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मोदी सरकार ने वो कर दिखाया जो, 70 वर्षों में कोई सपने में भी नहीं सोच सकता था

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मोदी सरकार ने इतिहास रच दिया है। ऐसा काम कर दिखाया है जो शायद ही कोई ही कर पाए। कट्टरपंथी ताकतों को ठेंगा दिखाते हुए और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कांग्रेस को आइना दिखाते हुए जो फैसला लिया है, वो 56 इंच का ही कमाल है। एक समय था जब मुस्लिम कट्टरपंथियों के आगे कांग्रेस ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया था। शाहबानो केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बदल दिया और पूरे देश का सिर नीचा कर दिया था, लेकिन मोदी सरकार ने एक झटके में ऐसे फैसले किए, जिसने साफ कर दिया है कि अब देश में न तो तुष्टिकरण की नीति चलेगी और न ही कट्टरपंथियों की हेकड़ी।

धर्म के नाम पर चल रही मुसलमानों की हज सब्सिडी खत्म की..

हर साल हज सब्सिडी के नाम पर 700 करोड़ रुपये रेवड़ियों की तरह बांट दिए जाते थे। अब यह नहीं होगा, मोदी सरकार ने मुसलमानों को हज पर दी जाने वाली सब्सिडी को खत्म कर दिया है। अब यह रकम मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर खर्च की जाएगी। आजादी के बाद से ही मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर हज सब्सिडी में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। हज कमेटी के जरिए, हज यात्रा पर जाने वाले मुसलमानों को इस सब्सिडी का पैसा केंद्र सरकार खुद वहन करती है। 70 वर्षों से मुसलमानों को खुश करने के लिए खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपयों को बचाने की चर्चा तो कई सालों से चल रही थी, लेकिन देश की कोई भी सरकार हज सब्सिडी खत्म करने की हिम्मत नही जुटा पाई। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं, जिन्होंने एक ही झटके में हज सब्सिडी की खत्म कर दिया और यह साफ संदेश भी दिया कि मुसलमानों को खुश करने के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा नहीं लुटाया जाएगा।

मुस्लिम मर्दों का वर्चस्व तोड़ा
पहले कोई मुस्लिम महिला अकेले हज यात्रा पर नहीं जा सकती थी, मर्दों के वर्चस्व वाले मुस्लिम समाज में महिलाओं को अकेले हज यात्रा की इजाजत नहीं थी। मेहरम के नाम पर महिलाओं को अपने साथ किसी पुरुष अभिभावक को ले जाना जरूरी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के बाद से ही चली आ रही इस परंपरा को खत्म करने का आदेश दिया। अब मुस्लिम महिलाएं आजाद हैं, और 45 साल से ज्यादा उम्र की मुस्लिम महिलाएं अकेले हज यात्रा कर सकती है। इस वर्ष ही 1300 मुस्लिम महिलाएं अकेले हज यात्रा पर जाएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले से कई मौलानाओं, मुस्लिम संगठनों के कलेजे पर छुरी चल गई। इनका कहना था कि यह गैर-इस्लामिक और शरिया के खिलाफ है, लेकिन मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं के हक में फैसला लेने में किसी की नहीं सुनी।

हलाला के नाम पर मौलवियों की दुकान बंद
मोदी सरकार ने सदियों से चली रही तीन तलाक की पापी कुप्रथा से मुस्लिम महिलाओं को निजात दिलाने का बीड़ा उठाया है। यह एक ऐसी प्रथा थी जिससे लाखों मुस्लिम महिलाएं पीड़ित थीं, पुरुषों के वर्चस्व वाले मुस्लिम समाज में इस प्रथा की वजह से मुस्लिम महिलाओं की हालत दोयम दर्जे की हो गई थी। तीन तलाक के नाम पर मुस्लिम धर्मगुरुओं और मौलवियों ने भी अपनी दुकानें खोल रखी थीं। यदि किसी वजह से तीन तलाक के बाद पति-पत्नी दोबारा साथ में रहना चाहें तो, मौलवी मुस्लिम महिलाओं का हलाला कराने को कहते थे, और इसके नाम पर महिलाओं का जमकर शोषण किया जा रहा था, वो भी इस्लामिक कानून यानी शरियत के नाम पर। अब इन मौलवियों की दुकानें बंद हो गई हैं। तीन तलाक को जुर्म घोषित कर इसके लिए सजा मुकर्रर करने संबंधी विधेयक को 15 दिसंबर को कैबिनेट की मंजूरी मिली और 28 दिसंबर को लोकसभा ने इसे पास भी कर दिया। हालांकि राज्यसभा में कांग्रेस पार्टी की वजह से यह विधेयक अटका हुआ है। सरकार बजट सत्र में इस विधेयक को दोबारा पास कराने की कोशिश करेगी। मोदी सरकार के इस कदम से जहां मुस्लिम महिलाएं खुश हैं तो मुस्लिम संगठन और तमाम मौलवी पीएम मोदी के इस कदम से नाराज हैं।

एएमयू और जामिया यूनिवर्सिटी अल्पसंख्यकों की बपौती नहीं
अलीगढ मुस्लिम विश्वविद्यालय को वर्षों से अल्पसंख्यक संस्थान की तरह देखा जाता रहा है, पूर्व की सरकारों ने भी इसे अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय मानते हुए तमाम सहूलियतें दीं। यह मोदी सरकार ही है जिसने एएमयू और जामिया विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान मानने से इनकार कर दिया। मोदी सरकार की तरफ से बाकायदा कोर्ट में हलफनामा दिया गया कि केंद्र सरकार एएमयू को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं देती है। दरअसल 1981 में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने मुस्लिम तुष्टीकरण की नीति के तहत कानून में संशोधन कर एएमयू का अल्पसंख्यक दर्जा बरकरार रखने की कोशिश की थी। इसके बाद एएमयू ने अल्पसंख्यकों के लिए प्रवेश में 50 फीसद आरक्षण लागू कर दिया था। इसी फैसले के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 2006 में एएमयू का अल्पसंख्यक दर्ज रद्द कर दिया था। पर मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने में लगी तत्कलीन यूपीए सरकार ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इसी मामले की सुनवाई के दौरान 2016 में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है। इसी तरह जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी को भी केंद्र सरकार ने अल्पसंख्यक संस्थान मानने से इनकार कर दिया है।

मोदी सरकार ने अपने इन फैसलों से साफ संदेश दिया है कि सरकार कट्टरपंथियों के आगे नहीं झुकेगी और मुस्लिम तुष्टिकरण की राह पर नहीं चलेगी। प्रधानमंत्री मोदी का साफ कहना है कि उनकी सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण की बजाय मुस्लिम सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही है। बीजेपी शासित तमाम राज्यों की सरकारें भी केंद्र सरकार की राह पर चल पड़ी है।

*उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मदसरों में झंडा फहराना अनिवार्य कर दिया है। योगी सरकार ने 2018 में मदरसों के लिए छुट्टियों का कैलेंडर भी जारी किया है, जिसमें दिवाली, दशहरा, बुध पूर्णिमा और महावीर जयंती पर मदरसों में छुट्टी रहेगी। मदरसों को साल में ईद और मुहर्रम के लिए मिलने वाली 10 विशेष छुट्टियों को घटाकर 4 कर दिया गया है।
*उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मदरसों में प्रधानमंत्री की फोटो लगाने का आदेश दिया है।

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