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मार्क नहीं नॉलेज से चलती है जिंदगी- प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों के लिए अपने खास मन की बात कार्यक्रम में कहा कि जिंदगी मार्क से नहीं नॉलेज से चलती है। उन्होंने साफ कहा कि मार्क और मार्कशीट का एक सीमित उपयोग है। जिंदगी में मार्क ही सब कुछ नहीं होता है। जिंदगी इससे चलती है कि आपने कितना ज्ञान अर्जित किया है और आपने जो जाना है, उसको जीने का प्रयास किया है या नहीं?

ऋचा आनंद की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में मार्क नहीं नॉलेज काम आने वाला है, स्किल काम आने वाली है, आत्मविश्वास काम आने वाला है, संकल्पशक्ति काम आने वाली है। उन्होंने कहा कि जब आप किसी डॉक्टर के पास जाते हैं तो ये नहीं पूछते कि वो कितने नंबर में पास हुए थे। आपको लगा कि वे अच्छे डॉक्टर हैं तो आप उनकी सेवाएं लेने लगते हैं। इसी तरह किसी केस के सिलसिले में वकील के पास जाते हैं तो मार्कशीट नहीं देखते। आप उसके अनुभव को, उसके ज्ञान को, उसकी सफलता की यात्रा को देखते हैं। और इसलिए ये जो अंक का बोझ है, वो भी कभी-कभी हमें सही दिशा में जाने से रोक देता है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि पढ़ना ही नहीं है। अपनी कसौटी के लिए इसका उपयोग जरूर है।

पीएम मोदी ने कहा कि अगर आप ज्ञान को केंद्र में रखते हैं, तो बहुत चीजों को अपने में समेटने का प्रयास करते हैं। लेकिन अंक पर फोकस करते हैं, मार्क पर फोकस करते हैं, तो आप धीरे-धीरे अपने-आप को सिकुड़ते जाते हैं और एक निश्चित एरिया तक अपने आपको सीमित कर देते हैं। ऐसे में एक्जाम में होनहार बनने के बावजूद भी जीवन में कभी-कभी विफल हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन को आगे बढ़ाने के लिए अनुस्पर्द्धा काम आती है। अनुस्पर्द्धा का मतलब है, स्वयं से स्पर्द्धा करना। बीते हुए कल से आने वाला कल बेहतर कैसे हो? बीते हुए परिणाम से आने वाला अवसर अधिक बेहतर कैसे हो? ज्यादातर सफल खिलाड़ियों के जीवन की एक विशेषता है कि वो अनुस्पर्द्धा करते हैं। अगर सचिन तेंदुलकर का ही उदहारण लें तो बीस साल लगातार अपने ही रिकॉर्ड तोड़ते जाना, खुद को ही हर बार पराजित करना और आगे बढ़ना। उन्होंने प्रतिस्पर्द्धा से ज्यादा अनुस्पर्द्धा का रास्ता अपनाया। आप भी खुद से प्रतिस्पर्धा कर जीवन में काफी आगे बढ़ सकते हैं।

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