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अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, जीडीपी विकास दर बढ़कर 6.3 प्रतिशत पर पहुंची

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ रही है। सितंबर तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद 6.3 प्रतिशत रहा जबकि पहली तिमाही में यह 5.7 प्रतिशत था। जुलाई-सितंबर में, पिछली तिमाही की तुलना में विनिर्माण, बिजली उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है। इसके साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था में आया हल्की गिरावट का दौर भी थम गया है । गुरुवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में जीडीपी दर तेजी से ऊपर की ओर बढ़ी है ।

विनिर्माण क्षेत्र में सात फीसदी की दर से इजाफा हुआ है। खनन में विकास की दर जहां साढ़े पांच प्रतिशत रही है वहीं, बिजली, गैस, जल आपूर्ति सेवाओं में साढ़े सात प्रतिशत से ज्यादा की दर से विकास हुआ है। निर्माण क्षेत्र में 2.5 प्रतिशत की दर से विकास हुआ है। व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट, सेवा में 10 फीसदी की दर से इजाफा हुआ है। जुलाई में नई टैक्स नीति जीएसटी लागू की गई है। इन आंकडों से साफ है कि जीएसटी का कारोबार और जीडीपी की वृद्धि दर पर सकारात्मक असर रहा है ।

मोदी विदेशी ऋण में कमी के लिए चित्र परिणाम

26 मई, 2014 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली थी तब देश की अर्थव्यवस्था दम तोड़ रही थी। 4.4 प्रतिशत की विकास दर से बढ़ रही इंडियन इकोनॉमी खस्ताहाल थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने देश की अर्थव्यवस्था में नयी जान डाल दी है। उनकी भारत माता के प्रति समर्पण, दूरदर्शी नीति, कड़ी मेहनत और लगन से आज देश की अर्थव्यवस्था सही दिशा में अग्रसर है। विमुद्रीकरण और जीएसटी जैसे अहम बदलाव के साथ डिजिटल इंडिया के प्रोत्साहन से देश की अर्थव्यवस्था की ‘सफाई’ भी हो रही है। आधार के माध्यम से ट्रांजैक्शन्स में पारदर्शिता लाने की कोशिश भी जारी हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव
08 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का जब निर्णय किया गया तो इसका एक उद्देश्य ‘शैडो इकोनॉमी यानी आभासी अर्थव्यवस्था’ को भी कम करना था। ‘शैडो इकोनॉमी’ वस्तुओं एवं सेवाओं के उस उत्पादन और व्यापार का उल्लेख करती है, जो जान-बूझकर और अक्सर अवैध रूप से सार्वजनिक प्राधिकरणों से छिपी होती हैं। इससे महंगाई बढ़ती है और सरकार अपने वैध राजस्व से वंचित रह जाती है। जुलाई 2010 में भारत की आभासी अर्थव्यवस्था के आकार का अनुमान सकल घरेलू उत्पाद का 23.2 प्रतिशत लगाया था, लेकिन 2014 में नयी सरकार बनने के बाद ‘शैडो इकोनॉमी’ में उत्तरोत्तर कमी आती गई है और यह वर्तमान समय में (जुलाई, 2017 तक) देश की जीडीपी के मुकाबले 17.22 प्रतिशत है।

40% बढ़े पंजीकरण, बढ़े टैक्स पेयर्स
जीएसटी का रजिस्ट्रेशन शुरुआती तीन महीनों में 40 प्रतिशत तक बढ़ा है, जो सकारात्मक संकेत है। 72 लाख लोग पुराने सिस्टम से GST में आए और 28 लाख लोग नए जुड़े हैं। कुल रजिस्ट्रेशन एक करोड़ से ज्यादा हो गया है। इसके साथ ही नोटबंदी के बाद व्यक्तिगत टैक्स रिटर्न करने के अंतिम दिन पांच अगस्त तक 56 लाख नये करदाताताओं ने रिटर्न दाखिल किया, जबकि पिछले साल यह संख्या 22 लाख थी। पहली अप्रैल से लेकर 5 अगस्त के बीच कुल मिलाकर 2.79 करोड़ आईटी रिटर्न दाखिल किए गए जबकि 2016 में इस दौरान 2.23 और 2015 में 2 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए।

तीन सालों में हुए 7000 सुधार
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की कल्पना को साकार रूप दिया गया है।

व्यापार संतुलन की ओर इंडियन इकोनॉमी
इस साल सितंबर महीने में व्यापार घाटा 8.98 अरब डॉलर रहा जो पिछले वर्ष के इसी महीने के 9 अरब डॉलर के लगभग बराबर है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-जुलाई 2013-14 में अनुमानित व्‍यापार घाटा 62448.16 मिलियन अमरीकी डॉलर का था, वहीं अप्रैल-जनवरी, 2016-17 के दौरान 38073.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। जबकि अप्रैल-जनवरी 2015-16 में यह 54187.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर के व्‍यापार घाटे से भी 29.7 प्रतिशत कम है। यानी व्यापार संतुलन की दृष्टि से भी मोदी सरकार में स्थिति लगातार बेहतर होती जा रही है और 2013-14 की तुलना में लगभग 35 प्रतिशत तक सुधार आया है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की आर्थिक तस्वीर बदलने का कार्य लगातार जारी है। विमुद्रीकरण और जीएसटी जैसे अहम बदलाव के साथ सुधारवादी नीतियां को लेकर दुनियभर का तमाम एजेंसियों ने भारत के बारे में सकारात्मक राय जाहिर की है।

भारत 8 फीसदी दर से करेगा विकास : गोल्डमैन सैक्स
प्रसिद्ध निवेश संस्था गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2018-19 में भारत 8 फीसदी की दर से विकास करेगा। इसके पीछे का मुख्य कारण होगा, बैंकों का पुनर्पूंजीकरण। गोल्डमैन का मानना है कि बैंकों के पूंजीकरण से देश के क्रेडिट डिमांड और निजी निवेश को मजबूती मिलेगी। गोल्डमैन के मुताबिक, ‘हम भारत की जीडीपी विकास को वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए 8 फीसदी पर निर्धारित कर रहे हैं। 2017-18 में हालांकि जीडीपी विकास 6.4 फीसदी पर रहा, जिसका मुख्य कारण नोटबंदी और जीएसटी का शुरुआती प्रभाव रहा, लेकिन बैंकों का पुनर्पूंजीकरण जीडीपी के विकास में मददगार साबित होगा।’

दुनिया का सबसे तेज अर्थव्यवस्था वाला देश होगा भारत: मॉर्गन स्टेनली
भारत अगले 10 वर्षों में दुनिया में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हो जाएगा। वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली ने दावा किया है कि डिजिटलीकरण, वैश्वीकरण और सुधारों के चलते आने वाले दशक में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होगी। मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि डिजिटलीकरण से जीडीपी वृद्धि को 0.5 से 0.75 प्रतिशत की बढ़त मिलेगी और अनुमान है कि 2026-27 तक भारत की अर्थव्यवस्था 6,000 अरब डॉलर की हो जाएगी। मॉर्गन स्टेनली के अनुसार आने वाले दशक में भारत की सालाना जीडीपी वृद्धि दर 7.1 से 11.2 के बीच रहेगी।

7.5 की विकास दर हासिल करेगा भारत: मूडीज
अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग संस्था मूडीज के इंवेस्टर सर्विस सर्वे में पता चला है कि भारत की विकास दर अगले 12 से 18 महीने के दौरान 6.5 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में रहेगी। सर्वेक्षण में 200 से ज्यादा मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि संभावना को लेकर विश्वास व्यक्त किया। सर्वे में शामिल सभी लोगों का मानना था कि जीएसटी के लागू होने से 12 से 18 माह में आर्थिक वृद्धि बढ़ेगी।

मूडीज को विश्वास है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार अगले 3-4 साल में बढ़कर 8 प्रतिशत के आसपास पहुंच जाएगी। मूडीज के सहायक प्रबंध निदेशक मैरी डिरोन का कहना है कि भारत में चल रहे आर्थिक और संस्थागत सुधारों और आने वाले समय में होने वाले बदलावों को देखते हुए नोटबंदी से पैदा हुई अल्पकालिक अड़चन के बावजूद अगले 12 से 18 माह के दौरान भारत उसके जैसे दूसरे देशों के मुकाबले अधिक तेजी से वृद्धि करेगा।

काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है भारत- विश्व बैंक
विश्व बैंक के अध्यक्ष जिम यॉन्ग किम ने कहा है कि भारत काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। न्यूयॉर्क में ब्लूमबर्ग ग्लोबल बिजनेस फोरम की बैठक में उन्होंने कहा कि जापान, यूरोप और अमेरिका के साथ भारत तेज वृद्धि दर्ज कर रहा है। किम ने कहा कि भारत जैसा देश तेज वृद्धि दर्ज कर रहा है। हमारा मानना है कि जापान भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। यूरोप भी अधिक तेज वृद्धि दर्ज कर रहा है। अमेरिका भी आगे बढ़ रहा है। उन्‍होंने कहा कि निजी और सरकारी सेक्‍टर को और ज्‍यादा तालमेल के साथ काम करने का अवसर है। विश्व बैंक का कहना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से है।

जीएसटी को बताया बड़ा संरचनात्मक सुधार
इसके पहले जीएसटी को लेकर वर्ल्ड बैंक ने सकारात्मक टिप्पणी की। वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि जीएसटी जैसे कर सुधार के परिणामस्वरूप भारत 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल कर सकता है। वर्ल्ड बैंक ने कहा कि जीएसटी का लागू होना एक संरचनात्मक बदलाव इसलिए है क्योंकि इसने पूरे देश को एक बाजार के रूप में बदलने का काम किया है। इस कर सुधार के बाद 8 प्रतिशत की विकास दर हासिल करने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। जीएसटी अगर कुशल तरीके से क्रियान्वित होता है, तो विकास की गति तेज होगी।

IMF ने कहा अर्थव्यवस्था में आएगी तेजी
इसके पहले अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) भारत की विकास दर में 2017-2018 तक तेजी आने की उम्मीद जता चुकी है। आईएमएफ ने 2018 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.8 फीसदी की दर से विकास करने का अनुमान व्यक्त किया है, जो मौजूदा आर्थिक गतिविधियों की तुलना में कहीं अधिक है। आईएमएफ ने अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में कहा है कि भारत की विकास दर में 2017 और 2018 तक तेजी आने की उम्मीद है, जो अप्रैल, 2017 में जताए गए अनुमान के अनुकूल है।

निवेश के लिहाज से भारत आकर्षक जगह: पॉल पोलमैन
उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली दुनिया की चौथी सबसे बड़ी कंपनी यूनीलीवर के सीईओ पॉल पोलमौन ने कहा कि निवेश के लिहाज से भारत आकर्षक जगह है। एक अखबार को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वह अपने कारोबार के सबसे बड़े क्षेत्र अमेरिका के मुकाबले भारत में हो रहे विकास को लेकर वह ज्यादा उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि ग्रुप अपने कारोबार को बढ़ाकर और नए ब्रांड लाकर हिंदुस्तान यूनीलीवर में निवेश करने में लगा हुआ हैं और ये आगे भी जारी रहेगा। नोटबंदी और जीएसटी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि श्री मोदी स्मार्ट इंडिया, मेड इन इंडिया और स्वच्छ भारत जैसे बिग आइडियाज के साथ आगे बढ़ रहे हैं तथा अर्थ व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए उनके कई कदमों के हम समर्थक हैं।

भारत तेजी से उभरती अर्थ व्यवस्था- हार्वर्ड
भारत की अर्थव्यवस्था की गति और इसकी मजबूती पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में माना गया है कि भारत चीन से आगे बढ़कर वैश्विक विकास के आर्थिक स्तंभ के रूप में उभरा है और आने वाले दशक में वो नेतृत्व जारी रखेगा। सेंटर फॉर इंटरनेशल डेवलपमेंट (CID) ने 2025 तक सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्थाओं की लिस्ट में भारत को सबसे ऊपर रखा है। CID के अनुमान के अनुसार भारत 2025 तक सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं की सूची में सबसे ऊपर है। भारत में अर्थव्यवस्था के ग्रोथ की गति औसत 7.7 प्रतिशत की वार्षिक रहेगी। CID के रिसर्च से ये निकलकर आया है कि वैश्विक आर्थिक विकास की धुरी अब भारत है। चीन की तुलना में दुनिया का भारत पर भरोसा बढ़ा है, जो आने वाले एक दशक से अधिक समय तक कायम रह सकता है।

अर्थव्यवस्था में आगे बढ़ रहा भारत
एक अमेरिकी टॉप थिंक-टैंक काउंसिल में भारत, पाकिस्तान और साउथ एशिया मामलों की वरिष्ठ सदस्य अलीसा एयर्स ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था उसे व्यापक वैश्विक महत्व और देश की सैन्य क्षमताओं के विस्तार तथा आधुनिकीकरण के लिये ऊर्जा दे रही है। अलीसा के अनुसार, ‘भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को बेहतर वैश्विक उछाल दिया है। इसकी मदद से भारत अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रहा है।’ फोर्ब्स में छपे आर्टिकल में अलीसा कहती हैं, ‘पिछले वर्षों में भारत दुनिया भर में विदेशी और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नीतियों के संदर्भ में एक बड़ा कारक बनकर उभरा है और अब वैश्विक मंच पर अब भारत ज्यादा मुखर दिखाई दे रहा है। दरअसल भारत खुद को एक ‘प्रमुख शक्ति’ के रूप में देख रहा है।’

‘सपनों’ के साथ आगे बढ़ रहा भारत
मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विश्लेषक फ्रिट्ज लॉज ने ‘द सिफर ब्रीफ’ में एक लेख में भी भारत की प्रशंसा की है और पीएम मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। फ्रिट्ज लॉज ने लिखा, ‘पीएम नरेंद्र मोदी भारत को आर्थिक, सैन्य, भू-राजनीतिक शक्ति से योग्य बनाने के अपने सपने के साथ आगे बढ़ रहे हैं।’

भारत बना विदेशी कंपनियों के लिए पसंदीदा जगह- चीन
चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि भारत विदेशी कंपनियों के लिए खूब आकर्षण बन रहा है। अखबार ने एक लेख में कहा है कि कम लागत में उत्पादन धीरे-धीरे चीन से हट रहा है। अखबार ने लिखा है कि भारत सरकार ने देश के बाजार के एकीकरण के लिए जीएसटी लागू किया है। यह अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने वाला है। इस नई टैक्स व्यवस्था से मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है क्योंकि इसमें राज्य और केंद्र के विभिन्न करों को मिला दिया गया है। लेख में कहा गया है कि आजादी के बाद के सबसे बड़े आर्थिक सुधार जीएसटी से फॉक्सकॉन जैसी बड़ी कंपनी भारत में निवेश करने के अपने वादे के साथ आगे बढ़ेंगी।

इंग्लैंड से बड़ी अर्थव्यवस्था बना भारत
पीएम मोदी की विकास नीतियों के कारण आर्थिक तरक्की के मामले में भारत ने इंग्लैंड को पछाड़ दिया है। भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। 17 दिसंबर 2016 को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले सौ साल में पहली बार ऐसा है कि कभी दुनिया के एक बड़े हिस्से पर राज करने वाला ब्रिटेन उपनिवेश रहे भारत से पीछे हो गया है। हालांकि 2011 में विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई थी कि भारत अर्थव्यवस्था के मामले में 2020 तक इंग्लैंड को पीछे छोड़ देगा लेकिन भारत ने उससे काफी पहले ही इंग्लैंड को पछाड़ दिया।

दुनिया देख रही भारतीय शेयर बाजार का दम
भारतीय शेयर बाजार में लगातार उछाल जारी है। 13 जुलाई को पहली बार सेंसेक्स 32,000 का आंकड़ा भी पार गया। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साहसिक और त्वरित फैसले लेने, उसे लागू करने के लिए आगे बढ़कर काम करने की कार्यशैली से भारतीय अर्थव्यवस्था में दिन-ब-दिन सुधार हो रहा है। मोदी सरकार के तीसरी वर्षगांठ पर जब केंद्र सरकार ने तीन साल का लेखा-जोखा 26 मई, 2017 को जारी किया। तब शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक पहली बार 31,000 के आंकड़े को पार किया था। तब सेंसेक्स का यह उछाल ऐतिहासिक था।

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