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पीएम मोदी की विदेश यात्राओं से मजबूत हुआ देश, अर्थनीति से कूटनीति तक में मिला ये फायदा

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लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार अभियान के बीच विपक्ष बार-बार पीएम नरेन्द्र मोदी को घेर रहा है। पीएम के खिलाफ तमाम झूठे आरोपों के साथ विपक्षी नेता विदेशी दौरों के लिए उन पर फब्तियां कस रहे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि मोदी की विदेश यात्राओं से देश पर केवल आर्थिक बोझ बढ़ा. कुछ हासिल नहीं हुआ, लेकिन आंकड़े उनके दावों की कलई खोल देते हैं। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक पीएम की विदेश यात्राओं से भारत कूटनीतिक रूप से तो मजबूत हुआ ही, आर्थिक और सामरिक क्षेत्रों में भी कई बड़ी उपलब्धियां हासिल हुई।

विदेशी निवेश
2014-19 के दौरान भारत को कुल 193 अरब डॉलर का विदेशी निवेश मिला। 2009-14 के बीच मनमोहन सिंह के कार्यकाल की तुलना में यह करीब 50 फीसदी ज्यादा है। अच्छी बात यह है कि मोदी के कार्यकाल में चीन जैसे धुर विरोधी देश का भी भारत में निवेश बढ़ा है। मार्च, 2018 तक चीन से भारत को 1.5 अरब डॉलर का निवेश हासिल हुआ। दूसरी ओर, जापान ने पांच साल में 20 अरब डॉलर के निवेश का विश्वास दिलाया है।

 

बड़े प्रोजेक्ट्स
मोदी की जापान यात्रा के बाद वह भारत को बुलेट ट्रेन बनाने में मदद कर रहा है। इजरायल दौरे पर जाने वाले पहले भारतीय पीएम मोदी उससे एडसांस्ड डिफेंस और वाटर टेक्नोलॉजी लेने के प्रयास में हैं। 2016 में फ्रांस दौरे पर दोनों देशों के बीच राफेल डील पर सहमति बनी जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

 

ऊर्जा सुरक्षा
विपक्षी पार्टियां आरोप लगाती हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनावों के चलते भारत ईरान से सस्ती कीमत पर तेल नहीं खरीद पड़ा। हालांकि, सच्चाई यह है कि ईरान के साथ संबंध मजबूत करते हुए खाड़ी देशों के साथ तेल व्यापार को बढ़ावा दिया। मोदी की कूटनीति का ही असर है कि भारत ने अमेरिका से पहली बार कच्चा तेल और लिक्विफाइड नैचुरल कार्गो गैस खरीदना शुरू किया। मोदी के प्रयासों से ही विश्व की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी अमार्को को भारत में निवेश के लिए तैयार हुई।

 

कूटनीतिक ताकत
मोदी के विदेश दौरों ने भारत को दुनिया के इनवेस्टमेंट डेस्टिनेशन के रूप में पेश किया। भारत को उभरती हुई वैश्विक अर्थव्यवस्था के रूप में पहचान मिली और बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों में शामिल किया गया। पीएम ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और शांगरी ला सिक्योरिटी डायलॉग को संबोधित किया। डोकलाम विवाद के बाद मोदी के चीन दौरे से दोनों देशों के बीच तनाव में कमी आई। पाकिस्तान की लाख कोशिशों के बावजूद इस्लामिक देशों के संगठन में भारत को अहम स्थान मिला।

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