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मोदी सरकार में डिजिटल होता इंडिया

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अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग संस्था मूडीज, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली संसार की चौथी बड़ी कंपनी यूनीलिवर के सीईओ पॉल पोलमैन, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी मॉर्गन स्टेनली, जैसी अनेक संस्थाएं और व्यक्ति अगर भारत की तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था के प्रति अत्यंत आशान्वित हैं तो इसके पीछे मोदी सरकार की वे नीतियां हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी निरंतर अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहीं।

आइए देखते हैं कि मोदी सरकार ने इस क्षेत्र को सुदृढ़ता प्रदान करने हेतु प्रमुखता से क्या प्रयास किए।

डिजिटल इंडिया से पारदर्शी हुआ सरकारी तंत्र

आज देश की युवा शक्ति भारत का गौरव है, देश की आशाओं का केंद्र है। भारतीय युवाओं का संपूर्ण विकास देश की प्राथमिकता है और इन युवाओं  की प्राथमिकताओं में सर्वोच्च है- भ्रष्टाचार मुक्त सरकारी तंत्र। इसी विचार को कार्यान्वित करने के उद्देश्य के साथ वर्ष ‘डिजिटल इंडिया’ की शुरुआत की गई। सरकारी कामकाज में भागीदारीयुक्त पारदर्शिता और जिम्मेदार सरकार बनाना, नागरिकों हेतु सरकारी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप में उन तक पहुंचाना इसके लक्ष्य रहे हैं। साथ ही साधन-संपन्न और वंचित वर्ग के बीच की खाई को पाटना भी इस सरकार के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। मोदी सरकार इस तथ्य में विश्वास करती है कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह संपन्न वर्ग का हो या वंचित वर्ग का, सभी का समय अमूल्य है, जिसे हर जगह लंबी-लंबी लाइनों में लगकर नष्ट नहीं किया जाना चाहिए। इस विचार को क्रियान्वित करने के लिए संपूर्ण तंत्र का डिजिटलीकरण किया जाना आवश्यक है। ‘डिजिटल इंडिया’ इसी लक्ष्य की ओर एक पहल है। इस माध्यम से देश को डिजिटल के तौर पर सशक्त ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने का पूर्ण प्रयास किया जा रहा है। डिजिटल इंडिया का लाभ पहुंचाने के लिए देश में 2.5 लाख कॉमन सर्विस सेंटर का नेटवर्क स्थापित किए गए। इस उद्यमिता से गरीब, वंचित, दलित एवं महिलाओं को बड़ी संख्या में जोड़ा गया, ताकि ‘सबका साथ सबका विकास’ की अवधारणा को आगे बढ़ाया जा सके। इन केंद्रों में 34 हजार से अधिक महिलाएं जन औषधि, आधार सेवा, टिकेट बुकिंग जैसी इकाइयों के साथ जुड़कर कार्य कर रही हैं। डिजिटलीकण द्वारा कार्य में दक्षता लाकर, मानवीय श्रम को कम करके तथा उत्पादन में बढ़ोतरी द्वारा प्रत्येक क्षेत्र में क्रांति उत्पन्न करने के प्रयास जारी है। यह सर्वविदित सत्य है कि वर्तमान मोदी सरकार के कार्यकाल में डिजिटलीकरण के कारण संपूर्ण शासन प्रणाली में, शिक्षा के क्षेत्र में, स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में भारी सुधार हुआ है। कैशलेस अर्थव्यवस्था और डिजिटल लेन-देन व्यावहारिक रूप ले चुके हैं।

शिक्षा के नए सबक

यदि हम बढ़ती अर्थव्यवस्था और उसमें युवा भारत के योगदान की बात करते हैं तो हमें इस बात पर भी ध्यान देना पड़ेगा कि उन्नत कल का सामना करने के लिए वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की आवश्यकता है, जो कि केवल डिजिटलीकरण द्वारा ही संभव हो सकता था। मोदी सरकार द्वारा इस से संबंधित अनेक योजनाओं को मूर्त रूप दिया गया। शिक्षा का चाहे प्राथमिक स्तर हो, माध्यमिक स्तर हो, उच्च स्तर हो अथवा अनुसंधान कार्य, सभी में क्रांतिकारी परिवर्तन आए हैं।

केवल ‘स्वयंम’ जैसी योजना की ही बात की जाए तो नौवी कक्षा से लेकर स्नातक स्तर तक उसके पाठ्यक्रम की संपूर्ण सामग्री विद्यार्थी को घर बैठे सुलभ है।  इ-पाठशाला, मिड डे मील निगरानी एप, शाला सिद्धि, शाला दर्पण, ओलैब डिजिटल योजना, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क, इ-ग्रंथालय, उन अनेक योजनाओं में से हैं, जो विकास की धारा से कटे हुए वर्ग के लिए बहुत बड़ी सौगात है।

डिजिटल एम्स’ से सुधरती स्वास्थ्य सेवाएं

एक स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है। यह स्वास्थ्य चाहे देश का हो या व्यक्ति का। भारत में स्वास्थ्य सेवाओं का जो इतिहास रहा है, वह सर्वविदित है। इस सत्य को बदला है मोदी सरकार ने। ‘डिजिटल एम्स’ मोदी सरकार की एक ऐसी ही महत्वाकांक्षी योजना है, जो स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे सामान्य जन से जोड़ती है। इसका उद्देश्य यूएआईडीएआई और एम्स से सीधे तौर पर जोड़ना है। इ-स्वास्थ्य योजना स्वास्थ्य योजनाओं का एक सीधा-सरल विकल्प है। एमरक्त कोष सभी ब्लडबैंकों को आपस में जोड़ने का कार्य करता है, जो जरूरतमंद लोगों को सीधे तौर पर लाभान्वित करता है।

किसानों से मिटती दूरी

मोदी सरकार ने विकास के क्रम में किसानों के, गांवों के बीच की खाई को पाटने के लिए ऐसे कई एप जारी किए हैं, जो सीधे तौर पर इस वर्ग की समस्याओं का समाधान करते हैं। जैसे- इ-पंचायत द्वारा ग्रामीण वर्ग अपने लिए बनी सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करके उनका लाभ उठा सकता है। एम किसान, किसान पोर्टल, किसान सुविधा एप, पूसा कृषि, सॉयल हेल्थ कार्ड एप, इनाम, फसल बीमा मोबाइल एप, एग्री मार्केट एप, फर्टिलाइजर मोबाइल एप आदि ऐसे एप हैं, जो किसान और बाजार के बीच एक ऐसा समन्वयन स्थापित करते हैं, जिनकी सहायता से किसान घर बैठे उन्नत खेती और उसके विकास से जुड़ी सभी प्रकार की योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकता है। भूमि की उर्वरकता की जानकारी से लेकर मंडी में फसलों के उचित रेट तक का संपूर्ण ज्ञान इसमें मौजूद है। इससे किसान बिचौलियों द्वारा किए जाने वाले शोषण से भी बच सकता है।

महिला-सुरक्षा से लेकर प्रशासनिक तंत्र तक डिजिटलीकरण

महिला-सुरक्षा एक ऐसा विषय है, जिसे लंबे समय से एक सशक्त और प्रभावी समाधान की तलाश थी। ‘निर्भया एप’ और ‘हिम्मत एप’ ऐसे माध्यम के रूप में ऐसे ही विकल्प सामने आए हैं, जो किसी भी प्रकार की विपत्ति के समय महिलाओं की सुरक्षा को सशक्त बनाते हैं। ये वर्तमान समय में महिलाओं की जीवनशैली, उनके कामकाजी जीवन, उनकी सुरक्षा आदि को बल देते हैं।

मोदी शासन अपने कार्य में पारदर्शिता के प्रति आरंभ से ही कटिबद्ध है, इसलिए उसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली के स्तर से लेकर न्याय व्यवस्था तक में सबकी भूमिका स्पष्ट करने हेतु अनेक एप जारी किए हैं। इन सबका उद्देश्य ‘हार्ड वर्क’ को ‘स्मार्ट वर्क’ में बदलना है, जो तकनीक के विकास के माध्यम से ही संभव है, क्योंकि आज विकास में भारत की दावेदारी विश्व-मंच पर है।

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