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अब पराली भी इनकम का एक स्रोत बन सकती है- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि गांव की अर्थव्यवस्था को ताकतवर बनाना, किसानों की आय बढ़ाना, पेट्रोल-डीजल का विकल्प तलाशना और पर्यावरण को सुरक्षित करना, उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। दिल्ली के विज्ञान भवन में विश्व बायोफ्यूल दिवस पर आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उन्होंने कहा कि किसानों का विज्ञान भवन में आना अपने आप में एक बहुत बड़ा मैसेज है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बायोफ्यूल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने जो राष्ट्रीय नीति बनाई और उसको लेकर जो प्रयास किए जा रहे हैं, उससे देश के किसानों की न सिर्फ आमदनी बढ़ेगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार का अवसर भी पैदा होगा। बायोफ्यूल से देश का धन भी बचेगा और पर्यावरण के लिए भी वरदान साबित होगा।

अब किसानों की फसल का एक भी दाना व्यर्थ नहीं जाएगा- प्रधानमंत्री मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि बायोफ्यूल को लेकर जो राष्ट्रीय नीति बनी है, वह सरकार के उस व्यापक विजन का हिस्सा है, जिससे स्वच्छता, स्वास्थ्य, गांव-गरीब और किसानों की समृद्धि का रास्ता और मजबूत होने वाला है। उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत 2022 तक 10 प्रतिशत और 2030 तक 20 प्रतिशत इथेनॉल को पेट्रोल के साथ मिक्स करने की क्षमता विकसित करना है। इससे गन्ना किसानों को और विकल्प मिलेगा और फायदा भी होगा। यही नहीं अब अगर मौसम के चलते अनाज खराब भी हो जाएगा तो उसका एक भी दाना बर्बाद नहीं होने दिए जाएगा और उसका उपयोग इथेनॉल बनाने के लिए किया जा सकता है। यही नहीं अब घास और बांस से भी इथेनॉल बनाया जा रहा है। सबसे बड़ी बात है कि जो किसान पराली को नासमझी में जला देते हैं, उससे भी इथेनॉल बनाने की संभावनाएं विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

4 वर्षों में इथेनॉल से 4000 करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा की बचत
प्रधानमंत्री ने कहा कि गन्ने से इथेनॉल बनाने का काम अटल जी की सरकार ने शुरू किया था। लेकिन उसकी बाद आई सरकार ने उसपर ध्यान नहीं दिया। 2014 से इसका एक नया रोडमैप बनाकर काम हो रहा है। आज देश के 25 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में इथेनॉल ब्लेंडिंग का काम तेजी से चल रहा है। पिछले 4 वर्षों में देश में इथेनॉल का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। इससे न केवल किसानों को लाभ पहुंचा है, बल्कि इसे पेट्रोल में मिलाने से 4 साल में लगभग 4000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बजत हुई है। अगले 4 वर्षों में इससे 12 हजार करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत का लक्ष्य है। यही नहीं अगले 4 वर्षों में इथेनॉल बनाने से 20 हजार करोड़ जुटाने का भी अनुमान है। इससे किसानों की आय तो बढ़ेगी ही, पर्यावरण संरक्षण में भी सहायता मिलेगी।

गोबरधन, वनधन, जनधन से गरीबों,किसानों और आदिवासियों के जीवन में बदलाव
प्रधानमंत्री ने कहा है कि सरकार बायोमास को बायोफ्यूल में बदलने के लिए बहुत बड़े स्तर पर निवेश कर रही है। देशभर में 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 12 आधुनिक रिफाइनरी बनाने की योजना है। इसके कारण करीब 1.5 लाख युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा। यही नहीं गोबरधन योजना के तहत देश के हर जिले में बायोगैस प्लांट लगाए जाने हैं, जिनमें से 700 का निर्माण जारी है। उन्होंने कहा कि गोबरधन, वनधन, जनधन योजनाओं से गरीबों, किसानों और आदिवासियों के जीवन में आर्थिक बदलाव सुनिश्चित करने का प्रयास हो रहा है। सरकार किसी चीज को बर्बाद नहीं होने देना चाहती और हर चीज के उचित उपयोग पर जोर दे रही है। अब कचड़े से सीएनजी यानि बायो सीएनजी बनाने का काम भी तेज चल रहा है, ताकि विदेशी आयात पर से निर्भरता को कम किया जा सके। देश में अब तक पौने दो सौ से अधिक बायो सीएनजी प्लांट लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अब वो दिन दूर नहीं जब शहरों के साथ-साथ गांवों में भी गाड़ियां सीएनजी से चलने लगेंगी।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन की जमकर तारीफ की, जिन्होंने हाल ही में मोदी सरकार के द्वारा किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए चलाई जा रही योजनाओं और उससे इस क्षेत्र में आए बदलाव की जमाकर सराहना की है।

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