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किसान कर्जमाफी के नाम पर राजस्थान में करोड़ों का घोटाला!

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राजस्थान में किसान कर्जमाफी के नाम पर करोड़ों का घोटाला समाने आया है। राज्य के किसानों ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार कर्जमाफी के नाम पर फर्जी किसानों को करोड़ों रुपये बांट रही है, जबकि कर्ज में डूबी असली किसानों को किनारे किया जा रहा है। राजस्थान में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सबसे पहले किसानों का 2 लाख रुपये तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी। हाल ही में कर्जमाफी में शामिल किए गए किसानों की सूची ऑनलाइन की गई है। इसके बाद किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। दरअसल राज्य के आदिवासी बहुल वाले डूंगरपुर जिले के गोवाडी, नांदोर, जेठाना समेत कई गांवों में कर्जमाफी की सूची में ऐसे किसानों का नाम शामिल किया गया है, जिन्होंने कभी कर्ज लिया ही नहीं था। बताया जा रहा है कि इस सूचि में कांग्रेसी नेताओं ने अपने खास लोगों के नाम डाल दिए हैं और किसान कर्जमाफी के नाम पर करोड़ों रुपये की लूट का रास्ता तैयार कर लिया गया है। गौरतलब है कि लूट और भ्रष्टाचार कांग्रेस पार्टी के डीएनए में है और राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में जनता की गाढ़ी कमाई की लूट का सिलसिला शुरू हो गया है।

यह सिर्फ राजस्थान की ही बात नहीं है। जहां-जहां कांग्रेस पार्टी की सरकारें हैं वहां किसानों के साथ इसी तरह छलावा किया जा रहा है। डालते हैं एक नजर-

मध्यप्रदेश के किसानों से कांग्रेस सरकार ने किया धोखा
कर्नाटक और पंजाब की तर्ज पर ही मध्यप्रदेश में सत्ता में आते ही कांग्रेस ने किसानों को धोखा दे दिया है। मुख्यमंत्री कमलनाथ की कर्जमाफी की घोषणा खोखली साबित हो रही है। मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस किसानों के साथ छलावे के अपने इतिहास को दोहरा रही है। प्रदेश के किसानों पर सहकारी बैंक, राष्ट्रीयकृत बैंक, ग्रामीण विकास बैंक और निजी बैंकों का 70 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज है। लेकिन, सिर्फ राष्ट्रीयकृत और सहकारी बैंकों से लिए गए कर्ज ही माफ होंगे। इतना ही नहीं, जून 2009 के बाद और 31 मार्च 2018 से पहले लिए गए अल्पकालिक फसल ऋण ही माफ किए जाएंगे। इस पूरी कर्जमाफी के दायरे में सिर्फ 9 प्रतिशत किसान ही आ पाएंगे।    

किसानों ने ट्रैक्टर और कुआं सहित अन्य उपकरणों के लिए कर्ज लिया है तो, उसे कर्जमाफी के दायरे में नहीं माना जाएगा। इसमें भी यदि किसान ने दो या तीन बैंक से कर्ज ले रखा है तो सिर्फ सहकारी बैंक का कर्ज माफ होगा। इसके लिए, पहले किसान को कालातीत बकाया राशि बैंक को वापस लौटानी होगी। 

कर्नाटक-पंजाब में भी वादे तोड़े

कर्नाटक में भी जेडीएस-कांग्रेस की सरकार ने किसानों के साथ नाइंसाफी की। चुनाव में तो जोर-शोर से किसानों की कर्जमाफी के नाम पर वोट मांगे गए, लेकिन अब उन किसानों को वारंट भेजा जा रहा है जो कर्ज लौटाने में सक्षम नहीं हैं। वहां रोज 2-3 किसान आत्महत्या कर रहे हैं। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस पार्टी ने किसानों से झूठे वादे किए। किसानों के कुल 6,000 अरब रुपये की कर्जमाफी का वादा किया गया, लेकिन सत्ता में आते ही सिर्फ 60 हजार करोड़ से भी कम कर्ज माफ किया। पंजाब में भी कांग्रेसी सरकार ने किसानों के साथ ऐसा ही मजाक किया। 90 हजार करोड़ रुपये की माफी का वादा कर सत्ता में आई, लेकिन हर किसान को सिर्फ 5 रुपये की राहत दी।    

कर्नाटक में किसानों की कर्ज माफी का सच, 6 महीने में 250 किसानों ने की आत्महत्या
कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार में किसानों की खुदकुशी के आंकड़ों ने कांग्रेस की पोल खोल कर रख दी है। कांग्रेस ने एमपी, राजस्थान और यूपी में किसानों को कर्जमाफी का झांसा देकर सरकार बनाने में भले ही कामयाबी पा ली हो, लेकिन हकीकत ये है कि कर्नाटक में कुमारस्वामी सरकार सत्ता में आने के 6 महीने बाद भी किसानों का कर्ज माफ नहीं कर पाई है।

डेक्कन क्रॉनिकल अखबार के मुताबिक हालत ये पहुंच गई है कि 6 महीने में कर्नाटक के 250 किसानों को खुदकुशी के लिये मजबूर होना पड़ा है। ये आंकड़ा बेहद चौंकाने वाला है।

कांग्रेस और जेडीएस ने कर्नाटक के किसानों को कर्ज माफी का सब्ज बाग दिखाकर बरगलाया था और मई 2018 में सरकार बनाई थी। इस तरह सरकार बने करीब 6 महीने हो चुके हैं, लेकिन कर्नाटक सरकार कर्ज माफ करने के बजाए नए नए बहाने बना रही है। कर्नाटक के सहकारिता मंत्री बांदेपा काशमपुर ने खुद विधानसभा में बताया कि कर्ज माफी अगले साल जुलाई यानी करीब 8 महीने बाद ही हो पाएगी। उन्होंने ये भी कहा कि इसके लिए आंकड़ा जुटाया जा रहा है लेकिन इसका फायदा केवल सहकारी बैंकों से लोन लेने वाले किसानों को ही मिलेगा। वाणिज्यिक और निजी बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों को इसका फायदा नहीं मिल सकेगा।

कर्नाटक सरकार के इस दोगले व्यवहार से किसान और किसान संगठन बेहद परेशान और गुस्से में हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता मिलने के 24 घंटे बाद कर्ज माफी का दावा करने वाले कुमारास्वामी टालमटोल कर रहे हैं। जिन किसानों ने वक्त पर कर्ज नहीं लौटाया, उनको गिरफ्तारी वारंट भी भेजे जा रहे हैं। खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कर्नाटक में कांग्रेस के द्वारा किसानों पर हो रहे इन अत्याचारों का जिक्र किया था लेकिन कर्नाटक सरकार की बेशर्मी देखिये कि वो किसानों पर ही सहयोग न देने का आरोप लगा रही है।

जाहिर है जिस तरह कांग्रेस सरकार ने कर्नाटक में किसानों को बेवकूफ बनाया, वो एमपी,राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ही ऐसा ही खेल खेलने जा रही है। इसीलिए जोर शोर से किए गए कर्ज माफी के ऐलान में ऐसी छिपी हुई शर्तें जोड़ दी गई है जिससे किसानों के हाथ में कुछ नहीं आएगा।

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