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‘संगठित और वैधानिक’ लूट के ‘सरदार’ तो आप ही हैं डॉक्टर साहब !

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गुजरात में 06 अक्टूबर को एक चुनावी सभा में पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने नोटबंदी को ‘संगठित और वैधानिक’ लूट कहा, लेकिन वे यह बताना शायद भूल गए कि नोटबंदी किस तरह से ‘संगठित लूट’ थी?  उन्होंने यह भी नहीं बताया कि किस-किस के पास लूट के पैसे गए? क्या यह वैसी ही ‘संगठित लूट’ थी जैसी लूट 2जी, सीडब्लूजी, कोलजी में होती रही है?  डॉक्टर साहब, सवाल तो यह है कि जब आपके राज में ‘संगठित लूट’ हो रही थी तो आप क्यों नजर फेर कर बैठे थे?

नोटबंदी का उद्देश्य तो देश के अर्थतंत्र को हर फ्रंट पर मजबूत करना था, पारदर्शी बनाना था, इसमें कोई निजी हित नहीं था, लेकिन आपने तो अपने समय के कानूनी लूट पर तो कभी कोई अफसोस तक जाहिर नहीं किया था! डॉक्टर साहब, अगर इसी बहाने देश को संगठित लूट का मतलब भी समझा देते तो राष्ट्र का कुछ भला हो जाता!

टूजी स्कैम और मनमोहन सिंह के लिए चित्र परिणाम

अगर ‘संगठित और वैधानिक’ लूट की ही बात करनी है तो आइये जरा आपको दिखाते हैं, आपके समय के वैसे ‘संगठित और वैधानिक’ लूट जो आपको भी पता थे और आपने मौन धारण कर रखा था।

पहली संगठित लूट- कोलगेट स्कैम
डॉक्टर साहब आपके नेतृत्व में ही तो कोलगेट घोटाले को अंजाम दिया गया था। यूपीए की सरकार में ही तो सीएजी के रिपोर्ट से इस ‘संगठित और वैधानिक’ लूट का खुलासा हुआ था। मार्च 2012 में सीएजी ने रिपोर्ट दी कि 2004 से 2009 के बीच कोयला ब्लॉक का आवंटन में घोटाला हुआ। सरकारी खजाने को 1 लाख 86,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। एनटीपीसी, टाटा स्टील, भूषण स्टील, जेएसपीएल, एमएमटीसी और सीईएससी जैसी सरकारी और प्राइवेट- दोनों कंपनियों को बिना किसी नीलामी के कोयला ब्लॉक आवंटित कर दिए गए थे। इस संगठित लूट में केंद्रीय पर्यटन मंत्री सुबोध कांत सहाय, कांग्रेस नेता विजय दर्डा और राजेंद्र दर्डा, आरजेडी नेता और पूर्व कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्री प्रेमचंद गुप्ता और कांग्रेस सांसद और जिंदल स्टील एंड पॉवर के चेयरमैन नवीन जिंदल समेत कई अन्य नेता और बड़े नाम शामिल थे। वहीं वर्तमान केंद्र सरकार ने कोल ब्लॉक की 29 खदानों की ऑनलाइन नीलामी से राज्य सरकारों को 1.72 लाख करोड़ रुपयों का फायदा पहुंचाया है।

दूसरी संगठित लूट- टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला
टूजी स्पेक्ट्रम घोटाला स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला कहा जाता है जो यूपीए की सरकार के दौरान हुआ और सरकार के मुखिया तो आप ही थे। एक लाख छिहत्तर हजार करोड़ रुपये के इस घोटाले में पूरी कांग्रेस सरकार ही कठघरे में खड़ी थी। तत्कालीन संचार मंत्री ए राजा की अगुवाई में हुए इस घोटाले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी बार-बार तत्कालीन डॉक्टर मनमोहन सिंह की सरकार को कठघरे में खड़ा किया था। सुप्रीमकोर्ट ने प्रधानमंत्री की चुप्पी पर भी सवाल उठाया था। टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन को लेकर संचार मंत्री की नियुक्ति के लिए हुई लॉबिग में नीरा राडिया, पत्रकारों, नेताओं और उद्योगपतियों की बातचीत के बाद सरकार अब भी कठघरे में है। वर्तमान केंद्र सरकार ने इसकी भी ऑनलाइन नीलामी कर कर देश का 2.22 लाख करोड़ रुपया बचाया गया।

तीसरी संगठित लूट- कॉमनवेल्थ घोटाला
कांग्रेस की सरकारों द्वारा किस तरह से ‘संगठित और वैधानिक’ लूट की जाती रही है, इसका बड़ा उदाहरण है 2010 का कॉमनवेल्थ घोटाला। इस दौर में भी केंद्र की ‘सरदारी’ तो आपके ही जिम्मे थी डॉक्टर साहब! 70 हजार करोड़ के इस स्कैम में राजनेताओं, नौकरशाहों और कॉर्पोरेट्स का बड़ा नेक्सस शामिल था। कांग्रेस नेता और कॉमनवेल्थ गेम्स की आयोजन समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी, दिल्ली की तत्कालीन सीएम शीला दीक्षित और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा का इस स्कैम से सीधा संबंध था। इसमें करीब सौ नौकरशाह, दसियों कॉरपोरेट्स और व्यवसायी भी शामिल थे। 

चौथी संगठित लूट- आदर्श सोसाइटी घोटाला
यह संगठित लूट की ऐसा नमूना है जिसने कांग्रेस सरकारों की संवेदनहीनता को सरेआम कर दिया। शहीदों की विधवाओं के लिए बने मकानों की बंदरबांट कर ली थी कांग्रेसी नेताओं ने। दरअसल करगिल में शहीद हुए सैनिकों के परिजनों के लिए पहले सेना की जमीन का आवंटन कर छह मंजिला इमारत बनाई गई, लेकिन नेताओं, अफसरों, सैन्य अधिकारियों ने आपसी सांठ-गांठ कर इस 31 मंजिला इमारत में बाजार दर के मुकाबले बेहद मामूली कीमत पर फ्लैट्स आपस में ही बांट लिए। इसपर उठे विवाद के चलते अशोक चव्हाण को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा। सोसायटी में चव्हाण की सास और अन्य करीबी रिश्तेदारों को भी फायदा पहुंचाया गया। इसमें महाराष्ट्र के तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों- सुशील कुमार शिंदे, विलासराव देशमुख और अशोक चव्हाण के खिलाफ आरोप लगाये गये थे।

पांचवीं संगठित लूट-अगस्ता वेस्टलैंड चॉपर घोटाला
इस संगठित लूट में 53 करोड़ डॉलर का ठेका पाने के लिए कंपनी ने भारतीय अधिकारियों को 100-125 करोड़ रुपये तक की रिश्वत दी थी। इसमें कई राजनेता, भारतीय वायु सेना के चीफ एयर मार्शल एसपी त्यागी और हेलिकॉप्टर निर्माता अगस्टा वेस्टलैंड जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। कंपनी ने 610 मिलियन अमेरिकी डॉलर के 12 हेलीकाप्टरों की आपूर्ति में एक अनुबंध पाने के लिए रिश्वत दी थी। इटली की एक अदालत में 15 मार्च 2008 को प्रस्तुत एक नोट यह संकेत करता है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी घोटाले में शामिल थीं। 2013 में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल पर इटली की चॉपर कंपनी अगस्ता वेस्टलैंड से कमीशन लेने के आरोप लगे।

छठी संगठित लूट- वाड्रा-डीएलएफ घोटाला
2012 में देश की सबसे ताकतवर महिला मानी जाने वाली कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ से 65 करोड़ का ब्याजमुक्त लोन लेने का आरोप लगा। उस दौर में डॉक्टर साहब आपके जिम्मे ही देश की कमान थी, लेकिन आपकी ही नाक के नीचे सांठ-गांठ कर घोटाले किए जाते रहे। इस सौदे में बिना ब्याज पैसे की अदायगी के पीछे कंपनी को राजनीतिक लाभ पहुंचाना उद्देश्य था। यह भी सामने आया है कि केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते रॉबर्ट वाड्रा ने देश के कई हिस्सों में बेहद कम कीमतों पर जमीनें खरीदीं।

vadra manmohan के लिए चित्र परिणाम

सातवीं संगठित लूट- महाराष्ट्र सिंचाई घोटाला
संगठित लूट का यह एक ऐसा नमूना है जिसमें 1999 से 2009 तक लगातार लूट की गई थी। एनसीपी के अजीत पवार के पास सिंचाई मंत्रालय था, इस दौरान मंत्रालय ने करीब 70 हजार करोड़ का खर्च किया, लेकिन जमीन पर काम नहीं दिखाई दिया। कांग्रेस और एनसीपी की गठबंधन वाली सरकार ने इसमें जबरदस्त लूट मचाई और किसानों के हितों से खिलवाड़ किया।

आठवीं संगठित लूट- सत्यम घोटला
सत्यम कंप्यूटर सर्विसेजस के घोटाले से भारतीय निवेशक और शेयरधारक बुरी तरह प्रभावित हुए। 2009 का यह घोटाला कॉरपोरेट जगत के सबसे बड़े घोटालों में से एक है,  इसमें 14,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया था। पूर्व चेयरमैन रामलिंगा राजू इस घोटाले में शामिल थे, जिन्होंने सब कुछ संभाला हुआ था। बाद में उन्होंने 1.47 अरब अमेरिकी डॉलर के खाते को किसी प्रकार के संदेह के कारण खारिज कर दिया। उस साल के अंत में, सत्यम का 46 प्रतिशत हिस्सा टेक महिंद्रा ने खरीदा था, जिसने कंपनी को अवशोषित और पुनर्जीवित किया।

दरअससल कांग्रेस ने 60 सालों तक देश को खूब जमकर लूटा है। कांग्रेस की सरकारों के तहत घोटालों की सूची इतनी लंबी है कि कभी खत्म नहीं होती। आत्महित और घोटाले कांग्रेस का हिस्सा है।  

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