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प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत-नेपाल संबंधों को मिला नया आयाम

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भारत और नेपाल न सिर्फ पड़ोसी हैं, बल्कि इतिहास, सभ्यता, संस्कृति, परंपरा, भाषा, बोली समेत अनेक तार आपस में जुड़ते हैं। हजारों वर्षों के इस पावन रिश्ते को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल में नई ऊंचाई प्रदान की है।  11 मई, 2018 को जब वे दो दिवसीय नेपाल दौरे पर पहुंचे तो दोनों देशों के रिश्तों को नया आयाम मिला। नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के साथ मिलकर उन्होंने माता सीता के जन्म स्थान जनकपुर से भगवान श्री राम की जन्म भूमि अयोध्या तक की सीधी बस सेवा की शुरुआत की, तो दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया।

विश्वास के आधार पर विकास के साझीदार बन रहे भारत-नेपाल
पीएम मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने माता जानकी के जन्म स्थान जनकपुर का दौरा किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने यहीं से रामायण सर्किट की भी घोषणा की है, जिसमें भगवान राम से जुड़े जगहों को चिन्हित किया गया है। भारत सरकार ने इसके लिए 223.94 करोड़ का बजट पास किया है, जिसमें भारत के 15 शहर समेत श्रीलंका और नेपाल के शहर भी शामिल होंगे। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत, नेपाल के विकास का ही अहम साझीदार नहीं बना है, बल्कि दोनों देशों के बीच विश्वास का नाता भी नये दौर में पहुंच गया है। यूं कह सकते हैं कि इस कालखंड में भारत-नेपाल रिश्ते अपने स्वर्णिम युग में हैं।

कांग्रेस की हठधर्मिता से बिगड़े थे भारत-नेपाल रिश्ते
1989 में राजीव गांधी के नेपाल दौरे के समय जब गैर हिंदू होने के कारण सोनिया गांधी पशुपतिनाथ मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया, तो राजीव गांधी ने इसे अपने अनादर के तौर पर लिया। उन्हें लगा कि तत्कालीन राजा बीरेंद्र ने उन्हें अपने तरीके से नीचा दिखाया है। हालांकि पुरी और तिरुपति की तरह ही यहां भी गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। लेकिन राजीव गांधी अड़ गए और वे  पशुपतिनाथ मंदिर से बिना पूजा किए ही लौट गए थे। राजीव गांधी की इस यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंध बेहद बिगड़ गए। भारत ने नेपाल की आर्थिक नाकेबंदी कर दी, इससे नेपाल पर बहुत बुरा असर पड़ा। वहां भारत विरोधी भावनाएं भड़कने लगीं और वह भारत को दुश्मन मानने लगा। इस घटना के बाद से ही नेपाल धीरे-धीरे चीन की ओर जाने लगा।

पीएम मोदी के कार्यकाल में पहली बार

  • 70 वर्षों में जनकपुर जाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री
  • नेपाल की धरती पर जनसभा करने वाले पहले प्रधानमंत्री
  • चार वर्षों में तीन बार नेपाल जाने वाले पहले प्रधानमंत्री
  • पहली बार किसी राष्ट्राध्यक्ष का जनकपुर में स्वागत हुआ
  • पहली बार दिल्ली-काठमांडू के बीच चलेगी भारतीय रेल

भारत की विदेश नीति में नेपाल को अहम स्थान
जुलाई 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब नेपाल का दौरा किया तो वे 17 वर्षों के बाद नेपाल जाने वाले पहले पीएम बने। दरअसल 1989 के बाद कांग्रेस की कुनीति के कारण दोनों देशों के संबंधों में जो खटास आई थी, उसे खत्म करने के लिए 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने नेपाल दौरा किया था। लेकिन यूपीए सरकार के 10 वर्षों के दौरान रिश्ते और बिगड़ते चले गए, परन्तु अपने चार वर्षों के कार्यकाल में ही प्रधानमंत्री मोदी की तीसरी नेपाल यात्रा साबित करती है कि भारत, नेपाल को कितना अहम मानता है। जाहिर है प्रधानमंत्री मोदी ने नेबहुड फर्स्ट नीति में भी नेपाल को पहले पायदान पर रखा है। 

अब दिल्ली से सीधे काठमांडू पहुंचेगी भारतीय रेल
अप्रैल के पहले हफ्ते में जब नेपाल के पीएम केपी शर्मा ओली जब भारत दौरे पर आए थे तो प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, ‘’नेपाल के विकास में भारत के योगदान का लंबा इतिहास रहा है और मैंने प्रधानमंत्री ओली को आश्वस्त किया है कि यह भविष्य में भी यह योगदान जारी रहेगा।‘’ भारत ने अपने इस वादे को निभाया है और दिल्ली और काठमांडू नई रेल लाईन से जुड़ने जा रहा है।

भारत की मदद से वाटर-वे से जुड़ेगा नेपाल
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब सार्क सेटेलाइट की घोषणा की थी तो उनका मकसद अपने पड़ोसी देशों को तकनीक के जरिये आपस में जोड़ना था। इस पहल में भी भारत ने नेपाल को प्रमुखता दी और मुफ्त में संचार सुविधा देने का एलान किया। अब भारत नेपाल के साथ मिलकर आइ-वे, रेलवे के साथ वाटरवे का भी विकास करना चाहता है। अप्रैल, 2018 में जब नेपाल के पीएम ने भारत का दौरा किया तो इसकी कार्ययोजना भी प्रस्तुत की गई थी।

नेपाल के भूकंप में भारत ने पहुंचाई थी बड़ी मदद
27 अप्रैल, 2015 को नेपाल की धरती में हलचल हुई और आठ हजार से ज्यादा जानें एक साथ काल के गाल में समा गईं। जान के साथ अरबों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ सो अलग। हलचल नेपाल में हुई लेकिन दर्द भारत को हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरजेंसी मीटिंग बुलाई और नेपाल के लिए भारत की मदद के द्वार खोल दिए। प्रधानमंत्री मोदी की इस पहल की पूरे विश्व ने सराहना की।

विनाशकारी बाढ़ के वक्त भी नेपाल के साथ रहा भारत
अगस्त, 2017 में नेपाल बाढ़ संकट से जूझ रहा था। नेपाल में आई बाढ़ के कारण कई लोगों की जान भी गई और हजारों अशियाने तबाह हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल से नेपाल को बाढ़ से मची तबाही से निबटने के लिए तत्काल सहायता पहुंचाई गई। प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट में लिखा, “मैंने नेपाल के प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से बात की है और और नेपाल को हर संभव मदद का भरोसा दिया है।”

 

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