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नवाज शरीफ के खुलासे ने खोल दी कांग्रेस की पोल, मुंबई हमले में RSS को फंसाने की रची थी साजिश!

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हिंदू विरोध की भावना कांग्रेस के डीएनए में है। यह सिर्फ आरोप नहीं है, बल्कि इसके कई तथ्य सामने आ चुके हैं। एक और बड़ा तथ्य तब सामने आया, जब पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने ये मान लिया कि मुंबई हमला पाकिस्तान ने करवाया था।

नवाज शरीफ का ये बयान पाकिस्तान के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाला तो है ही, साथ ही कांग्रेस पार्टी की कुत्सित सोच का भी कच्चा चिट्ठा खोलती है। दरअसल मुंबई हमले के बाद कांग्रेस ने इसकी पूरी कोशिश की थी कि इस हमले का आरोप आरएसएस पर लगा दिया जाए।

मुंबई हमले में आरएसएस को फंसाने की साजिश!
तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे, कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह, सोनिया गांधी, अहमद पटेल और राहुल गांधी- ये पांच शख्स हैं, जिन्होंने यूपीए सरकार के दौरान ‘हिंदू आतंकवाद’ की अवधारणा गढ़ी थी और उसे साबित करने का हर तरह का फर्जी प्रयास किया था। यहां तक कि वर्ष 2008 में 26/11 को मुंबई पर हुए हमले को भी आरएसएस द्वारा हमले के रूप में न केवल प्रचारित किया गया, बल्कि इस पर एक पुस्तक भी लिखी गई। गौरतलब है कि इसका लोकार्पण दिग्विजय सिंह ने किया था।

कसाब के कबूलनामे से साजिश हुई नाकाम
अजीज बर्नी की लिखी पुस्तक- आरएसएस की साजिश 26/11, पुस्तक का विमोचन 6 दिसंबर 2010 को आल इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने किया। अजीज बर्नी द्वारा लिखित इस पुस्तक में 26/11 को मुंबई में हुई घटनाओं का वर्णन किया गया है। हालांकि पाकिस्तानी आतंकी कसाब के पकड़े जाने और उसके कबूलनामे की वजह से कांग्रेस संचालित यूपीए सरकार की यह योजना फलिभूत नहीं हो सकी।

कांग्रेस ने गढ़ी ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी
जिस हिंदू संस्कृति और सभ्यता की सहिष्णुता को पूरी दुनिया सराहती है, उसे भी बदनाम करने में कांग्रेस ने कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। वर्ष 2007 में हैदराबाद के मक्का मस्जिद में बम विस्फोट हुआ था। इस मामले में स्थानीय पुलिस ने आतंकी संगठन हूजी से जुड़े कुछ लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया। इसके बाद देश में हिंदुओं को बदनाम करने की एक साजिश रची गई और नाम दिया गया ‘भगवा आतंकवाद’! अजमेर और मालेगांव ब्लास्ट के बाद यूपीए की मनमोहन सरकार ने ‘हिंदू आतंकवाद’  या ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी दी थी। इसी के तहत सरकार मोहन भागवत को फंसाना चाहती थी और इसके लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के बड़े अधिकारियों पर दबाव डाला जा रहा था।

मोहन भागवत को फंसाने की थी साजिश
भागवत को ‘हिंदू आतंकवाद’ के जाल में फंसाने के लिए कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार के मंत्री कोशिश में जुटे थे। गौरतलब है कि जांच अधिकारी और कुछ वरिष्ठ अधिकारी अजमेर और दूसरे कुछ बम ब्लास्ट मामलों में तथाकथित भूमिका के लिए मोहन भागवत से पूछताछ करना चाहते थे। ये अधिकारी यूपीए के मंत्रियों के आदेश पर काम कर रहे थे, जिसमें तत्कालीन गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे भी शामिल थे। ये अधिकारी भागवत को पूछताछ के लिए हिरासत में लेना चाहते थे।

आरवीएस मणि ने किया साजिश का खुलासा
यूपीए सरकार के दौरान गृह सचिव रहे आरवीएस मणि ने इस मामले की पूरी साजिश सामने ला दी है। उन्होंने कहा, ”हिंदू आतंकवाद जैसा कोई मामला नहीं था, लेकिन मेरे ट्रांसफर के बाद मंत्रालय में ‘हिंदू आतंकवाद’ की कहानी गढ़ी गई। गृह मंत्रालय ने हवा देकर हिंदुओं को बदनाम करने की साजिश रची थी।” उन्होंने कहा कि इस साजिश में साथ नहीं देने के लिए ही उनका गृह मंत्रालय से ट्रांसफर कर दिया गया था। जिसके बाद सरकार के इस रुख से परेशान होकर उन्होंने रिटायरमेंट के 22 महीने पहले की स्वैच्छिक सेवानिवृति ले ली थी। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रालय में काम करने का मतलब था कि राजनेताओं का काम करना, इसलिए एक निष्पक्ष ब्यूरोक्रेट के तौर पर काम करना मेरे लिए संभव नहीं था।

कांग्रेस ने भगवा आतंकवाद पर हिंदुओं को किया बदनाम
समझौता ब्लास्ट में भी सोनिया गांधी की अगुआई में भगवा आतंकवाद की साजिश रची गई थी। 18 फरवरी, 2007 को समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट केस में दो पाकिस्तानी मुस्लिम आतंकवादियों को पकड़ा गया था, उसने अपना गुनाह भी कबूल किया था, लेकिन महज 14 दिनों में उसे चुपचाप छोड़ दिया। उनके स्थान पर निर्दोष हिन्दुओं को गिरफ्तार किया गया। समझौता विस्फोट में कांग्रेस को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए सोनिया गांधी, अहमद पटेल, दिग्विजय सिंह, शिवराज पाटिल और सुशील कुमार शिंदे ने हिंदू आतंकवाद का जाल बुना और इस केस में स्वामी असीमानंद को फंसाया गया ताकि भगवा आतंकवाद की साजिश को अमली जामा पहनाया जा सके।

योगी और मोहन भागवत को फंसाना चाहती थी कांग्रेस
यूपीए सरकार के दौरान मालेगांव ब्लास्ट मामले में उत्तर प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को फंसाने की साजिश रची गई थी। यह दावा 23 अक्टूबर, 2017 को बनारस में ब्लास्ट के आरोपी सुधाकर चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बड़े नेताओं ने जांच अधिकारियों से मिलकर ये साजिश की थी। 9 साल बाद जमानत पर जेल से रिहा हुए सुधाकर चतुर्वेदी ने खुलासा किया कि कांग्रेस नेता पी चिदंबरम, दिग्विजय सिंह और तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार की सोची समझी साजिश के तहत जांच अधिकारी हेमंत करकरे के साथ मिलकर मालेगांव ब्लास्ट को भगवा आतंकवाद साबित करने में लगे थे।

कांग्रेस ने कर्नल पुरोहित, प्रज्ञा सिंह ठाकुर पर ढाए जुल्म
सुधाकर चतुर्वेदी अभिनव भारत संस्था से जुड़े हैं। मालेगांव ब्लास्ट के बाद 23 अक्टूबर 2008 को सुधाकर को नासिक से गिरफ्तार कर मुंबई ले जाया गया था। सुधाकर चतुर्वेदी ने कहा कि साध्वी प्रज्ञा को जांच अधिकारियों ने लैपटॉप पर पॉर्न मूवी और अश्लील फोटो दिखाकर टॉर्चर किया। अपने बारे में बताया कि तीन दिनों तक खाना नहीं दिया गया। बाथरूम में करंट लगाकर रखा और पूरा नंगा कर पैरों के तालू पर लाठी से मारते थे। मालेगांव ब्लास्ट मामले में कर्नल पुरोहित के साथ भी ऐसा ही हुआ था। उनके साथ भी जुल्म ढाए गए और जबरिया कई सादे कागजों पर दस्तखत करवाए गए।

भगवाधारी साधु-संतों का अपमान करना कांग्रेस की साजिश
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी अपनी किताब ‘द कोलिशन इयर्स’ में ये खुलासा किया है कि 2004 में शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती की गिरफ्तारी के पीछे सोनिया गांधी हाथ था। जाहिर है इसके मूल में हिंदू विरोध ही था। दरअसल दक्षिण भारत में बेरोक-टोक ईसाई धर्म का प्रचार चल सके इसके लिए वेटिकन के इशारे पर शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को साजिश के तहत गिरफ्तार करवाया गया। हालांकि 2013 में वे बाइज्जत बरी किए गए, लेकिन उन्हें बेकसूर ही 10 वर्षों तक हिंदू होने की सजा भुगतनी पड़ी और जेल के सलाखों के पीछे रहना पड़ा।

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