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मोदी राज में पर्यटन क्षेत्र का कायापलट, 165 देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा की मियाद बढ़ी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पर्यटन क्षेत्र का कायाकल्प कर दिया है। भारत में विदेशी पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पर्यटन को और बढ़ावा देने के मकसद से सरकार ने 165 देशों के नागरिकों को मिलने वाली ई-वीजा सुविधा की मियाद बढ़ाने का एलान किया है। यह सुविधा 25 हवाई अड्डों और पांच बंदरगाहों पर मिलेगी। पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंस ने लोकसभा में बताया कि पिछले साल विदेशी पर्यटकों की संख्या में 14 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई वहीं इनके माध्यम से होने वाले विदेशी मुद्रा विनियम की लागत 1.77 लाख करोड़ रुपये रही। उन्होंने बताया कि केंद्र ने इन्क्रेडिबल इंडिया पार्ट-2 लांच करने और पर्यटकों की सुविधा के लिए चौबीस घंटे खुली रहने वाली बहुभाषी हेल्पलाइन भी जल्द शुरू की जा रही है।

आइए एक नजर डालते हैं पर्यटन क्षेत्र की उपलब्धियों पर-

ई-वीजा से विदेशी सैलानियों की संख्या में हुई बढ़ोतरी
इसी क्रम में वीजा ऑन अराइवल (विदेशियों के स्‍वदेश आगमन के बाद उन्‍हें वीजा उपलब्ध कराने) सुविधा और ई-टूरिज्‍म वीजा का प्रारंभ होने से भी भारत आने वाले पर्यटकों को बढ़ावा मिला है। केंद्र सरकार 165 देशों से आने वाले नागरिकों को ई-पर्यटक वीजा उपलब्ध करा रही है। ई-वीजा की सुविधा मिलने के बाद से भारत के प्रति विदेशी सैलानियों की रुचि और बढ़ी है और वे बड़ी संख्या में भारत आ रहे हैं। 2017 के पूरे वर्ष के दौरान ई-पर्यटक वीजा पर कुल मिलाकर 16.97 लाख विदेशी पर्यटक आए, जबकि वर्ष 2016 में यह संख्‍या 10.80 लाख थी। यह 57.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है।

मोदी सरकार भारत आने वाले पर्यटकों को किसी भी तरह की असुविधा से बचाने के लिए 25 एयरपोर्ट्स और 5 बंदरगाहों पर ई-वीजा की सुविधा दे रही है। इस ई-वीजा की वैधता की सीमा को भी 30 दिन से बढ़ाकर 60 दिन कर दिया गया है। साथ ही भारत आने वाले पर्यटकों को वेलकम कार्ड देने की भी शुरुआत की जा चुकी है, जिससे सैलानियों को सभी महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही स्थान पर मिल जाएं और उन्हें किसी भी प्रकार की समस्या का सामना न करना पड़े।

विदेशी पर्यटकों के लिए पसंदीदा जगह बना भारत
भारत विदेशी पर्यटकों के लिए पसंदीदा जगह बनता जा रहा है। भारत के टूरिज्म सेक्टर के लिहाज से पिछला साल 2017 काफी अच्छा साबित हुआ है। पिछले साल भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या एक करोड़ के पार पहुंच गई, तो दूसरी तरह इससे होने वाली आमदनी भी 27 अरब डॉलर के आंकड़े तक पहुंच गई। नई परियोजनाओं के साथ नए साल में यह संख्या और बढ़ने की उम्मीद है। 2017 के पूरे वर्ष के दौरान विदेशी पर्यटकों के आगमन का आंकड़ा 101.77 लाख का रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 15.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। वर्ष 2016 में 88 लाख से ज्यादा पर्यटक भारत आए थे।

रैंकिंग में सुधार
मोदी सरकार की दूरदर्शी नीतियों के चलते भारत में पर्यटन उद्योग निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। देश में विदेशी पर्यटकों की निरंतर बढ़ती आवाजाही इस बात का प्रमाण है। उल्लेखनीय है कि अभी कुछ ही अर्सा पहले वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की Travel & Tourism, Competitiveness Report-2017 में भी इस बात का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया था। इस रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत ने 12 अंकों की लंबी छलांग लगाई है। भारतीय पर्यटन की रैंकिंग साल 2013 में 65वें नंबर पर थी, वहीं साल 2015 में भारत 52वें नंबर पर आ गया और केवल डेढ़ साल के अंतराल पर 12 अंकों की छलांग लगाते हुए 40वें पायदान पर जा पहुंचा। 

साहित्य-संस्कृति और कला का सम्मोहन
भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में पर्यटन कितना अधिक महत्व रखता है, इस तथ्य से प्रधानमंत्री भली-भांति परिचित हैं, इसीलिए इस विषय में वे व्यक्तिगत रुचि लेते हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री ने खुद अपने स्तर पर दुनिया-भर में जाकर भारत के पर्यटन क्षेत्र के प्रति दुनिया के आकर्षण को बढ़ावा दिया है। यहां जो सौंदर्य कश्मीर में दिखता है, केरल उस से बिल्कुल अलग है। राजस्थान और बंगाल की प्राकृतिक संपदा की कोई तुलना नहीं है। पूरी दुनिया में कहीं और शायद ही यह देखने को मिले कि सभी की रुचियों के अनुकूल पर्यटन एक ही देश में मिल जाए। चाहे प्राकृतिक सौंदर्य हो या नवीनतम तकनीक, संगीत-साहित्य हो या योग-अध्यात्म, भारत के समान अनेकता में एकता कहीं और नहीं।

आस्था का आकर्षण
देश के विभिन्‍न भागों में आयोजित किये जाने वाले वार्षिक साहित्‍योत्‍सव देश की कला और साहित्‍य की समृद्ध परम्‍परा की स्‍पष्‍ट झांकी प्रस्‍तुत करते हैं। यह अपने-आप में इतने आश्चर्य की बात है कि ये कलाएं उन्हें इतना आकर्षित करती हैं कि वे स्वयं इनसे जुड़ने को लालायित हो जाते हैं। यही कारण है कि भारत में ऐसे विदेशियों की संख्या भी अच्छी-खासी है, जो कोई न कोई भारतीय कला सीख रहे हैं। यहां के भांति-भांति के पकवान अपना एक अलग ही आकर्षण रखते हैं। ये सभी पर्यटकों के लिए भारत को एक बेमिसाल जगह बना देते हैं, जिसे वे जीवन-भर भूल नहीं पाते और भारत यात्रा को दोहराना चाहते हैं। भारत की अतुल्यता और अध्यात्म हमेशा से विश्व के लिए उत्सुकता का विषय रहा है, इसीलिए सरकार आध्‍यात्मिक पर्यटन और तीर्थ पर्यटन को बढ़ावा देने पर विशेष रूप से ध्‍यान दे रही है। कई ऐसी योजनाएं भी इस समय प्रगतिशील हैं, जो भारत के आध्यात्मिक महत्त्व को केंद्र में रख बनाई गई हैं। हमारी पूज्य नदी गंगा केवल भारतीयों की आस्था का प्रतीक-भर नहीं है। इसका प्रभाव विदेशियों तक पर समान है, इसलिए अध्यात्म भारत का एक बहुत बड़ा आकर्षण है। इससे भी पर्यटन क्षेत्र की क्षमता का और अधिक उपयोग हो सकेगा। चाहे गंगा के घाट हों या लद्दाख के बौद्ध स्थल, इनका आकर्षण कभी कम नहीं हुआ, न देश में, न विदेश में।

स्वदेश दर्शन के द्वारा प्रोत्साहन
विदेशी पर्यटन को बढ़ावा देने वाली अनेक योजनाओं को प्रारंभ करने के अतिरिक्त देशी पर्यटन को प्रोत्साहित करने और लोगों में अपनी विरासत के प्रति जागरुकता देने की दिशा में भी कई प्रयास किये गए हैं। इसके लिए सरकार ने ‘स्‍वदेश दर्शन’ नाम की योजना शुरू की है। केंद्र सरकार स्वदेश दर्शन की थीम पर टूरिस्ट सर्किट का विकास कर रही है। इसके तहत 13 सर्किट की पहचान की गई है- पूर्वोत्तर भारत सर्किट, बौद्ध सर्किट, हिमालयन सर्किट, तटीय सर्किट, कृष्णा सर्किट, मरुस्थल सर्किट, जन-जातीय सर्किट, इको सर्किट, वन्यजीव सर्किट, ग्रामीण सर्किट, आध्यात्मिक सर्किट, रामायण सर्किट, और विरासत सर्किट। 31 दिसंबर 2016 से पर्यटन मंत्रालय ने इस योजना के तहत 2601.76 करोड़ रुपये की लागत वाली सभी 31 परियोजनाओं पर काम प्रारम्भ कर दिया है और 506.47 करोड़ रुपये का काम भी पूरा हो चुका है।

प्रसाद योजना
इस योजना के अंतर्गत देश में धार्मिक महत्व के 25 स्थलों की पहचान की गई है। यह है अमरावती ( आन्ध्र प्रदेश), अमृतसर (पंजाब), अजमेर (राजस्थान), अयोध्या (उत्तरप्रदेश), बद्रीनाथ (उत्तराखंड), द्वारका (गुजरात), देवघर (झारखंड), बेलूर (पश्चिम बंगाल), गया ( बिहार), गुरुवायुर (केरल), हजरतबल ( जम्मू कश्मीर), कामाख्या ( असम), कांचीपुरम ( तमिलनाडु), कटरा ( जम्मू कश्मीर), केदारनाथ ( उत्तराखंड), मथुरा (उत्तर प्रदेश), पटना (बिहार), पुरी (ओडिशा), श्रीसेलम (आंध्रप्रदेश), सोमनाथ (गुजरात),तिरुपति (आंध्रप्रदेश), त्रम्बकेश्वर (महाराष्ट्र), उज्जैन (मध्य प्रदेश), वाराणसी ( उत्तर प्रदेश) और वेलानकनी (लमिलनाडु)। 

भारत में पारंपरिक पर्यटन क्षेत्रों के अतिरिक्त कई अन्य आकर्षण भी हैं, जिनमें विशिष्ट क्षेत्र हैं— क्रूज, चिकित्सा, निरोगता (Wellness), गोल्फ, पोलो, प्रदर्शनी, इको पर्यटन, फिल्म पर्यटन और सतत पर्यटन। 

स्वच्छता और नई टेक्नोलॉजी से मिलेगी गति
सदियों से विदेशियों की दृष्टि में भारत की छवि एक गंदे स्थान के रूप में रही है। मोदी सरकार ने इस कड़वी सच्चाई की कभी अनदेखी नहीं की। उसने जहां एक ओर पर्यटन को बढ़ावा देने वाली बड़ी नीतियां बनाई तो दूसरी तरफ देश में स्वच्छता संबंधी योजनाओं के द्वारा जागरुकता का माहौल भी बनाया। सुखद यह है कि इन योजनाओं को भारी जन समर्थन और सफलता मिली। स्वच्छ भारत अभियान, स्वच्छता ही सेवा जैसे अनेक उदाहरण अपनी पूर्ण सफलता के साथ हमारे सामने हैं। इनके साथ नई तकनीक के समन्वय ने इसे और गति दी है। ये सफलताएं इस बात का विश्वास दिलाती हैं कि भारतीय पर्यटन उद्योग मोदी सरकार में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

“ये बात सही है कि टूरिज्म सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। गरीब से गरीब व्यक्ति कमाता है और जब टूरिस्ट, टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर जाता है। टूरिस्ट जाएगा तो कुछ न कुछ तो लेगा। अमीर होगा तो ज्यादा खर्चा करेगा और टूरिज्म के द्वारा बहुत रोजगार की संभावना है। विश्व की तुलना में भारत टूरिज्म में अभी बहुत पीछे है। लेकिन हम सवा सौ करोड़ देशवासी तय करें कि हमें अपने टूरिज्म को बल देना है तो हम दुनिया को आकर्षित कर सकते हैं। विश्व के टूरिज्म के एक बहुत बड़े हिस्से को हमारी ओर आकर्षित कर सकते हैं और हमारे देश के करोड़ों-करोड़ों नौजवानों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करा सकते हैं। सरकार हो, संस्थाएं हों, समाज हो, नागरिक हों, हम सब को मिल करके ये काम करना है”।– नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री ( मन की बात-26 मार्च, 2016)

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