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मुस्लिम प्रेम में महिलाओं की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करती है ममता की पार्टी

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पश्चिम बंगाल में हिंदुओं पर हो रहे जुल्म अब तक बाहरी दुनिया से छिपे रहे थे, लेकिन इस बार बशीरहाट के दंगे ने ममता बनर्जी सरकार को एक्पोज करके रख दिया है। इस पर्दाफाश से ममता बनर्जी की सरकार बुरी तरह बौखलाई हुई है और अब उनके मंत्री और पार्टी कार्यकर्ता अनाप-शनाप हरकतें करने लगे हैं। हिंदुओं के साथ हो रही ज्यादती पर तो ममता सरकार चुप्पी लगाए बैठी है, लेकिन आवाज उठाने वाले लोगों का मुंह बंद करने के लिए सारे षडयंत्र कर रही है। आलम यह है कि अब वह महिलाओं की प्रतिष्ठा को भी तार-तार करने पर उतर आई है।

ममता के मातहत के बिगड़े बोल
पश्चिम बंगाल से भाजपा सांसद रूपा गांगुली ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर हमला बोला और तंज कसते हुए कहा, ”जो नेता या जिस पार्टी के नेता तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी का समर्थन करते हैं वो अपनी बहू-बेटियों को बंगाल भेजें, पंद्रह दिन के अंदर उनका बलात्कार हो जाएगा।” उनका मकसद पश्चिम बंगाल के लॉ एंड ऑर्डर को लेकर सवाल उठाना था। लेकिन तृणमूल कांग्रेस के नेता सेवनदेब चट्टोपाध्याय को ये बात इतनी कड़वी लगी कि मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दी।

क्यों बिगड़ी टीएमसी की भाषा?
दरअसल टीएमसी के सामने संकट यह है कि भाजपा लगातार ऐसे मुद्दे को उठा रही है जो ममता बनर्जी की सरकार को कठघरे में खड़ा करने का काम कर रही है। मुस्लिमों का तुष्टिकरण हो या पश्चिम बंगाल से हिंदुओं का पलायन, हर मोर्चे पर ममता सरकार घिरती नजर आ रही है। इतना ही नहीं जितनी तेजी से भाजपा के समर्थकों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, वो ममता के पेशानी पर बल लाने को काफी है। पश्चिम बंगाल में हिंदुओं को दोयम दर्जे का नागरिक बना देने वाली ममता और उनके समर्थकों के पैरों के नीचे की जमीन खिसक रही है तो वे अभद्रता पर उतर आए हैं।

लव जिहाद के नाम पर हिंदू महिलाओं से बलात्कार
पिछले दिनों एक गैर सरकारी संस्था द्वारा रिपोर्ट प्रकाशित की गई थी, जिसमें कहा गया था कि पश्चिम बंगाल के 24 परगना, मर्शिदाबाद, हुगली, मालदा जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में सुनियोजित तरीके से हिंदू महिलाओं को शिकार बनाया जा रहा है।

मजहबी कट्टरपंथी जमात लव जिहाद के नाम पर फंडिंग करते हैं और हिंदु महिलाओं से बलात्कार कर उसे नर्क की जिंदगी जीने को छोड़ दिया जाता है। इसी रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई थी कि बीते पंद्रह सालों में करीब चालीस हजार महिलाओं को लव जिहाद के नाम पर शिकार बनाया गया है।

पश्चिम बंगाल में सिंदूर नहीं लगा सकती हिंदू महिलाएं
पश्चिम बंगाल में बढ़ती मुस्लिम आबादी और उसके भीतर उभर रही कट्टरता ने हिंदुओं का जीना मुहाल कर दिया है। पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में आज हिंदू महिलाएं सिंदूर लगाने से भी डरती हैं। उन्हें यह डर लगता है कि सिंदूर से उसकी पहचान हो जाएगी, जिससे या तो वह बलात्कार का शिकार हो जाएगी या फिर उनके परिवार को मार दिया जाएगा। बांग्लादेश और बिहार से लगी सीमाई इलाकों में इसका खासा प्रभाव देखा जा रहा है।

ममता के राज में हिंदुओं के पूजा करने पर भी पाबंदी
बंगाल की ममता बनर्जी सरकार मुसलमानों को खुश करने के लिए हिंदुओं पर पाबंदियां लगा रही है। यह बात किसी और ने नहीं, बल्कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने कहा है। दरअसल पश्चिम बंगाल सरकार ने मुहर्रम के चलते दुर्गा प्रतिमाओं विसर्जन के लिए एक समयसीमा तय कर दी थी। ऐसा सिर्फ इसलिए किया गया ताकि मुसलमानों को मुहर्रम मनाने में कोई दिक्कत न हो। ममता सरकार ने फतवा जारी किया था कि दुर्गा पंडाल वाले 11 अक्टूबर को शाम 6 बजे से पहले-पहले विसर्जन कर लें। अगर वो ऐसा नहीं कर पाए तो उन्हें 13 तारीख के बाद ही इजाज़त मिलेगी, क्योंकि 12 को मुहर्रम है। कोर्ट ने इस आदेश को रद्द कर दिया और ममता बनर्जी सरकार पर टिप्पणी की कि वो धर्म के आधार पर भेदभाव कर रही है।

चार साल से कांगलापहाड़ी में दुर्गा पूजा नहीं
ममता बनर्जी की सरकार में मुसलमानों को तो दामाद की तरह रखा जा रहा है, लेकिन हिंदू अपने ही देश में बेगाने हो गए हैं। 10 अक्टूबर, 2016 को कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश से ये बात साबित होती है। ममता बनर्जी के राज में बीरभूम जिले का कांगलापहाड़ी गांव भुक्तभोगी है। गांव में 300 घर हिंदुओं के हैं और 25 परिवार मुसलमानों के हैं, लेकिन इस गांव में चार साल से दुर्गा पूजा पर पाबंदी है। मुसलमान परिवारों ने जिला प्रशासन से लिखित में शिकायत की कि गांव में दुर्गा पूजा होने से उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है, क्योंकि दुर्गा पूजा में बुतपरस्ती होती है। शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन ने दुर्गा पूजा पर बैन लगा दिया। गांव के लोग जगह-जगह फरियाद करके थक गए, लेकिन लगातार चौथे साल भी यहां दुर्गा पूजा नहीं हुई।

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