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ब्लैक मनी रखने वालों को छोड़ेगी नहीं मोदी सरकार, बड़े स्तर पर कार्रवाई की तैयारी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने ब्लैक मनी के खिलाफ जबरदस्त अभियान चलाया है। यही वजह है कि काला धन रखने वालों की रातों की नींद खराब हो गई है। नोटबंदी के फैसले के बाद तो काला धन रखने वालों की कमर ही टूट गई। अब मोदी सरकार ने एक बार फिर ब्लैक मनी पर शिकंजा कसने के लिए एक मेगा ऐक्शन प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है। केंद्र सरकार कॉरपोरेट से लेकर आम आदमी के हर वित्तीय लेनदेन नजर रखना चाहती है। बताया जा रहा है कि इस प्लान पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने काम भी शुरू कर दिया है।

वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक स्विस बैंकों के साथ सरकार घरेलू मार्केट में ब्लैक मनी का आवागमन रोकना चाहती है। सरकार वित्तीय लेनदेन में पारदर्शिता लाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में जरूरी है कि देश में ब्लैक मनी पैदा होने और उसके फ्लो पर अंकुश लगाया जाए। इसके लिए सभी तरह के वित्तीय लेनदेन पर नजर रखने की जरूरत है।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए कैश स्टांप खरीदने वालों नजर
एक और बात सामने आई है कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, एमपी और झारखंड में प्रॉपर्टी रजिस्ट्री के लिए कैश स्टांप खरीदे गए हैं। इसे देखते हुए राज्यों के प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन विभागों पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की नजर है। स्टांप खरीद में कैश के लेनदेन के खुलासे से पता चला है कि 2 लाख की तय लिमिट से ज्यादा की खरीदारी कैश में की गई है। इस बारे में ट्रेजरी और स्टांप वेंडरों ने जानकारी छिपाई है। हरियाणा, यूपी, एमपी और झारखंड में इस तरह के दर्जनों मामले सामने आए हैं। इस पर राज्यों से हर महीने जानकारी भेजने को कहा गया है।

एक नजर डालते हैं ब्लैक मनी के खिलाफ मोदी सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और अब तक काली कमाई से खरीदी गई कितनी संपत्ति जब्त हुई है।

 43 अरब रुपये की बेनामी संपत्ति जब्त
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने “ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा” के नारे के साथ देश की सत्ता संभाली थी। चार वर्षों के कार्यकाल के दौरान मोदी सरकार ने इस नारे पर पूरी तरह से अमल किया है। पीएम मोदी ने अपनी नीतियों से भ्रष्टाचार के सभी स्रोतों पर तो लगाम लगाई ही है, साथ ही पूर्व में भ्रष्टाचार द्वारा अर्जित अकूत दौलत और बेनामी संपत्ति पर भी शिकंजा कसा है। नवंबर 2016 में मोदी सरकार ने बेनामी संपत्ति कानून में संशोधन कर उसे धारदार बनाया और इसी का असर है कि डेढ़ साल के भीतर आयकर विभाग ने 4,300 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति जब्त करने में कामयाबी हासिल की है।

आयकर विभाग ने संशोधित बेनामी कानून लागू होने के डेढ़ साल के भीतर 4,300 करोड़ रुपये मूल्य की 1,500 बेनामी संपत्तियां कुर्क की हैं। जयपुर, मुंबई और भोपाल इस सूची में शीर्ष पर हैं और इनमें से प्रत्येक शहर में 200 परिसंपत्तियां कुर्क की गई हैं। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पटना में 30 और लखनऊ में 50 परिसंपत्तियां कुर्क की गई हैं, वहीं कोलकाता, चंडीगढ़ और हैदराबाद में सौ से अधिक बेनामी संपत्तियां जब्त की गई हैं।

सौजन्य

आयकर विभाग के अधिकारियों के मुताबिक संशोधित कानून के लागू होने के बाद से ही आयकर विभाग ने बेनामी लेनदेन को चिन्हित करने की दिशा में काम किया है। करीब 1,500 से अधिक परिसंपत्तियां अब तक कुर्क की जा चुकी हैं। कई अन्य लोग निगरानी में हैं। इसके दायरे में सोने के कारोबारी, बैंकर, हवाला कारोबारी, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और राजनेता भी हैं। आपको बता दें कि बेनामी कानून सन 1988 से मौजूद था, लेकिन मोदी सरकार ने इसके प्रावधानों को 1 नवंबर, 2016 से काफी सख्त बनाया है। कानून का उल्लंघन करने वालों को 1 से 7 वर्ष का सश्रम कारावास हो सकता है और परिसंपत्ति के बाजार मूल्य के 25 फीसदी तक जुर्माना चुकाना पड़ सकता है।

बेनामी संपत्ति बताने वाले को 5 करोड़ रुपये इनाम देगी मोदी सरकार
बेनामी संपत्ति रखने वालों और कर चोरी करने वालों के विरुद्ध केंद्र सरकार और सख्त हो गई है। हाल ही में वित्त मंत्रालय ने घोषणा की है कि अगर कोई व्यक्ति बेनामी प्रहिबिशन यूनिट्स में जॉइंट या अडिशनल कमिश्नर के सामने किसी ऐसी संपत्ति के बारे में जानकारी देता है तो उसे यह इनाम मिलेगा। अब आप आयकर विभाग को बेनामी संपत्ति की जानकारी देकर एक करोड़ रुपये इनाम पा सकते हैं। विदेश में काले धन की जानकारी देकर पांच करोड़ रुपये तक इनाम के हकदार बन सकते हैं। वित्त मंत्रालय के आदेश के मुताबिक ऐसी संपत्ति की जानकारी इनकम टैक्स विभाग के इन्वेस्टिगेशन निदेशालय को देनी होगी। ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति को विभाग की ओर से 5 करोड़ रुपये तक का इनाम दिया जाएगा। बेनामी ट्रांजेक्शंस इन्फर्मेंट्स रिवॉर्ड स्कीम, 2018 के तहत यह राशि सूचना देने वाले को दी जाएगी।

जानकारी देने वालों का नाम गुप्त रहेगा
इस स्कीम का लाभ विदेशी नागरिक भी उठा सकते हैं। बेनामी संपत्तियों के बारे में जानकारी देने वाले शख्स की पहचान को गुप्त रखा जाएगा और पूरे मामले में सख्ती से गोपनीयता का पालन किया जाएगा। बेनामी ट्रांजेक्शंस इन्फर्मेंट्स रिवॉर्ड स्कीम, 2018 के बारे में इनकम टैक्स के दफ्तरों और उसकी वेबसाइट पर पूरी जानकारी उपलब्ध है।

बेनामी ट्रांजेक्शन्स ऐक्ट, 2016 से कसा शिकंजा
गौरतलब है कि हाल ही में सरकार ने 1988 के बेनामी ऐक्ट को संशोधित कर बेनामी ट्रांजेक्शन्स ऐक्ट, 2016 पारित कराया है। अब बेनामी संपत्तियों की खोज में लोगों के सहयोग को बढ़ाने के लिए सरकार ने यह इनामी योजना घोषित की है। बेनामी लेनदेन और संपत्तियों को उजागर किए जाने और ऐसी संपत्तियों से मिलने वाली आय के बारे में सूचना देने वाले लोगों को यह इनाम हासिल होगा।

टैक्स चोरी की जानकारी पर मिलेंगे 50 लाख
केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स चोरी के मामलों को उजागर करने के लिए भी 50 लाख रुपये की इनामी योजना की घोषणा की है। 1961 के आईटी ऐक्ट के तहत सरकार ने इनकम टैक्स इनफर्मेंट्स रिवॉर्ड स्कीम शुरू की है। इसके तहत यदि कोई व्यक्ति टैक्स चोरी के मामले की जानकारी आयकर विभाग के जांच निदेशालय में देता है तो इस इनाम का हकदार होगा।

संदेसारा ग्रुप की 4701 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त
बैंकों को करोड़ों का चूना लगाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है। पांच हजार करोड़ रुपये का घोटाला करने वाले संदेसारा ग्रुप की 4701 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति जब्त कर ली गई है। गुरुवार को ईडी ने संदेसारा ग्रुप के मालिकों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की और प्रोपर्टी, रेंज रोवर की गाड़ी, फर्जी चेकबुक, 200 से ज्यादा बैंक खाते और बायोटेक प्लांट आदि जब्त किये। गुजरात, मुंबई में कई जगहों पर छापेमारी के दौरान विदेशों में 50 से ज्यादा बैंक खाते भी पाए गए। गौरतलब है कि संदेसारा ग्रुप ने आंध्रा बैंक, यूको बैंक, एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया और इलाहाबाद बैंक से लोन लिया था। आरोप है कि संदेसारा ग्रुप ने देश विदेश में 300 शेल कंपनियां बना कर लोन के पैसे का गबन किया है।

केंद्र सरकार की ओर से भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए एक के बाद एक कई निर्णय लिए गये हैं। 

कर बचाने में मददगार देशों के साथ कर संधियों में संशोधन मॉरीशस, स्विटजरलैंड, सऊदी अरब, कुवैत आदि देशों के साथ कर संबंधी समझौता करके सूचनाओं को प्राप्त करने का रास्ता सुगम कर लिया गया है।

नोटबंदी- कालेधन पर लगाम लगाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के बाद सबसे बड़ा कदम 08 नवंबर 2016 को उठाया। नोटबंदी के जरिए कालेधन के स्रोतों का पता लगा। लगभग तीन लाख ऐसी शेल कंपनियों का पता चला जो कालेधन में कारोबार करती थी। इनमें से लगभग दो लाख कंपनियों और उनके 1 लाख से अधिक निदेशकों की पहचान करके कार्रवाई की जा रही है।

• रियल एस्टेट कारोबार में 20,000 रुपये से अधिक कैश में लेनदेन पर जुर्माना- रियल एस्टेट में कालेधन का निवेश सबसे अधिक होता था। पहले की सरकारें इसके बारे में जानती थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करती थीं। इस कानून के लागू होते ही में रियल एस्टेट में लगने वाले कालेधन पर रोक लग गई।

• राजनीतिक चंदा- राजनीतिक दलों को 2,000 रुपये से ज्यादा कैश में चंदा देने पर पाबंदी। इसके लिए इलेक्टोरल बॉन्ड लाने का ऐलान किया गया।

• स्रोत पर कर संग्रह- 2 लाख रुपये से अधिक के कैश लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। इससे ऊपर के लेनदेन चेक, ड्रॉफ्ट या ऑनलाइन ही हो सकते हैं।

• ‘आधार’ को पैन से जोड़ा- कालेधन पर लगाम लगाने के लिए ये एक बहुत ही अचूक कदम है। ये निर्णय छोटे स्तर के भ्रष्टाचारों पर भी नकेल कसने में काफी कारगर साबित हो रहा है।

• सब्सिडी में भ्रष्टाचार पर नकेल- गैस सब्सिडी को सीधे बैंक खाते में देकर, मोदी सरकार ने हजारों करोड़ों रुपये के घोटाले को खत्म कर दिया। इसी तरह राशन कार्ड पर मिलने वाली खाद्य सब्सिडी को भी 30 जून 2017 के बाद से सीधे खाते में देकर हर साल 50 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत की जा रही है। इससे निचले स्तर पर चल रहे भ्रष्टाचार को पूरी तरह से खत्म करने में कामयाबी मिली है।

• प्राकृतिक संसाधानों की ऑनलाइन नीलामी- मोदी सरकार ने सभी प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसकी वजह से पारदर्शिता बढ़ी है और घोटाले रुके हैं। यूपीए सरकार के दौरान हुए कोयला, स्पेक्ट्रम नीलामी जैसे घोटालों में देश का इतना खजाना लूट लिया गया था कि देश के सात आठ शहरों के लिए बुलेट ट्रेन चलवायी जा सकती थी।

• आधारभूत संरचनाओं के निर्माण की जियोटैगिंग- सड़कों, शौचालयों, भवनों, या ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले सभी निर्माण की जियोटैगिंग कर दी गई है। इसकी वजह से धन के खर्च पर पूरी निगरानी रखी जा रही है। 

मोदी सरकार ने चार वर्षों में भ्रष्टाचार और सरकारी धन की लूट-खसोट रोकने के लिए कई कदम उठाए हैं। एक नजर डालते हैं उन कदमों पर-

मोदी सरकार के व्यापक सुधारों ने कालेधन-भ्रष्टाचार पर कसी नकेल
संविधान में संसाधनों के न्यायोचित और समान वितरण के लिए जिस व्यवस्था को मूर्त रूप दिया गया, उसमें कांग्रेस के शासनकाल के दौरान घुन लग गया। व्यवस्था को चलाने वालों में नैतिक मूल्यों का ऐसा पतन हुआ था कि उन्होंने कोयले, पानी, स्पेक्ट्रम, अनाज, देश की सुरक्षा के लिए खरीदे जाने वाले हथियारों को ही व्यक्तिगत मुनाफा कमाने का तरीका बना लिया था। साल 2014 तक स्थिति इतनी अधिक भयावह हो गई कि देश के हर गली -मोहल्ले और सड़क पर कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन खड़ा हो गया। इस आंदोलन के कारण कांग्रेस को 2014 के लोकसभा चुनाव में करारी हार का मुंह देखना पड़ा और नरेन्द्र मोदी ऐतिहासिक पूर्ण बहुमत के साथ प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हुए।

देश में कालाधन रखने वालों की जानकारी को एकत्रित किया कांग्रेस सरकार में 2004-14 के दौरान, देश में भ्रष्टाचार चरम पर था। 2009 में सर्वोच्च न्यायालय में कालेधन पर एक लोकहित याचिका दायर की गई। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाई गई कि देश में पैदा हो रहे कालेधन को जिसे विदेशी बैंकों में जमा किया जा रहा है, उसकी छानबीन की जाए और उस पर रोक लगाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। इस याचिका पर, 2011 में सर्वोच्च न्यायालय ने तब की केन्द्र की कांग्रेस सरकार को कालेधन के बारे में पता लगाने के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश दिया। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह  ने कुछ विशेष लोगों के दबाव में एसआईटी का गठन नहीं किया। 26 मई 2014 को नई सरकार बनने के साथ ही  प्रधानमंत्री मोदी ने पहली कैबिनेट बैठक मे ही न्यायाधीश एम बी शाह की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन कर दिया। एसआईटी अबतक सरकार और सर्वोच्च न्यायालय को कई रिपोर्ट्स के साथ कालेधन के मालिकों की लिस्ट  दे चुकी है। इन जानकारियों के ही आधार पर सरकार ने कालेधन पर नकेल कसने के लिए कई सारे कदम उठाये ।

कालेधन में लेनदेन खत्म करने के लिए जन धन योजना – बैंकिंग व्यवस्था के माध्यम से लेनदेन होने से, पूरी अर्थव्यवस्था में रुपये का प्रवाह पारदर्शी होता है, लेकिन 2014 तक देश में बहुत ही कम लोगों का बैंकों में खाता होता था, जिसकी वजह से व्यवस्था में पूरा लेनदेन पूरी नगद राशि में ही होता। नगद में लेन देन होने से कालाधन आसानी से पैदा हो रहा था और आर्थिक व्यवस्था में भ्रष्टाचार चरम पर था लेकिन कांग्रेस की मनमोहन सरकार के पास इसे नियंत्रित करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अगस्त, 2014 को प्रधानमंत्री जन धन योजना का शुभारंभ करके, नगद में लेनदेन की स्थिति को बदल दिया। आज पूरे देश में लगभग 32 करोड़ वयस्कों के पास बैंक खाता हैं।

कालाधन पैदा करने वाले स्रोतों को बंद करने के लिए कानून बनायाप्रधानमंत्री मोदी ने एसआईटी के गठन के साथ -साथ देश में उन स्रोतों को जहां से कालाधन पैदा हो रहा था और नगद में लेनदेन पर लगाम लगाने के लिए नये कानूनों को संसद से पारित करवाया। इनमें से कुछ प्रमुख कानून इस तरह से हैं-

• स्विस बैंकों में रखे गए काले धन के बारे में सूचना साझा करने के मकसद से भारत और स्विट्जरलैंड के बीच संशोधित दोहरा कर बचाव संधि (डीटीएए) किया। डीटीएए के तहत कई देशों के साथ समझौते किए गए। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन के देश, साल 2017 से काला धन जमा करने वालों के नाम की लिस्ट देने के लिए सहमत हो गए हैं।

• विदेशो में भारतीयों के काले धन पर लगाम लगाने के लिए कालाधन और इम्‍पोजिशन ऑफ टैक्‍स एक्ट, 2015 को संसद में पारित करवाया। इस कालाधन कानून के तहत विदेश से होने वाली आय और संपत्ति के मू्ल्यांकन के नियमों को लागू कर दिया। इसमें विदेशी संपत्तियों और आय का खुलासा नहीं करने पर सख्‍त सजा का प्रावधान किया गया । इसके जरिए विदेशी संपत्तियों से होने वाली आय को छुपाने और कर चोरी पर 10 साल की सजा निश्चित कर दी गई। इसके अलावा 300 प्रतिशत जुर्माने का प्रावधान भी किया।

 काले धन पर लगाम लगाने के लिए आईडीएस इनकम डिक्लेरेशन स्कीम 1 जून 2016 से लागू किया। यह स्कीम 30 सितंबर 2016 तक जारी रही। इस योजना के माध्यम से ही देश में लोगों ने हजारों करोड़ रुपये  का कालाधन घोषित किया।

• रियल एस्टेट में कालेधन पर लगाम लगाने के लिए इनकम टैक्स एक्ट में  बदलाव किया गया। इस बदलाव ने रियल एस्टेट में 20 हजार से ज्यादा के नगद लेनदेन पर रोक लगा दी। 20 हजार से अधिक नगद लेनदेन  करने पर 20 फीसदी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया। 1 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति की खरीददारी या बिक्री पर पैन देना अनिवार्य हो चुका है।

• काले धन पर अंकुश लगाने के लिए बेनामी लेनदेन (प्रतिबंध) संशोधन विधेयक को संसद में पास किया गया। 1 नवंबर 2016 को इस कानून को लागू कर दिया गया। इससे रियल एस्टेट और सोने की  बेनामी खरीदारी पर लगाम लगी। कानून ने  विदेशों में काला धन छिपाने वालों को दस साल  की सजा और नब्बे फीसदी का जुर्माना कर दिया। अब इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में संपत्ति की जानकारी छिपाने पर सात साल की सजा दी जाती है।

नोटबंदी के ऐतिहासिक कदम से तीन लाख फर्जी कंपनियों का कालेधन का धंधा बंद
08 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री मोदी ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 500 और 1000 रुपये के नोट को बंद करने का निर्णय लिया। कालेधन पर, प्रधानमंत्री मोदी का यह सबसे घातक सर्जिकल स्ट्राइक था। इसने देश में जाली नोटों के कारोबार को पूरी तरह से बंद कर दिया। कालेधन और जाली नोटों से चलने वाले उग्रवादी और आतंकवादी संगठनों की कमर टूट गई। नोटबंदी ने देश की तीन लाख फर्जी कंपनियों को बेनकाब कर दिया। इन कंपनियों का पता चलते ही सरकार ने इन्हें खत्म कर दिया और कंपनियों के निदेशकों को आजीवन ब्लैकलिस्ट कर दिया। नोटबंदी ने देश में  टैक्स देने वालों की संख्या को दोगुना कर दिया। आज देश में  सात करोड़ लोग टैक्स देते हैं, जबकि अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कांग्रेस सरकार के दौरान मात्र तीन करोड़ लोग टैक्स देते थे।

डिजिटल पेमेंट ने कालेधन के स्रोत को खत्म किया-प्रधानमंत्री मोदी ने देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए भीम एप लॉन्च किया। इस एप से 89 बैंकों में लेनदेन करने के लिए डिजिटल सुविधा जनता के हाथों में पहुंच गई, बैंकिंग के काम सरल और देश में हर जगह सुलभ हो गए।  मार्च 2018 तक देश में 2.64 करोड़ लोग भीम एप का इस्तेमाल कर रहे थे। एप के जरिए लेनदेन देश में तेजी से बढ़ रहा है। 18 मार्च 2018 तक 4972.69 करोड़ रुपये का लेन देन लोग कर चुके थे। इसी तरह से क्रेडिट, डेबिट कार्ड और चेक के जरिए होने वाले लेनदेन ने आर्थिक व्यवस्था को पारदर्शी बना दिया है, जो 2014 के पहले एकदम से ही नहीं थी।

सरकारी खरीद और नीलामी में ऑनलाइन व्यवस्था ने भ्रष्टाचार खत्म कियाकांग्रेस सरकार ने कोयला, स्पेक्ट्रम, जमीन और अयस्कों की नीलामी में जिस तरह से लाखों करोड़ रुपये का घोटाला किया था उसकी पुनरावृत्ति को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी को ऑनलाइन कर दिया। व्यवस्था पारदर्शी बन चुकी है। अब सरकार के विभिन्न विभागों में सामानों की खरीदारी के लिए ऑनलाइन मार्केट GeM बना चुका है, जिस पर लाखों करोड़ की खरीददारी होती है और सरकारी कामों में बिचौलियों के राज का अंत हो चुका है।

सरकारी विभागों में कार्य करने का तरीका बदला2014 तक देश के केन्द्रीय मंत्रालयों के कार्यालय और अधिकारियों में जनता के प्रति संवेदनहीनता चरम पर थी। सरकारी कार्यालयों में अस्वच्छता और अनुशासनहीनता का आलम था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस स्थिति में जबरदस्त परिवर्तन ला दिया है। बायोमेट्रिक प्रणाली ने समय पर कार्यालय पहुंचने का अनुशासन पैदा किया है। काम में अनुशासन को बनाने के लिए  प्रधानमंत्री स्वयं हर महीने PRAGATI – Pro-Active Governance and Timely Implementation की बैठकों के जरिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों की समीक्षा करते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने एक तरफ जहां सरकारी कार्यालयों में कामकाज करने का ढंग बदला है वहीं जनता को सरकार से जुड़ने और हर समस्या के समाधान पर सुझाव देने के लिए MyGov का प्लेटफॉर्म भी दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले चार सालों में आर्थिक व्यवस्था और सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार, अनुशासनहीनता और संवेदनहीनता को खत्म करके एक सुशासन की व्यवस्था दी है, जो पिछली कांग्रेसी सरकारें करने में अक्षम थी।

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