Home विपक्ष विशेष पीएम मोदी ने दबा दी है नस, कांग्रेसी तो अब चीखेंगे ही!

पीएम मोदी ने दबा दी है नस, कांग्रेसी तो अब चीखेंगे ही!

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। राज्यसभा में उनके बयान पर कांग्रेसी सांसद माफी की मांग कर रहे हैं। जब प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान उन्हीं के सवालों का जवाब देना शुरू किया तो उन्हें इतना नागवार गुजरा कि वे वाकआउट कर गए। दरअसल प्रधनमंत्री ने बुधवार को पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा था कि 30-35 सालों से आर्थिक फैसलों में मनमोहन सिंह की अहम भूमिका रही। उनके कार्यकाल में इतने घोटाले सामने आए लेकिन मनमोहन सिंह पर दाग नहीं लगा। बाथरूम में रेनकोट पहनकर नहाना तो कोई मनमोहन सिंह से सीखें।

कांग्रेसी नेता अब प्रधानमंत्री से माफी की बात कर रहे हैं। कांग्रेसी नेता अब चीख रहे हैं, चिल्ला रहे हैं। सदन चलने नहीं दे रहे हैं। साफ बात है पीएम मोदी ने कांग्रेस की दुखती रग दबा दी है।

कांग्रेसी नेता जिस मनमोहन सिंह को लेकर इतना हंगामा कर रहे हैं, उनकी पार्टी में कितनी चलती थी यह जगजाहिर है। रबर स्टॉम्प की तरह वे दस जनपथ के इशारे पर सारे काम करते थे, बदले में पार्टी इनको ईमानदार नेता के तमगा से नवाज कर खुश कर देती थी।

राहुल ने की बेइज्जती
जिस पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम पर कांग्रेस इतना हंगामा कर रही है, पार्टी ने उनकी कितनी इज्जत की, ये राहुल गांधी से बेहतर कौन बता सकता है। मनमोहन सिंह के एक अध्यादेश को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने फाड़ दिया था। सरकारी अध्यादेश पर राहुल ने बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा था कि अध्यादेश पर मेरी राय है कि यह सरासर बकवास है और इसे फाड़कर फेंक देना चाहिए। इससे मनमोहन सिंह की काफी किरकिरी हुई थी। ऐसे में राहुल गांधी मर्यादा तोड़ने की बात करते हैं तो हजम नहीं होता।

नरसिंहराव का अपमान
अपने पीएम के ही अपमान की बात हो तो पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंहराव से बेहतर उदाहरण कौन हो सकता है। जब उनका पार्थिव शरीर 24-अकबर रोड पहुंचा तो लोगों को श्रद्धांजलि का मौका देने की जगह मुख्यद्वार पर ताला लटका दिया गया। सोनिया गांधी के इशारे पर दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार नहीं होने दिया गया।

एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर
लेकिन अभी बात मनमोहन सिंह की हो रही है। कहा जाता है कि मनमोहन सिंह तो सिर्फ फाइलों पर दस्तखत करते थे, असल फैसला तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी लेती थी। सोनिया गांधी का सरकारी निवास दस जनपथ सत्ता का असली केंद्र बना हुआ था और सारे फैसले वहीं लिए जाते थे। तब के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने तो उन्हें ‘एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ तक कहा था। कुछ लोगों ने तो मनमोहन सिंह सरकार को पेटीकोट सरकार तक की संज्ञा दे दी थी।

घोटालों की सरकार
पिछले दिनों बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने पूर्व यूपीए सरकार के खिलाफ आरोप पत्र जारी करते हुए कहा था कि सोनिया और राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के पद का गलत इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि यूपीए राज में देश में गरीबी बढ़ी, घोटाले और लूट बढ़े, महंगाई और बेरोजगारी बढ़ी। कोयला घोटाले, हेलीकॉप्टर घोटाले, टूजी घोटाले, आदर्श घोटाले, राष्ट्रमंडल खेल घोटाले, बोफोर्स घोटाले औ ना जाने कौन-कौन घोटाले हुए। कोयला घोटाले में तो खुद मनमोहन सिंह पर आरोप लगे। अब तो यह भी आरोप लग रहे हैं कि विजय माल्या को लोन दिलाने में भी इनकी भूमिका थी।

घोटालों का सरदार कैसे ईमानदार
अब सवाल उठता है कि जिनके राज में घोटाले पर घोटाले हुए वे खुद बेदाग कैसे? सरकार के मंत्री देश लुटते रहे और मनमोहन सबसे ईमानदार नेता का तमगा लगाए बैठे रहे। आखिर लुटेरों के सरदार ईमानदार कैसे? वे करीब 35 साल तक देश के किसी ना किसी अहम पद पर बने रहें। जिसमें से दस साल तक तो प्रधानमंत्री के पद पर रहें। ऐसे में पीएम मोदी का यह तंज कि बाथरूम में रेनकोट पहन कर नहाना कोई मनमोहन सिंह से सीखें तो इसमें गलत क्या है?

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