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केजरीवाल एंड कंपनी की नौटंकी चालू है!

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केजरीवाल एंड कंपनी में कोहराम मचा हुआ है। केजरीवाल के ही साथी रहे कपिल मिश्रा रोज केजरीवाल के नए कारनामे सामने ला रहे हैं। हर दिन केजरीवाल एंड कंपनी का कच्चा चिट्ठा खोल रहे हैं और दिल्ली के विवादास्पद मुख्यमंत्री बगलें झांक रहे हैं। कपिल मिश्रा के सवालों के जवाब देने का जो तरीका केजरीवाल ने चुना वो उसी तरह की नौटंकी है, जैसे वो हमेशा करते आए हैं। रविवार को आम आदमी पार्टी के प्रदेश सम्मेलन में उन्होंने सफाई दी कि जब तक मेरे पास चंदे की कमान है, किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। दिलचस्प बात है कि जनता को इसी बात का तो अंदेशा है कि चंदे के खजाने पर उन जैसे दागी कुंडली मारकर बैठे हैं। 

सम्मेलन में सीएम केजरीवाल ने पार्टी नेताओं को संबोधित तो किया लेकिन मीडिया को अंदर नहीं बुलाया, लेकिन अंदर की रिकॉर्डिंग मीडिया को जारी कर दी। इतना ही नहीं केजरीवाल ने कपिल मिश्रा के आरोपों का जवाब भी नहीं दिया। जाहिर है केजरीवाल एंड कंपनी की नौटंकी अभी जारी है। लेकिन कुछ सवाल हैं जो अब भी केजरीवाल के जवाब का इंतजार कर रहे हैं।

97 करोड़ के विज्ञापन का झूठ किसने फैलाया?
केजरीवाल ने सफाई दी कि 97 करोड़ के विज्ञापन का झूठ फैलाया गया। तो क्या केजरीवाल सीएजी रिपोर्ट को झूठा बता रहे हैं जिनकी रिपोर्ट में 97 करोड़ के विज्ञापन की बात सामने आई है। सरकार की इमेज चमकाने के चक्कर में जनता के 21.62 करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए गए वो किसने किए? लेकिन दिल्ली के विवादित सीएम खुद को कानून और अदालत से ऊपर मानते हैं शायद यही है कि आरोपों का जवाब दिए बिना ही वो खुद को अपने ही कोर्ट से बरी भी कर दे रहे हैं।

कपिल के ‘शीतल बम’ पर क्यों नहीं बोलते?
हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट मामले में 400 करोड़ रुपए का घोटाले के आरोप में दिल्ली के एक बिजनेसमैन शीतल प्रसाद का नाम आ रहा है। आरोप है कि पार्टी नेता संजय सिंह और आशुतोष की रूस यात्रा का खर्च उसने उठाया। शीतल प्रसाद सिंह 400 करोड़ रुपए के नंबर प्लेट रजिस्ट्रेशन घोटाले से संबंधित हैं। लेकिन केजरीवाल जी इसपर कुछ क्यों नहीं बोल रहे?

मनीष सिसोदिया क्लीन चिट देने की जल्दी क्यों?
शब्दार्थ नाम की प्राइवेट एड एजेंसी (आरोप है कि डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के साले की है कंपनी) को 3.63 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया जिसकी जरूरत नहीं थी। इतना ही नहीं अन्य राज्यों में भी विज्ञापन पर 18.39 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। कैग के मुताबिक 2.15 करोड़ रुपये के विज्ञापन ऐसे हैं जो बेतुके हैं।

16 हजार की थाली का झूठ किसने फैलाया?
केजरीवाल ने इस बात का भी जवाब नहीं दिया कि 16 हजार की थाली मंगवाई थी या नहीं! लेकिन उन्होंने ये नहीं कहा कि मनीष सिसोदिया के टेबल पर भेजा गया बिल किसका था। तो क्या केजरीवाल ये कहना चाहते हैं कि मनीष सिसोदिया झूठ बोल रहे हैं? क्योंकि मनीष सिसोदिया ने ये तो स्वीकार किया ही है कि उसका बिल उनकी टेबल पर आया था।

शुंगलू कमिटी की रिपोर्ट भी झूठी है?
वीके शुंगलू समिति ने केजरीवाल सरकार के फैसलों से जुड़ी 404 फाइलों की जांच कर इनमें संवैधानिक प्रावधानों के अलावा प्रशासनिक प्रक्रिया संबंधी नियमों की अनदेखी किये जाने का खुलासा किया है। इसके लिये समिति ने सरकार के मुख्य सचिव, विधि एवं वित्त सचिव सहित अन्य अहम विभागीय सचिवों को तलब कर सरकार के इन फैसलों में संबद्ध अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की है।

सैर-सपाटे पर जो खर्च हुए वो किसने किए?
2016 में जब दिल्ली में डेंगू का कहर था तो राज्य के डिप्टी सीएम फिनलैंड में मौज-मस्ती कर रहे थे। उपराज्यपाल की डांट पड़ी तो वापस आए। इसी तरह 11 अगस्त से 16 अगस्त, 2015 के बीच मनीष सिसोदिया ब्राजील की यात्रा पर गए। प्रोटोकॉल तोड़ अर्जेंटिना में इग्वाजू फॉल देखने चले गए। इसमें सरकार को 29 लाख रुपयों का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा। ये सब किसने किए हैं केजरीवाल जी?

अब अन्ना के नाम के आसरा क्यों लेते हैं ?
अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर कहा है कि अन्ना जी के साथ हमने जिस आंदोलन का सपना देखा था वो समाज के लिए था और वे इसे आगे बढ़ाते रहेंगे। लेकिन केजरीवाल जी आप ही तो हैं जिन्होंने अन्ना हजारे को बीजेपी का एजेंट तक कहा है। तो क्या केजरीवाल जी एक बार फिर आप अपने सियासी ड्रामे की स्क्रिप्ट तो नहीं लिख रहे हैं?

आरोपों के ‘कीचड़’ पर क्यों नहीं बोलते ?
अपने ऊपर लगे आरोपों पर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि ये बेबुनियाद हैं। कोई सबूत नहीं, सिर्फ कीचड़ फेंका है। लेकिन केजरीवाल के इस जवाब पर कपिल मिश्रा ने पलटवार किया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘न सबूतों पर बोले, न हवाला और काले धन के दस्तावेजों पर। न अपने सगे संबंधियों के भ्रष्टाचार पर बोले और न विदेशी दौरों पर। यह नए केजरीवाल हैं, यह कहते हैं, अगर अपराधी होता तो जेल में होता। जेल में नहीं हूं इसका मतलब अपराधी नहीं।’

बहरहाल कपिल मिश्रा ने केजरीवाल का कच्चा चिट्ठा खोलने के बाद ‘लेट्स क्लीन आप’ अभियान चला रखा है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के सदस्यों का आह्वान किया है कि पार्टी के भीतर रहकर भ्रष्टाचारियों को निकाल बाहर करें।

आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच केजरीवाल ने खुद को ईमानदारी का सर्टिफिकेट दे दिया है। लेकिन ये सच है कि राजनीति की जिस गंदगी को साफ करने का दावा करते हुए केजरीवाल ने जनता का विश्वास जीता था, उसी जनता के साथ उन्होंने विश्वासघात किया है। जाहिर है अन्ना हजारे को धोखा देने वाले केजरीवाल ने आम आदमी के साथ छल किया है और ‘आप’ की क्रांति की मशाल खुद अपने हाथों से ही बुझा दी है। लेकिन केजरीवाल एंड कंपनी की नौटंकी चालू है!

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