Home चुनावी हलचल मोदी लहर के उफान ने लिखी चुनावों में नई इबारत

मोदी लहर के उफान ने लिखी चुनावों में नई इबारत

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नरेन्द्र मोदी दूसरी बार देश के प्रधानमंत्री के पद की शपथ 30 मई को लेने जा रहे हैं। देश में ऐसा पहली बार होगा जब कोई  गैरकांग्रेसी सत्ता में रहते हुए दोबारा प्रधानमंत्री पद की शपथ लेगा। भारतीय लोकतंत्र में यह एक मील का पत्थर बनेगा।

भारत के 130 करोड़ जनता के रसायन बल ने भाजपा को 303 सीटें और एनडीए गठबंधन को 353 सीटों पर लाकर खड़ा कर दिया। यह न्यू इंडिया की उस सोच को दर्शाता है जिसमें कुछ कर गुजरने का जज्बा, विश्वास और इंडिया फर्स्ट के विचार छाए रहते हैं। 

न्यू इंडिया की सोच ने चुनावों में जो अप्रत्याशित परिवर्तन किए हैं उसकी तस्वीर आंकड़ों के जरिए कुछ इस तरह से बनती है –

कांग्रेस के 9 पूर्व मुख्यमंत्री हार गए चुनाव में आयी मोदी सुनामी से कांग्रेस के बड़े से बड़े दिग्गज नेता हाशिए पर ला पटके गए, इनमें 9 नेता राज्यों के मुख्यमंत्री रह चुके हैं-

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, सीट- सोनीपत-भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भाजपा के रमेश चंद्र कौशिक ने हराया। रमेश को 5,87,664 मत मिले तो भूपेंद्र को 4,22,800 मिले।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, सीट- नैनीताल,-हरीश को इस सीट पर भाजपा के अजय भट्ट ने हराया। अजय को 7,72,195 मत और हरीश को 4,33,099 वोट मिले।

मेघालय के पूर्व मुख्यमंत्री मुकुल संगमा, सीट- तुरा,इस सीट पर नेशनल पीपुल्स पार्टी की अगाथा संगमा ने मुकुल संगमा को हराया। उन्हें 3,03,895 और मुकुल को 2,40,123 वोट मिले।

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री वीरप्पा मोइली , सीट-चिकबल्लापुर,– कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम वीरप्पा मोइली को भाजपा उम्मीदवार बीएन बाचे गौड़ा ने 1,82,110 मतों के अंतर से हरा दिया

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चह्वाण, सीट- नांदेड़, –अशोक चह्वाण को भाजपा के प्रतापराव पाटिल चिखालिकर ने 40,148 वोटों से हराया।

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री सुशील शिंदे, सीट- सोलापुर, –सुशील शिंदे भाजपा प्रत्याशी जय सिद्धेश्वर एस महास्वामीजी से 1,58,608 वोटों से हार गए।

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, सीट- उत्तर-पूर्व दिल्ली- शीला दीक्षित भाजपा के मौजूदा सांसद मनोज तिवारी से चुनाव हार गईं। मनोज को 7,87,799 वोट तो शीला को 4,21,697 वोट मिले।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, सीट- भोपाल, -भोपाल लोकसभा सीट पर दिग्विजय सिंह को प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने हराया। प्रज्ञा को 8,66,482 और दिग्विजय को 5,01,660 मत मिले।

अरुणाचल के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी, सीट- अरुणाचल वेस्ट –इस सीट से भाजपा के किरेन रिजिजु ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी को 1 लाख 40 हजार से ज्यादा मतों के अंतर से हराया।

भाजपा का रिकार्ड तोड़ प्रदर्शन

इस लोकसभा चुनाव में भाजपा को 224 सीटों पर कुल डाले गये मतों का 50 प्रतिशत से भी अधिक मत मिले जबकि 2014 में ऐसी सीटों की संख्या 136 थी।

15 राज्य व केन्द्र शासित राज्यों में भाजपा को गठबंधन के साथी दलों के साथ 50 प्रतिशत से अधिक मत मिले।

इस बार भाजपा को 15 सीटों पर 5 लाख से अधिक मतों से जीत मिली है जबकि 2014 में ऐसी सीटों की कुल संख्या 6 थी।

10 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में भाजपा ने पूरी की पूरी सीटें जीतकर Clean Sweep किया, लेकिन बिहार और मध्यप्रदेश ऐसे दो राज्य रहे जहां एक दो सीटों से भाजपा का Clean Sweep रुक गया।

Hindi Heartland में भाजपा को 141 सीटों पर जीत मिली। इस तरह से भाजपा का इस क्षेत्र में Strike Rate 71% रहा। यहां की सभी सीटों पर भाजपा को कुल डाले गये मतों का 50 प्रतिशत से भी अधिक मत मिला।

सात चरणों के चुनाव में भाजपा के लिए Undercurrent था, इसका पता हर चरण में भाजपा के लिए बढ़ते मत प्रतिशत से लगता है। पहले चरण में भाजपा का मत प्रतिशत जहां 1.9 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई, वहीं  छठवें चरण तक यह बढ़ते हुए 12.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। सातवें चरण के मतों में बढ़ोत्तरी 7.6 प्रतिशत 7.6 रही।

20 राज्यों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं मिली है, उसका खाता ही नहीं खुल सका।

यूपी में लोकसभा की 80 सीटों में से 73 पर कांग्रेस ने चुनाव लड़ा लेकिन सिर्फ 2 सीटों पर ही इसके नेता ही अपनी जमानत बचा पाए हैं। बाकी के सभी दिग्गज जो पहले केंद्र में भी मंत्री रहे, अपनी जमानत नहीं बचा पाए।

भाजपा को शहरों और गांवों में भी जमकर समर्थन मिला

ग्रामीण भारत में भाजपा को उज्‍ज्‍वला और हाउसिंग फॉर ऑल योजना का जबरदस्त फायदा मिला। भाजपा ने ग्रामीण भारत की कुल 342 सीटों में से 197 सीटों पर विजय हासिल की हैं। यहां कि सिर्फ 30 सीटें ही कांग्रेस के खाते में आ सकीं।

गांवों में भाजपा को शहरों से अधिक मत प्रतिशत मिले। गांवों  में भाजपा को 39.5% मत मिले तो शहरों में 33.9 % मत मिले।

भाजपा को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जबरदस्त लाभ मिला, भाजपा को शहरी क्षेत्रों(Urban) की 90 सीटों में 39 सीटों पर जीत मिली, जहां कुल 33.9 प्रतिशत मत मिले।  2014 में  ऐसी 40 सीटें थीं जिन पर 28.8 प्रतिशत मत मिले थे।

इसी तरह अर्द्धशहरी क्षेत्रों (Rurban) की 251 सीटों पर भाजपा ने 141 सीटों पर जीत हासिल करते हुए 37.1 प्रतिशत मत प्राप्त किए। 2014 में इन सीटों में से 127 सीटों पर 30.6 प्रतिशत मत के साथ जीत मिली थी।

ग्रामीण क्षेत्रों (Rural) की 202 सीटों में से भाजपा ने 123 सीटों पर जीत के साथ 39.5 प्रतिशत मत हासिल किए जबकि 2014 में  इन्हीं सीटों में से 115 सीटों पर 32.5 प्रतिशत मत मिले थे।

गांधी परिवार का गढ़ माने जाने वाले अमेठी में भाजपा की स्मृति इरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,120 मतों से हरा दिया। 39 सालों में ऐसा पहली बार हुआ है जब गांधी परिवार को अपने ही गढ़ में हार का मुंंह देखना पड़ा है।

भाजपा दक्षिण भारत की सबसे बड़ी पार्टी

भाजपा ने दक्षिण के पांच राज्यों -कर्नाटक, आन्ध्रप्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल की 130 सीटों में से 30 सीटों पर कब्जा किया है जबकि कांग्रेस को 26 सीटों पर जीत मिली है। इस तरह से भाजपा दक्षिण भारत में भी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।

भाजपा ने बंगाल में भी परचम लहराया

भाजपा को बंगाल में भी भारी सफलता मिली है। 42 सीटों में से 18 सीटों पर भाजपा को जीत मिली और इसका कुल 40.2 प्रतिशत मत मिले। 2014 में भाजपा को राज्य में 2 सींटे मिली थी। राज्य में वामपंथी दल को मिलने वाला मत 7.5 प्रतिशत पर ही सिमट कर रह गया, इस दल को कोई भी सीट नहीं मिल सकी।

इस बार की सतरहवीं लोक सभा में वामपंथी दलों के सदस्यों की सबसे कम संख्या होगी। कभी वामपंथ का गढ़ रहे बंगाल में इन दलों को कोई सीट नहीं मिली, केरल में भी मात्र एक सीट ही मिली है। यह हाल उस विचारधारा के दलों का है जिसका देश के पहले लोकसभा में , अविभाजित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के रुप में सबसे बड़ा विपक्षी दल हुआ करता था।

भाजपा का उत्तर भारत के राज्यों में कमाल का प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश में सपा, बसपा और आरएलडी की जातिवादी महागठबंधन को भाजपा ने फेल कर दिया। भाजपा ने राज्य में 49.5 प्रतिशत मतों पर कब्जा करते हुए 62 सीटों पर जीत हासिल कर ली, जबकि सपा को 18.3 प्रतिशत मत के साथ 5 सीटें और 19.3 प्रतिशत के साथ बसपा को 10 सीटें मिली। कांग्रेस को मात्र 6.8 प्रतिशत मत के साथ रायबरेली की सीट ही मिल सकी। इस तरह बसपा और सपा के गठबंधन को मात्र 37.6 प्रतिशत मत मिले जो भाजपा से 12 प्रतिशत कम रहे।

लोकसभा चुनाव 2019 में सबसे ज्यादा चर्चा जिस सीट की रही, वह थी यूपी की अमेठी। यहां से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी उम्मीदवार थे, उनके खिलाफ थीं केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति इरानी।  राहुल अपना चुनाव यहां से हार गए । इस तरह से संजय गांधी के बाद राहुल दूसरे ऐसे ‘गांधी’ बने हैं, जिनको अमेठी की जनता ने 39 साल बाद नकार दिया।

भाजपा ने हिमाचल प्रदेश में इतिहास बना दिया। हिमाचल प्रदेश के चुनावी इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी पार्टी ने लगातार दो लोकसभा चुनाव में Clean Sweep किया है। 2014 में भाजपा ने 53.3 प्रतिशत मतों से चारों सीटों पर कब्जा किया था तो इस बार के चुनाव में भी 69 प्रतिशत मतों से चारों सीटों पर कब्जा किया।

मध्यप्रदेश में भाजपा कुछ महीने पहले विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बावजूद 28 सीटों पर 58 प्रतिशत मतों के साथ कब्जा कर लिया और सत्तारुढ़ दल कांग्रेस को एक सीट और 34.5 प्रतिशत मतों पर ही रोक दिया।

हरियाणा में मोदी लहर का जबरदस्त असर रहा। राज्य की दस सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया। 2014 में सात सीटों पर जीत हासिल हुई थी। 2014 में पार्टी को 34.7 प्रतिशत मत मिले थे जबकि इस बार 58 प्रतिशत मत मिले।

राजस्थान में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद भी कांग्रेस को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। भाजपा ने 24 सीटों पर जीत हासिल करते हुए 58.5 % मतों पर कब्जा कर लिया जबकि कांग्रेस को 34.2% मतों के साथ शून्य सीट मिली।

लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए ने बिहार में 39 सीटें लेकर जहां इतिहास बनाया वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) का नाम भी इतिहास में दर्ज हो गया। आरजेडी के लिए यह चुनाव बहुत बुरा रहा। आरजेडी को अपने गठन के बाद पहली बार इस चुनाव में एक भी लोकसभा सीट नहीं मिली, जबकि बिहार के जातिगत समीकरण को साधने के लिए आरजेडी ने महागठबंधन बनाया था।

गुजरात में भाजपा ने 62.2 प्रतिशत मतों के साथ राज्य में Clean Sweep किया। भाजपा ने राज्य की सभी 26 सीटों पर कब्जा कर लिया।

भाजपा ने अकेले 303 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। इससे पहले किसी भी गैरकांग्रेसी राजनीतिक दल इतनी सीटें नहीं मिली हैं। इस तरह से भाजपा ने 37.4 प्रतिशत मतों पर भी कब्जा कर लिया। 2014 की तुलना में 6.4 प्रतिशत मतों और 21 सीटों का इजाफा हुआ है।

महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना का कमाल

यूपी के बाद सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में भी मोदी मैजिक दिख रहा है। सूबे की 48 लोकसभा सीटों में से एनडीए को 41, यूपीए को 5 और अन्य को 2 सीटों मिली हैं।

पूर्वोत्तर राज्यों में भी कमल खिला

भाजपा ने पूर्वोत्तर राज्यों में चमत्कार कर दिया। अरुणाचल प्रदेश में उसने दोनों सीटें जीतीं तो आसाम में 14 में से 9 सीटें जीतने में कामयाब हुई। मणिपुर की  दो में से एक सीट पर भाजपा का कब्जा हुआ। यही नहीं, त्रिपुरा राज्य की  दोनों ही सीटों पर भाजपा ने परचम लहराया।

वास्तविकता यह है कि पूर्वोत्तर राज्यों में भाजपा का इस लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में प्रभावी उदय हुआ है। पिछली बार आम चुनाव में भाजपा को पूर्वोत्तर के सभी राज्यों में मात्र आठ सीटों पर ही जीत हासिल हुई थीं, लेकिन भाजपा ने इस लोकसभा चुनाव में 14 सीटों पर कब्जा करके यह साबित कर दिया कि अब वह पुराने पिंजड़ों को तोड़कर सही मायनों में राष्ट्रीय पार्टी बनी है।

2014 में असम में बीजेपी को 36.50 फीसदी, मणिपुर में 11.90, मेघालय में 8.90 और त्रिपुरा में 5.70 प्रतिशत वोट मिले थे. इस बार उसे इन राज्यों असम में 35, मणिपुर में 34.2, मेघालय में 8 और त्रिपुरा में 47.8 फीसदी वोट मिले हैं.

अल्पसंख्यकों ने भी भाजपा को जमकर वोट दिया

देश में 79 लोकसभा सीटें ऐसी हैं, जहां अल्पसंख्यक आबादी 25 प्रतिशत से भी ज्यादा है। इनमें से 41 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है। 2014 की तुलना में 2019 में 15 सीटें ज्यादा मिली है।

वहीं कांग्रेस का प्रदर्शन इन सीटों पर गिरा है। बीते चुनावों में इन सीटों में से 12 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी, जबकि 2019 में सिर्फ 6 सीटें मिली हैं।

2014 के मुकाबले बीजेपी ने कांग्रेस से जो सीटें छीनी हैं, उनमें उत्तर-पूर्वी राज्यों में 3 सीटें, वहीं एक सीट कर्नाटक और एक सीट पश्चिम बंगाल की है।

उत्तर प्रदेश में 2014 में बीजेपी ने अल्पसंख्यक बहुल इलाकों की सारी सीटें जीती थी, जबकि इस बार, कम सीटों से संतोष करना पड़ा है।

सबसे अधिक महिलाएं भाजपा से सांसद बनीं

17वीं लोकसभा में महिला सांसदों की अब तक की सबसे ज़्यादा भागीदारी के साथ ही उनकी संख्या कुल सदस्य संख्या का 17 प्रतिशत है। कुल 78 महिलाएं संसद पहुंची हैं।

इसमें बीजेपी की 40 महिला सांसद हैं, तृणमूल कांग्रेस की 9 सांसद हैं कांग्रेस की 6 सासंद हैं बीजेडी की चार, वाईएसआर की चार इसके अलावा दो दलों की 2-2 महिलाएं और करीब 9 दलों की 1-1 महिला उम्मीदवार संसद पहुंची हैं।

इस बार  चुने गए सांसदों के स्ट्राइक रेट की बात करें तो महिलाओं की जीत का स्ट्राइक रेट पुरुषों के मुकाबले काफी ज्यादा है। भाजपा की महिला उम्मीदवारों का स्ट्राइक रेट 74.1 प्रतिशत है तो  पुरूष सांसदों का स्ट्राइक रेट 68 प्रतिशत रहा। कांग्रेस की महिला उम्मीदवारों का स्ट्राइक रेट सबसे कम रहा है।

 

 

 

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