसानी होगी। साथ ही किसानों को समय पर पर्याप्त बिजली आपूर्ति भी सुनिश्चित होगी।

प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना– प्रधानमंत्री कृषि कौशल योजना का मुख्य उद्देश्य कृषि से संबंधित विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान करवाना है। विशेषकर ऐसे युवाओं को, जो बीच में पढ़ाई छोड़ चुके हैं अथवा खेती से विमुख हो रहे हैं। इस प्रशिक्षण द्वारा कुशल कामगारों को विकसित किया जाता है। इसके अंतर्गत पाठ्यक्रमों में सुधार करना, बेहतर शिक्षण और प्रशिक्षित शिक्षकों पर विशेष जोर दिया गया है। प्रशिक्षण में अन्या पहलुओं के साथ व्यवहार कुशलता और व्यवहार में परिवर्तन भी शामिल है।

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