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प्रधानमंत्री के विदेश दौरे से जुड़ी ऐसी पहल, जिससे कृषि विकास की खुल रही नई राह

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विदेश दौरा अक्सर सुर्खियों में रहता है। उनका आत्मविश्वास भरा चलने का अंदाज हो, कपड़े पहनने की विशेष शैली हो या फिर विदेशी नेताओं के बीच उनकी लोकप्रियता, सबकुछ मीडिया की नजरों में रहता है। लेकिन उनके विदेश दौरों में कुछ ऐसी भी चीजें होती हैं जिनकी उतनी चर्चा नहीं होती है, पर होती बहुत महत्व की हैं। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी न केवल किसानों के कल्याण के लिए तत्पर हैं, बल्कि हमेशा से कृषि में नई तकनीक, नये शोध और वैज्ञानिक दक्षता को बढ़ावा देने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। उन्हें इसको देखने-समझने का जब भी कोई अवसर मिलता है, वे इसे गंवाते नहीं हैं और वे विदेशी दौरों में व्यस्तताओं के बीच भी इसके लिए समय निकाल लेते हैं। वर्तमान में प्रधानमंत्री मोदी ASEAN शिखर सम्मेलन के लिए फिलीपींस में हैं वहां भी उन्होंने कुछ ऐसा किया जो किसानों के कल्याण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

फिलीपींस : भारत में खुलेगा IRR सेंटर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 अक्टूबर को फिलीपींस के लॉस बनोस के इंटरनेशनल राइस रिसर्च इंस्टीट्यूट (IRRI) का दौरा किया। यहां पीएम मोदी ने ‘श्री नरेंद्र मोदी रेजिलियंट राइस फील्ड लैबोरेटरी’ (चावल प्रयोगशाला) का उद्घाटन किया और चावल उत्पादन के क्षेत्र में हो रहे अनुसंधानों की बारीकियों को समझा। उन्होंने यहां कुदाल भी चलाया जो मीडिया की सुर्खियां बनीं, लेकिन इस दौरे में उन्होंने जो एक बड़ा काम किया उसकी विशेष चर्चा नहीं हुई। गौरतलब है कि जल्द ही आईआरआर का एक सेंटर वाराणसी में भी खुलेगा। यह फिलीपींस से बाहर IRRI का पहला रिसर्च सेंटर होगा। इससे उत्‍पादन बढ़ाने, उत्‍पादन पर होने वाली लागत को कम करने, मूल्‍य संवर्धन, विवधता और किसानों के कौशल को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी, जिससे अंतत: किसानों की आय बढ़ेगी।

ऑस्ट्रेलिया: एग्रो रोबोट टेक्नोलॉजी से बढ़ेगी खेती
नवंबर, 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गए तो उन्होंने सबसे पहले क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (क्यूयूटी) का दौरा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने यहां एग्रो रोबोट देखा और कृषि के क्षेत्र में चल रहे शोध की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि एग्रो रोबोट कम वजन की एक मशीन है जो कि बड़े ट्रैक्टर का काम कर सकता है। इस तकनीक के भारत लाने पर भी सहमति बनी है। प्रधानमंत्री ने यहां विजिटर्स बुक पर लिखा, ”शोध विकास की जननी है। मानव और शोध की विकास यात्रा के बीच संबंध बरकरार है। कृषि में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का प्रभाव कृषकों और कृषि क्षेत्र के लिए लाभदायी साबित होगा।”

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कनाडा: भारत में कोल्ड स्टोरेज की चेन
2016 में जब प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के दौरे पर गए तो उन्होंने भारत में कोल्ड स्टोरेज चेन को मजबूत बनाने के लिए समझौते किए और भारत से टमाटर, अंगूर वगैरह का आयात बढ़ाने पर भी बल दिया। दरअसल कोल्ड स्टोरेज के मामले में कनाडा की विशेषज्ञता है और प्रधानमंत्री ने कनाडा को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया है। इससे देश के किसानों को उनकी फसलों को अधिक दिनों तक तरोताजा रखने में मदद मिल रही है।

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इजरायल: खारे पानी का वाटर प्लांट 
प्रधानमंत्री ने अपने विदेशी दौरों के दौरान कई बार ऐसे स्थानों और इंस्ट्रीच्यूशन्स के दौरे किए हैं जो तकनीक और इनोवेशन्स से जुड़े हैं। 4 से 6 जुलाई, 2017 के बीच प्रधानमंत्री मोदी इजरायल की ऐतिहासिक यात्रा पर गए तो दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा मिली। पीएम मोदी ने पीएम नेतन्याहू के साथ समुद्र के खारे पानी को तत्काल फिल्टर कर पीने लायक बनाने का चलित संयंत्र देखा। दोनों नेताओं ने इस तकनीक से साफ पानी भी पिया। इस पानी का उपयोग सिंचाई में भी भरपूर मात्रा में किया जा रहा है। भारत के परिप्रेक्ष्य में भी ये तकनीक लाभदायक है और इसे समुद्री क्षेत्र में या फिर जहां खारा पानी है, उन इलाकों में इसके प्लांट लगाए जाने पर बात आगे बढ़ी है।

खारे पानी को मीठा बनाने का फ़ॉर्म्युला

इजरायल: खेती के आधुनिक तरीके
इजरायल का मौसम खेती के लायक नहीं है फिर भी आधुनिक तरीकों से उसने खेती को मुमकिन बनाया है। इजरायल ने ऐसी तकनीक विकसित की है जिससे बहुत ही कम पानी में सब्जियां और फल उगाए जाते हैं। उसने ऐसे आलू को विकसित किया है जो काफी गर्म मौसम में भी उग सकता है और खारे पानी से भी उसकी सिंचाई हो सकती है। पीएम मोदी इजरायल से खेती के आधुनिक तरीकों को समझा और इसे भारत में भी लागू करने के लिए कदम उठा रहे हैं।

स्प्रिंकलर सिंचाई की तकनीक भारत में लेकर आए
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए स्प्रिंकलर तकनीक को बढ़ावा दिया जो अति आधुनिक तकनीक है। ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप की तकनीक’ से आज गुजरात का बहुत बड़ा रेगिस्तानी क्षेत्र सिंचित हो रहा है और खेती के विकास में योगदान दे रहा है। 2001 तक ड्रिप तकनीक सिर्फ 10,000 हेक्टेयर भूमि पर ही उपलब्ध थी, लेकिन आज सात लाख हेक्टेयर भूमि इससे सिंचित हैं।

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पेय उत्पादों में फलों के जूस मिलाने के निर्देश
नेट हाउस, ग्रीन हाउस, पॉली हाउस जैसी आधुनिक कृषि तकनीकों और विधियों ने बागवानी फसलों की खेती ने किसानों की समृद्धि की राह खोल दी है। इसके साथ कोका कोला, फेंटा जैसे पेय उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को निर्देश दिया है कि पांच प्रतिशत फलों का पक्का-कच्चा जूस भी मिलाए। केंद्र सरकार के इस प्रयास से फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा देने मिल रहा है जिससे किसानों को फसलों की उचित कीमत मिल रही है और उनकी आय बढ़ रही है।

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दरअसल प्रधानमंत्री हर क्षण देश की प्रगति के उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं और वे विज्ञान और तकनीक को देश की समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। वे कहते हैं, ”विज्ञान और तकनीक देश की प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि इसने गरीबी दूर करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।‘’ उनका स्पष्ट मानना है कि मानव विकास का सम्पूर्ण लक्ष्य तभी प्राप्त किया जा सकता है जब इसके लिए विज्ञान और तकनीक का उपयोग किया जाए।

 

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