Home नरेंद्र मोदी विशेष मोदी सरकार के विकासवादी कदमों से घबराया है विपक्ष

मोदी सरकार के विकासवादी कदमों से घबराया है विपक्ष

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आज से ठीक 41 महीने पहले केंद्र की सत्ता में आते ही मोदी सरकार भ्रष्टाचार और कालाधन पर शिकंजा कसने के साथ जनहित की योजनाओं को जमीन पर लागू करने को लेकर अपना संकल्प जता चुकी थी। तब से लेकर यह सरकार लगातार उन योजनाओं और कदमों को अमलीजामा पहनाने में जुटी है जिनसे गरीबों और किसानों का कल्याण हो और देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार में रहे। उसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए मंगलवार 24 अक्टूबर को सरकार ने दो बड़ी घोषणाएं की जिनमें से एक है सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ताकत भरने के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये लगाने का फैसला तो दूसरा है सड़कें और हाइवे के साथ इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर 7 लाख करोड़ रुपये खर्च करना। भारत लगातार तीसरे साल विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल तो है ही अब ये घोषणाएं अर्थव्यवस्था की स्पीड में बड़ी तेजी लाने वाली साबित हो सकती हैं।

सुधार कार्यक्रमों पर लग रही मुहर

इस बात की मजबूत संभावना जताई जा रही है कि कारोबार की सुगमता (Ease of doing business) से संबंधित विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग में सुधार  होने जा रहा है। ये संभावना बनी है विभिन्न क्षेत्रों में सरकार द्वारा किये गए सुधार से। वर्ष 2018 के लिए विश्व बैंक की कारोबार सुगमता व्यापार सर्वेक्षण रिपोर्ट 31 अक्‍टूबर को जारी होने वाली है। Department of Industrial Policy & Promotion (DIPP) के सचिव रमेश अभिषेक ने इस मामले में एक सवाल के जवाब में कहा:  ‘’हमने काफी मेहनत की है, बड़ी संख्या में सुधार कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है और इसीलिए हम रैंकिंग में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं।‘’

विदेश निवेश की बौछार की उम्मीद

वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने भी हाल में यही संकेत देते हुए कहा था कि देश को व्यापार सुगमता के मोर्चे पर जल्दी ही अच्छी खबर सुनने को मिल सकती है। Ease of doing business से संबंधित सर्वे को प्रतिभागी देश गंभीरता से लेते हैं क्योंकि यह विदेशी निवेशकों को निवेश की जगह के बारे में निर्णय करने में मदद करता है। पिछले साल Ease of doing business के सर्वे में भारत की रैंकिंग केवल एक पायदान सुधरकर 130 रही थी।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बहार

बैंकों को recapitalisation के लिए सरकार द्वारा बड़ी रकम दिये जाने के एलान के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बहार नजर आने लगी है। वैश्वित वित्तीय सेवा कंपनी Morgan Stanley ने SBI के शेयर को अपग्रेड करते हुए ओवरवेट कर दिया है। 2011 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। उसने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) , बैंक ऑफ बड़ौदा, ICICI बैंक और Axis बैंक को भी ओवरवेट में अपग्रेड कर दिया। SBI  और PNB के शेयर तो 52 हफ्ते के अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गये।

‘बैंकों की सभी जरूरतों का एकमुश्त ध्यान’

30 से ज्यादा देशों में अपना नेटवर्क रखने वाले global investment bank Nomura के मुताबिक bank recapitalisation एक बड़ा ‘game-changer’ है जिससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की re-rating की स्थिति बनी है। Nomura ने अपने एक नोट में कहा है कि Recapitalisation package में सभी जरूरतों का एकमुश्त ध्यान रखा गया है।

सरकार के कदमों का जोरदार स्वागत

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में मजबूती भरने और infrastructure projects पर बड़े खर्च करने के सरकार के निर्णय का बैंकिंग और उद्योग जगत ने जोरदार स्वागत किया है। SBI के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा: ‘’बैंकों को recapitalise करने को लेकर यह एक साहसिक कदम है। यह एक मील का पत्थर साबित होने वाली घोषणा है जो सचमुच वक्त की एक जरूरत थी। यह कदम infrastructure जैसे सेक्टर में ज्यादा निवेश लाएगा जिससे मांग और आपूर्ति में एक संतुलन बना रहेगा। इस फंड से बैंकों की रिस्क और क्रेडिट कैपिटल संबंधी जरूरतों को भी सही तरीके से मैनेज करने में मदद मिलेगी।‘’

CII के Director General चंद्रजीत बनर्जी ने कहा: ‘’ एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे पर हुए कैबिनेट के इस निर्णय का स्वागत है। हमें recapitalisation bonds  की घोषणा को लेकर विशेष खुशी हुई है जिसकी CII ने मजबूती से सिफारिश की थी।‘’

बनर्जी ने यह भी कहा: ‘’सड़कों और हाइवे पर रणनीतिक तरीके से खर्च बढ़ाने के सरकार के फैसले से अर्थव्यवस्था के विकास को बहुत बढ़ावा मिलेगा। port connectivity, border और cross-border रोड भी इस खर्च के दायरे में होंगे जो कि एक अच्छी बात है।‘’

Federation of Indian Chamber of Commerce and Industry (FICCI) के President पंकज पटेल ने कहा: ‘’ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के recapitalisation में निवेश के निर्णय से ऋण देने की बैंकों की क्षमता बढ़ेगी। इसका ज्यादा फायदा विशेष रूप से MSME (micro small and medium enterprises) सेक्टर को होगा।’’

8 फीसदी विकास दर पाने में होगी आसानी: IMF

वहीं अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)  ने बैंकों को लेकर उठाये गए कदम को सही बताते हुए मोदी सरकार की तारीफ की है। उसने कहा है कि सरकारी बैंकों में पूंजी डालना इकोनॉमी के लिए सकारात्मक कदम है।  इससे देश की आर्थिक ग्रोथ को बढ़ावा मिलेगा, और 8 फीसदी की आर्थिक विकास दर हासिल करने में आसानी होगी।

सरकार के विकासवादी कदमों से घबराया है विपक्ष

केंद्र की सत्ता में रही पिछली यूपीए सरकार ने एक पर एक कई घोटालों में अपना हाथ और चेहरा काला करने के बाद मोदी सरकार को विरासत में लुंज-पुंज अर्थव्यवस्था दी थी, लेकिन मोदी सरकार ने अपने कदमों से देश की दशा और दिशा में विकास का रंग भरने के लिए ठान रखी है। फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी जिस तरह से अर्थव्यवस्था की बेहतरी के लिए सरकार के हर कदम की आलोचना में लगे हैं उसके पीछे उनका निहित इरादा जाहिर होता है। वो सुधार के बड़े से बड़े कदमों की सिर्फ इसलिए आलोचना करते हैं क्योंकि उन्हें ये डर है कि मोदी सरकार के किसी कदम को अच्छा कहने से उनकी चुनावी राजनीति की गाड़ी बैठ जाएगी।

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