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उल्टा पड़ा राहुल का पीएम कैंडिडेट बनाने का कांग्रेसी दांव, विपक्षी दलों ने जताया ऐतराज

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ज्यादा गर्म खा लेने से मुंह भी जल जाता है और पेट भी नहीं भरता। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की यही हालत हो गई है। 3 राज्यों में विधानसभा चुनाव में मिली जीत से उत्साहित कांग्रेस नेता चापलूसी में राहुल को प्रधानमंत्री बनाने के ऐलान में एक दूसरे से होड़ कर रहे हैं लेकिन विपक्षी दलों में राहुल गांधी को लेकर कोई उत्साह नहीं हैं।

विपक्षी दलों की राय जानने के लिए कांग्रेस ने डीएमके के प्रमुख एम के स्टालिन ने राहुल गांधी को पीएम का दावेदार बताने का चारा फेंका। स्टालिन ने चेन्नई में राहुल-सोनिया को बुलाकर बड़ा मजमा किया और कहा “राहुल में मोदी सरकार को हराने की काबलियत है. तमिलनाडु की तरफ से 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए मैं राहुल गांधी के नाम का प्रस्ताव रखता हूं।” कांग्रेस को लगा था कि स्टालिन के इस प्रस्ताव को विपक्षी नेता हाथोंहाथ लेंगे और राहुल गांधी विपक्ष का चेहरा बन जाएंगे। लेकिन कांग्रेस की ये चाल उसे ही उल्टी पड़ गई और अब उसे जवाब देना भारी पड़ रही है।

ज़्यादातर विपक्षी नेता अभी इसे समय से पहले उठाया गया सवाल मान रहे हैं। समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती तो इस बयान से इतने नाराज होगए कि वो कांग्रेस के मुख्यमंत्री के शपथग्रहण में ही नहीं पहुंचे। लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल ने गोलमोल जवाब देकर इस सवाल से पीछा छुड़ा लिया। जबकि टीएमसी कह रही है कि कौन पीएम होगा, ये वक्त ही तय करेगा? चेन्नई में स्टालिन के साथ मौजूद एन चंद्रबाबू नायडू ने भी इस प्रस्ताव को लेकर कोई गर्मजोशी नहीं दिखाई।

 

ये तो वो नेता है जो कांग्रेस के संभावित सहयोगी हो सकते हैं। लेकिन अपने अपने राज्यों में कांग्रेस से लड़ रहे ओडिशा के बीजू जनता दल, तेलंगाना की तेलंगाना राष्ट्र समिति, केरल की कम्युनिस्ट पार्टियां, नॉर्थ ईस्ट के क्षेत्रीय दल तो किसी भी कीमत पर राहुल को समर्थन देने को राजी नहीं हैं। तो इन समीकरणों को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि घर में नहीं है दाने, अम्मा चली भुनाने।

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