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राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विस्तार के मामले में मोदी सरकार ने यूपीए सरकार को पीछे छोड़ा

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने पहले दिन से ही बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया। पिछले साढ़े चार साल में चाहे रेलवे हो, सड़क हो या शिपिंग, सरकार संपर्क बढ़ाने के लिए बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में लगी है। देश के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का विस्तार करने के मामले में मोदी सरकार ने यूपीए सरकार को पीछे छोड़ दिया है। अपने साढ़े 4 साल के कार्यकाल में एनडीए ने 33,361 किलोमीटर के राजमार्ग बनाए हैं जो की यूपीए के वित्त वर्ष 08 और वित्त वर्ष 2014 के बीच 7 वर्षों में बनाए गए 33,038 किलोमीटर राजमार्गों से अधिक है। इस साल अप्रैल-अक्टूबर के दौरान 23 किमी प्रतिदिन की दर से राजमार्ग बनाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर विशेष जोर रहता है। पिछले साढ़े चार वर्षों में सड़क, रेल, हवाई मार्ग सभी के विकास में अभूतपूर्व कार्य हुआ है। एक नजर डालते हैं किस तरह मोदी सरकार देश में आधारभूत ढांचे के निर्माण में लगी है।

मोदी सरकार में इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में खूब हुए काम, जीवन हुआ आसान
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की बागडोर थामने के साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर को सशक्त बनाने का बीड़ा उठा लिया था। सड़क, हाईवे, रेलवे, वाटरवे और एयरपोर्ट से जुड़ी परियोजनाओं से लेकर आवास योजना तक में उनकी सरकार ने जो तेजी दिखाई है वह एक सक्षम और समर्थ भारत का भरोसा देती है। इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास का सबसे ताजा उदाहरण है 2 किलोमीटर लंबा जोजिला टनेल जिसका प्रधानमंत्री ने पिछले 19 मई को शिलान्यास किया है। 3100 मीटर की ऊंचाई पर बनने वाली इस सुरंग से श्रीनगर, कारगिल और लेह-लद्दाख के बीच हर मौसम में संपर्क बना रहेगा और जोजिला से गुजरने में लगने वाले 5 घंटे का समय घटकर महज 15 मिनट का रह जाएगा। यह न्यू इंडिया के निर्माण की सुनहरी तस्वीर है जो कई क्षेत्रों में दिख रही है। 

2019 तक हर गांव को रोड कनेक्टिविटी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत देश के हर गांव को 2019 तक रोड कनेक्टिविटी प्रदान करना है। इस योजना की रफ्तार का पता इसी से चलता है कि 2014 में ग्रामीण क्षेत्रों में रोड कनेक्टिविटी 56 प्रतिशत थी, आज वो बढ़कर 82 प्रतिशत तक जा पहुंची है। शहरों और सड़कों की कनेक्टिविटी से गांवों तक आर्थिक और सामाजिक सेवाएं पहुंचे और रोजगार के लिए नए अवसर तैयार हो सके, इस योजना में सबसे बड़ा प्रयास यही रहा है। रोड कनेक्टिविटी गरीबी कम करने में भी मददगार होगी। 

20 हजार गांवों में बिछेगा सड़कों का जाल
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार गांवों के समग्र विकास के लिए कार्य कर रही है। मोदी सरकार का स्पष्ट मानना है कि जब गांवों का विकास होगा तभी देश का विकास होगा। किसी भी क्षेत्र के विकास में सड़क, संपर्क मार्ग, यातायात के साधन अहम भूमिका निभाते हैं। इसीलिए मोदी सरकार का जोर देश के एक-एक गांव को सड़क मार्ग से जोड़ने का है। पिछले साढ़े चार वर्षों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत रिकॉर्ड स्तर पर सड़कें बनाई गई हैं। अब मोदी सरकार ने मौजूदा वित्तीय वर्ष में देश के 20,000 गांवों को सड़कों से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

मार्च 2019 तक 1.78 लाख गांव सड़कों से जुड़ जाएंगे
साढ़े चार वर्षों के कार्यकाल में मोदी सरकार ने गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए लगातार बजट आवंटन बढ़ाया है। पिछले वित्तीय वर्ष 2017-18 में देशभर में करीब 49,000 किलोमीटर ग्रामीण सड़क बनाई गईं थी, इसमें 6.5 हजार किमी सड़कें ग्रीन टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं। सरकार ने रोजाना 32 गांवों को पक्की सड़कों से जोड़ा है और इसके लिए प्रतिदिन रिकॉर्ड 133 किमी ग्रामीण सड़क का निर्माण किया गया। आपको बता दें कि देश के कुल 13 राज्यों में PMGSY का दूसरा चरण पूरा हो चुका है, जबकि 14 राज्यों में जारी है। मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2019 तक कुल 1.78 लाख गांव सड़कों से जुड़ जाएंगे। पीएमजीएसवाई में अब तक कुल 5.50 लाख किमी लंबाई की सड़कें बनाई जा चुकी हैं।

नक्सल प्रभावित इलाकों में भी सड़क निर्माण
मोदी सरकार का मानना है कि विकास के जरिए ही हिंसा और नक्सलवाद की समस्या को खत्म किया जा सकता है। इसके लिए नक्सल प्रभावित इलाकों में सड़क निर्माण पर सरकार का खास ध्यान है। देश में कई राज्यों में नक्सल प्रभावित ऐसे इलाकों में सड़कें बनाई जा रही हैं, जहां अभी तक किसी के जाने की हिम्मत तक नहीं होती थी। चालू वित्त वर्ष में नक्सल प्रभावित इलाकों में कुल 268 सड़कों के लिए 4134 किमी लंबाई की सड़कों के बनाने का लक्ष्य तय किया गया है, जिसके लिए 4142 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। ये सड़कें बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिसा और मध्य प्रदेश के नक्सल प्रभावित इलाकों में  बनाई जाएंगी।

धुआंधार गति से सड़कें और हाईवे निर्माण
अच्छी सड़कें अच्छे इन्फ्रास्ट्रक्चर का उदाहरण होती हैं। मोदी सरकार का सड़कों और हाईवे के निर्माण पर शुरू से जोर रहा है। यह इससे पता चलता है कि 2013-14 में यूपीए सरकार के सड़कों के निर्माण का बजट जहां 32,483 करोड़ रुपये था वो 2017-18 में मोदी सरकार में बढ़कर 1,16,324 करोड़ रुपये हो गया। 2013-14 में नेशनल हाईवे 92,851 किलोमीटर तक विस्तारित था जो 2017-18 में 1,20,543 किलोमीटर तक पहुंच गया। 2013-14 में कंस्ट्रक्शन की स्पीड 12 किलोमीटर प्रतिदिन थी जो 2017-18 में बढ़कर 27 किलोमीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई। इसके साथ ही 2,000 किलोमीटर के कोस्टल कनेक्टिविटी रोड की भी पहचान की गई है जिसका निर्माण और विकास किया जाना है।

सबसे लंबी सड़क सुरंग और पुल राष्ट्र को समर्पित
पिछले वर्ष सड़क पर देश की सबसे लंबी सुरंग चेनानी-नाशरी सुरंग राष्ट्र को समर्पित किया गया। असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बने देश के सबसे लंबे पुल को भी जनता को समर्पित किया गया। 9.15 किलोमीटर लंबे ढोला-सादिया पुल (भूपेन हजारिका पुल) ने ऊपरी असम और अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्से के बीच चौबीस घंटे की कनेक्टिविटी को सुनिश्चित किया है। इसके साथ ही भरुच में नर्मदा के ऊपर और कोटा में चंबल के ऊपर बने पुल भी जनता को समर्पित किए जा चुके हैं।

भारतमाला परियोजना फेज-1  
भारतमाला परियोजना के तहत देश के पश्चिम से लेकर पूर्व तक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सड़कों का जाल बिछाने की योजना है। इसके लिए नेशनल हाईवे के 53,000 किलोमीटर के हिस्से की पहचान की गई है जिसके फेज-1 में 2017-18 से 2021-22 तक 24,800 किलोमीटर के काम को पूरा किया जाएगा। इसके दायरे में नेशनल कॉरिडोर के 5,000 किलोमीटर, इकोनॉमिक कॉरिडोर के 9,000 किलोमीटर, फीडर कॉरिडोर और इंटर-कॉरिडोर के 6,000 किलोमीटर, सीमावर्ती सड़कों के 2,000 किलोमीटर, 2,000 किलोमीटर कोस्टल और पोर्ट कनेक्टिविटी रोड और 800 किलोमीटर के ग्रीन-फील्ड एक्सप्रेसवे आते हैं। फेज-1 पर लगभग 5 लाख 35 हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि फेज-1 के इस पूरे कार्य के दौरान रोजगार के करीब 35 करोड़ श्रमदिवसों का सृजन होगा।

सेतु भारतम से सड़क पर सुरक्षा
मार्च 2016 में लॉन्च की गई इस योजना का मकसद है सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना। इसके तहत 2019 तक सभी नेशनल हाईवे को रेलवे ओवरब्रिज और अंडरपास बनाकर रेलवे क्रॉसिंग से मुक्त करना है। 1500 पुराने और जीर्णशीर्ण पुलों को नए सिरे से मजबूती के साथ ढालना है और चौड़ा करना है। 20,800 करोड़ की लागत से 208 रेलवे ओवरब्रिज और अंडरब्रिज का निर्माण किया जाना है।

चार धाम महामार्ग विकास परियोजना
27 दिसंबर 2016 को लॉन्च की गई इस परियोजना का मकसद है हिमालय में स्थित चारधाम तीर्थ केंद्रों की कनेक्टिविटी को बेहतर करना। इससे तीर्थयात्रियों का सफर और अधिक सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक होगा। नेशनल हाईवे के करीब 900 किलोमीटर के हिस्से के आसपास होने वाले इस कार्य की अनुमानित लागत है करीब 12,000 करोड़ रुपये। मार्च 2020 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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