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देश का सौहार्द बिगाड़ने वाले हामिद अंसारी के नाम एक देशवासी का पत्र

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माननीय हामिद अंसारी जी,

दस वर्षों तक उपराष्ट्रपति के पद पर बैठे रहने के बाद कुर्सी छोड़ने के वक्त जाकर आपको ये महसूस हुआ कि देश के मुसलमानों में घबराहट है, एक असुरक्षा का माहौल है। राज्यसभा टीवी को दिये अपने इंटरव्यू में आपने जिस तरह की टिप्पणियां की हैं उनसे आपकी खुद की नीयत ही सवालों के घेरे में आ गई है।

हामिद जी हो सकता है ‘सबका साथ सबका विकास’ की मूल भावना के साथ विश्व मंच पर देश की शान बढ़ा रही केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों को शायद कभी नहीं पचा पाने के चलते आपके ये विचार उभरे हों। जाते-जाते जिस तरह से आपने अपनी भड़ास निकालने की कोशिश की है उससे आपके दो-दो कार्यकाल तक उपराष्ट्रपति बने रहने को लेकर जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है। अब तो यही लग रहा है कि इतने बड़े संवैधानिक पद पर बैठकर दस वर्षों तक क्या आप सिर्फ मुसलमानों की चिंता करते रहे? कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीख लेकर सवा सौ करोड़ देशवासियों की भी चिंता कर ली होती!   

कई देशों में आप भारत की राजनयिक नुमाइंदगी कर चुके हैं..देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों ने आपको मानद उपाधियां दे रखी हैं। इसलिए अब तक तो हम यही मानकर चल रहे थे कि आप बड़े विद्वान रहे हैं, आपकी विद्वता का आगे भी देश को बड़ा फायदा होगा..लेकिन अब आपकी एक और जो बड़ी काबिलियत सामने आई है उससे हमें अब आपको लेकर शक और सिर्फ शक है। आपके मन में जो कुछ उमड़-घुमड़ रहा था उसे जिस तरह से 10 वर्षों तक दबाये रखा और ठीक कुर्सी छोड़ने से पहले जाहिर किया वो शायद आपकी सबसे बड़ी काबिलियत है। कुर्सी की चिंता के बीच आप अपना असली चेहरा दिखाते भी कैसे!

काश! देश के सच्चे सपूत पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम से आपने ये सीख ली होती कि कैसे पद पर रहते  हुए और पद छोड़ने के बाद भी संवैधानिक पद की गरिमा को बरकरार रखा जाता है।

पिछले महीने राष्ट्रपति पद से मुक्त हुए प्रणब दा से भी आपने कुछ सीखा होता कि कैसे गरिमामय तरीके से कुर्सी छोड़ी जाती है और कैसे उसके बाद भी अपने विनम्र कुशल व्यवहार से देशवासियों के दिलों पर राज किया जाता है। क्या आपने ये समझने की कोशिश नहीं की कि प्रणब दा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही उनकी सरकार के कामकाज की क्या यूं ही तारीफ की थी या फिर उसके पीछे जमीनी सच्चाई छुपी थी? अफसोस! आप संवैधानिक पद पर बैठे रहकर भी आज के कांग्रेसी जैसे ही रह गए..जो सिर्फ एक परिवार का महिमामंडन और मुस्लिमों का तुष्टिकरण करते आए हैं।

जाते-जाते आपने जिस तरह से असहिष्णुता के मुद्दे में हवा भरने की कोशिश की, अब देशवासियों को आपकी उपलब्धियों से ज्यादा यही कोशिश याद रहेगी। आप बताएंगे कि ऐसा क्या हुआ कि पदमुक्त होने के अवसर पर अचानक असहनशीलता बढ़ने का भय आपको सताने लगा?  कम से कम पद की गरिमा का तो ख्याल करते।

आप जिस तरह की घटनाओं का हवाला देकर मुसलमानों में डर फैलने की बात करते हैं उस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चिंताओं और सख्त रुख को आपने किस चश्मे से देखा है? कानून-व्यवस्था राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है और किसी भी तरह की हिंसात्मक गतिविधि को लेकर उन्होंने राज्य सरकारों को आगाह कर रखा है। क्या आप ये भी नहीं देख पा रहे कि हिंसक वारदात का  शिकार सिर्फ कोई समुदाय विशेष नहीं रहा है, इसके दायरे में हर वर्ग-समुदाय के बेगुनाह लोग आते रहे हैं। काश! आपने पश्चिम बंगाल और केरल की हालिया घटनाओं पर भी नजरें इनायत की होतीं!

सच तो ये है कि अपनी टिप्पणियों से आप देश में सौहार्द के पनपते वातावरण को दूषित कर गए हैं।   

उम्मीद है अपनी टिप्पणियों पर अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए आप माफीनामा लेकर आएंगे।

शुभकामनाओं सहित,

एक जिम्मेदार देशवासी 

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