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मोदी सरकार में सभी को घर का सपना हो रहा साकार, भ्रष्टाचार पर अंकुश से कीमतों पर लगी लगाम

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रोटी, कपड़ा और मकान हर आदमी की मूलभूत जरूरतें हैं। इनमें से मकान एक ऐसी चीज है जो हर आदमी का सपना होता है। पहले अपना मकान होना सच में एक सपना था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम आदमी के इस सपने को पूरा करने के की ठान ली है। मोदी सरकार ने 2022 तक देश के हर नागरिक के सिर पर छत होने का लक्ष्य निर्धारित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक विजन के साथ काम कर रहे हैं। प्रॉपर्टी बाजार में भ्रष्टाचार का पैसा लगाने से रोकने के लिए मोदी सरकार ने नोटबंदी, जीएसटी जैसे कदम उठाए हैं, साथ ही रियल इस्टेट रेग्युलेशन एक्ट (RERA) को भी लागू किया है। इससे प्रॉपर्टी बाजार में कालाधन और भ्रष्टाचार का पैसा लगना बंद हो गया है। मोदी सरकार की कम आय वर्ग के लोगों को होमलोन में सब्सिडी की योजना के बाद डेवलपर भी सस्ते मकानों की योजनाएं लांच कर रहे हैं। इसके उलट बात मनमोहन सरकार की करें, तो यूपीए सरकार में प्रॉपर्टी की कीमतें आसमान छू रही थीं और आम आदमी के लिए मकान के बारे में सोचना भी पाप था। एक नजर डालते हैं किस तरह प्रधानमंत्री मोदी की योजनाएं सबके लिए आवास पर कार्य कर रही है।

पहले लक्जरी पर था जोर अब सस्ते मकानों के प्रोजेक्ट ज्यादा

यूपीए सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार का बोलबाला था। भ्रष्टाचारियों के पास अफरात में कालाधन था, और उसे खपाने का सबसे आसान जरिया प्रॉपर्टी बाजार था। यही वजह है कि उस वक्त बिल्डर्स और डेवलपर्स का जोर लक्जरी मकानों के प्रोजेक्ट लांच करने पर होता था। प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए नोटबंदी, जीएसटी जैसे कई कदम उठाए। मोदी सरकार ने रियल इस्टेट रेग्युलेशन एक्ट (RERA) भी लागू किया। इन्हीं कदमों का असर है कि देश में अब सस्ते मकानों के प्रोजेक्ट ज्यादा बन रहे हैं। नाईटफ्रैंक इंडिया रियल ईस्टेट की रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में जहां बिल्डरों द्वारा लांच किए गए नए प्रोजेक्ट्स में सस्ते घरों की हिस्सेदारी 53 फीसदी थी, वहीं 2017 में यह बढ़कर 83 फीसदी हो गई है। डिवेलपर्स अब 50 से कम कीमत वाले घरों को फोकस कर रहे हैं।

वर्ष सस्ते घरों की हिस्सेदारी
2016 53 प्रतिशत
2017 83 प्रतिशत

बेनामी संपत्ति और कालाधन पर अंकुश के गिरी बिक्री
पहले कालाधन ठिकाने लगाने का सबसे बड़ा जरिया प्रॉपर्टी मार्केट था। लोग भ्रष्टाचार के जरिए कमाए गए पैसों को प्रॉपर्टी बाजार में ही लगाते थे, और इसकी वजह से मकानों की कीमतें भी आसमान छूने लगी थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालाधन को खत्म करने के लिए 8 नवंबर, 2016 को नोटबंदी का फैसला किया। इसी फैसले के बाद हजारों करोड़ के कालाधन का खुलासा हुआ। बेनामी संपत्ति रखने वालों पर भी केंद्र सरकार की नजर है। प्रॉपर्टी खरीद में जीएसटी भी लागू की गई है। इन्हीं सभी फैसलों का नतीजा है कि अब भ्रष्टाचार से कमाया पैसा प्रॉप्रटी की खरीद में नहीं लग पा रहा है, और इस वजह से शहरों में फ्लैटों की बिक्री में भी कमी आई है। कालाधन पर अंकुश का ही असर है कि पहले साल 2010 में जहां 4.80 लाख अपार्टमेंट लॉन्च हुए थे, वहीं साल 2017 में यह संख्या घटकर 1.03 लाख रह गई है। 2014 में न्यूज पोर्टल कोबरापोस्ट डॉट काम के एक स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा किया था कि ज्यादातर डेवरलपर्स प्रॉपर्टी खरीदने पर 80 फीसदी तक कालाधन खपाने को तैयार दिखे। अक्टूबर, 2014 में यूएस स्टेट डिपार्टमेंट ने इंटरनेशन नार्कोटिक्स कंट्रोल स्ट्रेटजी की रिपोर्ट में खुलासा किया था कि दिल्ली-एनसीआर के प्रॉपर्टी बाजार में 40 फीसदी काला धन लगा है। कारोबारियों और राजनेताओं के जरिये ये धन निवेश के तौर पर बड़ी-बड़ी परियोजनाओं में लगाया जा रहा है। खास बात यह है कि अधिकतर धन चुनावी दिनों में प्रचार के रास्ते रियल एस्टेट में लाया जाता है।

शहर मकानों की बिक्री में गिरावट
बंगलुरू 26 प्रतिशत
चेन्नई 20 प्रतिशत
दिल्ली-एनसीआर 6 प्रतिशत

भ्रष्टाचार पर लगाम से सस्ते हुए घर

नोटबंदी और जीएसटी के बाद प्रॉपर्टी बाजार में कालाधन लगना बंद हो गया है। इसके साथ ही रियल इस्टेट रेग्युलेशन एक्ट (RERA) लागू होने के बाद बिल्डरों की मनमानी पर भी रोक लगी है। अब बिल्डर एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे प्रोजेक्ट में नहीं लगा सकते हैं, साथ ही खरीददारों से किए गए वादों और समयसीमा से भी नहीं मुकर सकते। इससे जहां नए प्रोजेक्ट के लांच होने का सिलसिला थमा है, वहीं वर्तमाम में बगैर बिके फ्लैटों की कीमतें भी धीर-धीरे कम हो रही है। पुणे में सबसे ज्यादा 7 प्रतिशत और मुंबई में 5 प्रतिशत तक घरों की कीमतों में गिरावट आई है।

शहर घरों की कीमत में गिरावट
पुणे 7 प्रतिशत
मुंबई 5 प्रतिशत
दिल्ली-एनसीआर 2 प्रतिशत

गरीबों को होम लोन पर 6.5 प्रतिशत तक सब्सिडी
कम आय वर्ग के लोगों के लिए मकान खरीदने में सबसे बड़ी बाधा थी होम लोन की ब्याज दरें। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे समझा और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पहला मकान खरीदने में होमलोन के ब्याज में सब्सिडी देने की योजना लांच की। इस योजना के तहत गरीबों को होमलोन के ब्याज पर शुरू के 15 महीने तक 3 से लेकर 6.5 प्रतिशत की सब्सिडी दी जाती है। होम लोन की इस क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम को 31 मार्च 2019 तक बढ़ा दिया है। साल 2022 तक हाउसिंग फॉर आल के लक्ष्य को पाने के लिए सरकार ने इस योजना का लाभ लेने की अवधि बढ़ाई है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में गरीबों को होमलोन में सब्सिडी के नाम पर मजाक किया जा रहा था। यूपीए सरकार के दौरान गरीबों को 25 लाख तक का मकान खरीदने पर सिर्फ 15 लाख के होमलोन पर 1 प्रतिशत छूट दी जाती थी, वो भी सिर्फ एक साल के लिए।

होम लोन के ब्याज पर सब्सिडी  
मनमोहन सरकार 1 प्रतिशत
मोदी सरकार 3-6.5 प्रतिशत

मोदी राज में कम हुई होम लोन की दरें
मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान प्रॉपर्टी तो महंगी थी ही, होम लोन की दरें भी बेहद ज्यादा थीं। मोदी सरकार के कार्यकाल में आर्थिक मोर्चे पर लगातार काम हो रहा है, बैंकों की स्थिति सुधर रही है, यही वजह है कि होमलोन की दरें भी कम हुई हैं। यूपीए सरकार के दौरान होम लोन की दरें 10 प्रतिशत के आसपास थीं, वहीं अब होम लोन की ब्याज दर 8.5 प्रतिशत से भी कम है।

वर्ष बैंक होम लोन पर ब्याज
2013 एसबीआई 9.8 प्रतिशत
2018 एसबीआई 8.65 प्रतिशत

पहले नहीं था कोई विजन,अब 2022 तक सभी को मकान का लक्ष्य
देश के हर नागरिक के सिर पर छत हो, इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन बिलकुल साफ है। केंद्र सरकार ने 2022 तक सभी को मकान मुहैया कराने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना और प्रधानमंत्री ग्रमीण आवास योजना पर जोरशोर से काम किया जा रहा है। दिसंबर,2017 तक पीएम ग्रामीण आवास योजना के तहत 11.57 लाख आवास बन चुके हैं, जबकि 58.58 लाख लाभार्थियों को आवास के लिए स्वीकृत मिल चुकी है। इस योजना के तहत 31 मार्च 2019 तक एक करोड़ नये घरों का निर्माण सुनिश्चित किया जाना है। इनमें से 31 मार्च 2018 तक 51 लाख मकान बनाए जाने हैं। यूपीए सरकार के कार्यकाल में गरीबों को मकान देने के लिए इंदिरा आवास योजना चलाई जा रही थी। इस योजना में भ्रष्टाचार की खबरें लगातार आती रहती थीं। यूपीए के दौरान जरूरतमंदों के बजाये अपने खास लोगों को इस योजना के तहत मकान दिए जाते थे, तभी प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर,2016 में इस योजना के बंद कर नए सिरे से पीएम ग्रामीण आवास योजना लांच की थी।

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