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प्रधानमंत्री मोदी अबतक के सबसे कुशल प्रशासक ही नहीं, बेहतरीन रिफॉर्मर भी हैं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं को राष्ट्रसेवक कहना पसंद करते हैं, ये उनका बड़प्पन है। आग बढ़ें उससे पहले उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले के सिर्फ 10 सालों का दौर को याद कर लीजिए। किसी भी देशप्रेमी के रोंगटे खड़े हो जाएंगे। लेकिन छोटे से कार्यकाल में ही पीएम मोदी ने देश की जनता को नया हौंसला दे दिया है। दुनिया आज हमारी बातों को अनसुना करने की स्थिति में नहीं रह गई है। हम लचर अर्थव्यस्था से उबर कर दुनिया में सबसे तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यस्थाओं में शामिल हो चुके हैं। पाताल की गहराइयों से लेकर अंतरिक्ष की ऊंचाइयों तक के हर क्षेत्र में भारत के झंडे गाड़े जा रहे हैं। ये सब संभव हुआ है प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व के कारण। वो स्वयं को राष्ट्रसेवक भले ही कहें, लेकिन वो असल राष्ट्रनायक हैं। वो एक बेहतरीन रिफॉर्मर हैं, जिनके सम्मान में अब सारी दुनिया सजदा करने को तैयार है।

देश में बदलाव का असर साफ दिख रहा है। पिछले तीन सालों में प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने जो नीतियां अपनाई हैं उससे हर क्षेत्र में विकास को गति मिली है। मोदी सरकार के कुछ निर्णयों पर गौर करें तो पाएंगे कि ऐसे फैसलों पर किसी सामान्य व्यक्तित्व का प्रभाव नहीं हो सकता। ये वो निर्णय हैं जो सदियों में एक बार कोई बहुत बड़ा रिफॉर्मर ही ले सकता है, जो देश को पीएम मोदी के रूप में मिला है-

विमुद्रीकरण से रिफॉर्म
8 नवंबर, 2016 को प्रधानमंत्री ने 500 और 1000 रुपये के नोट को चलन से बाहर करने का निर्णय लिया वो हर किसी राजनेता के वश की बात नहीं थी। पीएम मोदी पहले दिन से ठान चुके हैं कि कालाधान और भ्रष्टाचार रूपी गंदगी को समाप्त करके रहेंगे। वो जानते थे कि इस फैसले से थोड़े दिनों के लिए लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। लेकिन उन्हें भरोसा था कि जनता देशहित में लिए जाने वाले हर निर्णय के साथ रहेगी। आखिरकार विश्व बैंक को भी मानना पड़ा कि नोटबंदी का फैसला पूरी तरह सही था और आने वाले समय में इससे भारतीय अर्थव्यवस्था और भी मजबूत होगी। जैसे-जैसे आंकड़े उपलब्ध हुए हैं, उससे भी साफ हो गया है कि इस एक निर्णय ने 5 लाख करोड़ रुपये के छिपे हुए धन को उजागर कर दिया। साथ ही साथ लाखों लोग टैक्स के दायरे में जुड़ गए। ये कोई मामूली बात नहीं कि 2016-17 के लिए इनकम टैक्स जमा करने वालों की संख्या में 23.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसमें से कम से कम 10 प्रतिशत की वृद्धि अकेली नोटबंदी के कारण हुई।

डिजिधन से जन-क्रांति
नोटबंदी के दौरान पीएम मोदी ने देश को जिस तरह से डिजिटल ट्रांजैक्शन का विकल्प दिया, वो हर किसी नेता की सोच की वश की बात नहीं है। पांच महीनों के अंदर ‘BHIM’ एप से देश के 2 करोड़ से अधिक लोगों को जोड़ देना विकसित से विकसित देशों के लिए भी आसान काम नहीं है। पीएम ने कोशिश की है कि लोगों की कैश पर निर्भरता कम हो जाए। वो अर्थव्यवस्था में कैश की जगह डिजिधन पर जोर देते हैं। सिस्टम से भ्रष्टाचार मिटाने की ऐसी सोच पीएम मोदी जैसे सुधारवादी राजनेता ही दे सकते हैं। इसी का परिणाम है कि 2017-18 में 2,500 करोड़ रुपये से अधिक डिजिटल लेन-देन होने का अनुमान है। आंकड़ों को देखें तो 2015-16 में डेबिट कार्ड से कुल 117 करोड़ ट्रांजेक्शन में 1.58 लाख करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था। जबकि 2016-17 में ये संख्या बढ़ कर 240 करोड़ तक पहुंच गई और 3.3 लाख करोड़ मूल्य का लेन देन हुआ। ये बदलाव नहीं तो क्या है?

जनधन को बनाया जन-अभियान
आजादी के बाद से अबतक देश में गरीबों को बैंकों से दूर रखा गया था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस अन्याय को मिटाने का काम किया है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत गरीबों को बैंकों में मुफ्त में खाता खोलने का मौका दिया गया। 28 अगस्त, 2014 को शुरू किए गए इस स्कीम के तहत अबतक करीब 29 करोड़ से अधिक नये खाताधारक बैंकिंग सिस्टम में जुड़े हैं, जिन्होंने इससे पहले बैंक का मुंह नहीं देखा था। ये योजना जहां एक तरफ गरीबों को सशक्त करने का काम कर रही है, वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के चलते भ्रष्टाचार के एक बहुत बड़े रास्ते को सरकार ने हमेशा-हमेशा के लिए बंद कर दिया है। इन खातों में आज के दिन लगभग 65 हजार करोड़ से ज्यादा रुपये जमा हैं।  यह एक वित्तीय समावेशन कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम के शुरू होने के पहले दिन ही डेढ़ करोड़ बैंक खाते खोले गए थे और हर खाता धारक को 1,00,000 रुपये का दुर्घटना बीमा कवर दिया गया है। यही तो बदलाव है जिसकी आस में देश की जनता ने 6 दशक से अधिक गंवा दिए। उनका सपना पूरा करने का काम किया है तो वो हैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

आधार को बनाया जन-अधिकार
देश में आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया तो पहले से चल रही थी। लेकिन पिछली सरकार ने उसे देश में बड़े रिफॉर्म का माध्यम बनाने के बारे में सोच ही नहीं विकसित होने दी। पीएम मोदी की सरकार ने हर स्तर पर संघर्ष करके आधार को एक महत्वपूर्ण साधन बनाने का काम कर दिया है। इसके चलते अभी से देश की दशा और दिशा बदलना शुरू हो गया है। आप सोच लीजिए कि आधार को अनिवार्य बनने से पहले ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर स्कीम के माध्यम से पिछले तीन साल में सरकार ने 50,000 करोड़ रुपये से अधिक की रकम बचा ली है, तो आगे कितना अधिक लाभ मिलने वाला है। अबतक इस कार्यक्रम के तहत 32 करोड़ जरूरतमंदों को डीबीटी स्कीम के तहत उनके कोष में रकम सीधे ट्रांसफर किया जा चुका है । आधार से डीबीटी योजना की खामियों को दूर करने में मदद मिल रही है और बिचौलियौं और फर्जी लाभार्थियों को हटाया जा सका है।

टैक्स रिफॉर्म्स के लिए जीएसटी
वर्ल्ड बैंक से लेकर तमाम राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के गीत गा रहे हैं। अमेरिकी रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर सर्विस तो भारतीय अर्थव्यवस्था में 8 प्रतिशत तक की दर से वृद्धि होने की संभावना जता चुकी है। ऐसी स्थिति में भारत जैसे विविधता वाले देश में एक साथ जीएसटी को लागू करवाना सामान्य नेतृत्व कौशल वाले व्यक्तित्व के वश की बात नहीं है। ऐसा सुधार पीएम में मोदी जैसी दूरदर्शी सोच वाला राजनेता ही ला सकता है। आखिर 6 दशकों से अधिक अवधि में किसी प्रधानमंत्री ने एक देश, एक टैक्स की दिशा में सोचने की सच्ची पहल क्यों नहीं की ? क्योंकि इसके लिए विजन चाहिए जो पीएम मोदी में है। 30 जून और एक जुलाई 2015 की अर्धरात्रि से इस विजन का असर दुनिया देखेगी।

योग से किया विश्व में रिफॉर्म
पिछले 7-8 सौ वर्षों में विदेशी ताकतों ने भारत में जैसी लूट-खसोट मचाई थी, उसके बाद क्या कोई सोच सकता था कि भारत एक बार फिर से दुनिया का सिरमौर बनकर वापसी कर सकता है। लेकिन तीन साल में ही भारत के एक बार से विश्व गुरु बनने की उम्मीद की जाने लगी है। पीएम मोदी की पहल पर तीन साल से 21 जून को दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मना रही है। कैलिफोर्निया से लेकर टोक्यो तक और साइबेरिया से लेकर धरती के सुदूर दक्षिण छोर तक योग को अपनाया जा चुका है। प्राचीन काल में जिस योग के माध्यम से भारतीय ऋषि-मुनियों ने विश्व की वैचारिक अगुवाई की, वर्तमान समय में वो सब संभव हो रहा है राष्ट्रऋषि पीएम मोदी जी के नेतृत्व में। अगर वर्तमान समय में प्रधानमंत्री मोदी को रिफॉर्मर नहीं कहेंगे तो किसे कहेंगे ?

लीगल रिफॉर्मर हैं पीएम मोदी
देश को स्वतंत्र हुए 70 साल बीत चुके हैं। 67 सालों तक देश की जनता अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए गैर-जरूरी कानूनों को झेलने के लिए विवश रही। सत्ता में आने से पहले ही पीएम मोदी ने एक संकल्प कर लिया था। जितने भी कानून समय की कसौटी पर खरे नहीं उतरेंगे, उन्हें धीरे-धीरे जांच-परख कर समाप्त कर दिया जाएगा। अभी मोदी सरकार के तीन साल ही पूरे हुए हैं और देश में 1200 से अधिक अनावश्यक कानूनों को समाप्त किया जा चुका है। देश के आम नागरिक के जीवन को जो बदल दे उसे ही सुधार कहते हैं। अगर पीएम मोदी के चलते देश की 125 करोड़ जनता के जीवन में एक साथ बदलाव आ रहा है, तो वर्तमान में धरती पर उनसे बड़ा सुधारवादी कौन हो सकता है ?

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