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नोटबंदी का असर: आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या में भारी वृद्धि

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भ्रष्टाचार और कालेधन के खिलाफ चलाए गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नोटबंदी अभियान का असर दिखने लगा है। देश में आयकर रिटर्न भरने वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। नोटबंदी अभियान के बाद आयकर रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या करीब 95 लाख बढ़ गई है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस साल नोटबंदी के बाद करीब 95 लाख नए आयकर रिटर्न फाइल हुए हैं। सरकार की कोशिश है कि देश के ज्यादा से ज्यादा लोग आयकर रिटर्न फाइल करें। फिलहाल देश में सिर्फ एक प्रतिशत लोग ही आयकर देते हैं।

बताया जा रहा है कि पिछले साल सवा सौ करोड़ लोगों में से पांच करोड़ 28 लाख लोगों ने रिटर्न फाइल किए थे। जो इसके पहले साल के रिटर्न फाइल करने से 22 प्रतिशत ज्यादा है। साफ है कि देश के 120 करोड़ से भी ज्यादा लोग टैक्स नहीं देते। वे आजादी के इतने साल भी टैक्स दायरे से बाहर हैं। जबकि दौलत, शानो-शौकत के मामले में उनकी काफी तरक्की हुई है। लोग आमदनी तो बढ़ाना चाहते हैं लेकिन टैक्स देना नहीं चाहते। जिस हिसाब से लोगों की आमदनी बढ़ी है उस हिसाब से टैक्स देने वालों की संख्या नहीं।

नोटबंदी अभियान के बाद अब सरकार टैक्स चोरी को रोकने के लिए कदम उठा रही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ऐसे लोगों पर नजर रख रहा है जिनकी आमदनी तो ज्यादा है लेकिन वो टैक्स के दायरे से बाहर हैं। फिलहाल विभाग ने करीब 18 लाख लोगों की पहचान की है जिनके ट्रांजेक्शन उनकी इनकम प्रोफाइल से मैच नहीं खाते। इनमें से काफी लोगों ने नोटबंदी के बाद 500 और 1000 रुपए के लाखों रुपए बैंक में जमा कराए थे। आयकर विभाग ने इन लोगों से जवाब मांगे हैं। अगर जांच में यह पाया गया कि आपने इनकम छिपाई है तो आपको भी डिपार्टमेंट की तरफ से टैक्‍स नोटिस मिल सकता है।

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