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इस वेमुला की आत्महत्या पर आंसू बहाने वाला कोई नहीं

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कर्नाटक के श्रृंगेरी में बी-कॉम के एक छात्र ने आत्महत्या कर ली है। आत्महत्या की कहानी भी कमोबेश रोहित वेमुला की तरह है। एक तरह से कह सकते हैं रोहित वेमुला की घटना यहां दोहराई गई। छात्रों के दो गुटों में संघर्ष, प्रशासन पर पक्षपात का आरोप, एक गुट के छात्रों को सजा सुनाना और एक छात्र का आत्महत्या करना।

असल में यहां छात्रों के बीच संघर्ष के बाद एफआईआर दर्ज हो जाने से बी-कॉम का छात्र अभिषेक परेशान हो जाता है। उसे लगता है कि उसका करियर अब खत्म हो गया। उसे अब कोई नौकरी नहीं मिलेगी और अब वह नॉर्मल जिंदगी नहीं जी सकता। आरोप लगाने वाला गुट कर्नाटक की सत्ताधारी पार्टी से संबद्ध है। पार्टी, कॉलेज प्रशासन के दबाव से परेशान अभिषेक आत्महत्या कर लेता है। अभिषेक उसी दिन आत्महत्या करता है, जिस दिन उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाती है।

असल में कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और संघर्ष करने के बाद प्राथमिकी दर्ज कराने वाले गुट के छात्र एनएसयूआई के हैं। कांग्रेस से संबद्ध एनएसयूआई के खौफ के कारण कोई कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

इस घटना के बाद से अभिषेक के पिता काफी बेचैन हैं। बेटे की मौत के लिए वे कॉलेज के प्राचार्य और प्रबंधन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। अभिषेक के खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज कराने के लिए उन्होंने एनएसयूआई के अध्यक्ष और अन्य लोगों के खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई है। न्याय के लिए एबीवीपी के छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

लेकिन ताज्जुब है कि इस आत्महत्या को लेकर देशभर में कोई हाय-तौबा नहीं मचा। मुख्यधारा की मीडिया या खुद को उदार बताने वाले बुद्धिजीवी सीन से गायब हैं। रोहित वेमुला के समय प्राइम टाइम पर विधवा विलाप करने वाले बड़े-बड़े पत्रकार इस खबर पर कोई बहस नहीं कर रहे हैं। रोहित के दलित ना होने पर भी उस मामले पर दलित कार्ड खेलने वाले आप संयोजक अरविंद केजरीवाल, जेएनयू के कन्हैया कुमार और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी चुप्पी साधे हुए हैं। सोशल मीडिया पर वेमुला की तरह कोई #JusticeForAbhishek अभियान भी नहीं चल रहा है। आखिर क्यों?

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