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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों का शोषण खत्म करने का बीड़ा उठा रखा है

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देश के किसानों, मजदूरों और गरीबों की समस्याओं का समाधान करने और उन्हें सक्षम एवं विकास का मजबूत हिस्सेदार बनाने के लिए 48 सालों से भी अधिक समय तक सत्ता में रही कांग्रेसी सरकारों ने योजनाएं तो बनाईं, लेकिन उनका लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने में कामयाब नहीं हो सकी। कांग्रेसी सरकारों ने योजनाओं को सही तरीके से लागू करने के बजाय एक ही योजना को नये-नये लोक लुभावन नामों से हर बजट पेश कर यह मान लिया कि योजनाएं जमीनी स्तर पर लागू हो गईं। कांग्रेस की सड़ी-गली कार्य संस्कृति का ही परिणाम रहा है कि मौजूदा सरकार को सब कुछ नये सिरे से दुरुस्त करने में जुटना पड़ा। इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी ने खुद किसानों, मजदूरों और गरीबों से संबंधित योजनाओं को निश्चित समय में जमीनी स्तर पर लागू कर देने का बीड़ा उठा रखा है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की दशकों से चली आ रही समस्याओं के समाधान में किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए उनकी हर छोटी से छोटी समस्या का निराकरण किया, जो पहले इस देश में नहीं होता था। 

दशकों से किसानों की समस्या को निश्चित समय में पूरा करने का ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की समस्याओं के समाधान को निश्चित समय में लागू करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए। कांग्रेस की सरकारों में किसानों के लिए पानी, बिजली, खाद आदि से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए योजनाएं तो बनीं, लेकिन उनके क्रियान्वयन की समयसीमा को निश्चित नहीं किया गया, इसका परिणाम यह हुआ कि समस्या हमेशा बनी ही रही। प्रधानमंत्री मोदी ने इसके विपरीत किसानों की पानी, बिजली, बीज, खाद, कृषि से जुड़े अन्य धंधों, बाजार, बीमा आदि से जुड़ी योजनाओं को निश्चित समय में लागू करने निर्णय लिया। प्रधानमंत्री का संकल्प है कि देश के किसानों की आय को 2022 तक दोगुना कर देंगे। किसानों की समस्याओं का समाधान करते हुए, आय दोगुनी करने का संकल्प मोदी सरकार से पहले इस देश में किसी सरकार ने नहीं लिया।

किसानों की आय दोगुनी करने के लिए बजट दोगुना हुआ
प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की आय को दोगुना करने के संकल्प को 2022 तक पूरा करने के लिए केंद्रीय बजट में खेती को दिए जाने वाले धन को भी दोगुना कर दिया है। कांग्रेस की यूपीए सरकार ने जहां 2009 से 2014 के दौरान मात्र 1 लाख 21 हजार 82 करोड़ रुपये दिए थे वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने 2014-18 के बीच, चार सालों में ही, 2 लाख 11 हजार 694 करोड़ रुपये दे दिए। संकल्प को पूरा करने के लिए उठाये गये कदम बताते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।

कृषि कार्य के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी किसानों की समस्याओं को सुलझाने के उपायों को लागू करने के लिए भी धन को रिकॉर्ड मात्रा में उपलब्ध कराया गया है। इससे साफ होता है कि आय को दोगुना करने का संकल्प मजबूत है।

किसानों को आसानी से धन मिलता है
किसान को खेती के लिए जरूरत में धन सही समय पर उपलब्ध कराने का काम किया गया है। बैकों से मिलने वाला ऋण, एक साल के लिए मात्र 7 प्रतिशत की ब्याज दर पर मिल रहा है। छोटे किसानों को भी, बैकों से यह धन मिले, इसके लिए छोटे किसानों के छोटे से छोटे समूहों  को बैकों से ऋण लेना आसान हो गया है। केन्द्रीय बजट से निकला धन किसानों तक बैंकों के माध्यम से पहुंचाने का रास्ता सरल और आसान हो चुका है। 

किसानों के पानी की समस्या खत्म हुई
खेती के लिए, किसानों के पानी की जरूरत को पूरा करने के लिए फाइलों में बंद पड़ी योजनाओं को लागू किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की सोच है कि देश में योजनाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें लागू करने की राजनीतिक इच्छा शक्ति और कर्मठता की कमी रही है,जिसे वह पिछले चार सालों से पूरा कर रहे हैं। हर खेत को पानी पहुंचाने के लिए 50,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ नहरों और बांधों पर काम चल रहा है। इसके साथ पानी का खेती के कामों में उचित उपयोग हो, ड्रिप सिंचाई की तकनीक को चार सालों के अंदर ही 26.87 लाख हेक्टेयर खेतों तक पहुंचा दिया गया है।

किसानों के खेतों की पैदावार की ताकत बढ़ायी गई है
प्रधानमंत्री मोदी की किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने के संकल्प के प्रति कितनी निष्ठा है, इसका अंदाजा मात्र एक ऐतिहासिक योजना से लग जाता है। सॉयल हेल्थ कार्ड खेतों की उपज शक्ति मापने का किसानों के हाथ में जबरदस्त हथियार है। अब तक किसी सरकार ने किसानों के खेतों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में खेतों की ताकत के बारे में कभी नहीं सोचा था। सॉयल हेल्थ कार्ड, किसान को यह बता देता है कि उसके खेत में किस तरह के उर्वरक की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी का इस छोटी सी लेकिन महत्वपूर्ण समस्या के समाधान के बारे में सोचना और योजना को लागू करना,यह साबित करता है कि 2022 तक किसानों की आय दो गुनी होने से कोई नहीं रोक सकता है।

किसानों को खाद किसी समय, बिना लाइन में लगे मिल जाता है
कांग्रेस की सरकारों के दौरान किसानों को खेती के लिए उर्वरक लाने में जान के लाले पड़ जाते थे। सरकारी खाद की दुकानों पर किसानों का अधिक समय लाइन लगाने और खाद लाने में बीत जाता था। इन लाइनों में खाद न मिलने के कारण कई राज्यों में अनेकों बार हिंसक घटनाएं हुईं। लेकिन अब देश में यह बीते दिनों की बातें हो चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने नीम कोटिंग का ऐतिहासिक फैसला लेकर कालाबजारी को पूरी तरह से बंद कर दिया, अब रासायनिक उर्वरकों का उपयोग केवल खेतों में ही हो सकता है, पहले की तरह उद्योगों में  इसका उपयोग होना बंद हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरा ऐतिहासिक कदम यह उठाया कि सभी बंद पड़े उर्वरक संयंत्रों को उत्पादन के लायक बनाकर, देश में उर्वरक उत्पादन को बढ़ा दिया। कांग्रेस की सरकारों के समय से बंद पड़े कई उर्वरक संयंत्रों को पुर्नजीवित किया जा रहा है।

किसानों ने योजनाओं का लाभ उठाते हुए अनाजों का रिकॉर्ड उत्पादन किया
प्रधानमंत्री मोदी की योजनाएं, किसानों तक सही समय पर पहुंच रही हैं इसका अंदाजा इस तथ्य से लगता है कि पिछले चार साल में देश में किसानों ने अपने खेतों से अनाजों का रिकॉर्ड उत्पादन किया है। इस रिकॉर्ड उत्पादन से जहां किसानों की आय बढ़ी है, वहीं देश अनाजों के मामले में आत्मनिर्भर होने के साथ ही साथ, विश्व के दूसरे देशों को निर्यात करने वाला भी बन गया है।

किसानों को लगभग मुफ्त में फसल बीमा का लाभ मिला है
आज किसानों को खरीफ फसलों के लिए 2 प्रतिशत और रबी फसलों के लिए 1.5 प्रतिशत के प्रीमियम पर बीमा मिल रहा है, शेष 98 प्रतिशत प्रीमियम राज्य और केन्द्र सरकारें देती हैं। फसल बीमा से खेती में अचानक हुए किसी भी तरह के नुकसान की भरपाई बैंक कर रहे हैं। फसल बीमा से किसानों को खेती की अनिश्चितता से होने वाली चिंता खत्म हुई है। इससे छोटे -छोटे किसान भी बड़ी तेजी से फसल बीमा कराके चिंताओं से मुक्त हो रहे हैं।

किसानों का उपज लेने के लिए, बाजार किसानों के घर तक पहुंचा
देश में सभी अनाज और फल-सब्जी मंडियों के कानून में संशोधन करके, इंटरनेट के माध्यम से जोड़ा जा रहा है। पूरे देश की अनाज और फल की मंडियों के एक हो जाने से किसी भी गांव का किसान देश में उपज कहीं भी बेच सकता है। 2022 तक यह पूरी तरह से व्यवस्थित होकर एक हो जाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब तक 585 मंडियों को e-NAM से जोड़ा जा चुका है जिस पर 87.5 लाख किसान अपना उपज बेच रहे हैं। अब तक e-NAM पर 164.5 लाख टन कृषि उपज बेचा जा चुका है, जिससे किसानों को 41, 591 करोड़ रुपये मिले हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने देश के किसानों की आय को दोगुना करने और उन्हे आत्मनिर्भर करने का जो संकल्प लिया है, उससे किसान उस शोषण के तंत्र से स्वतः ही मुक्त हो जायेंगे, जिसे पिछले 48 सालों में कांग्रेस की सरकारों ने तैयार किया था। किसानों की समस्याओं को लेकर देश में होने वाली राजनीति समस्याओं का समाधान नहीं चाहती है, बल्कि उसके बल पर देश की सत्ता पर काबिज होने का प्रयास करती है, जैसा पिछले 48 सालों में कांग्रेस और उसके जैसी सोच रखने वाले क्षेत्रीय दल करते रहे हैं।

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