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बुजुर्गों के लिए बनेगा देश में पहला अस्पताल, पीएम मोदी रखेंगे आधारशिला 29 को

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर केंद्र सरकार विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए देश का पहला अस्पताल बनाने जा रही है। 200 बिस्तरों वाला इस अस्पताल में वरिष्ठ नागरिकों को दिल से लेकर हड्डियों तक का उपचार मिल सकेगा। वर्तमान समय में देश के सर्वश्रेष्ठ चिकित्सीय संस्थान एम्स में बुजुर्गों के इलाज के लिए एक विभाग है लेकिन इस अस्पताल के बन जाने से बुजुर्गों के लिए अलग से अस्पताल और रिसर्च सेंटर होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 29 जून को नेशनल एजिंग इंस्टीट्यूट की आधारशिला रखेंगे। अभी देश में बुजुर्गों के लिए अलग से अस्पताल की व्यवस्था नहीं है। सीनियर सिटीजन काउंटर तो है लेकिन उन्हें इलाज कराने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

नेशनल एजिंग इंस्टीट्यूट की रखेंगे आधारशिला
दिल्ली के मस्जिद मोठ क्षेत्र में एम्स के नए सेंटर में नेशनल एजिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना होगी। नेशनल एजिंग इंस्टीट्यूट में बुजुर्ग मरीजों को उपचार मिलने के अलावा डॉक्टरों की ट्रेनिंग और रिसर्च पर भी काम होगा। केंद्र सरकार इसके लिए एम्स के साथ करार कर चुकी है। 2022 तक इसके शुरू होने की संभावना है। फिलहाल मस्जिद मोठ क्षेत्र के एम्स के नए सेंटर के पास न्यू ओपीडी ब्लॉक, सर्जरी और मदर एंड चाइल्ड सेंटर बनकर तैयार है।

एक साथ चार प्रोजेक्ट का उद्घाटन करेंगे पीएम मोदी
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, सफदरजंग सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक, इमरजेंसी, एम्स और ट्रामा सेंटर के बीच बने टनल और ट्रामा सेंटर में बनी धर्मशाला का औपचारिक शुभारंभ पीएम मोदी 29 जून को करेंगे। इसी दौरान नेशनल एजिंग इंस्टीट्यूट की आधारशिला भी रखी जाएगी। खास बात यह है कि इनमें से तीन सुविधाएं सफदरजंग इमरजेंसी, टनल और धर्मशाला पहले से ही जनता के लिए खोली जा चुकी है। चौथे सफदरजंग सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक का सोमवार से ट्रायल रन शुरू हो गया है।

वाजपेयी सरकार के बाद मोदी सरकार कर रही है बुजुर्गों की चिंता
भारत भले ही युवाओं का देश कहा जाता है लेकिन देश में कुल जनसंख्या का 8.9 प्रतिशत बुजुर्गों की जनसंख्या है। आने वाले तीन दशक के बाद 2050 में बुजुर्गों की संख्या बढ़कर कुल जनसंख्या का 19.4 प्रतिशत हो जाएगा यानि प्रत्येक 5 में से एक व्यक्ति बुजुर्ग होगा। इसे देखते हुए पहली बार तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 1999 में नेशनल पॉलिसी फॉर इलडरली पीपुल बना। उसी की अगली कड़ी के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2016 में एजिंग इंस्टीट्यूट को मंजूरी दी गई। एम्स, दिल्ली के अलावा चेन्नई के मद्रास मेडिकल कॉलेज में भी यह इंस्टीट्यूट शुरू होगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर केंद्र सरकार इससे पहले भी बुजुर्गों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं की शुरुआत की है। उन योजनाओं की एक झलक – 

बुजुर्गों को मिलेगी चश्मा, छड़ी और ट्राई साइकिल
बुजुर्गों के लिए शुरू की गई वयोश्री योजना के तहत केंद्र सरकार बढ़ती उम्र के साथ उनके स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को पूरा करती है। इसके तहत उन्हें चश्मा, छड़ी, ट्राई साइकिल, ट्राई मोटर, आरामदायक जूते, बैसाखी, कृत्रिम दांत, ट्रायपॉड और सुनने की मशीन आदि प्रदान की जाती है। केंद्र सरकार ने छह महीनों के भीतर करीब 100 जिलों में योजना को पहुंचाने का लक्ष्य तय किया गया। इसके लिए योजना से जु़ड़े एलिम्बको (आर्टीफिशियल लिम्बस मैनुफैक्चरिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया) को तेजी से काम करने को कहा गया है। इसके तहत एलिम्बको को जिला प्रशासन से मिलकर तुरंत सर्वे कराने को कहा गया है। गौरतलब है कि वयोश्री योजना के तहत पहले सर्वे कराया जाता है। सर्वे के माध्यम से जरूरतमंद लोगों के चयन का काम होता है। बाद में कैंप के जरिए उपकरणों का वितरण किया जाता है।

जाहिर है कि 2011 के जनगणना के मुताबिक देश में 10.38 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं और इनमें से 5.2 फीसद बुजुर्ग उम्र संबंधी निशक्तता से ग्रसित हैं। अनुमान है कि 2026 तक देश में  बुजुर्गों की संख्या 17 करोड़ से अधिक होगी। संपन्न परिवार के बुजुर्गों को तो परेशानी होने पर ये उपकरण मिल जाते हैं, लेकिन देश में एक बड़ी आबादी गरीब बुजुर्गों की है, जिन्हें इस योजना के तहत जरूरी उपकरण मुहैया कराए जाएंगे।

पीएम वय वंदन योजना की निवेश राशि बढ़ाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले दिनों बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए बड़ा कदम उठाया। मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री वय वंदन योजना (पीएमवीवीवाई) के अंतर्गत निवेश की सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री वय वंदना योजना के तहत निवेश सीमा को 7.5 लाख रुपये से दोगुना कर 15 लाख रुपये करने के साथ-साथ इसकी सदस्यता की समय सीमा को 4 मई, 2018 से बढ़ाकर 31 मार्च, 2020 करने की भी मंजूरी दे दी।

10000 रुपये पेंशन का रास्ता साफ
इस तरह वरिष्ठ नागरिकों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवर सुलभ करा दिया गया है। मोदी सरकार के इस कदम से वरिष्ठ नागरिकों को हर माह 10,000 रुपये पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। पीएमवीवीवाई को एलआईसी के जरिए क्रियान्वित किया जा रहा है, ताकि वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जा सके और इसके साथ ही 60 साल एवं उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को अनिश्चित बाजार स्थितियों के चलते उनकी ब्याज आमदनी में किसी भी भावी कमी से उन्हें सुरक्षा प्रदान की जा सके।

दो लाख से ज्यादा बुजुर्गों ने उठाया योजना का लाभ
एलआईसी के जरिए चलाई जा रही इस स्कीम के तहत 10 साल तक प्रति वर्ष 8 प्रतिशत की गारंटीड रिटर्न दर के आधार पर एक निश्चित या आश्वासित पेंशन दी जाती है और इसमें मासिक/तिमाही/छमाही एवं वार्षिक आधार पर पेंशन का चयन करने का विकल्प दिया गया है। रिटर्न में अंतर अर्थात एलआईसी द्वारा सृजित रिटर्न और प्रति वर्ष 8 प्रतिशत के आश्वासित रिटर्न में अंतर को वार्षिक आधार पर सब्सिडी के रूप में भारत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। मार्च, 2018 तक कुल मिलाकर 2.23 लाख वरिष्ठ नागरिक पीएमवीवीवाई के तहत लाभान्वित हो रहे हैं। वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना-2014 नामक पिछली स्कीम में कुल मिलाकर 3.11 लाख वरिष्ठ नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।

बजट में भी दिखा ‘सबका साथ सबका विकास’ का मंत्र
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक ही मंत्र है ‘सबका साथ-सबका विकास’। पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार इसी मंत्र को साकार करने में लगी है। देश में एक बड़ी आबादी वरिष्ठ नागरिकों की है। मोदी सरकार ने आम बजट में भी वरिष्ठ नागरिकों के लिए तमाम सहूलियों का ऐलान किया था। वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज से होने वाली 50,000 रुपये तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है। पहले यह सिर्फ 10,000 रुपये थी। इस फैसले से वरिष्ठ नागरिकों को हर वर्ष 2 हजार से 12 हजार रुपये का फायदा होगा।

*वरिष्ठ नागरिकों को अब मियादी जमाओं पर मिलने वाले ब्याज पर स्रोत पर कर कटौती नहीं होगी।

*वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य बीमा के प्रीमियम की सीमा को 30,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया है। इससे उन्हें 1 हजार रुपये से 6 हजार रुपये का फायदा होगा।

*वरिष्ठ नागरिकों को गंभीर बीमारियों के इलाज पर कर की दृष्टि से कटौती को 60,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है। इससे उन्हें प्रतिवर्ष 2 हजार से 12 हजार रुपये की बचत होगी।

पेंशनभोगी डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र
वरिष्ठ नागरिकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। जीवन के इस पड़ाव में उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर उनकी जरूरतें पूरी करने में और आपातकालीन परिस्थितियों में सहायता करती है। पहले पेंशनभोगियों को सेवानिवृत्ति के बाद बैंक जैसे अधिकृत पेंशन वितरण एजेंसी में व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित होकर अपना जीवन प्रमाण-पत्र जमा कराना पड़ता था। लेकिन नई योजना लागू होने के साथ वरिष्ठ नागरिकों को बड़ी राहत मिल गई है। अब पेंशनभोगियों को बैंकों या पेंशन देने वाली संस्था और प्रमाणन अधिकारी के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने की जरूरत नहीं रह गई है और उन्हें अनावश्यक बाधाओं का सामना करने से भी छुटकारा मिल गया है।

वृद्ध व्यक्तियों के लिए समेकित कार्यक्रम
इसके तहत स्वंयसेवी संस्थाओं को वृद्धाश्रम, डे केयर केन्द्र, मोबाइल चिकित्सा केन्द्र की सेवा देने के लिए 90 प्रतिशत तक वित्तिय मदद करता है। इसके पंचायती राज संस्थाओं, स्वंयसेवी संस्थाओं, सेल्फ हेल्प ग्रुप को वृद्धाश्रम के निर्माण में सहायता देता है।

पांच लाख तक कोई कर नहीं
वित्त मंत्रालय 60 वर्ष की आयु से ऊपर के व्यक्तियों से तीन लाख रुपए तक की वार्षिक आय पर कोई कर नहीं लेता जबकि 80 वर्ष से ऊपर वालों से पांच लाख रुपए तक की आमदनी पर कोई कर नही लिया जाता।

बचत योजनाओं पर अधिक ब्याज
वरिष्ठ नागरिकों को बचत योजनाओं में अधिक ब्याज मिलता है। वरिष्ठ नागरिकों को पोस्ट आफिस की बचत योजनाओं में 8.6 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है।

वरिष्ठ नागरिक पेंशन योजना 
बुढ़ापे में जीवनयापन एक बड़ी चुनौती होती है। एलआइसी वरिष्ठ नागरिकों के लिए निश्चित पेंशन योजना लाएगी जिसमें 10 वर्ष के लिए 8% प्रतिवर्ष का गारंटीकृत लाभ मिलेगा। 60 वर्ष और उससे ऊपर की आयु वाले वर्ग के व्यक्तियों के लिए यह योजना आय सुरक्षा प्रदान करेगी। इस योजना में मासिक / तिमाही / छमाही या वार्षिक आधार पर लाभ का एक विकल्प दिया जाएगा, लाभार्थी वरिष्ठ पेंशन बीमा योजना 2017 के तहत विकल्पों में से किसी का भी चयन कर सकते हैं।

एनपीएस से जुड़ने की आयु 65 तक हुई
केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय पेंशन योजना से जुड़ने की आयु-सीमा 60 वर्ष से बढ़ाकर 65 वर्ष कर दी है। अब पेंशन खाता से जुड़ना भी 65 वर्ष की आयु तक सुलभ हो गया है, जिसे 70 साल की आयु तक जारी रखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त ऐसे खाताधारक, जो 60 वर्ष से अधिक की आयु में जाकर राष्ट्रीय पेंशन योजना से जुड़ पा रहे हैं, उन्हें भी पेंशन कोष तथा निवेश के वही विकल्प उपलब्ध होंगे, जो इस योजना से 60 वर्ष की आयु से पहले जुड़ चुके लोगों को प्राप्त हैं। 

बुर्जुगों के लिए स्मार्ट कार्ड
मोदी सरकार ने 2017-18 के बजट पिटारे से बुर्जुगों के लिए स्मार्ट कार्ड निकला। आधार आधारित स्मार्ट कार्ड में उनका स्वास्थ्य संबंधी सारा ब्योरा रहता है।

अन्त्योदय कार्यक्रम
अन्त्योदय कार्यक्रम के अन्तर्गत गरीबी की रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों को वरिष्ठ नागरिकों सहित उपभोक्ता और खाद्य मंत्रालय 35 किलो अनाज प्रति परिवार देता है, जिसमें चावल 3 रुपये प्रति किलो और गेहूं 2 प्रति किलो दिया जाता है।

ट्रेन में लोअर बर्थ का कोटा बढ़ाया
मोदी सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए ट्रेनों में लोअर बर्थ का कोटा 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। ये बढ़ोत्तरी सभी श्रेणी के डिब्बों और ट्रेनों में किया गया है, जिससे बुजुर्गों को सफर करने में किसी तरह की परेशानी न हो। यानी अब स्लीपर में कम से कम 6 और थर्ड एवं सेकंड एसी में कम से कम 3 बर्थ वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित रखे जाते हैं। यही नहीं राजधानी और दुरंतो जैसी ट्रेनों में थर्ड एसी में कम से कम 4 बर्थ वरिष्ठ नागरिकों के लिए आरक्षित रखे जाते हैं।

प्रधानमंत्री जन औषधि योजना
इस योजना में केंद्र सरकार द्वारा उच्च गुणमवत्ता वाली जेनरिक (Generic) दवाइयां बाजार मूल्य से कम में उपलब्ध कराई जा रही हैं। ये दवाइयां ब्रांडेड या फार्मा कंपनी की दवाइयों की तुलना में काफी सस्ती लेकिन उतनी ही असरदार होती हैं। ये दवाइयां देशभर में जन औषधि केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस योजना के लागू होने से बुजुर्गों या आम नागरिकों का दवाई पर खर्च 60 से 70 फीसदी से भी ज्यादा कम हो गया है।

स्टेंट प्राइस कंट्रोल
मोदी सरकार ने स्टेंट की कीमतों पर लगाम लगाकर एक तरह से लाखों हृदय रोग से पीड़ित मरीजों, खासकर वरिष्ठ नागरिकों को नया जीवन-दान दे दिया है। मोदी सरकार का ये कदम कितना ऐतिहासिक है इस बात का अंदाजा सिर्फ इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस फैसले से हर साल देश के नागरिकों के 4,500 करोड़ रुपये से ज्यादा बचेंगे। उदाहरण के तौर पर जो स्टेंट पहले 1.21 लाख रुपये में मिलता था, वही स्टेंट अब 30,000 रुपये भी कम कीमत में उपलब्ध है यानी, 85 प्रतिशत की बचत। उसी तरह से 45,000 रुपये से ज्यादा कीमत वाले स्टेंट को मोदी सरकार ने स्टेंट बेचने वाली कंपनियों को लगभग 7 हजार रुपये में बेचने को मजबूर कर दिया है।

घुटना प्रत्यारोपण के खर्च में कमी की
मोदी सरकार ने घुटना प्रत्यारोपण के खर्च में 70 प्रतिशत तक कमी कर दी है। पहले जहां घुटना प्रत्यारोपण में 3 से 4 लाख रुपये खर्च होते थे, वहीं अब इसमें 70 से 80 हजार रुपये ही खर्च होते हैं। जाहिर है कि मोदी सरकार के इस फैसले से देश के बुजुर्गों को बहुत लाभ हो रहा है।

 

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