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Indian Express Exclusive: देश को कई स्तंभों पर विकसित करना चाहता हूं- प्रधानमंत्री मोदी

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लोकसभा चुनाव प्रचार की गहमागहमी के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी मुद्दों, सरकार के कामकाज, अर्थव्यवस्था की स्थिति, एयर स्ट्राइक, विपक्ष के आरोपों पर जवाब देने समेत देश के राजनीतिक परिदृश्य पर इंडियन एक्सप्रेस के रवीश तिवारी और राज कमल झा से खास बातचीत की। आप भी पढ़िए-

11 दिसंबर 2018 का दिन मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हार के चलते आपके और आपकी पार्टी के लिए नाकामयाबी वाला दिन रहा। अब 11 मई है। इस बीच आपने करीब 200 जनसभाएं कीं। आपको क्या लग रहा है?

पीएम मोदी: लुटियंस क्लब, मीडिया, खान मार्केट गैंग हर कोई हमें हराने के लिए उत्सुक था। अनुमान लगाए जा रहे थे कि तीनों राज्यों में मिलाकर हमें सिर्फ 40 सीटें मिल पाएंगी। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हम 15 साल से सरकार में थे। वहां थोड़ी सत्ता विरोधी लहर (एंटी इनकमबेंसी) स्वाभाविक थी। वह (कांग्रेस) न तो राजस्थान में और न ही मध्य प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बना पाए। मध्य प्रदेश में हमें उनसे ज्यादा वोट मिले। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए ये नतीजे एक तरह से आत्मविश्वास बढ़ाने वाले साबित हुए। जनता ने सोचा कि उन्होंने (कांग्रेस) अपने तरीके ठीक किए होंगे, लेकिन पुरानी आदतें चंद पलों में लौट आईं। नोटों के बंडल फिर से निकलने लगे, पूरे देश में यह खबर फैल गई।

खोजी पत्रकारिता करने वाले द इंडियन एक्सप्रेस के लिए भले ही यह भ्रष्टाचार नहीं होगा। भोपाल में गरीब बच्चों का पेट भरने के लिए जो पैसे थे, वे छीन लिए गए। मैं द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित होने वाली खबरों को बेहद गंभीरता से लेता हूं। इसने खोजी पत्रकारिता की दुनिया में अपना नाम बनाया है। यह दूसरों से अभी भी आगे है।

आपका अखबार हमेशा पिछड़े वर्ग के खिलाफ अपराधों से जुड़े मुद्दे उठाने में अग्रणी रहा है, लेकिन राजस्थान के अलवर में हुए वीभत्स रेप पर लगातार फॉलोअप को आपने छोड़ दिया, जिसके लिए आप जाने जाते हैं। आपका अखबार अभिव्यक्ति की आजादी के लिए हमेशा से आगे खड़ा रहा है, लेकिन जब मध्य प्रदेश में मोदी-मोदी के नारे लगाने पर लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया तो यह खबर आपके अखबार में फ्रंट पेज पर नहीं दिखी। किसानों की कर्जमाफी, बेरोजगार युवकों के लिए बेरोजगारी भत्ता आदि का वादा किया था, लेकिन कांग्रेस धन इकट्ठा करने में लगी रही। ऐसे में हमें अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए ज्यादा कुछ करने की जरूरत नहीं है।

आप लगातार प्रचार अभियान में जुटे रहे हैं, पिछले पांच साल से विपक्ष को निशाने पर ले रहे हैं। इसका अर्थ है कि आप भी उनके निशाने पर हैं। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बातचीत और गिव-एंड-टेक (लेन-देन) चलते रहते हैं। आपको नहीं लगता कि लगातार प्रचार से इनकी संभावनाएं कम हुई हैं?

पीएम मोदी: अच्छा विषय है, लेकिन इसमें एक बात की कमी है। जो विज्ञान भवन और कैबिनेट के कमरों से सरकार चलाते हैं, उनके लिए यह आपत्तिजनक हो सकता है। उनसे सवाल पूछे जाने चाहिए। अगर प्रधानमंत्री देशभर की यात्रा नहीं करेगा तो उसे कैसे पता चलेगा कि क्या हो रहा है? इस बात को भी संज्ञान में लिया जाना चाहिए कि यह प्रधानमंत्री कभी छुट्टी के दिन यात्रा पर नहीं जाता। अगर मैं पानी से जुड़े किसी कार्यक्रम में जाऊंगा तो मैं पानी के अलावा किसी पर नहीं बोलूंगा। अगर यह बिजली से जुड़ा कार्यक्रम है तो मैं बिजली पर ही बात करूंगा। मैं कभी भी विकास को छोड़कर किसी मुद्दे पर नहीं बोलता।

चुनाव को छोड़कर आप मुझे शायद ही कभी किसी पार्टी और उसके नेताओं के खिलाफ बात करते हुए सुनेंगे। जब तक विपक्ष की तरफ से उस दिन कोई ऐसा बयान न दिया जाए, जिस पर मेरी प्रतिक्रिया की जरूरत हो। आप गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दिनों से मेरे भाषणों में यह बात देख सकते हैं। यह मेरा संकल्प है, संसद में भी।

मैं आपको दो घटनाएं बताऊंगा जिन पर मुझे लगता है द इंडियन एक्सप्रेस सही परिप्रेक्ष्य में लिखेगा। आईएनएस (विराट) का मुद्दा कहां से आया? यह कोई नई बात नहीं थी, जिसकी जानकारी मुझे नहीं हो, यह मुद्दा आया क्यों? जब एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष कहते हैं कि सेना मोदी की व्यक्तिगत जागीर नहीं है। आप सभी से यह छूट गया, तब मुझे कहना पड़ा कि इसमें व्यक्तिगत जैसा क्या है? राजीव गांधी मेरा मुद्दा नहीं है। अगर आप उनकी मदद करना चाहते हैं तो आप राजीव गांधी को सुर्खियां देने के लिए स्वतंत्र हैं। यह आपकी इच्छा है। कहते हैं बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी।

दूसरी बार जब मैं झारखंड में पढ़ रहा था, वहां राहुल गांधी ने कहा था कि वह (राहुल गांधी) नरेंद्र मोदी की छवि बिगाड़ना चाहते हैं। उद्देश्य यह है कि किसी भी तरह से मेरी छवि को नुकसान पहुंचाया जाए।

मोदी की छवि दिल्ली के खान मार्केट गैंग या लुटियंस दिल्ली ने नहीं बनाई है। 45 साल की तपस्या ने मोदी की छवि बनाई है। अच्छी है या बुरी है। आप इसे बिगाड़ नहीं सकते। लेकिन लुटियंस और खान मार्केट गैंग ने पूर्व प्रधानमंत्री के लिए मिस्टर क्लीन, मिस्टर क्लीन की छवि बनाई थी, इसका अंत कैसे होगा? मेरी छवि? यह मेरा जवाब था। खोजबीन करना और लोगों को बताना आपका काम है।

सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, ममता बनर्जी और चंद्रबाबू नायडू के साथ भी प्रचार अब बेहद व्यक्तिगत हो गया है। आश्चर्य होता है कि आप लोग चुनाव के बाद राष्ट्रीय मुद्दों पर आप मिलकर काम कर पाएंगे?

पीएम मोदी: मैंने एक ही समय में चुनाव (एक देश, एक चुनाव) के लिए कोशिश की है। मैंने विपक्ष के सदस्यों से बातचीत की। वे इस पर कुछ करने को तैयार हैं, लेकिन उनकी पार्टी अलग स्टैंड ले लेती है। व्यक्तिगत तौर पर विपक्ष के नेता मानते हैं कि इतना समय देने वाला प्रधानमंत्री उन्होंने नहीं देखा, लेकिन वे सार्वजनिक तौर पर ऐसी बात नहीं कहते। जब संसद काम करती है तो मैं हर दिन पार्टी लाइन से हटकर सभी दलों के औसतन 40 से 45 सांसदों से मुलाकात करता हूं। लोकतंत्र में संवाद बेहद जरूरी है।

जब साइक्लोन आया तो मैंने ममता जी और नवीन जी को तुरंत फोन किया। मैंने आपदा प्रबंधन पर बैठक के लिए अपने एक चुनावी कार्यक्रम को भी थोड़ी देर से शुरू किया और आपदा प्रबंधन टीम के साथ एक बैठक की। जब साइक्लोन समुद्री तट से 1000 किमी दूर था, तभी से मैं हर दो घंटे में जानकारी ले रहा था। केरल के मंदिर में पटाखे में विस्फोट के चलते जब 18 लोग मारे गए थे (10 अप्रैल 2016 को जब राज्य में कांग्रेस की सरकार थी) तब भी मैंने वहां जाकर सबसे अनुभवी डॉक्टरों से मुलाकात की थी। यह सच है, लेकिन आपको मुझे अच्छा बताने की जरूरत नहीं है।

हमने ऐसा फोटो मुश्किल से कभी देखा होगा जिसमें आप और विपक्ष के प्रमुख नेता एक साथ खड़े हों और सभी के चेहरे पर मुस्कुराहट हो

पीएम मोदी: मैं इस तरह की चीजों को मैनेज नहीं करता। वैसे मैं मजाकिया व्यक्ति हूं, मेरी कैबिनेट बैठकें आमतौर पर हल्के-फुल्के पलों से भरपूर होती है। लेकिन इसे राजनीतिक रंग दिया जा चुका है।

लेकिन इमेज की ताकत क्या होती है, यह आपसे बेहतर कोई नेता नहीं जानता।

पीएम मोदी: (जब मैं काम कर रहा होता हूं) मैं गतिविधियों पर केंद्रित होने में भरोसा करता हूं, मैं पूरी तरह उसमें शामिल हो जाता हूं। और जब मैं फ्री हो जाता हूं तो वास्तव में खुद को फ्री रखता हूं।

माना जाता है कि नरेंद्र मोदी हमेशा से चीजों को नियंत्रण में रखना चाहते हैं। सवाल यह है कि क्या आप मतभेदों को खत्म करते हैं? क्या आपने कभी कैबिनेट या पार्टी की बैठकों में बातों को खारिज किया है?

पीएम मोदी: मैं आपको गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के दौरान का उदाहरण दे सकता हूं। मैं 8-9 विधायकों का एक समूह बनाकर एक मंत्री को उनके संपर्क में रहने के लिए कहता था। मंगलवार का दिन विधायकों के लिए हुआ करता था, इस दिन विधायक, सांसद, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद मुझसे या सरकारी पदाधिकारियों से बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत मिल सकते थे। मंत्री अपने समूह के विधायकों से मिलते थे और उनसे जमीनी स्थितियों की जानकारी लेते थे। बुधवार को कैबिनेट बैठक हुआ करती थी। हर कैबिनेट बैठक से पहले करीब 45 मिनट का एक शून्य काल होता था जहां ये मंत्री मंगलवार को मिले फीडबैक पर मंथन करते थे और मेरे मीटिंग में जाने से पहले खुलकर अपने विचार रखते थे।

मीटिंग के पहले 15 मिनट में मुझे सभी मुद्दों पर संक्षेप में जानकारी दी जाती थी। मैं कहा करता था कि मुझे यह मत बताइए कि फीडबैक कहां से मिल रहा है ताकि किसी भी मुद्दे पर किसी तरह के पूर्वाग्रह से बचा जा सके। मैंने अपने मंत्रालयों और सीएजी (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) के बीच मतभेद वाले मुद्दों पर खुली बातचीत के लिए वर्कशॉप भी करवाई। मैंने अपनी टीम को प्रशिक्षण दिलवाया और उन्होंने खुद में ही सुधार भी किया। क्या यह लोकतंत्र नहीं है?

इसी तरह विधानसभा में सवाल-जवाब के दौरान विपक्ष के नेता सरकार की आलोचना करेंगे और सरकार के लोग उन्हें जवाब देने की कोशिश करेंगे।

विधानसभाओं का मतलब अब एग्जिक्यूटिव सिस्टम पर दबाव बनाना होता है। इसके बजाए वे एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने वाली राजनीति में लग गए हैं, जो अगले दिन अखबारों में प्रकाशित होता है। मेरा मानना है कि विधानसभाएं इन सबके लिए नहीं होती हैं।

इसी तरह संसद में आपको मनमोहन सिंह सरकार के दौरान कैबिनेट बैठकों का औसत समय निकलना चाहिए। यह औसत करीब 20 मिनट था। मेरी कैबिनेट बैठकों का औसत समय तीन घंटे होता है। आपको क्या लगता है उस समय क्या होता है? कैबिनेट के कई ऐसे प्रस्ताव रहे हैं जो वापस हो गए। कई प्रस्तावों को मंत्रियों की अस्थाई समितियों को भेजा गए। इसके अतिरिक्त मैंने पूरे मंत्रिपरिषद के साथ बैठकें कीं जहां सभी को बोलने के लिए आमंत्रित किया जाता है। प्रेजेंटेशन बनते हैं लेकिन वो मीडिया के लिए नहीं होते।

लेकिन हमें खबर के रूप में क्या मिलता है?

पीएम मोदी: यह आपकी समस्या है। मैं अलोकतांत्रिक नहीं हूं। मैंने दिल्ली में बातचीत के लिए करीब 250 लोगों से मुलाकात की है, सभी के साथ लगभग तीन घंटे तक मंथन चला। मेरा मानना है कि सरकार के साथ-साथ मीडिया के लोगों की सोच भी पारदर्शी होनी चाहिए। लोकतंत्र का अर्थ सिर्फ खबरों का प्रकाशित हो जाना नहीं है।

282 सीटें होने के बावजूद आपकी सरकार के लिए क्या संभव नहीं था?

पीएम मोदी: (मुस्कुराते हुए कहते हैं) द इंडियन एक्सप्रेस का उद्देश्य अब मोदी की आलोचना है।

हमने यही सवाल बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से भी पूछा। अटल बिहारी वाजपेयी के पास संख्याबल नहीं था, उनके सामने गठबंधन साथियों की मांगें, संघ की अधीरता थी। आप इन तीनों से आजाद हैं। उनकी उपलब्धियों में स्वर्णिम चतुर्भुज, विनिवेश, बिजली व्यवस्था में सुधार, पोखरण थे, जिन्हें 20 सालों बाद भी याद रखा जाएगा। आपके पास ऐसा क्या है जिसे याद रखा जाए?

पीएम मोदी: मैं इस सवाल का जवाब नहीं देना चाहूंगा क्योंकि यह नाइंसाफी होगी। दुर्भाग्य से हमने सरकारों को सिर्फ एक या दो बातों से पहचानने की कोशिश की है, न कि उसके समग्र कामकाज को देखकर। इससे सरकारों में लालच की स्थिति आ जाती है और वे एक या दो कामों पर केंद्रित हो जाते हैं जो याद रखे जाएं। मैं देश को कई स्तंभों पर विकसित करना चाहता हूं। यदि कोई कहे कि स्वच्छता मेरी विरासत है तो मैं कहूंगा मैंने शौचालय बनवाए हैं। कोई कहे कि हेल्थकेयर मेरी उपलब्धि है तो मैं आपको आयुष्मान भारत याद दिलाऊंगा।

ठीक अटल जी की सरकार की तरह हमने अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को ऊंचाई के रास्ते पर रखा और भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती अर्थव्यवस्था बनाया। हमारे सबसे बड़े आलोचक भी मानते हैं हमारी सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बहुत अच्छा काम किया है। हमने ग्रामीण क्षेत्रों में पिछली सरकार की तुलना में दुगुनी रफ्तार से सड़क निर्माण किया। हाइवे कंस्ट्रक्शन के मामले में भी स्थिति यही रही। हाइवे कंस्ट्रक्शन के मामले में भारत आज दुनिया में सबसे तेज है।

विपक्ष ने अटल जी की सरकार को रक्षा घोटाले के मनगढ़ंत आरोपों से बदनाम करने की कोशिश की, लेकिन सभी आरोप बाद में गलत पाए गए। अब वे यही काम हमारे साथ करना चाहते हैं। एक बार फिर सच हमारे साथ है।

कांग्रेस और उसके साथियों ने बेरोजगारी और नौकरियों की कमी को लेकर आंकड़ों से परे जाकर माहौल बनाने की कोशिश की। अटल जी ने एक कार्यकाल में यूपीए के दो कार्यकालों की तुलना में काफी ज्यादा संख्या में नौकरियों के अवसर पैदा किए थे। हमारी सरकार के खिलाफ भी ऐसा ही माहौल बनाने की कोशिश हो रही है।

अगर आप मेरी सरकार को एक या दो मुद्दों तक सीमित रखना चाहते हैं तो मोदी के लिए नाइंसाफी होगी। वे अपने पूरे कार्यकाल को लेकर मनरेगा से ऊपर बात नहीं करते। मैं उन्हें एक ही चीज में फंसाकर नहीं रखना चाहता। मैं 13 साल तक गुजरात में रहा। इस दौरान आप कोई एक काम नहीं बता सकते। आपको लगभग हर क्षेत्र में किए गए काफी काम मिलेंगे। सरकार को कैसे चलाना चाहिए, इसके लिए मैंने एक मॉडल बनाने की कोशिश की।

नोटबंदी का फैसला किस तरह का था? आप पाला बदलते रहे।

पीएम मोदी: यहां पाला बदलने का कोई सवाल ही नहीं है। क्या हमने पहले दिन से नोटबंदी को भ्रष्टाचार के खिलाफ और काले धन को वापस लाने के लिए उठाया गया कदम नहीं बताया है? काले धन के खिलाफ अपनी पहल के जरिये क्या हम 1.30 लाख करोड़ रुपए की अघोषित आय को टैक्स के दायरे में नहीं लाए? क्या 3.38 लाख फर्जी कंपनियों की पहचान नहीं हुई और उनका रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं किया गया? क्या उनके डायरेक्टर्स को अयोग्य घोषित नहीं किया? मैं हमेशा से कहता रहा हूं कि अब हर रुपये के साथ कोई नाम जुड़ा है, बेनामी नहीं है, यह पहले नहीं था।

नोटबंदी टैक्स चोरी रोकने और डिजिटल पेमेंट के जरिए साफ-सुथरी अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने का भी अच्छा माध्यम बनी। इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या 2013-14 में 3.8 करोड़ थी जो 2017-18 में बढ़कर 6.8 करोड़ हो गई है। टैक्स बेस में 80 फीसदी तक की ग्रोथ हुई है। डिजिटल पेमेंट में हुई बढ़ोतरी से आंकड़ों और जीने के तरीके दोनों में सुधार हुआ है।

बैंक्रप्सी कोड (दिवालियापन से जुड़े कानून), जीएसटी और संसाधनों के आवंटन में महत्वपूर्ण प्रगति देखने को मिली। अब आगे क्या?

पीएम मोदी: आप जीएसटी, इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आईबीसी) और संसाधनों के आवंटन में एक समान बात नोटिस करेंगेः हम मनमानी वाली व्यवस्था से नियम आधारित व्यवस्था की तरफ बढ़ रहे हैं जो हर किसी को अच्छे काम का अवसर देती है। हमने पारदर्शिता बढ़ाई, टैक्सपेयर्स के लिए जीएसटी लाने के साथ इंस्पेक्टर राज को खत्म किया। जीएसटी का मकसद भी लोगों के लिए टैक्स दरों को घटाना है। आईबीसी से सुनिश्चित हुआ कि कोई कितना भी बड़ा या छोटा हो, वह अपनी जवाबदेही से नहीं भाग सकता और बैंकों में रखी लोगों की गाढ़ी कमाई के प्रति जवाबदेही को नजरअंदाज नहीं कर सकता। आपने पूछा- इनके आगे अब क्या, इस पर मैं आपको भरोसा दिला सकता हूं कि अभी और सुधार होंगे। व्यापक स्तर पर और दूरगामी सुधार होंगे।

सामाजिक मुद्दों पर बात करते हैं। राष्ट्रवाद को चुनावी बातचीत का मुद्दा बनाना आपका अधिकार है। लेकिन सवाल राष्ट्रवाद की प्रकृति का है। समाज का एक वर्ग और अल्पसंख्यक राष्ट्रवाद को पाकिस्तान और कश्मीर के चश्मे से देखता है। इन चुनावों की कवरेज करने के दौरान हमारे सहकर्मी झुंझुनूं से बिना तक के गांवों में गए तो लोगों ने उनसे कहा कि उन्हें आपकी विदेश नीति पसंद है और उन्हें इससे इज्जत मिली। हमने इससे पहले किसी भी चुनाव प्रचार में यह बात नहीं सुनी। लेकिन एक राष्ट्रवाद वो है जो आलोचनाओं पर सवाल करता है। कई अर्थशास्त्रियों ने नोटबंदी पर सवाल उठाए लेकिन आपने सिर्फ यही कहा कि नोटबंदी के खिलाफ वही लोग हैं जो या तो भ्रष्ट हैं या उन्होंने कांग्रेस से सुपारी ली है।

पीएम मोदी: पंडित नेहरू ने सरदार सरोवर बांध का शिलान्यास किया था। हाल ही में मैंने उसका उद्घाटन किया। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 6 हजार करोड़ रुपए आंकी गई थी, लेकिन यह करीब 1 लाख करोड़ रुपए में पूरा हुआ। अगर मैं कहूं कि देशद्रोहियों ने देश को बर्बाद किया है, तो इससे आपको परेशानी क्यों?

विदेशी संपत्ति की जानकारी सरकार को देने के लिए कानून है। यह मैंने नहीं बनाया। यह इसी खानदान द्वारा बनाया गया था। मैंने सिर्फ एक अकाउंट मांगा, जो नहीं दिया गया। अपने आप 20 हजार एनजीओ बंद हो गए। मैं कहूंगा कि यह देशद्रोह है। आपको क्यों बुरा लगता है जी।

नोटबंदी की आर्थिक आधार पर आलोचना करने वालों का मैंने कभी भी विरोध नहीं किया। आप मेरा 20 साल पुराना भाषण उठाकर भी देख सकते हैं, तब मैं मुख्यमंत्री भी नहीं था। बीजेपी के एक यूथ विंग के कार्यक्रम के दौरान मैंने कहा था कि भारत माता की जय कहना व्यर्थ है अगर आप उसी भारत माता पर पान-गुटखा थूकते हैं। यही मेरा राष्ट्रवाद और देशप्रेम है। आपके दिमाग में पाकिस्तान भरा पड़ा है।

क्या खोजी पत्रकारिता करने वाले द इंडियन एक्सप्रेस ने लिखा कि जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगने के बाद 100 फीसदी इलेक्ट्रिफिकेशन किया जा चुका है। क्या यह खबर नहीं है? जम्मू-कश्मीर में चुनाव के दौरान एक भी हिंसा की घटना नहीं हुई। पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव के दौरान ही हिंसा में 100 से ज्यादा लोग मारे गए थे। वहां बिना हिंसा के कोई चुनाव ही नहीं होता। आपको मेरी देशभक्ति जम्मू-कश्मीर में नहीं दिखती क्या? तनाव से जूझ रहे पूर्वोत्तर में शांति है। क्या हमने वहां राष्ट्रवाद का भाव पैदा नहीं किया? उन्हें मुख्यधारा में लेकर आए।

निसंदेह भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन क्या यह देशद्रोह है?

पीएम मोदी: हमने कुछ चीजों पर सरकारी होने का टैग लगा देते हैं। हमें यह मानसिकता बदलनी पड़ेगी। यही मेरी देशभक्ति का सुर है। आप देख सकते हैं कि लोगों ने सरकारी बसों की सीटों को कैसे नुकसान पहुंचाया है। क्या यह राष्ट्रवाद है? हम ऐसा क्यों करते हैं? हम अपने पुराने स्कूटर को चार बार साफ करते हैं, लेकिन हम सरकारी बसों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाते हैं। यह किस तरह का राष्ट्रवाद है? यह सब देश का है, मतलब तुम्हारा है। यही भाव जगाना चाहिए कि नहीं? यही मेरी देशभक्ति है।

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