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पीएम मोदी की पहल पर जम्मू कश्मीर के लोगों को मिलेगी सुरक्षा और सहायता

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा और सशक्तीकरण को लेकर काफी जागरूक है। इस दिशा में लगातार कोशिशें भी कर रही हैं। इसी क्रम में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर का दौरा किया और पाकिस्तान की फायरिंग और आतंकवादियों की गोलियों का सामना कर रहे लोगों के लिए कई राहतभरी घोषणाएं की।

बंकर बनने से लोगों को मिलेगी सुरक्षा
केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषणा की है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए सरकार बेहतर व्यवस्था करने के लिए तत्पर है। और इसी के तहत 450 करोड़ रुपए की लागत से 14,460 बंकर बनाने का निर्णय लिया है। इन बंकरों में 1,431 बंकर सामुदायिक होंगे जबकि 13,029 बंकर व्यक्तिगत बनाए जाएंगे।

सुरक्षा के साथ महिला व क्षेत्र के लोगों का सशक्तीकरण
केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जहां लोगों को बंकर बनाकर संकट के समय सुरक्षित ठिकाना देने का ऐलान किया। वहीं, महिलाओं और वहां के लोगों को खुद की सुरक्षा के साथ-साथ दूसरों की सुरक्षा करने के लिए उनके सशक्तीकरण की कोशिश जारी है। केंद्रीय गृह मंत्री ने ऐलान किया कि 9 नई बटालियन स्थापित किए जाएंगे। इसमें दो बटालियन सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित की जाएंगी। इन बटालियनों में दो महिला बटालियन होंगी। इसके अलावा पांच ऐसी ‘इंडियन रिजर्व बटालियन’ स्थापित की जायेंगी जिनमें 60 प्रतिशत सीट सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए रिजर्व होंगी।

विस्थापितों और शरणार्थियों को मिली बड़ी राहत
जम्मू-कश्मीर में दशकों से चले आ रहे आंतकवाद से जहां हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, वहीं आतंकवाद के शिकार हुए हजारों कश्मीरी परिवार आज विस्थापित होकर बदहाली में जीने को मजबूर है। ऐसे लोगों को मदद के लिए केंद्र सरकार फिर सामने आई है। गृह मंत्री ने कहा कि कश्मीरी विस्थापितों को दी जानेवाली नकदी सहायता राशि में 30 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई है। अब प्रत्येक परिवार को वर्तमान 10 हजार रुपए के बदले 13 हजार रुपए मिलेंगे। उन्होंने यह भी घोषणा की कि पाकिस्तान की गोलाबारी में मारे गये लोगों के परिजनों को दी जाने वाली अनुदान राशि तीन लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपए कर दी गई है। इसके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पश्चिमी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के प्रत्येक परिवार को 5.50 लाख रुपए का मुआवजा दिया जायेगा। इसका लाभ 5,764 शरणार्थियों को मिलेगा।  

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्पष्ट नीति के चलते जम्मू कश्मीर की फिजा बदल रही है। बदलाव की चुनिंदा झलकियां – 

विदेश मंत्री की सीख से बदली अलगाववाद की मानसिकता
अपने दायित्वों को लेकर सक्रिय रहने में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का कोई जवाब नहीं है। फिलीपींस में रह रहे शेख अतीक नाम के एक व्यक्ति ने पिछले 5 अप्रैल को सुषमा स्वराज को ट्वीट करके अपने पासपोर्ट में गड़बड़ी की शिकायत की और भारत वापसी के लिए मदद मांगी। विदेश मंत्री ने देखा कि उस व्यक्ति ने अपने प्रोफाइल में जम्मू-कश्मीर की जगह ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ लिखा था। यह देखकर सुषमा स्वराज ने उसे जवाब दिया कि ‘भारत अधिकृत कश्मीर’ नाम की कोई जगह ही नहीं है। सुषमा स्वराज की इस सीख को इस कश्मीरी युवा ने माना, फिर उसने अपना प्रोफाइल ठीक कर लिया। प्रोफाइल बदलने के बाद खुद को जम्मू-कश्मीर का रहने वाला बताकर उसने मदद की गुहार लगाई। इसके जवाब में 10 मई को विदेश मंत्री ने कहा कि आप जम्मू-कश्मीर के हैं, तो सरकार आपकी सहायता जरूर करेगी और उन्होंने अधिकारियों को तुरंत उसकी सहायता के लिए निर्देश दिए।

मुख्यधारा में शामिल होने की बढ़ रही है चाहत
15 अगस्त,2017 को लाल किले से प्रधानमंत्री मोदी ने ये कहकर अपनी कश्मीर नीति को और अधिक स्पष्ट की थी कि गाली से, न गोली से, कश्मीर समस्या गले लगाने से हल होगी। इस आह्नान का असर ये हुआ है कि कट्टरपंथी कश्मीरी युवा मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं और सेना में भर्ती के लिए दौड़ लगा रहे हैं। इसी आह्वान का परिणाम है कि फुट बॉलर से आतंकवादी बने माजिद खान के पिछले वर्ष नवंबर में मुख्यधारा में वापसी के बाद अबतक पांच से ज्यादा आतंकवादी दहशतगर्दी को अलविदा कह चुके हैं। हाल ही में पकड़े गए लश्कर के आतंकवादी ऐजाज गुजरी यहां तक कहा है कि सेना चाहती तो उसका खात्मा कर सकती थी, लेकिन मुख्यधारा में लौटने की बात कहने के बाद सेना के जवानों ने ही उसकी जान बचा ली।

कश्मीर के विकास पर जोर
कश्मीर के विकास को लेकर प्रधानमंत्री मोदी बहुत ही तत्पर हैं और इसमें वे कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसी के चलते राज्य में सड़कों, पुलों और सुरंगों के निर्माण पर प्रधानमंत्री डेवलपमेंट पैकेज के तहत राज्य में 42,000 करोड़ रुपये को मंजूरी दी गई है। राज्य ने घरों में ट्वायलेट निर्माण के लगभग 72 प्रतिशत टारगेट को हासिल कर लिया है और लेह, कारगिल,शोपियां और श्रीनगर जिले ODF घोषित हो चुके हैं।

कश्मीरी युवाओं के लिए खुल गए द्वार
अपने पहले ही बजट में मोदी सरकार ने खेल के बुनियादी ढांचों के विकास के लिए राज्य को 200 करोड़ रुपये दिये थे। इसी का असर है कि श्रीनगर की गलियों में सुरक्षा बलों पर पत्थरबाज लड़कियों की अगुवा अफशां आशिक जम्मू-कश्मीर महिला फुटबॉल टीम की कप्तानी कर रही हैं। वहां आज आर्मी गुडविल स्कूल के तहत जरूरतमंदों को शिक्षा भी दी जा रही है। सुपर-40 के जरिये भी सेना प्रतिभाओं को नई धार देने की कोशिश में जुटी रहती है। श्रीनगर की 30 छात्राओं ने भारतीय सेना द्वारा आयोजित ऑपरेशन सद्भावना के तहत देश के विभिन्‍न भागों का भ्रमण किया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से भी मिलीं। पिछले वर्ष प्रधानमंत्री स्पेशल स्कॉलरशिप योजना के अंतर्गत राज्य के 3,420 छात्र लाभान्वित हुए।

बाढ़ की विभीषिका में दिया संबल
जिस वर्ष मोदी जी ने देश का जिम्मा संभाला था उसी वर्ष सितंबर में कश्मीर में भयंकर बाढ़ आई। भीषण बाढ़ से राज्य में 6,000 किलोमीटर सड़कें, 600 पुल, हजारों घर और लाखों एकड़ में लगी फसलें बुरी तरह बर्बाद हो गईं थीं। जम्मू-कश्मीर के लोगों को उस मुश्किल घड़ी में साथ देने के लिए सबसे पहले वहां पहुंचने वालों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शामिल थे। उनके निर्देश पर सेना ने राहत और बचाव का बहुत बड़ा अभियान चलाया। जो लोग कभी जवानों पर हमला करते थे, सेना के लोग उन्हें मौत की मुंह से निकाल कर ले आए। इस ऑपरेशन में 5 लाख से अधिक लोगों का जीवन बचाया गया। बाढ़ के बाद घाटी के पुनर्निमाण के लिए केंद्र की सहायता से बहुत बड़ा अभियान शुरू किया गया, जो लगातार जारी है।

चुन-चुन कर मारे जा रहे हैं आतंकवादी
कश्मीर के अलगाववादी नेता अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुके हैं। कई इस समय जेलों में बंद हैं। राज्य में टेरर फंडिंग पर नकेल कसा जा चुका है। 4 वर्षों में 640 आतंकियों का खात्मा किया जा चुका है। इनमें 60 आतंकी इसी साल अब तक मारे जा चुके हैं। इनके अलावा 55 से अधिक कुख्यात आतंकवादियों को भी मार गिराया गया है। पिछले साल शुरू हुआ ऑपरेशन ऑल आउट मुहिम का असर ये हुआ है कि आतंकवाद का पोस्टर ब्वॉय रहे बुरहान वानी गैंग के सभी 11 आतंकियों को ढेर किया जा चुका है। वहीं पत्थरबाजी की घटनाओं में भी काफी कमी आई है। 

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