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आक्रामक हुई भारतीय सेना तो एक बार फिर युद्धविराम के लिए गिड़गिड़ाया पाकिस्तान

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प्रधानमंत्री मोदी की आक्रामक नीतियों से पाकिस्तान एक बार फिर घुटनों के बल पर आ गया है। 29 मई 2018 को उसने भारत से कहा कि वह एक  2003 के युद्ध विराम को पूरी तरह से लागू करने के लिए तैयार है। दरअसल पाकिस्तान की यह मजबूरी प्रधानमंत्री मोदी की उस नीति के कारण हुई है जिसमें सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों गोलीबारी का किसी भी समय जवाब देने के लिए पूरी छूट मिली हुई है। 2014 तक कांग्रेस के यूपीए शासन के दौरान हर बार सैन्य कमान को जवाबी कार्रवाई के लिए दिल्ली से निर्देश लेना होता था।

प्रधानमंत्री मोदी की नीति से पाकिस्तान घबराया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पाकिस्तान के साथ रिश्ते को शांति और मित्रता से बढ़ाने के लिए पूरा प्रयास किया। जिसमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाने से लेकर उनकी बेटी की शादी में अचानक 25 दिसंबर 2015 को लाहौर पहुंचना भी शामिल था, लेकिन पाकिस्तान ने भारतीय सीमा में आतंकवादियों की घुसपैठ को कम नहीं किया और एक बाद एक कई सैन्य चौकियों पर निशाना साधने का काम जारी रखा। पाकिस्तान के रुख में बदलाव को न देखते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान को उसी के खेल में परास्त करने की नीति बनाई। 29 सितंबर 2016 को भारत ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दिया। इससे पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में बने आतंकवादी कैंपों और दर्जनों आतंकवादियों  का सफाया हुआ। सर्जिकल स्ट्राइक के बाद से भारतीय सेना ने हर घुसपैठिये आतंकवादियों को मारना शुरू कर दिया। पिछले चार सालों में सबसे अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया।

पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ी
भारतीय सैनिकों ने सीमा में घुसने वाले आतंकवादियों को ही नहीं मार गिराया, बल्कि जम्मू-कश्मीर राज्य के अंदर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों को चुन- चुन कर सफाया कर दिया। इनमें लश्कर ए तयबा और जैश ए मोहम्मद के सभी सरगना मार गिराये गये। मारे गए बड़े आतंकी चेहरों में- अबू दुजाना (लश्कर), अबू इस्माइल (लश्कर), बशीर लश्करी (लश्कर), महमूद गजनवी (हिजबुल), जुनैद मट्टू (लश्कर), यासीन इट्टू उर्फ ‘गजनवी’ (हिजबुल) और ओसामा जांगवी मुख्य था। इनके अलावा बशीर वानी, सद्दाम पद्दर, मोहम्मद यासीन और अल्ताफ भी सुरक्षा बलों की गोलियों का शिकार हो गया। मारे गये प्रमुख आतंकवादी –
बुरहान मुजफ्फर वानी, हिजबुल मुजाहिदीन
अबु दुजाना, लश्कर ए तैयबा कमांडर
बशीर लश्करी, लश्कर ए तैयबा
सब्जार अहमद बट्ट, हिजबुल मुजाहिदीन
जुनैद मट्टू, लश्कर ए तैयबा
सजाद अहमद गिलकर, लश्क ए तैयबा
आशिक हुसैन बट्ट, हिजबुल मुजाहिदीन कमांडर
अबू हाफिज, लश्कर ए तैयबा
तारिक पंडित, हिजबुल मुजाहिदीन
यासीन इट्टू ऊर्फ गजनवी, हिजबुल मुजाहिदीन
अबू इस्माइल, लश्कर ए तैयबा
ओसामा जांगवी, लश्कर ए तैयबा
ओवैद, लश्कर ए तैयबा
मुफ्ती विकास, जैश ए मोहम्मद
पिछले एक साल भारतीय सैनिकों ने 270 आतंकवादियों को मार गिराया। इतनी बड़ी संख्या में आतंकवादियों के मारे जाने से पाकिस्तान बौखला गया और वह अधिक से अधिक आतंकवादियों की घुसपैठ करवाने के लिए युद्ध विराम का उल्लंघन करने लगा। इस साल शुरुआती पांच महीनों में ही 1250 बार युद्ध विराम का उल्लंघन किया, जबकि 2017 में 971 बार किया था। 2014 में पाकिस्तान ने 583 बार युद्ध विराम का उल्लंघन किया था। पाकिस्तान के हर युद्ध विराम के उल्लंघन की भारत की जवाबी कार्रवाई से पाकिस्तानी सेना घबराकर इस बार पूरी तरह से  2003 के युद्ध विराम के समझौते का पालन करने के लिए मजबूर हुई ।

2003 युद्ध विराम समझौता
90 के दशक से कश्मीर को हथियाने के लिए पाकिस्तान ने आतंकवाद की रणनीति पर काम करना शुरू किया, क्योंकि सीधे युद्ध में उसको जबरदस्त हार का मुंह देखना पड़ा था और युध्द के कारण ही पाकिस्तान दो टुकड़ों में भी बंटा था। पीओके और भारतीय सीमा से सटे पाकिस्तानी क्षेत्रों में पाक सेना आतंकियों के ट्रेनिंग कैंप चलाने लगी और आतंकवादियों को भारत की सीमा में घुसपैठ कराने के लिए सीमा पर अकारण गोली बारी करती थी। इस गोली बारी का भारतीय सेना माकूल जवाब देती, लेकिन सीमा के दोनों ओर के गांवों में रहने वाले नगारिकों की मौतें बढ़ने लगी। यह सिलसिला, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहल पर  25 नवंबर 2003 की आधी रात से भारत और पाकिस्‍तान के बीच लागू हुए युद्धविराम से कुछ सालों के लिए थमा, लेकिन पाकिस्तानी सेना अपने रवैये को बदलने के लिए तैयार नहीं थी। 2009 से पाकिस्तान ने यु्द्ध विराम का उल्लंघन करने लगी और 2014 से इस उल्लंघन में तेजी ला दी। साल 2018 के पांच महीनों में ही अब तक का सबसे अधिक 1250 बार युद्ध विराम उल्लघंन किया।

इस बार युद्धविराम क्यों महत्वपूर्ण है
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक इस सीजफायर उल्लंघन और बदले में भारतीय सेना की कार्रवाई के चलते सीमा से सटे पाकिस्तानी गांवों के लोगों को भी काफी परेशानी हो रही है।  इसी के चलते बातचीत की पहल पाकिस्तान की तरफ से की गई है। भारत की तरफ से डीजीएमओ ले. जनरल अनिल चौहान और पाकिस्तान की तरफ से मेजर जनरल साहिर शमशाद मिर्जा 15 साल पुराने सीजफायर समझौते को पूरी तरह से लागू करने पर सहमत हुए। भारतीय सेना ने कहा कि यह सुनिश्चित किया गया है कि भविष्य में दोनों तरफ से युद्ध विराम का उल्लंघन नहीं होगा। पाकिस्तानी सेना ने एक बयान जारी कर कहा कि दोनों कमांडरों ने शांति बनाए रखने और सीमा से सटे क्षेत्र में रहने वाले लोगों की मुश्किलें दूर करने के उपायों पर आपसी सहमति व्यक्त की है। भारतीय सेना की तरफ से बयान में कहा गया है कि अधिकारी इस बात पर भी सहमत हुए कि किसी भी प्रकार के मुद्दे पर संयम बरता जाएगा और मुद्दे को हॉटलाइन संपर्क और बॉर्डर फ्लैग मीटिंग जैसी मौजूदा प्रणाली के जरिये हल किया जाएगा। भारतीय सेना ने यह भी सुनिश्चित किया है कि सीमा पर किसी भी तरह से चौकसी में कमी नहीं  आने दी जायेगी।

प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति और सैनिक कार्रवाई से पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में अपनी आतंकवादी रणनीति में चित हो चुका है। 

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