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मोदी सरकार की पहल, बांस बनेगा प्लास्टिक का विकल्प

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मोदी सरकार प्लास्टिक पर बैन के बाद अब इसका बड़ा विकल्प तैयार करने में लग गई है, सरकार बांस को प्लास्टिक के बड़े विकल्प के रूप में लाने पर काम कर रही है। बांस का इस्तेमाल घर बनाने से लेकर फर्नीचर तक में किया जाता है। इसी वजह से मोदी सरकार ने पहल करते हुए इसकी खेती और बिजनेस के लिए एक बड़ा प्लान तैयार किया है। इस प्लान के तहत मोदी सरकार किसानों को हर पौधे पर 120 रुपये की मदद भी दे रही है। वहीं खादी ग्रामोद्योग आयोग ने बांस की बोतल को लॉन्च कर दिया है।

राष्ट्रीय बैंबू मिशन

मोदी सरकार ने बांस की खेती के लिए राष्ट्रीय बैंबू मिशन बनाया है जिससे इसकी खेती और बिजनेस बढ़े। इसके लि हर राज्य में मिशन डायरेक्टर बनाए गए हैं जो कि जिलेवार अधिकारी तय कर रहे हैं कि कौन इस काम को देखेगा। इसमें एग्रीकल्चर, फॉरेस्ट और इंडस्ट्री तीन विभाग शामिल किए जा रहे हैं।

सीबीआरआई ने दी मंजूरी

बांस कई तरीकों से लोगों के जीवन के लिए बहुत उपयोगी है, इससे फ्लोरिंग, फर्नीचर, हैंडीक्रॉफ्ट, ज्वैलरी, बोतलें आदि बनाई जाती हैं। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई), रुड़की ने इसे विशेष जगहों पर कंस्ट्रक्शन के काम में लाने की मंजूरी दी है। अब शेड बनाने के लिए सीमेंट की जगह बांस का इस्तोमाल हो रहा है और हरिद्वार में रेलवे ने इसी से स्टेशन का शेड बनाया है।

बांस क्यों है खास

बांस को लगाने में करीब तीन साल में औसतन 240 रुपये प्रति प्लांट की लागत आएगी, जिसमें से 120 रुपये प्रति प्लांट सरकारी सहायता मिलेगी। साथ ही हर हर जिले में इसके नोडल अधिकारी बनाए गए हैं वो पूरी जानकारी देंगे। बांस की खेती आमतौर पर तीन से चार साल में तैयार होती है. चौथे साल में कटाई शुरू कर सकते हैं। इसकी खेती किसान का रिस्क फैक्टर कम करती है. क्योंकि किसान बांस के बीच दूसरी खेती भी कर सकता है।

पिछले साल 2018 की जनवरी में केंद्र सरकार ने बांस को पेड़ की कैटेगरी से हटा दिया, लेकिन ऐसा सिर्फ निजी जमीन के लिए किया गया है।

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