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उपलब्धियां 2017: मोदी सरकार की एग्रेसिव फॉरेन पॉलिसी से भारत की जय-जय

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि लगातार बेहतर हुई है। कूटनीतिक दृष्टि से वर्ष 2017 भारत के लिए अहम साबित हुए। मोदी सरकार की कूटनीतिक रणनीति के चलते कई मोर्चों पर धुर विरोधी देश पाकिस्तान और चीन को कई बार मुंह की खानी पड़ी है। चीन की कई अंतर्राष्ट्रीय चालबाजियों को मोदी सरकार की सफल कूटनीति के माध्यम से नाकाम किया गया।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) और ग्वादर के जवाब में चाबहार बंदरगाह
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कूटनीति के चलते भारत ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की कई चालों को नाकाम किया। इससे चीन को कई झटके लगे। वह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के जरिए भारत को घेरना चाहता है। हिन्द महासागर में मजबूत पकड़ बनाने के लिए चीन पाकिस्तान के ग्वादर में बंदरगाह बना रहा है। हाल ही में बीजिंग में चीन-पाकिस्तान और अफगानिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच आपस में बातचीत हुई और CPEC प्रोजेक्ट को अफगानिस्तान तक बढ़ाने को लेकर चर्चा की, लेकिन मोदी सरकार ने ओमान की खाड़ी में चाबहार बंदरगाह का उद्घाटन करके चीन को तगड़ा झटका दिया है।

चाबहार बंदरगाह सामरिक नजरिये से भारत, अफगानिस्तान और ईरान समेत कई देशों के लिए अहम है। यह बंदरगाह ग्वादर से महज 85 किमी दूर है। इसके शुरू होने से भारत बिना पाकिस्तान गए अफगानिस्तान पहुंच सकेगा। अब तक भारत को अफगानिस्तान जाने के लिए पाकिस्तान से होकर गुजरना पड़ता था।

श्रीलंका के मट्टाला अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे का नियंत्रण भारत को मिलने से चीन के प्रोजेक्ट OBOR को झटका
श्रीलंका स्थित मट्टाला अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को श्रीलंका की महिंद्रा राजपक्षे सरकार ने अपने शासनकाल के दौरान चीन की मदद के लिए बनाया था। अब इस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को भारत अगले 40 साल के लिए अपने हाथ में लेने जा रहा है। यह चीन के लिए बड़ा झटका है, क्योंकि यह हवाई अड्डा हंबनटोटा बंदरगाह से सिर्फ 18 किमी की दूरी पर है। इस बंदरगाह को चीन ने श्रीलंका से 99 साल के लिए लीज पर ले रखा है।

दरअसल, चीन हिंद महासागर में भारत को घेरने के लिए यहां निवेश कर रहा है। इसके जवाब में भारत मट्टाला हवाई अड्डे पर 20.5 करोड़ डॉलर का निवेश कर रहा है। इसमें भारत की हिस्सेदारी 70 फीसदी होगा। इसका संचालन भारत को मिलने से चीन हवाई मार्ग से चीन से जुड़ नहीं पाएगा और चीन की वन बेल्ट वन रूट (OBOR) परियोजना को झटका लगेगा।

हंबनटोटा बंदरगाह पर चीनी सैन्य जहाज को इजाजत नहीं 
मोदी 
सरकार की कूटनीति के चलते श्रीलंका ने हंबनटोटा की सुरक्षा चीन को नहीं दिया। हंबनटोटा बंदरगाह की सुरक्षा श्रीलंका ने अपने पास रखने का निर्णय लिया। इतना ही नहीं, यहां पर चीन के सैन्य जहाजों के ठहरने पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

डोकलाम विवाद पर भारत की जीत
डोकलाम सीमा विवाद को लेकर भारत और चीन के बीच ढाई महीने से अधिक दिनों तक तनाव देखने को मिला। विवाद और तनाव इतना बढ़ गया कि चीन को यहां तक कहना पड़ा कि बीजिंग युद्ध से नहीं डरता, भारत को 1962 का युद्ध याद रखना चाहिए, लेकिन इन सब बयानों के बीच मोदी सरकार की कूटनीति के आगे चीन को झुकना ही पड़ा और करीब ढाई महीने के गतिरोध के बाद चीनी सेना को डोकलाम सीमा से पीछे हटना पड़ा। डोकलाम विवाद पर दुनिया के सामने चीन की बहुत फजीहत हुई।

इजरायल-भारत की दोस्ती को मिला नया आयाम 
भारत और इजरायल के बीच राजनीतिक संबंधों का 25वां वर्ष 2017 बेहद खास रहा। इसे खास बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इजरायल गए। इजरायल की यात्रा करने वाले नरेन्द्र मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने जुलाई, 2017 में इजरायल की यात्रा की। इस दौरान दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष, रक्षा और कृषि तकनीकी के क्षेत्र में करीब सात करार हुए। इसके साथ ही इसरो और इजरायल स्पेस एजेंसी (ISA) आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए भी काम करेंगे और इजरायल से जल शुद्धिकरण तकनीक भारत को मिलेगी। बता दें कि इजरायल तकनीक के क्षेत्र में बेहद आगे है। वहीं भारत और इजरायल के करीब आने से चीन और पाकिस्तान को काफी दिक्कत महसूस हुई।

कुलभूषण जाधव मामले में अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट में भारत की जीत
भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव मामले में भारत ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। दरअसल, पाकिस्तान ने आतंकवाद और विध्वंसक गतिविधियों में शामिल होने का झूठा आरोप लगाकर जाधव को फांसी की सजा सुनाई तो भारत ने इसका विरोध किया और इस मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में उठाया जहां ICJ ने कुलभूषण को फांसी देने पर रोक लगा दी।

वैश्विक दबाव में आकर पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव से उनकी मां और पत्नी की मुलाकात करानी पड़ी। हालांकि यह मुलाकात एक बंद कमरे में कराई गई। इस दौरान दोनों के बीच शीशे की दीवार मौजूद रही जिसकी वजह से वो दूसरे को छू भी न सके और न ही सीधे बात कर सके। इतना ही नहीं बातचीत के लिए एक फोन का इस्तेमाल किया गया और कई कैमरों की निगरानी में पूरी मुलाकात हुई।

अमेरिका ने हाफिज सईद को घोषित किया आतंकी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रणनीति का ही नतीजा है कि पाकिस्तान को मुंबई आतंकी हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद को दस महीने तक नजरबंद रखना पड़ा। हालांकि पाकिस्तान की अदालत ने सबूतों के अभाव में नजरबंदी से रिहा कर दिया। हाफिज सईद की वजह से अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में काफी कड़वाहट देखने को मिली है। अमेरिका और यूनाइटेड नेशंस ने हाफिज सईद को आतंकी घोषित कर रखा है। 

म्यांमार से दोस्ती, नए युग की शुरुआत
भारत और म्यांमार की सीमा 1600 किमी लंबी है, लेकिन कभी दोनों देशों के बीच घनिष्ठता नहीं रही। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर भारत और म्यांमार दोनों देश इस साल और नजदीक आए। सितंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने म्यांमार का दौरा किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा और व्यापार समेत 11 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। यह कदम चीन को रास नहीं आया क्योंकि भारत और म्यांमार के बीच व्यापारिक और रक्षा संबंध मजबूत होने से चीन को नुकसान होगा। चीन म्यांमार का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 

POK में परियोजना लगाने पर पुनर्विचार
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एग्रेसिव विदेश नीति का ही परिणाम है कि दक्षिण कोरिया पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में झेलम तट पर पनबिजली परियोजना से हाथ खींच रहा है। दक्षिण कोरिया की डायलिम इंडस्ट्रियल कंपनी लिमिटेड 500 मेगावॉट की चकोत परियोजना में निवेश पर पुनर्विचार कर रहा है। डायलिम इस प्रोजेक्ट को विकसित करने वाली कंपनियों के समूह की सबसे बड़ी कंपनी है। पीओके में सिर्फ डायलिम ही नहीं, एशियन डेवलपमेंट बैंक, इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन और एक्जिम बैंक ऑफ कोरिया ने भी निवेश को लेकर असमर्थता जताई है। भारत का साफ कहना है कि पीओके भारत का अभिन्न अंग है और पाकिस्तान का इस पर अवैध कब्जा है। इसी को लेकर भारत शुरू से चीन पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर पर अपना विरोध जताता रहा है। हाल ये है कि मोदी नीति के कारण पाकिस्तान दुनिया भर में अलग-थलग पड़ता जा रहा है। 

भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका का नया ‘फ्रंट’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आसियान-भारत और पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए तीन दिन की यात्रा पर मनीला गए थे। 36 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का ये पहला दौरा था। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे और रूस के प्रधानमंत्री दिमित्री मेदवेदेव के साथ अलग से बैठक की। भारत-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग और उसके भविष्य की स्थिति पर भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका एक साथ चतुष्कोणीय वार्ता की। दरअसल चीन की बढ़ती सैन्य और आर्थिक ताकत के बीच इन देशों ने माना है कि स्वतंत्र, खुला, खुशहाल और समावेशी इंडो-पसिफिक क्षेत्र से दीर्घकालिक वैश्विक हित जुड़े हैं। 

सार्क देशों को भारत का गिफ्ट, साउथ एशिया सैटेलाइट
भारत ने 5 मई को सफलतापूर्वक दक्षिण एशिया संचार उपग्रह का प्रक्षेपण कर दिया। यह दक्षिण एशियाई देशों के लिए ‘अमूल्य उपहार’ है। इस सैटेलाइट के लॉन्च होने से दक्षिण एशियाई देशों के बीच संपर्क को बढ़ावा मिलेगा। सैटेलाइट की मदद से प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग की जा सकेगी, टेली मेडिसिन, शिक्षा में सहयोग बढ़ेगा। भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सुनामी की दशा में संवाद-लिंक का माध्यम होगी। यह अंतरिक्ष आधारित टेक्नोलॉजी के बेहतर इस्तेमाल में इससे मदद मिलेगी। इसमें भागीदारी देशों के बीच हॉटलाइन उपलब्ध करवाने की भी क्षमता है।

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