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मोदी विरोध में इमरान ने पाकिस्तान को किया कंगाल, PR पर खर्च किए 3 लाख डॉलर

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सोशल मीडिया से साभार

एक तरफ पाकिस्तान कंगाली के कगार पर खड़ा है, दुनिया का कोई देश भीख देने को तैयार नहीं है, वहीं उसका प्रधानमंत्री इमरान खान है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने के लिए अमेरिका के दौरे पर 3 लाख डॉलर फूंक दिए। खास बात है कि इतना करने के बाद भी इमरान खान से भारत के पीएम मोदी का बाल भी बांका नहीं हो पाया, उल्टे भारत के साथ पीएम मोदी का जहां पूरी दुनिया में डंका बजा है, वहीं इमरान खान अपनी करतूत की वजह से खुद पूरी दुनिया में जगहंसाई कर आए।

मीडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक इमरान खान ने मोदी का विरोध कराने के लिए जहां एक सेल एनजीओ इंटरनेशनल ह्यूमनिटेरियन फाउंडेशन से एक लाख डॉलर का कांन्ट्रैक्ट किया वहीं एक अमेरिकी पीआर कंपनी Fenton Communications को 50,000 डॉलर दिए।

इमेज बनाने में US में फूंके 3 लाख डॉलर

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपना चेहरा चमकाने के लिए अमेरिकी दौरे पर 3 लाख डॉलर से ज्यादा डॉलर फूंक दिए। इसके लिए बकायदा एक महीने पहले International humanitarian Inc. नाम का फर्जी NGO का गठन किया गया है और इसी IHF के जरिए ह्यूस्टन में हाउडी मोदी कार्यक्रम के दौरान हाउडी मोदी कार्यक्रम में भाड़े के लोगों से प्रदर्शन कराया गया।

न्यूयॉर्क टाइम्स को फुल पेज विज्ञापन

इमरान खान ने जम्मू-कश्मीर को मुद्दे को हाईलाइट करने के लिए न्यूयॉर्क टाइम्स में फुल पेज विज्ञापन दिया और झूठा प्रचार करने की कोशिश की लेकिन वो पूरी तरह नाकाम रहे। जानकारी के मुताबिक न्यूयॉर्क टाइम्स में इस फुल पेज विज्ञापन की कीमत करीब एक लाख डॉलर के करीब है। इसके अलावा भारत विरोधी प्रचार के लिए अमेरिका की एक पीआर कंपनी Fenton Communications से 50 हजार डॉलर का कॉन्ट्रैक्ट किया गया। कुल मिलाकर इमरान खान ने अपना इमेज बनाने के लिए यूएस में तीन लाख डॉलर फूंका है।

तहरीक-ए-इंसाफ का सदस्य IHF का कर्ता-धर्ता

भारत विरोधी अभियान का कर्ता धर्ता साजिद बुर्की है जो इमरान खान की पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ का अमेरिका में बतौर प्रतिनिधि के रूप में काम करता है। पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ साजिद बुर्की  की कई तस्वीरें भी हैं। 

भारत विरोधी लगतार बयान के बावजूद भी पाकिस्तान भारत का बाल बांका भी नहीं सका और उसे मुंह की खानी पड़ी है।

ट्रंप ने इमरान खान को दी सलाह

संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र से इतर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की। इस दौरान इमरान खान ने फिर कश्मीर मध्यस्थता का मुद्दा उठाया। इस पर ट्रंप ने उन्हें साफ इंकार कर दिया। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक भारत नहीं चाहेगा, तब तक वह मध्यस्थता नहीं कर सकते। ट्रंप ने इमरान खान को सलाह दी है कि दोनों देश बातचीत के जरिए आपसी मुद्दों को सुलझाएं।

ट्रंप ने की पीएम मोदी की तारीफ

इमरान खान के सामने ही ट्रंप ने ह्यूस्टन में रविवार को आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम की जमकर प्रशंसा की। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने कार्यक्रम में पीएम मोदी का बयान सुना और एनआरजी स्टेडियम में मौजूद 50 हजार लोगों की जिक्र करते हुए कहा कि वहां मौजूद लोगों ने भी वैसी ही प्रतिक्रिया व्यक्त की। ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद का समर्थन करने के लिए पाकिस्तान पर जमकर निशाना साधा था। उनका कहना था कि भारत के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले से उन लोगों को परेशानी हो रही है जिनसे अपना ही देश नहीं संभाला जाता।

ट्रंप ने की पाकिस्तानी पत्रकार की खिंचाई

इमरान खान के साथ प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कई बार पाकिस्तानी संवाददाताओं की अनदेखी की। पाकिस्तानी पत्रकार कश्मीर पर इधर-उधर की बात कर रहे थे, जिससे नाराज ट्रंप ने उन्हीं की खिंचाई कर दी। एक बार तो उन्होंने एक संवाददाता से पूछ लिया कि क्या वह पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं। कश्मीर मसले पर एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल करने पर ट्रंप ने इमरान खान से पूछ ही लिया कि ऐसे संवाददाता आप लाते कहां से हो? इस पर इमरान खान की बोलती बंद हो गई।

जब UN में पीएम मोदी का भाषण सुनने पहुंचे राष्ट्रपति ट्रंप

अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जलवायु परिवर्तन से जुड़े एक सत्र को संबोधित करते वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पहुंच गए। दिलचस्प बात ये है कि ट्रंप का यहां पहुंचना पहले से तय नहीं था, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति सबको चौंकाते हुए पीएम मोदी का भाषण सुनने पहुंच गए। डोनाल्ड ट्रंप लगभग 15 मिनट तक शिखर सम्मेलन में रहे। हालांकि, उन्होंने सत्र को संबोधित तो नहीं किया, लेकिन उन्होंने पीएम मोदी के भाषण जरूर सुने। इसके बाद ट्रंप यूएन मुख्यालय से रवाना हो गए।

UNHRC में पाकिस्तान को नहीं मिला समर्थन

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत को पाकिस्तान के मुकाबले उस समय बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल हुई। जब संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) के 42वें सत्र में में पाकिस्तान को जम्मू-कश्मीर मामले में संकल्प पेश करने के लिए पर्याप्त समर्थन हासिल नहीं हो सका है। इससे कश्मीर मसले को अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बनाने की पाकिस्तान की साजिश एक बार फिर विफल हुई। ज्यादातर सदस्य देशों ने पाकिस्तान के प्रस्ताव का समर्थन करने से इन्कार कर दिया। प्रस्ताव लाने की पाकिस्तान की मंशा धरी रह गई और उसके राजनयिक अपना सा मुंह लेकर यूएनएचआरसी परिसर से निकल गए।

यूरोपीय संघ ने पाकिस्तान को लताड़ा, कहा- भारत में चांद से नहीं आते आतंकी

कश्मीर को लेकर दुनिया भर में विलाप करते फिर रहे पाकिस्तान को यूरोप के 28 देशों के संगठन यूरोपीय संघ ने जमकर फटकार लगा चुकी है।  यूरोपीय संघ की संसद के कई सदस्यों ने कश्मीर पर भारत के पक्ष का समर्थन किया और पाकिस्तान को आतंकवादियों को सुरक्षित पनाह देने के लिए कठघरे में खड़ा किया। इन सदस्यों ने साफ कहा कि भारत, खासकर जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी चांद से नहीं टपकते, बल्कि पड़ोस से ही आते हैं। यूरोपीय संसद में ‘कश्मीर में हालात’ विषय पर चर्चा के दौरान ज्यादातर सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के फैसले को भारत का आंतरिक मामला बताया। इन सदस्यों ने यूरोपीय संघ से भी भारत की संप्रभुता का सम्मान करने का आग्रह किया।

पाकिस्तान को नहीं मिला इस्‍लामिक देशों का समर्थन

कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर संकल्प का प्रस्ताव लाने के लिए पाकिस्तान एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है, लेकिन उसे इस्लामिक सहयोग संगठन के सभी 57 देशों का भी समर्थन हासिल नहीं हो पाया। ज्यादातर देशों ने पाकिस्तानी अधिकारियों को समझा दिया कि जम्मू-कश्मीर का मसला भारत का अंदरूनी मामला है,अगर उस पर पाकिस्तान कुछ बात करना चाहता है तो वह भारत के साथ करे।

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